वो कातिल नहीं

सुना है
 

सुना है आज कल वो परेशान रहती है
उससे कहना बे -फ़िक्र मैं भी नहीं हूँ
सुना है वो गुमसुम रहती है
उससे कहना हाज़िर जहाँ मैं भी नहीं हूँ
सुना है वो रातों को जागा करती है
उससे कहना सोते हम भी नहीं है
सुना है वो चुप चुप के रोती है
उससे कहना हँसता मैं भी नहीं हूँ
सुना है वो मुझे याद बुहत करती है
उससे कहना भूला मैं भी नहीं हूँ..


वो कातिल नहीं है
 

या रब वो कातिल नहीं है
फिर भी लगता है जान ले गया..


निगाहे बोलती हैं
 

निगाहे बोलती हैं बेतिहाशा
यह मोहब्बत पागलो की गुफ्तुगू है..


दिल के टुकड़े
 

अभी से मिलना छोड़ दिया है जानम
इब्तिदा में ऐसा करोगे तो साथ क्या निभाओगे
दिल के टुकड़े दिल से जुदा नहीं होते
अगर दुनिया बेवफा है तो बेवक़फ़ा नहीं होते
गरीब समझ  कर उठा दिया उसने अपनी महफ़िल से
क्या चाँद की महफ़िल में सितारे नहीं होते..


मेरे हाथों की लकीरों में
 

मेरे हाथों की लकीरों में ये ऐब छुपा है
में जिस शख्श को छु लू वो मेरा नहीं रहता..


तेरा ही दर्द
 

कैद था दिल में तेरा ही दर्द ता-उम्र के लिए
मर रही थी हर आरज़ू दर्द के इस सफर में..


पहली मुलाकात
 

पहली मुलाकात थी और दोनों ही बेबस थे
वो अपनी जुल्फों को न संभाल  पाये और हम खुद को..


इक निगाह से कत्ल 
 

तुम्हारी इक निगाह से कत्ल  होते है लोग
एक नज़र हम को भी देख लो तुम बिन जिंदगी अच्छी नहीं लगती..

Leave a Reply

%d bloggers like this: