100+ वफ़ा शायरी / Wafa Shayari In Hindi Urdu

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Wafa Shayari

—#1—

दुनिया के सितम याद न अपनी ही वफ़ा याद
अब मुझको नहीं कुछ भी मोहब्बत के सिवा याद

—#2—

वो कह कर गई थी कि लौटकर आऊँगी,
मैं इंतजार ना करता तो क्या करता,
वो झूठ भी बोल रही थी बड़े सलीके से,
मैं एतबार ना करता तो क्या क्या करता।

—#3—

क्यूँ किसी से वफ़ा करे कोई

दिल न माने तो क्या करे कोई

—#4—

मेरी वफ़ाए कुछ काम नहीं आ रही है,

देखो ना वो मुझे

कैसे भूलती जा रही है।

—#5—

मत रख हमसे वफा की उम्मीद ऐ सनम,
हमने हर दम बेवफाई पायी है,
मत ढूंढ हमारे जिस्म पे जख्म के निशान,
हमने हर चोट दिल पे खायी है।

—#6—

रात की गहराई आँखों में उतर आई,
कुछ ख्वाब थे और कुछ मेरी तन्हाई,
ये जो पलकों से बह रहे हैं हलके हलके आंसू,
कुछ तो मजबूरी थी कुछ तेरी बेवफाई…

—#7—

ना अदा से होंगी ना वफा से होंगी
अब मोहब्बत जिससे भी होगी
एग्जाम के बाद होंगी .

—#8—

अंजाम-ए-वफ़ा ये है जिसने भी मोहब्बत की
मरने की दुआ माँगी जीने की सज़ा पाई

—#9—

मैं सोचती हूँ कि इक जिस्म के पुजारी को
मेरी वफ़ा ने वफ़ा का सुहाग क्यूँ समझा

—#10—

कैसे लोग बसते है इस जहाँ में,
एक से वफ़ा कर नही सकते,
दूसरे से दिल लगा लेते है..

—#11—

रुशवा क्यों करते हो तुम इश्क़ को, ए दुनिया वालो,
मेहबूब तुम्हारा बेवफा है, तो इश्क़ का क्या गनाह।

वफ़ा शायरी – हिंदी शायरी

—#12—

मुझसे मेरी वफ़ा का सबूत मांग रहा है,

खुद बेवफ़ा हो के मुझसे वफ़ा मांग रहा है.

—#13—

वो जमाने में यूँ ही
बेवफ़ा मशहूर हो गये दोस्त,
हजारों चाहने वाले थे किस-किस से वफ़ा करते.

—#14—

वफाये मांगते फिरते है फकीरों की तरह

अजीब लोग है कहते है मुहब्बत की है।

—#15—

इस ज़िंदगी ने साथ किसी का नहीं दिया

किस बेवफ़ा से तुझ को तमन्ना वफ़ा की है

—#16—

वफ़ा का नाम मत लो यारों.
वफ़ा दिल को दुखाती है.
वफ़ा का नाम लेने से हमें
एक ✒ बेवफा की याद आती है.

—#17—

वाह मौसम तेरी वफा पे आज दिल खुश हो गया,,
याद-ए-यार मुझे आयी और बरस तू पड़ा..!!

—#18—

दो दिलों की धड़कनों में एक साज़ होता है,
सबको अपनी-अपनी मोहब्बत पर नाज़ होता है,
उसमें से हर एक बेवफा नहीं होता,
उसकी बेवफ़ाई के पीछे भी कोई राज होता है!

