टूट कर भी धड़कता है – Shayari

अगली बार भूल जायेंगे
 

सोचा था इस कदर उनको भूल जायेंगे
उनको देख कर भी अनदेखा कर जायेंगे
पर जब चेहरा सामने आया उनका
तो सोचा इसबार देख ले अगली बार भूल जायेंगे


ज़िन्दगी में तन्हाई क्यों है
 

इस दो पल की ज़िन्दगी में तन्हाई क्यों है ?
लोगों को हमसे रुस्वाई क्यों है ?
इस दुनिया में इंसान काम तो नहीं
फिर मेरे साथ सिर्फ मेरी परछाई क्यों है ?


हर धड़कन में एक राज़ होता है
 

हर धड़कन में एक राज़ होता है
हर बात को बताने का एक अंदाज़ होता है
जब तक ठोकर न लगे बेवफाई की
हर किसी को अपने प्यार पर नाज़ होता है


इश्क़ -ऐ सफर
 

है इश्क़ -ऐ सफर ऐसा के एक मुद्दत से हम ने ,
मंज़िल भी नहीं पायी , और रास्ता भी नहीं बदला ..


दिल सा भी कोई वफादार न हो
 

टूट कर भी धड़कता रहता है ,
दिल सा भी कोई वफादार न हो ..

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