【 हिंदी शायरी 】Hindi Shayari Collection Best Love & Sad Shayari In Hindi

Complete Hindi Shayari Collection For Lovers

वफा माथे पर लट लहराती है,
चूड़ी की खनक बुलाती है ।
रुखसारों पे है हया न का पर्दा,
चाहत फिर भी उसे सताती है ।

लोग हमारी मौत की दुआ मांगते हैं,
हम बेशर्मी से जीये जाते हैं ।
उनकी तमन्ना है जनाजा देखने की,
हम खड़े होकर मुस्कुराते जाते हैं ॥

दुआ बद्दुआ बन जाती है,
जब तकदीर बेवफा हो जाये।
उससे सारी खुदाई रूठ जाती है,
जिसका अपना दिल दुश्मन हो जाये

मुझे भी आ गया जीना
ये जबसे चोट खाई है
गमों संग अच्छा लगता है
खुशी लगती पराई है ।

हर नजर को तुम चाहते हो,
चाहत क्या होती है समझाओं हमे ॥
हम तो बेवफा हैं सागर
वफा क्या होती है समझाओं हमे ॥

दिलजला कहते हैं लोग मुझे
जख्म मुहब्बत में मैंने खाये हैं।
जो हमें बेवफा कहते हैं दोस्त,
उनके लिये खून के आंसू बहाये हैं ।

वफ़ा का नाम लेकर दोस्त,
वो बेवफाई का खंजर आजमाते हैं ॥
जख्मी दिल है पास मेरे,
वो फिर भी ठेस पहुंचाते है।

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मुझे भी चोट लगती है
मुझे भी दर्द होता है
तो पत्थर भी है रो पड़ता
ये दिल जब मेरा रोता है ।

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न फितरत ये रही मेरी
कि आगे हाथ फैलाऊँ
है इससे अच्छा तो नहीं
इसी पल मर न क्यूँ जाऊ ।

Hindi Shayari Collection For True Lovers

वो देता राम रहा मुझको
न जिद मैंने भी छोड़ी है
कमा कर राम की ये दौलत
यूं भर रखी तिजौरी है ।

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ज़रा सी आहट होती है।
तो तेरा ख्याल आता है
ज़रा मुझको भी बतलाना
कि कै सा भूला जाता है ।

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बहुत रोती हैं ये आंखें
ये दिल भी रोता है मेरा
न बाकी कु छ रहा मुझमें
न बिगड़ा कु छ सनम तेरा।

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कहा था लोगों ने मुझसे
न दिल उनसे लगाना तुम
हुआ क्या हाल फिर सागर
न ये ह मको बताना तुम।

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मुबारक तुझको ये दुनिया
नहीं मुझको समझ इसकी
वो मुझको छोड़ जाता है
कद्र करता हू मै जिसका।

True love Hindi Shayari Collection

टाहनी से एक फूल गिरा और
गिर कर पंहुचा राहों में
कुचला सबने बारी बारी
आया क्यों वो निगाहों में।

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सबको किस्मत से है शिकायत
सब अपनों से खफा लगते हैं
वफादारी निभाते देखा न किसी को
खुद को ही सब यहाँ ठगते हैं।

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वो राहें वो मंजर फिर से बुलाते हैं मुझे
साथ गुज़ारे पल बहुत याद आते हैं मुझे
जिस को भी चाहा दिल से समझा अपना
ना जाने क्यों राह में छोड़ जाते हैं मुझे|

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तेरे ग़म से ऐ दोस्त अनजान नहीं हूं मैं
तेरा अपना हूँ कोई मेहमान नहीं हूं मैं
कहने को कहो कुछ भी सह लूँगा सब मगर
इतना जरूर है दोस्त नादान नहीं हूं मैं।

Hindi Shayari Collection

दिल के किसी कोने में रहता हूं मैं
ना दिल लगाना तुम सबसे कहता हूं मैं
मैं हूं प्यार जो ग़र रूठ जाए तो
बनके अश्क आंखों से बहता हूं मैं।

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ना भूला न भूलूँगा तुमको कभी
तुम्हे दिल में बसाया है मैंने सनम
तुम न देना कभी अश्क मुझको यहाँ
बहुत खुद को रूलाया है मैंने सनम।

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क्या मुस्कुरा पाऊँगा मैं क भी
बस बैठा यही सोचता रहता हूँ
किसी और का दोष नहीं इसमें
बस खुद को ही कोसता रहता हूँ।

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तेरे प्यार में हम दीवाने हो गये
देख खुद से ही बेगाने हो गये
हमारे लिए मिलना बिछड़ना ज़िन्दगी थी
लोगों के लिए ये अफसाने हो गये।

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हर हाल में जीना है मुझको
जख्मों को सीना है मुझको
क्या हुआ जो ग़म है जीवन में
ये जहर भी पीना है मुझको।

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भले आज बदल डाला खुद को मगर
यह सच्च है कि मुझको भी प्यार था कभी
ना कोई संकोच है ये कहने में मुझको
कि मुझको भी उनका इंतजार था कभी।

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भले लाख कर लो कोशिश भी मगर
दिल की बात कही न जायेगी मुझसे
ऐ मेरे हमदम न होना जुदा क भी
तेरी जुदाई सही न जायेंगी मुझसे |

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ये पत्थरों का शहर है सारा
किसी को किसी की पहचान नहीं
रहते हैं यहाँ शैतान ही अब
यहाँ बचा कोई भी इन्सान नहीं।

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हमसे वो रिश्ता निभाया न गया
दर्द दिल का भी उनसे छुपाया न गया
हम जानते थे कि वो चाहते हैं हमें
चिराग मुहब्बत का हमसे जलाया न गया।

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ग़र मुझको इजाजत तुम दे दो
एक मुलाकात ही कर लेंगे
मन को समझाना ही तो है।
हम दिन को रात ही कर लेंगे।

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गिला बस इसका है मुझको
मैं कुछ भी कह नहीं पाया
मेरी कमज़ोरी ही कह लो
तेरे बिन रह नहीं पाया।

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वो मुझको भूल गया लेकिन
मुझसे ना भुलाया जाता है
खुशियों से मेल नहीं कोई
सागर का ग़म से नाता है।

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नज़रें मेरी राहों पे लगी है।
कि हज यार कभी तो मैं आएगा
किया है कितना इंतज़ार मैंने
ये रास्ता उसको बताएगा।

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Hindi Shayari Collection – For Broken Heart lovers

जीना हमने सीख लिया है
अश्क छुपाना आने लगा है।
शिक्वा रहा न अब तो किसे से
खुद को हंसाना आने लगा है।

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मेरी तरह सितारों से
कहा उसने भी कु छ होगा
अके ला मैं नहीं रोता
सहा उसने भी कु छ होगा।

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मिलेगा कुछ नहीं तुमको
न माँ गो हाथ फै लाकर
मुझे इतना तो बतलाना
क्या पाया है यहाँ आकर।

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खता मुझसे हुई तो है।
जो तुझपे प्यार आया है।
कि सी पत्थर की खातिर हो
ये दिल अपना रू लाया है ।

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दिल में अरमान तो लाखों हैं
पूरे मगर ये होते नहीं
हँसते हैं साथ सब खुशियों में
ग़म में मगर संग रोते नहीं।

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तुम्हारी महफिलों में हम बड़े बूढ़े जरूरी हैं,
अगर हम ही नहीं होंगे तो पगड़ी कौन बांधेगा !

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सेहरा पे बुरा वक़्त मेरे यार पड़ा है,
दीवाना कई रोज़ से बीमार पड़ा है !

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काले कपड़े नहीं पहने हैं तो इतना कर ले
इक ज़रा देर को कमरे में अँधेरा कर ले

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मैंने कल शब चाहतों की सब किताबें फाड़ दीं,
सिर्फ़ इक काग़ज़ पे लिक्खा लफ़्ज़ माँ रहने दिया !

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अब अँधेरा मुस्तक़िल रहता है इस देहलीज़ पर,
जो हमारी मुन्तज़िर रहती थी आँखें बुझ गईं |

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माँ शायद इतने साल तक इसलिए जीवित रहीं क्योंकि मैं उन्हें धमकाता रहता था
तुम चली गई तो तुम्हारे पीछे-पीछे मैं भी चला आऊंगा।

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मियाँ मैं शेर हूँ ,शेरों की गुर्राहट नहीं जाती
मैं लहजा नर्म भी कर लूँ तो झुंझलाहट नहीं जाती
मैं एक दिन बेख्याली में कहीं सच बोल बैठा था
मैं कोशिश कर चुका हूँ ,मुंह की कड़वाहट नहीं जाती

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ग़ज़ल और शायरी की सल्तनत पर आज भी क़ब्ज़ा हमारा है

इसलिए तो हम अपने नाम के आगे अभी राना लगाते हैं
ख़ुद अपने आपको शादाब करना चाहता है,
ये कलम का फ़क़ीर आपको आदाब करना चाहता है !