—#19—

इस ज़िंदगी ने साथ किसी का नहीं दिया

किस बेवफ़ा से तुझ को तमन्ना वफ़ा की है

—#20—

क्या जानो तुम बेवफाई की हद दोस्तों,
वो हमसे इश्क सीखती रही किसी ओर के लिए।

—#21—

वो बेवफा हमारा इम्तेहा क्या लेगी,
मिलेगी नज़रो से नज़रे तो अपनी नज़रे ज़ुका लेगी,
उसे मेरी कबर पर दीया मत जलाने देना,
वो नादान है यारो.. अपना हाथ जला लेगी।

—#22—

वफ़ा की ज़ंज़ीर से डर लगता है,
कुछ अपनी तक़दीर से डर लगता है.
जो मुझे तुझसे जुदा करती है,
हाथ की उस लकीर से डर लगता है!

—#23—

वफ़ा तुम से करेंगे, दुख सहेंगे, नाज़ उठाएँगे

जिसे आता है दिल देना उसे हर काम आता है

—#24—

बेवफा होने के बाद तो कितनी ही
मजबुरियो को गिना देते है लोग.
काश वफा करने की भी कोई मजबुरी होती.

—#25—

न जाने कैसी दिल्लगी थी उस बेवफा से
कि मैंने आखिरी ख़्वाहिश में भी उसकी वफा मांगी

—#26—

सज़ा ये दी है कि आँखों से छीन लीं नींदें

क़ुसूर ये था कि जीने के ख़्वाब देखे थे

किसी ने रेत के तूफ़ाँ में ला के छोड़ दिया

ये जुर्म था कि वफ़ा के सराब देखे थे ”

—#27—

ज़िंदगी तू ने तो सच है कि वफ़ा हम से न की

हम मगर ख़ुद तुझे ठुकराएँ ज़रूरी तो नहीं

—#28—

बहुत महँगी हुई अब तो वफा..
लोग कहाँ मिलते हैं, जो सच्चा प्यार करें
मोहब्बत तो बन गई है अब सजा..
आशिक कहाँ मिलते हैं, जो संग-संग इश्क का दरिया पार करें!

Shayari on Wafa

—#29—

तेरे होते हुए भी तन्हाई मिली है,
वफ़ा करके भी देखो बुराई मिली है,

—#30—

मेरी आँखों में आसूं….तुझसे हम दम क्या कहूं क्या है,
ठहर जाये तो अंगारा है,बह जाये तो दरिया है.

—#31—

हाल सुन कर मेरा वो यूँ बोले
और दिल दीजिए वफ़ा कीजे

—#32—

हमारी तबियत भी न जान सके हमे बेहाल देखकर,
और हम कुछ न बता सके उन्हें खुशहाल देखकर।

—#33—

वफ़ा तुझ से ऐ बेवफ़ा चाहता हूँ

मेरी सादगी देख क्या चाहता हूँ

—#34—

वो कहते हैं हर चोट पर मुस्कुराओ

वफ़ा याद रक्खो सितम भूल जाओ

—#35—

ऐ दोस्त कभी ज़िक्र-ए-जुदाई न करना,
मेरे भरोसे को रुस्वा न करना,
दिल में तेरे कोई और बस जाये तो बता देना,
मेरे दिल में रहकर बेवफाई न करना।

—#36—

कौन उठाएगा तुम्हारी ये जफ़ा मेरे बाद

याद आएगी बहुत मेरी वफ़ा मेरे बाद

—#37—

वफाओं से मुकर जाना मुझे आया नहीं अब तक,
जो वाकिफ ना हो चाहत से मैं उनसे ज़िद नहीं करता.!

—#38—

ये बेवफा वफा की कीमत क्या जाने !!
है बेवफा गम-ऐ मोहब्बत क्या जाने !!
जिन्हे मिलता है हर मोड पर नया हमसफर !!
वो भला प्यार की कीमत क्या जाने !!

—#39—

एक जाम उलफत के नाम,
एक जाम मुहब्बत के नाम.
एक जाम वफ़ा के नाम,
पूरी बोतल बेवफा के नाम,
और पूरा ठेका दोस्तों के नाम

—#40—

वफ़ा न कर तो हमारी वफ़ा की दाद ही दे
तिरे फ़िराक़ को हम इंतिज़ार कहते हैं

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