जो बोल ज़ुबानों निकल गया – Punjabi Shayari and Kalaam

जो बोल ज़ुबानों निकल गया

जो बोल ज़ुबानों निकल गया
ओ तीर कमानों निकल गया ..

मैं दिल विच ओहनूं लभणां वां
ओ दुर आसमानों निकल गया ..

ओहनूं मेरीया गलां याद रेह्याँ
पर मैं पहचानों निकल गया ..

हूण हाल फकीरा दा की पुछदे ओ
जद्ओ दर्द बयानों निकल गया ..

मैं घर दी अग्ग लुकाऊँदा सी
धुआं रोशन -दानों निकल गया ..


असां पानी बनके रूढ़ जाना 

बरसात विच असां पानी बनके रूढ़ जाना .
पतझड़ विच असां सूखे फूल बनके झड़ जाना .
की होया ये आज असां तेनु तंग करदे आँ .
इक दिन असां तेनु दसे बिना ही टूर जाना .


कुछ शौक सी यार फ़क़ीरी दा

कुछ शौक सी यार फ़क़ीरी दा
कुछ इश्क ने दर दर रौल दिता

कुछ सजना कसर न रखी सी
कुछ जहर रक़ीबा घोल दिता

कुछ हिज्र फ़िराक दा रंग चढ़िआ
कुछ दर्द माही अनमोल दिता

कुछ उँज भी राहवाँ औखियाँ सी
कुछ गल विच गम दा तौख भी सी

कुछ शहर दे लोक भी जालिम सी
कुछ सानू मरन शौक भी सी

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