याद-ऐ-गम

एक अजनबी
 

चले आओ फिर से
एक अजनबी हो कर मिलने
तुम मेरा नाम पूछो
में तुम्हारा हाल पुछू


तेरी एक झलक
 

तेरी एक झलक को दिल तरस जाता है मेरा
किस्मत वाले है वो लोग
जो रोज़ तेरा दीदार करते है , तुझसे बात करते है


उससे इतना कहना
 

वो लड़की नज़र आये कभी तो उससे इतना कहना
जिन को आदि कर दिया है आपने
वो लोग बहुत याद करते है आपको


किस्मत से गिला
 

कोई न मिले तो किस्मत से गिला नहीं करते
अक्सर लोग मिल के भी मिला नहीं करते
हर शाख पर बहार आती है जरूर
पर हर  शाख पर फूल खिला नहीं करते


प्यास मिलन की
 

गिरा दे जितना पानी है तेरे पास ऐ बादल
यह प्यास किसी के मिलने से बुझेगी
तेरे बरसने से नहीं


दर्दे दिल की दबा नहीं
 

दूर रह कर करीब कितने है
फासले भी अजीब कितने है

दर्दे दिल की दुआ नहीं वरना
इस जहाँ में तबीब कितने थे

उम्र भर जो साथ रहा जो तेरे
उसके अशे नसीब कितने थे

क्यों न आउूं में तेरे सपनो में
मेरे शिकबे अजीब कितने है

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