2 Line Shayari #220, Jaruraten bhi jaruri hai

जरूरतें भी जरूरी हैं, जीने के लिये लेकिन,
तुझसे जरूरी तो, जिदगी भी नही।

सारे घर के उजाले का जिम्मा था मुझ पर,
जब बुझने लगा चिराग तो जलना पड़ा मुझे।

सलूक जो चाहो कर लो मुझ से,
बस याद ये रहे, की में याद सब रखता हूं।

माना के तुम लफ़्ज़ों के बादशाह हो,
पर हम ख़ामोशी पे राज़ करते है।

उसकी बेवफ़ाई पर ही फिदा था दिल अपना,
खुदा जाने उसमें वफ़ा होती तो क्या होता।

किस्मत बुरी या मैं बुरा, फैसला हो ना सका,
मैं सबका होता गया, कोई मेरा हो न सका।

मुहब्बत मे वह पल बहुत खूबसूरत होता है,
जब देखना इबादत और छूना गुनाह लगता है।

न जाने किस तरह के हैं इस दुनियां के लोग,
प्यार भी प्यार से करते हैं और बर्बाद भी प्यार से।

प्यार के दो मीठे बोल से खरीद लो मुझे,
दौलत की सोचोगे तो पूरी दुनिया बेचनी पड़ेगी तुम्हे।

इस बेगानी दुनिया में तेरी उम्मीदों का सहारा लेकर,
हम तुम्हें फिर से चाहेंगे एक उम्र दुबारा लेकर।

Leave a Reply