25+ ओस शायरी 2 लाइन – ओस Status

25+ ओस शायरी 2 लाइन – ओस Status

ओस की बूंदों से लिखी थी खुदा ने तकदीर हमारी
जरा सी धूप में जिंदगी अश्क बन गई

महकी हूँ में भीग कर उसके प्यार की ओस में,
सोच बरस जाता वो तो क्या कमाल होता.
लोग कहते हैं
वाह क्या ओस की बुंदे छाई हैं,
पर उन्हें क्या मालूम की
चाँद ने रात रोके बितायी हैं.

ओस शायरी 4 लाइन

सर्द फ़िजा.खुशनुमा मौसम और ओस की हल्की बूँदे,
खामखाँ बढ़ा दिया बेचैनियों को जनवरी की लहर ने.
तेरे चेहरे पे बालों से टपकता पानी,
चेहरा नहीं ओस मे डूबा गुलाब हो जैसे.

पहले नहाई ओस मेंफिर आँसुओं में रात
यूँ बूँद बूँद उतरी हमारे घरों में रात.
रोता रहा फूल तन्हाई में रात भर,
और लोग उसे ओस कह कर
वहाँ से गुजरते रहे.
ओस पड़ी थी रात बहुत
और कोहरा था गर्माइश पर,
सैली सी ख़ामोशी में
आवाज़ सुनी फ़रमाइश पर.
हर सुबह ओस की बूंदों सी हो,
हर शाम चाँद की तरह रोशन सी हो,
यही इच्छा है मेरी भी मेरे श्याम साँवरे
दुनिया भी फूलों की तरह खूबसूरत सी हो.
सुनो, तुम लौट आओ, सर्द शाम से पहले,
मेरी आँखों से, फिर ओस टपकने लगी है.
सुबह की ओस जैसे हो तुम,
बस दिखते हो मग़र छू नहीँ सकते,
करीब होके भी करीब रह नही सकते ,
जो भी हो दिल के पास हो तुम
क्योंकि बहुत खास हो तुम.

सुबह से तेरी य़ादों की ओस कुछ ज़मीं सी है,
फिजायें करे तस्दीक की आपकी कमीं सी है,
तस्सवुर में भोर की आँखों में कुछ नमी सी है
फिजायें करे तस्दीक की आपकी कमी सी है.

अल्हड़ सी ओस की बूँदे बबो को मेरे भिगो गई,
तुम आओ तो मेरे रूह की प्यास बुझे.

मैं ओस की बूंद तुम सुबह की धूप हो,
इस इंतज़ार में हूँ की तुम आओ और मैं मिट जाऊँ.

नैनो से नैन मिलाकर, मोहब्बत का इजहार करूँ,
बन कर ओस की बुँदे, जिन्दगी तेरी गुलजार करूँ,
संवर जाएगी तेरी मेरी जिन्दगी, इश्क के सफर में
थाम ले तू हाथ मेरा, मैं तेरे हर वादे पे ऐतबार करूँ.
ओस की बूंदे है,आंख में नमी है,
ना उपर आसमां हैना नीचे जमीन है,
ये कैसा मोड है जिन्‍दगी का
जो लोग खास है उन्‍की की कमी हैं.

25+ ओस शायरी 2 लाइन – ओस Status

ओस की बूँद होती है बेटियाँ
स्पर्श खुरदुरा हो तो रोती है बेटियाँ
रोशन करेगा बेटा तो बस एक ही कुल को
दो दो कुलों की लाज होती हैं बेटियाँ.

ओस की बूँद की जैसी हैं मेरी ज़िन्दगी
जो डरती हैं बह जाने से,
पतझड़ के पत्तों के तरह हैं मेरी ज़िन्दगी
जो डरती हैं सुख कर गिर जाने से.

ओस की बूँद जैसी है जिन्दगी की सफर,
कभी फूल में तो ,कभी धूल में.

हमने सपनों को दूर होते देखा है ,
जो मिला भी नहीं उसे खोते देखा है,
लोग कहते हैं कि रात को ओस गिरती है,
मगर हमने रात में फूलों को रोते देखा है.

ओस शायरी 4 लाइन

तुम्हे पता हैसर्दियों की सबसे प्यारी बात क्या है ?
खिड़कियों के ओस जमे शीशों परतुम्हारे नाम का
सबसे पहला अक्षर लिखना.
ओस से क्या होगा जब तक बरसात नही होगी,
मोबाइल से क्या होगा जब तक मुलाकात नही होगी.
आज भीगी हैं पलके किसी की याद में
आकाश भी सिमट गया है अपने आप में,
ओस की बूँद ऐसी गिरी है जमीन पर
मानो चाँद भी रोया है उनकी याद में.

कुछ ज्यादा ही गिरती है ओस इन दिनों,
ये दिसम्बर भी तुम्हें बहुत याद करता है.
नींद की ओस से पलकों को भिगोये कैसे,
जागना जिसका मुकद्दर हो वो सोये कैसे,
रेत दामन में हो या दश्त में बस रेत ही है,
रेत में फस्ल-ए-तमन्ना कोई बोये कैसे.

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