2 Lines Shayari – दोस्त…

2 Lines Shayari – दोस्त…

दोस्तो से अच्छे तो मेरे दुश्मन निकले,
कमबख्त हर बात पर कहते हैं कि तुझे छोडेंगे नहीं|

सुकून की बातमत कर ऐ दोस्त,
बचपन वाला ‘इतवार’ जाने क्यूँ अब नहीं आता।

देखी जो नब्ज मेरी, हँस कर बोला वो हकीम,
जा जमा ले महफिल पुराने दोस्तों के साथ तेरे हर मर्ज की दवा वही है|

चेहरे के रंग को देखकर दोस्त ना बनाना.. दोस्तों..
तन का काला तो चलेगा लेकिन मन का काला नहीं।

शायरी लिखना बंद कर दूंगा अब मैं यारो..
मेरी शायरी की वजह से दोस्तों की आँखों में आंसू अब देखे नहीं जाते!!

कुछ रीश्ते ‘रब’ बनाता हे कुछ रीश्ते ‘लोग’ बनाते हे,
पर कुछ् लोग बीना कीसी रीश्ते के रीश्ते नीभाते हे, शायद वही ‘दोस्त’ कहेलाते हे|

थोङा ऐतबार करो मुझ पर, दोस्त हूँ मैं, कोई गैर नही,
मुहब्बत हुई है, गुनाह तो नही|

डूबे हुओं को हमने बिठाया था अपनी कश्ती में यारो,
और फिर कश्ती का बोझ कहकर, हमें ही उतारा गया।

डूबे हुओं को हमने बिठाया था अपनी कश्ती में यारो,
और फिर कश्ती का बोझ कहकर, हमें ही उतारा गया।

पीते थे शराब हम, उसने छुड़ाई अपनी कसम देकर,
महफ़िल में गए थे हम, यारों ने पिलाई उसकी कसम देकर।

मैने कहा बडी तीखी‬ मिर्च हो यार तुम,
वो.. मेरे होठचुम करबोलीऔर अब!!

तमाम गिले-शिकवे भुला कर सोया करो यारो,
सुना है मौत किसी को मुलाक़ात का मौका नही देती।

झूठ बोलने का रियाज़ करता हूँ सुबह और शाम मैं,
सच बोलने की अदा ने हमसे कई अजीज़ यार छीन लिये|

ख्वाब मत बना मुझे.. सच नहीं होते,
साया बना लो मुझे.. साथ नहीं छोडेंगे!!

हाथ पर हाथ रखा उसने तो मालूम हुआ,
अनकही बात को किस तरह सुना जाता है!!

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