सूरज पर कुछ कवितायेँ | Poem on Sun

Poem on Sun

बचपन में हमें हमारे बड़े चंदा मामा की कविता, कहानी बताया करते थे और हम भी उसे बड़े लगन से सुनते थे लेकिन कभी किसी ने बचपन में सूरज चाचू की कहानियाँ या कविता नहीं सुनी होंगी। सूरज की महानता उतनीही हैं जीतनी चंदा मामा की आज उन्ही की महानता दर्शाने वाली कुछ कविताये – Poem on Sun हम यहाँ पढेंगे।

Poem on Sun

सूरज पर कुछ कवितायेँ – Poem on Sun

Poem on Sun 1

“सूरज”

सबसे तेज वाला
आग का एक बड़ा गोला है
इससे जन जीवन है
वरना धरती बर्फ का गोला है
इस से मिलती है ऊर्जा
इस से मिलती है प्रेरणा
इसको मानते हैं देवता
इसकी होती है अर्चना
हमारे शौर मंडल का सबसे बड़ा तारा
हाँ, ये तो है सूरज हमारा

~ अनुष्का सूरी

Poem on Sun 2

“रोज सुबह को सूरज आकर”

रोज सुबह को सूरज आकर,
सबको सदा जगाता हैं,
श्याम होई लाली फैलाकर,
अपने घर को ज्याता हैं,
दिनभर ख़ुद को जला जलाकर
ये उजाला फैलता हैं,
उसका जीना ही जीना हैं,
जो काम सभी के आता हैं।

Poem on Sun 3

“दिनकर”

दहक उठी ये धरा, प्रगट हुए जब दिनकर
कड़ी धुप ने बजाया बिगुल, झुलस गया कण कण
बरस रहे हो शोले जैसे, अग्निपिंड सा होता प्रतीत,
बेईन्तहा जुल्म कर रहो जैसे, सूरज की ये बेरहमी,
दहक उठी ये धरा, प्रगट हुए जब दिनकर

Poem on Sun 4

“सूरज आया”

सूरज आया,
सुनहरी प्रभात लाया
आसमान में बिखेर कर अपनी किरणे,
एक नए दिन का परचम लहरा रहा है
फूल खिल रहे हैं बागों में,
हो रहा है नए जीवन का आगाज
पंछी उड़ रहे हैं गगन में,
भिन्न-भिन्न आवाजों से नया गीत सुना रहे है
मीठी मीठी ठंडी ठंडी हवा चल रही है,
मंद मंद मुस्का के फसलें लहरा रही है
कल कल करती नदियाँ बह रही है,
झरने भी अनोखी राग सुना रहे है
धरा भी खुश होकर घूम रही है,
हर एक कोना रोशन हो रहा है
हो रहा है तेरा हर तरफ गुणगान,
कोई तुझे नमन करता तो कोई करता पूजा
संध्या होते छिप गया कही दूर गगन में,
छोड़ अपनी निशानी लाली आसमा में

~ नरेंद्र वर्मा

Poem on Sun 5

“सूरज निकला हुआ सवेरा”

सूरज निकला हुआ सवेरा,
देखो बच्चों मिट गया अँधेरा।
चिड़ियों ने फिर से छोड़ा बसेरा,
जब आया थंडी हवा का फेरा।
इतना सुंदर समय ना खोओं,
जागों बच्चों अब मत सोओं

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