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एक हालत पर न रहने पायी दिल की हसरते,
तुमने जब देखा नए अंदाज से देखा मुझे,

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यह तो ठीक है तेरी जफ़ा भी है एक अता मेरे वास्ते,
मेरी दुआओं की कसम तुझे, कभी मुस्कुरा के भी देख ले.
हाय वो दौरे ज़िन्दगी, जिसका लक़ब शबाब था,
कैसी लतीफ़ नींद थी, कैसा हसीं ख़्वाब था

Hindi Shayari Collection (In Hindi with Images)

उसकी रफ़्तार है बस मोजा-इ-कोसर की तरह,
गुफ्तगू में है कनक शीशा-ओह-सागर की तरह

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मेरी नेकियाँ गिनने की नौबत ही नहीं आएंगी,
मैंने जो माँ पे लिखा है वही काफ़ी होगा

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सारे हवा में घोल दी है नफरतें और हवास अहल ए सियासत ने
मगर न जाने क्यों पानी कुँए का आज तक मीठा निकलता है
ये जो कलम दवात लिये कंधों पे फिरा करते हैं,
मर भी जाएं तो भी शायर नही होने वाले..!

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गाँव की कच्ची मिटटी का समझ के बेच न देना इस घर को
शायद ये कभी सर और अबरुर को छुपाने के काम आए
इन गाव की घोर अँधेरी रात में अक्सर सुनहरी मशालें लेकर
मासूम परिन्दों की मुसीबत का पता ये जुगनू लगाते हैं

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उम्मीद भी किरदार पे पूरी नहीं उतरी
ये शब दिले-बीमार पे पूरी नहीं उतरी

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क्या ख़ौफ़ का मंज़र था तेरे शहर में कल रात
सच्चाई भी अख़बार में पूरी नहीं उतरी

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तस्वीर में एक रंग अभी छूट रहा है
शोख़ी अभी रुख़सार पे पूरी नहीं उतरी

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पर उसके कहीं,जिस्म कहीं, ख़ुद वो कहीं है
चिड़िया कभी मीनार पे पूरी नहीं उतरी

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एक तेरे न रहने से बदल जाता है सब कुछ
कल धूप भी दीवार पे पूरी नहीं उतरी

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मैं दुनिया के मेयार पे पूरा नहीं उतरा
दुनिया मेरे मेयार पे पूरी नहीं उतरी

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जब कभी धूप की शिद्दत ने सताया मुझको
याद आया बहुत एक पेड़ का साया मुझको

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अब भी रौशन है तेरी याद से घर के कमरे
रोशनी देता है अब तक तेरा साया मुझको

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मेरी ख़्वाहिश थी की मैं रौशनी बाँटू सबको
जिंदगी तूने बहुत जल्द बुझाया मुझको

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चाहने वालों ने कोशिश तो बहुत की लेकिन
खो गया मैं तो कोई ढूँढ न पाया मुझको

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सख़्त हैरत में पड़ी मौत ये जुमला सुनकर
आ, अदा करना है साँसों का किराया मुझको

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शुक्रिया तेरा अदा करता हूँ जाते-जाते
जिंदगी तूने बहुत रोज़ बचाया मुझको

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ना जन्नत मैंने देखी है ना जन्नत की तवक्क़ो है
मगर मैं ख़्वाब में इस मुल्क का नक़शा बनाता हूँ

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मुझे अपनी वफ़ादारी पे कोई शक नहीं होता
मैं खून-ए-दिल मिला देता हूँ जब झंडा बनाता हूँ

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कभी शहरों से गुज़रेंगे कभी सेहरा भी देखेंगे,हम इस दुनिया में आएं हैं तो ये मेला भी देखेंगे ।

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तेरे अश्कों की तेरे शहर में क़ीमत नहीं लेकिन,
तड़प जाएंगे घर वाले जो एक क़तरा भी देखेंगे ।

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मेरे वापस ना आने पर बहुत से लोग ख़ुश होंगे,
मगर कुछ लोग मेरा उम्र भर रस्ता भी देखेंगे ।

ये दरवेशों कि बस्ती है यहाँ ऐसा नहीं होगा,
लिबास-ए-ज़िन्दगी फट जाएगा मैला नहीं होगा !

