महात्मा गांधी के द्वारा लिखी किताब “हिंद स्वराज” के बारेमें | Hind Swaraj Book

Hind Swaraj Book

इतिहास में झाककर देखे तो हमें पता चलता है की हमारे देश का इतिहास कितना गौरवशाली है। दुनिया के विदेशी मुल्को ने हमारे भारत पर आक्रमण किया। कभी सिकंदर ने भारत पर हमला किया तो कभी मुगलों ने इस देश के लोगो पर जुल्म किये। और उसके बाद में देश पर हुकूमत करने के लिए अंग्रेज आ गए थे।

महात्मा गांधी के द्वारा लिखी किताब “हिंद स्वराज” के बारेमें – Hind Swaraj Book

इन अंग्रेजो की देश से निकाल पाना बेहद मुश्किल काम था। लेकिन उन्हें देश को मजबूर होकर चुपचाप देश छोड़ना पड़ा। इसमें सभी स्वतंत्रता सेनानीओं ने योगदान दिया लेकिन महात्मा गांधी ने उन्हें देश से निकालने के लिए किसी बन्दुक, तलवार या किसी बम की सहायता नहीं ली।

उन्होंने देश के लोगो के विचारो में ऐसे बदलाव लाये जिसके कारण अंग्रेजो को देश छोड़कर जाना पड़ा। उन्होंने देश के लोगो के दिलो में राष्ट्रवाद भावना को जगाने का काम किया। लेकिन यह काम इतना आसान नहीं था। इसके लिए गांधीजी को भी काफी मेहनत करनी पड़ी। उसके लिए उन्होंने क़िता बे, अख़बार की मदत ली।

हिंद स्वराज पुस्तक समीक्षा – Hind Swaraj Book review

उन्होंने एक ऐसी भी किताब लिखी जिसे भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन में बहुत ही उचा स्थान दिया गया क्यों की इसी किताब को पढने के बाद में लोग राष्ट्र की अहमियत को समझने लगे थे और उसे पाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार थे। आज इसी किताब और भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के इसका कितना महत्वपूर्ण योगदान रहा इसके बारे में हम आपको जानकारी देने वाले है। तो चलिए जानते इस किताब के बारे।

जब भारत में भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन उग्र रूप ले चूका था तब स्वराज की नयी संकल्पना लोगो के दिल और दिमाग में धीरे धीरे विकसित हो रही थी। उस वक्त महात्मा गांधीजी ने भी हिन्द स्वराज नाम की किताब लिखी।

उन्होंने इस किताब को तब लिखा था जब वह कुछ समय के लिए भारत में आये थे और बाद में फिर से दक्षिण अफ्रीका में जा रहे थे। ऐसा भी कहा जाता है की महात्मा गांधी जब सफ़र में थे तो उन्होंने उसी सफ़र के दौरान किताब लिखी थी।

गांधीजी ने जिस अखबार को शुरू किया था उसमे इस हिन्द स्वराज किताब का कुछ हिस्सा प्रकाशित किया गया था। महात्मा गांधीजी उस अख़बार के संपादक भी थे। जब किताब को पूरी तरह से लिखा गया तो सन 1909 में इसे प्रकाशित किया गया और इसे एक किताब के रूप में देखा जाने लगा।

हिन्द स्वराज बहुत ही छोटी किताब है और इसमें केवल 80 पन्ने ही है। इस किताब में 22 प्रकरण है और इस किताब को एक संवाद के रूप में लिखा गया है जिसमे गांधीजी एक संपादक के रूप में बात करते है तो वार्ताकार किसी वाचक के रूप में बातचीत करते है।

“हिन्द स्वराज” किताब में महात्मा गांधीजी ने स्वराज को बहुत ही अच्छे तरीके से और सरल भाषा में समझाने की कोशिश की है।

उनके कहने के मुताबिक स्वराज एक बहुत ही सरल संकल्पना जिसमे वे कहते है की स्वराज एक ऐसी शासन व्यवस्था है जिसमे अंग्रेजो की कोई भूमिका ना हो, जिस व्यवस्था में अंग्रेजो का कोई तालुकात ना हो, उसे सरल भाषा में हिन्द स्वराज कहते है।

इस किताब में गांधीजी की भारतीय पारंपरिक सोच और आधुनिक सोच दोनों ही देखने को मिलती है। एक तरह से इस किताब में दो सोच का मिश्रण देखने को मिलता है। इस किताब में महात्मा गांधी सफलतापूर्वक बताने की कोशिश करते है की किस तरह से केवल भारतीय लोग ही देश को अच्छे तरीके से चला सकते, देश का विकास कर सकते है और इस किताब में हमें गांधीजी के भारतीय और पश्चिमी सोच की झलक देखने को मिलती है।

