होली 2020 कब है?

होली रंगों का त्यौहार है जिसे हर कोई बड़े ही हर्ष उल्लास से मनाता है। इस दिन का नारा “बुरा न मानो होली है” बढ़ा ही मजेदार और सटीक है क्योकि इस दिन सभी इतने रंगों से रंगे होते है कि सभी एक समान लगते है, उस वक्त कौन दोस्त है और कौन दुश्मन इस बात की किसी को सुध नही रहती है और सभी एक हो जाते है। आपने एक प्रसिद्द गाना तो सुना होगा जो शोले फिल्म की शान है और उस वक्त से लेकर आज तक होली के दिन बजाया और गाया जाता है। गाना है, “होली के दिन दिल मिल जाते है रंगों में रंग मिल जाते है, गिले शिकवे भूलकर दोस्तों दुश्मन भी गले मिल जाते है”। होली का दिन सभी को एक दूसरे के करीब ले आता है। लोग एक दूसरे पर लाल, पीला, गुलाबी आदि रंग उड़ाते है और कहते है हैप्पी होली। इस दिन को भारत का हर कोना मनाता है और ब्रज की होली तो सबसे प्रसिद्ध है क्योकि वो स्थान है भगवान कृष्ण और राधा का। इस त्यौहार का इंतज़ार सबसे ज्यादा बच्चे और युवा करते है। बच्चे तो एक हफ्ते पहले से से पिचकारी और रंग खरीदने की जिद्द करते है और सभी पर पिचकारी से पानी डालकर उनको परेशान करने लग जाते है, लेकिन ये उनके लिए उनका फेवरेट खेल बन जाता है जो होली के बाद भी काफी दिनों तक चलता रहता है। युवा बच्चे अपने दोस्तों को रंगने के लिए तरह तरह के कलर खरीदने लग जाते है, कई बच्चे को पक्के रंग खरीद लेते है, खासकर सिल्वर और गोल्डन रंग। इतनी अच्छी बाते सुनकर आप सोच में पढ गए होंगे कि इस साल होली कब है। आपको इस परेशानी को मैं दूर कर देती हूँ।

होली 2020 कब है? और होली क्यों मनाई जाती हैं?

होली 2020 कब है?

इस साल यानी 2020 में होली 9 मार्च और 10 मार्च को है। 9 मार्च को होलिका दहन है और 10 मार्च को रंगों से खेलने वाली होली।

2020 होली दहन पूजा का समय महूर्त?

होलिका दहन तिथि – 09 मार्च 2020

होलिका दहन का शुभ मुहूर्त – 18:22 से 20:49 अर्थात शाम के 6.22 बजे से लेकर 8.49 तक |

पूर्णिमा तिथि आरंभ- 03:03 बजे( 09 मार्च 2020)

पूर्णिमा तिथि समाप्त- 23:17 बजे (09 मार्च 2020)

रंगवाली होली (धुलंडी) – 10 मार्च 2020


होली क्यों मनाते है?

फागुन के महीने में रंगों का त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन पूर्णिमा भी होती है। इस त्यौहार का सिर्फ ख़ुशी से नही नाता नही है बल्कि इसका घार्मिक महत्व भी है। इस त्यौहार के मनाने के पीछे पुरानी पौराणिक कथा है। ये कथा हिरण्यकश्यप और भक्त प्रहलाद की है।

होली का इतिहास | होली के पीछे की कहानी

प्राचीन कथा के अनुसार एक राजा हुआ करता था हिरण्यकश्यप। ये राजा राक्षस प्रवृति का था। वो विष्णु भगवान् से अपने छोटे भाई की मृत्यु का बदला लेना चाहता था। इसी उद्देश्य के चलते उसके कठीन तप किया और सालो तक साधना की और वरदान पाया। वरदान मिलने के बाद वो अपने आप को भगवान् मानने लगा और अपने राज्य की जनता को उसे भगवान् की तरह पूजने को कहता था। राजा का एक पुत्र था, प्रह्लाद। प्रहलाद विष्णु भगवान् का परम भक्त था और रोज उनकी मन से पूजा आराधना करता था। इस बात से राजा नाराज हुआ और अपने पुत्र को उसे भगवान् मानकर उसकी पूजा करने को कहा लेकिन पुत्र नही माना और वो भगवान् विष्णु को अपना प्रभु मानता रहा और उनकी पूजा करता रहा। इस बात से बहुत नाराज होकर राजा ने अपने खुद के पुत्र को मारने की सोची। राजा की एक बहन थी होलिका। होलिका के पास वरदान था कि वो जल नही सकती थी, इसलिए राजा ने अपनी बहन को कहा कि वो प्रहलाद को गोद में बिठाकर आग में बैठ जाए। प्रहलाद पूरा वक्त भगवान् विष्णु का स्मरण करता रहा और प्रहलाद की जगह होलिका जलकर ख़त्म हो गई। भगवान् विष्णु ने अपने भक्त की रक्षा की और हिरण्यकश्यप राजा का वध किया।

इसी कथा के चलते इस दिन को होली के नाम से जाना जाता है और ऐसा माना जाता है इस दिन सारी बुराई जलकर राख हो जाती है।

होली पर रंगों से क्यों खेलते है

होली के दिन कृष्ण भगवान् अपनी गोपियों और दोस्तों के साथ होली खेलते है और भगवान् कृष्ण भगवान् विष्णु के अवतार थे। गोकुल और वृन्दावन में आज भी कृष्ण जी को याद करके हर्ष और उल्लास के साथ सैकड़ो लोग होली मनाते है। जैसी होली वृन्दावन में मनाई जाती है वैसी कही नही मनाई जाती है।
ऐसा माना जाता है होली के दिन से सर्दियाँ कम होने लगती है।कुछ शहरों में होली को फसल पकने की ख़ुशी में भी मनाया जाता है।

आपके लिए जरुरी सन्देश

होली का त्यौहार ख़ुशी से मनाए और नेचुरल रंगों का इस्तेमाल करे। रसायन मिले रंगों और पक्के रंगों से खेलने से बचे। इन रंगों का स्किन पर बुरा असर पड़ता है। होली खेलने के लिए जाने से पहले बालो पर और हाथ पैरो पर सरसों का तेल लगा ले ताकि होली का रंग आसानी से निकल जाए। जहाँ पर आप लोग बढ़ी संख्या में होली खेल रहे हो वहां पर सुरक्षा का पूरा इंतज़ार रखे। होली पर पानी का इस्तेमाल न करे और अगर करना चाहते है तो कम पानी का इस्तेमाल करे।
हैप्पी होली!

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