शेयर बाज़ार की क़ीमत उछलती गिरती रहती है,
मगर ये खून-ए-मुफ़लिस है कभी महंगा नहीं होगा !

Hindi Shayari Collection Of Two Lines Shayari

परदेस जाने वाले कभी लौट आएँगे,
लेकिन इस इन्तिज़ार में आँखें चली गईं

वहां आसाइशें कम थीं तमन्नाएं ज़ियादा थीं,
यहाँ पर तेल नो मन है तो राधा छोड़ आएं हैं !

ज़रा सी बात है लेकिन हवा को कौन समझाए,
दिये से मेरी माँ मेरे लिए काजल बनाती है !

ग़रीबों पर तो मौसम भी हुकूमत करते रहते हैं,
कभी बारिश, कभी गर्मी, कभी ठंडक का क़ब्ज़ा है !

ज़मीं-ए-नानक-ओ-चिश्ती, ज़बान-ए-ग़ालिब-ओ-तुलसी,
ये सब कुछ पास था अपने, ये सारा छोड़ आए हैं !

Hindi Shayari Collection of Sad Shayri

मुहाजिर हैं मगर हम एक दुनिया छोड़ आए हैं
तुम्हारे पास जितना है हम उतना छोड़ आए हैं

कहानी का ये हिस्सा आजतक सब से छुपाया है
कि हम मिट्टी की ख़ातिर अपना सोना छोड़ आए हैं

नई दुनिया बसा लेने की इक कमज़ोर चाहत में
पुराने घर की दहलीज़ों को सूना छोड़ आए हैं

अक़ीदत से कलाई पर जो इक बच्ची ने बाँधी थी
वो राखी छोड़ आए हैं वो रिश्ता छोड़ आए हैं

किसी की आरज़ू के पाँवों में ज़ंजीर डाली थी
किसी की ऊन की तीली में फंदा छोड़ आए हैं

पकाकर रोटियाँ रखती थी माँ जिसमें सलीक़े से
निकलते वक़्त वो रोटी की डलिया छोड़ आए हैं

जो इक पतली सड़क उन्नाव से मोहान जाती है
वहीं हसरत के ख़्वाबों को भटकता छोड़ आए हैं

यक़ीं आता नहीं, लगता है कच्ची नींद में शायद
हम अपना घर गली अपना मोहल्ला छोड़ आए हैं

हमारे लौट आने की दुआएँ करता रहता है
हम अपनी छत पे जो चिड़ियों का जत्था छोड़ आए हैं

हमें हिजरत की इस अन्धी गुफ़ा में याद आता है
अजन्ता छोड़ आए हैं एलोरा छोड़ आए हैं

सभी त्योहार मिलजुल कर मनाते थे वहाँ जब थे
दिवाली छोड़ आए हैं दशहरा छोड़ आए हैं

हमें सूरज की किरनें इस लिए तक़लीफ़ देती हैं
अवध की शाम काशी का सवेरा छोड़ आए हैं

गले मिलती हुई नदियाँ गले मिलते हुए मज़हब
इलाहाबाद में कैसा नज़ारा छोड़ आए हैं

हम अपने साथ तस्वीरें तो ले आए हैं शादी की
किसी शायर ने लिक्खा था जो सेहरा छोड़ आए हैं

हमारे दौर में इंसान का अकाल रहा !
ये लोग फिर भी पयंबर की बात करते हैं !!

जिन्हे भरोसा नहीं है स्वयं की मेहनत पर !
वे रोज ही किसी मंत्र के बात करते हैं !!

नहीं है नीव के पत्थर का जिक्र जिनके यहां !
ये बेशकीमती पत्थर की बात करते हैं !!

ये अफसरी भी मनोरोग बन गई आखिर !
वो अपने घर में भी दफ्तर की बात करते हैं !!

मैं कैसे मान लूं वो लोग हो गए हैं निडर !
जो बार-बार किसी डर की बात करते हैं !!

वो अपने आगे किसी और को नहीं गिनते !
वो सिर्फ अपने ही शायर की बात करते हैं !!

उड़ान भर हवाओं में या गोता लगा समुंदर में !
तुझको उतना ही मिलेगा जितना लिखा मुकद्दर में !!

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