भारत के राष्ट्रवाद का समर्थन करने के लिए और भारत की शासन व्यवस्था को अच्छे तरीके से चलाने के लिए गांधीजी ने किस तरह से पश्चिमी सोच का स्वीकार किया है, इस किताब के जरिये हमें पता चलता है।

गांधीजी ने जितने भी विचार इस किताब में बताये है सभी एक तरह से आधुनिक विचार है क्यों की इस किताब में महात्मा गांधीजी ने राष्ट्रवाद पर काफी जोर दिया है और उस समय राष्ट्रवाद के विचार भारत के लिए बिलकुल नए थे। हिन्द स्वराज किताब भारतीय और पश्चिमी सोच का अनोखा संगम है क्यों की महात्मा गांधी जब इस किताब को लिख रहे तो उन्होंने शांत और चरमपंथी वाचक, अंग्रेज और पूरी दुनिया के वाचक को ध्यान में रखकर ही इस किताब को लिखा था।

गांधीजी कहते है की अगर हम खुद ही स्वयं पर नियंत्रण करके अच्छे शासन करने लगे तो यह हमारे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। गांधीजी चाहते है की जितने भी लोग स्वराज में विश्वास रखते है उन सभी ने साथ में मिलकर अंग्रेजो के शासन का इंकार करना होगा और उसे जड़ समेत उखाड़ के फेक देना होगा तभी हम निजी और सामुदायिक स्थर पर विकास कर सकेंगे। यह एक ऐसी व्यवस्था होगी जिसमे हर किसी की अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए और खुद के विकास के लिए अवसर मिलेंगे।

हिन्द स्वराज किताब की प्रस्तावना को महात्मा गांधी ने ‘ए वर्ड ऑफ़ एक्स्प्लानेशन” नाम दिया और उसमे गांधीजी आगे लिखते है की जब वे लन्दन में थे, तो उनकी मुलाकात कुछ भारतीय क्रांतिकारियों से हुई थी जिनकी सोच बहुत ही खतरनाक और उग्र थी। गांधीजी आगे लिखते है की आजादी को लेकर उन क्रांतिकारियों की निडरता और जिद देखकर वे काफी प्रभावित हुए थे।

लेकिन गांधीजी सोचते थे की वो सभी क्रांतिकारी पूरी तरह से दिशाहीन थे क्यों की वो सभी केवल हिंसा के माध्यम से ही आजादी हासिल करना चाहते थे। नेताओ की हत्या करना, आजादी को हासिल करने के लिए खतरनाक बम का इस्तेमाल करना यह सब उनके रास्ते थे और इन रास्तो से सभी आजादी हासिल करना चाहते थे।

लेकिन गांधीजी इन सभी रास्तो का खुलकर विरोध करते हुए दिखाई देते है। जब महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका में रहते थे तो उस वक्त अहिंसा के मार्ग पर ही चलते थे और उन्हें पूरा विश्वास था की अहिंसा के माध्यम से ही हमें आजादी मिल सकती है। महात्मा गांधी जानते थे की उनकी हिन्द स्वराज किताब कोई छोटा बच्चा भी पढ़ सकता है इसीलिए वह किताब के माध्यम अहिंसा और प्यार सिखाना चाहते थे। वे चाहते थे की हिंसा की जगह आत्मबलिदान ने लेनी चाहिए।

लेकिन केवल इसी एक वजह के लिए गांधीजी हिन्द स्वराज किताब को लिखना नहीं चाहते थे। बल्कि हिन्द स्वराज किताब लिखने के पीछे उनका जो उद्देश्य था वह काफी दूर का सोचने वाला था।

गांधीजी की Hind Swaraj Book – हिन्द स्वराज किताब को लेकर कई लोगो ने उनके आधुनिक होने पर आलोचना भी की क्यों की उस समय इस तरह की क़िताबे बड़ी मुश्किल से देखने को मिलती थी और शायद इसी वजह से भी लोगो को उनकी किताब अच्छी नहीं लगी थी। लेकिन उनकी किताब आज के आधुनिक समय में बहुत ही उचित किताब मानी जाती है क्यों की आज दुनिया को सबसे ज्यादा अहिंसा की ही जरुरत है।

