शिक्षक दिवस पर शिक्षक कविता | Poem on Teachers day

Poem on Teachers Day

हमारे कर्म हमें हमेशा हमें आगे बढ़ने में हमें मदत करते हैं लेकिन अगर उसके साथ सही शिक्षा मिल जाये तो उसी कर्म के साथ एक नयी ऊँचाई को छु सकते हैं। और उसी ऊँचाईयों को छु ने के लिए हमारे जीवन में शिक्षा और उसी के साथ शिक्षक का महत्व बहुत ही ज्यादा बढ़ जाता हैं क्योकि की जैसे कुंभार एक मिटटी के घटे को सही आकर देता हैं वाही एक शिक्षक हमें अच्छी शिक्षा देकर हमरे जीवन को सही आकार देता हैं।

आज हम यहाँ शिक्षक दिवस पर शिक्षक का महत्व बताने वाली कुछ कवितायों – Poem on Teachers Day के जरिये बताने जा रहे हैं आशा हैं आपको जरुर पसंद आएँगी।

शिक्षक दिवस पर शिक्षक कविता – Poem on Teachers day

Teachers Day Poem 1

“शिक्षक बिन ज्ञान नहीं”

शिक्षक बिन ज्ञान नहीं रे।
अंधकार बस तब तक ही है,
जब तक है दिनमान नहीं रे॥
मिले न शिक्षक का अगर सहारा,
मिटे नहीं मन का अंधियारा
लक्ष्य नहीं दिखलाई पड़ता,
पग आगे रखते मन डरता।
हो पाता है पूरा कोई भी अभियान नहीं रे।
शिक्षक बिन ज्ञान नहीं रे॥
जब तक रहती शिक्षक से दूरी,
होती मन की प्यास न पूरी।
शिक्षक मन की पीड़ा हर लेते,
दिव्य सरस जीवन कर देते।
शिक्षक बिन जीवन होता ऐसा,
जैसे प्राण नहीं, नहीं रे॥
भटकावों की राहें छोड़ें,
शिक्षक चरणों से मन को जोड़ें।
शिक्षक के निर्देशों को मानें,
इनको सच्ची सम्पत्ति जानें।
धन, बल, साधन, बुद्धि, ज्ञान का,
कर अभिमान नहीं रे, शिक्षक बिन ज्ञान नहीं रे॥
शिक्षक से जब अनुदान मिलेंगे,
अति पावन परिणाम मिलेंगे।
टूटेंगे भवबन्धन सारे, खुल जायेंगे, प्रभु के द्वारे।
क्या से क्या तुम बन जाओगे, तुमको ध्यान नहीं, नहीं रे॥

Poem on Teacher 2

“दीपक सा जलता है शिक्षक”

दीपक सा जलता है शिक्षक
फैलाने ज्ञान का प्रकाश
न भूख उसे किसी दौलत की
न कोई लालच न आस
उसे चाहिए, हमारी उपलब्ध‍ियां
उंचाईयां,
जहां हम जब खड़े होकर
उनकी तरफ देखें पलटकर
तो गौरव से उठ जाए सर उनका
हो जाए सीना चौड़ा
हर वक्त साथ चलता है गुरु
करता हममें गुणों की तलाश
फिर तराशता है शिद्दत से
और बना देता है सबसे खास
उसे नहीं चाहिए कोई वाहवाही
बस रोकता है वह गुणों की तबाही
और सहेजता है हममें
एक नेक और काबिल इंसान को

Teachers Day Poem 3

“शिक्षक”

माँ देती नव जीवन, पिता सुरक्षा करते हैं।
लेकिन सच्ची मानवता, शिक्षक जीवन में भरते हैं।

सत्य न्याय के राह पर चलना, गुरु हमें बताते हैं।
जीवन संघर्षों से लड़ना, गुरु हमें सिखाते हैं।

ज्ञान दीप की ज्योति जला कर, मन आलोकित करते हैं।
विद्या का धन देकर शिक्षक, जीवन सुख से भरते हैं।

गुरु ईश्वर से बढ़ कर हैं, यह कबीर बतलाते हैं।
क्योंकि गुरु ही भक्तों को, ईश्वर तक पहुंचाते हैं।

जीवन में कुछ पाना है तो, गुरु का सम्मान करो।
शीश झूका कर श्रद्धा से तुम, बच्चों उन्हें प्रणाम करो।

“Poem on Teacher 4”

गुरूदेव के श्रीचरणो मे श्रद्धा सुमन सग वदन
जिनके कृपा नीर से जीवन हुआ चदन
धरती कहती, अबर कहते कहती यही तराना
गुरू आप ही वो पावन नूर है जिनसे रोशन हुआ जमाना
ले गए आप इस स्कूल को उस मुकाम पर, गर्व से उठते है हमारे सर,
हम रहे ना रहे कल, याद आएंगे आपके साथ बिताये हुए पल,
हमे आपकी जरुरत रहेगी हर पल।

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