2 line dard bhari shayari | दर्द भरी शायरी

Dard shayari is a type of verse communicating excruciating sentiments of heart. We have gathered best ever dard bhari shayari in hindi content. It is about extraordinary torment of emotions brought up in heart because of fragmented love or some terrible occurrences throughout everyday life.

दिल करता है सब दुनिया को छोड़ बस तेरा हो जाऊँ
तूँ बन जाये शाम मेरी मैं तेरा सवेरा हो जाऊँ

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हर किसी का दिल टुटा मिला, “इश्क़” और “प्यार”में,

कोई तो होगा, जो सिर्फ खुश होगा, ऐ “इश्क़” तेरी कतार में…

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अपनी ताकत पर इतना क्या गुरुर करना साहब*

*चोरी उनके यहाँ भी होती हैं जो ताले बनाते हैं..

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मेरे हाथों की लकीरों को पढ़ना कभी तुम..!!
एक तेरे नाम के बाद प्यार थम सा गया है कहीं….!!!

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जिस दरख्त की जड़ पर शॉपो का घोसला हो*

*उस पर परिन्दे अपना घोसला नही बनाते

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जश्न क्या मनाऊँ मै नये साल का,

तारीख ही बदली है हालात नहीं।

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बेहतर तो है यही कि न दुनिया से दिल लगे,

पर क्या करें जो काम न बे-दिल-लगी चले,,,

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बड़ी अजीब सी है शहरों की रौशनी,*

*उजालों के बावजूद चेहरे पहचानना मुश्किल है।*

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 चलो फिर खुद में खोया जाए,

ठंड बहुत है, सोया जाए…!!

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कुछ तो बात है उस एक पल में..
ज़िंदगी बीत गयी वो नही बीता !❣

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✍     *फिर पलट रही हैं सरदी की सुहानी शामें।*

*फिर उनकी याद में जलने के ज़माने आए।*

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 *दुनिया एक सर्कस है…*

*यहां कलाकार कम.. तमाशा देखने वाले ज्यादा है…!*

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आजकल धुंध बहुत है मेरे शहर में,

अपने दिखते नहीं,
और जो दिखते हैं वह अपने नहीं।

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 ✍ ✍ ये किसने “तेज़ हवाओँ” के पर “कतर” डाले…!!
✍ ✍ बड़े “यक़ीन” से खोली थी “खिड़कियाँ” हमने…!!

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कसूर तेरा नहीं वक्त मेरा ही खराब था

हकीकत किसी और कि बन गई जो मेरा ख्वाब था..

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 मेरी रूह की आवाज़ हो तुम..

ख़ास नहीं बहुत ख़ास हो तुम..

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 उसको चाहा ही है.. मैंने कुछ इस तरह…….!!!

वो कही भी रहे….. सिर्फ मेरी लगे……!!!

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 हमें पढ़ाओ ना रिश्तों की कोई और क़िताब

पढ़ी है बाप के चेहरे की झुर्रियाँ मैंने.!!

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 दिल को इसी गुमां में रखा उम्र भर
इस इम्तेहां के बाद कोई इम्तेहां नही

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तुम तो कमाल की मोहब्बत करते हो

मुझमे ही खुद को छोड़ जाते हो

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 *जब लोग बदल सकते हैं*

*तो किस्मत क्या चीज है*

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❤ याद आयेगी हर रोज, मगर तुझे आवाज न दूंगा…*
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*लिखूंगा तेरे ही लिये हर गजल, मगर तेरा नाम न लूंगा…

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मैं सोच रहा हूँ कि कोई मुझे समझे
पर मुझे हर कोई और उलझा कर चला जाता है
हाथ तो पकड़ता हूँ मैं पर हर कोई हाथ छुड़ाकर चला जाता है

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