गांधीजी के जो विचार है वह पूरी तरह से भारतीय संस्कृति से जुड़े है लेकिन उन्हें पश्चिमी शैली में बताने की कोशिश की गई है। गांधीजी का कहना है की सभी का लक्ष्य एक ही है लेकिन वहातक पहुचने के लिए अलग अलग धर्म के अलग अलग रास्ते है।

उनका हमेशा इसी बात पर विश्वास था की सभी धर्म का लक्ष्य एक ही होता है, सभी धर्म केवल भगवान की और ले जाने के रास्ते है। लेकिन गांधीजी ने जो रास्ता बताया है उसके जरिये सभी विचार समाज में आसानी से उपयोग में ला सकते है। ज्यादातर लोग महात्मा गांधी को हिन्दू मुस्लीम एकता के प्राध्यापक मानते है।

उन्होंने खुद के रास्ते से धर्म को भारतीय राष्ट्रवाद से जोड़ने की कोशिश की है। गांधीजी की ऐसी सोच है की सभी लोग उनके बताये गए धर्म के मार्ग पर चलने की कोशिश करेंगे तो उससे राष्ट्रवाद को और बढ़ावा मिलेगा। राष्ट्रवाद आधुनिक और पश्चिम के लोगो की सोच है।

इतिहास में देखे तो पता चलता है की राष्ट्रवाद की शुरुवात जर्मनी में बिस्मार्क ने की थी और इसी राष्ट्रवाद के कारण ही इटली फिर से एक बार एकजुट हो सका। प्रतियोगिता और उपनिवेशवाद की वजह से जो दो बड़े विश्व युद्ध हुए उनको रोकने के लिए राष्ट्रवाद का जन्म हुआ था। राष्ट्रवाद का केवल एक ही लक्ष्य था की एक राष्ट्र का निर्माण करना।

हिन्द स्वराज किताब – Hind Swaraj Book में महात्मा गांधी ने प्रमुखता से औपनिवेशिक शाहिवाद, औद्योगिक पूंजीवाद और तर्कसंगत भौतिकवाद पर भी अपने विचार रखे है।

हिन्द स्वराज सन 1909 में लिखी जाने के बाद भी आज के समय में एक महत्वपूर्ण किताब साबित हुई है। इस किताब में महात्मा गांधी ने हिन्दू मुस्लीम एकता का जो महत्व बताया है आज उसकी सबसे अधिक जरुरत है। आज सभी तरफ़ देश में जाती और धर्म के नाम पर लोगो को अलग अलग करने की कोशिश की जा रही है। इसकी वजह से ही देश में अशांतता और जाती और धर्म के नाम पर लोगो को अलग अलग गुटों में बाटा जा रहा है।

हिन्द स्वराज किताब – Hind Swaraj Book में साफ़ तरीके से बताया गया है की अगर हिन्दू मुस्लीम एक रहकर काम करे तो देश की तरक्की ही होगी। आज की युवा पीढ़ी ने इस किताब को जरुर पढना चाहिए ताकी वो किसी गलत रास्ते पर ना जा सके। गांधीजी हमेशा इस बात पर जोर देते थे की लोकशाही को छोटेसे छोटे गाव तक पहुचाना चाहिए। अगर इसे गाव तक पहुचाया नहीं गया तो इसमें लोकशाही की बड़ी हार होगी। आज पुरे देश में सभी गाव में लोकशाही पहुच चुकी है।

महात्मा गांधी ने जब इस किताब को लिखने की शुरुवात की थी तो उसके पीछे कई सारे कारण थे। आज महात्मा गांधी की इस हिन्द स्वराज किताब को सौ साल से भी अधिक समय बीत चूका है लेकिन इसका महत्व आज भी बरक़रार है।

वे इस किताब के जरिये देश को आजाद करना तो चाहते थे ही लेकिन इसके अलावा भी देश के लोगो को नैतिकता और मूल्य को बनाये रखने की सिख भी देना चाहते थे। उन्होंने इस किताब में जिस तरह से स्वराज बताया है वह काफी आदर्शवादी है, जिसमे सबका कल्याण छिपा है।

किताब में कुछ जगह पर गांधीजी शाहिवाद, पूंजीवाद और भौतिकवाद के खिलाफ क्यों है और उससे समाज को क्या हानी हो सकती है, समझ में आता है। एक तरह से देश के लोगो को सभी तरह की गुलामी से छुटकारा दिलाने पर उन्होंने काफी जोर दिया है और यह जरुरी भी है। इसीलिए आज के आधुनिक समय में भी सारी दुनिया को इस किताब के विचारो पर चलने की जरुरत है।

Leave a Reply