किस ने की थी वफ़ा जो हम करते – Faraz Ahmed Shayari

नाकामी

अपनी नाकामी का एक यह भी सबब है ” फ़राज़ ”
चीज़ जो भी मांगते हैं सब से जुदा मांगते हैं

Naakami

Apni Naakami Ka Ek Yeh Bhi Sabab Hai “Faraz”
Cheez Jo Maangte Hain Sub Se Juda Maangte Hain


बरसो के प्यासे

बस इतना ही कहा था हम बरसो के प्यासे हैं ” फ़राज़ “
होंटो को उस ने चूम कर खामोश कर दिया .

Barso ke pyase

bus itna hi kaha tha hum barso ke pyase hain “Faraz”
honto ko us ne choom kar khamosh kar diya.


बिछडने का सलीका

उस को तो बिछडने का सलीका भी नहीं आया ” फ़राज़ “
जाते हुए वो खुद को यहीं छोड़ गया

Bicharne ka Saleeka

Us ko to Bicharne ka Saleeka bhi nahi ayaa “Faraz”
Jate hue Khud ko yahin Chor gaya.


तेरे जाने के बाद

अकेले तो हम पहले भी जी रहे थे ” फ़राज़ “
क्यों तन्हा से हो गए है तेरे जाने के बाद

Tere Jane Ke Baad

Akele To Hum Pehle Bhi Ji Rahe The “Faraz”
Kyon Tanha Se Ho Gaye Hai Tere Jane Ke Baad


दो गज़ कफ़न

ऐ इंसान इब्न-ऐ -आदम से नंगा आया है तू ” फ़राज़ ”
कितना सफर किया है तूने दो गज़ कफ़न के लिये

Do Ghaz Kafan

Ae Insaan Ibn-E-Aadam Se Nanga Aya Hai To “Faraz”
Kitna Safar Kiya Hai tune do Ghaz Kafan Ke Liye.


वफ़ा

मेरे शिकवों पर उस ने हँस के कहा ” फ़राज़ “
किस ने की थी वफ़ा जो हम करते

Wafa

Mere Shikwon Par Us Ne Hans Ke Kaha
Kis Ne Ki thi Wafa Jo Hum Karte


बेवफाई का क़िस्सा

हम सुना रहे थे अपनी बेवफाई का क़िस्सा ” फ़राज़ “
अफ़सोस इस बात का है लोगो ने तो वाह वाह कहा , उन्होंने भी वाह वाह कहा

Bewafai Ka Qissa

Hum Suna Rahe The Apni Bewafai Ka Qissa “Faraz”
Afsos is Baat Ka hai logo Ne To Wah Wah kaha,Unhone Bhi Wah Wah Kaha

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