5 Best Makar Sankranti Essay in Hindi And English

Makar Sankranti 2019 Date : 14/ January

Makar Sankranti Information  :

Makar Sankranti, also known as the Kite festival, is a popular Hindu festival. It is known as ‘Lohri’ in Punjab. In Uttar Pradesh, the festival is known as ‘Khichiri’. In Gujarat and Rajasthan, the festival is known as ‘Uttarayan’.

Due to the variation in tradition through different cultures of India, the celebration procedure and myths behind the festival varies from region to region. The festival is dedicated to Sun God.

मकर संक्रांति के बारे मे जानकारी :

मकर संक्रांति हिन्दूओ का प्रसिद्ध त्योहार है, जो पतंग उत्सव के नाम से भी जाना जाता है. पंजाब मे इसे ‘लोहरी’ के नाम से, उत्तर प्रदेश मे ये त्योहार ‘Khichiri’ नाम से और गुजरात और राजस्थान मे ये ‘उतरायन’ के नाम से भी जाना जाता है.

भारत की विभिन्न संस्कृतियों भिन्नता के कारण, उत्सव की प्रक्रिया और त्योहार अलग अलग क्षेत्र में भिन्न होता है. मकर संक्रांति त्योहार सूर्य भगवान को समर्पित है.

Why is Makar Sankranti celebrated?

Makar Sankranti is observed to celebrate the transition of sun into the zodiac house of Capricorn. The Hindi version of Capricorn is “Makara”. Hence this day is known as “Makar Sankranti”. Sun God is worshiped at many places.

मकर संक्रांति त्योहार क्यूँ मानते है ?

मकर संक्रांति को मकर राशि के राशि चक्र में सूरज के संक्रमण का जश्न मनाने के लिए मनाया जाता है । मकर राशि का हिंदी संस्करण “मकर” है इसलिए इस दिन को “मकर संक्रांति” कहा जाता है कई स्थानों पर सूर्य भगवान की पूजा की जाती है ।

Makar sankranti essay in english

‘Makar Sankranti’ is a famous festival of Hindus. It is celebrated in several parts of India and also in some other parts. Makar-sankrant generally falls on 14th January every year. This festival is the one of the few chosen Indian Hindu festivals which has a fixed date.

Makar Sankranti is the day when the glorious Sun-God begins its ascendancy and entry into the Northern Hemisphere. It is a harvest festival which is essentially celebrated in the Hindu communities. Makar Sankranti signifies that we should turn away from the darkness of delusion in which we live, and begin to enjoy a new life with bright light within us to shine brighter and brighter.

Short essay on makar sankranti in english

Makar Sankranti is a harvest festival. It is celebrated to mark the arrival of spring season.

Kite Flying: Flying kites are seen on the sky. This is done to please the Sun God.

Celebration:

Makar Sankranti is generally celebrated a day after the Lohri fesitval. It is generally celebrated on 14th day of January every year.

It is extensively celebrated in different parts of India.
People wear new clothes and distribute sweets.
People take holy bath on this day.
Fairs (melas) are held in many cities.
World famous Kumbh mela is held every 12 years in the holy places.
People make sweets of sesame seeds. Semame sweets are traditionally consumed in India. It is very tasty and helps us to maintain good health.
Importance Of Makar sankranti :

The festival of Makar Sankranti is very important because it refers to the transition of sun into the zodiac house of Capricorn.

Makar Sankranti promotes a feeling of sense of unity among peoples.

People forget their past grievances and forgive one another.
Since it is a harvest festival, it is of utmost importance for the farmers.

Makar sankranti essay in hindi

मकर संक्रांति का त्योहार हिन्दू धर्म के प्रमुख त्योहारों में शामिल है, जो सूर्य के उत्तरायन होने पर मनाया जाता है। इस पर्व की विशेष बात यह है कि यह अन्य त्योहारों की तरह अलग-अलग तारीखों पर नहीं, बल्कि हर साल 14 जनवरी को ही मनाया जाता है, जब सूर्य उत्तरायन होकर मकर रेखा से गुजरता है।

कभी-कभी यह एक दिन पहले या बाद में यानि 13 या 15 जनवरी को भी मनाया जाता है लेकिन ऐसा कम ही होता है। मकर संक्रांति का संबंध सीधा पृथ्वी के भूगोल और सूर्य की स्थिति से है। जब भी सूर्य मकर रेखा पर आता है, वह दिन 14 जनवरी ही होता है, अत: इस दिन मकर संक्रांति का तेहार मनाया जाता है।

ज्योतिष की दृष्ट‍ि से देखें तो इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है और सूर्य के उत्तरायण की गति प्रारंभ होती है।

भारत के अलग-अललग क्षेत्रों में मकर संक्रांति के पर्व को अलग-अलग तरह से मनाया जाता है। आंध्रप्रदेश, केरल और कर्नाटक में इसे संक्रांति कहा जाता है और तमिलनाडु में इसे पोंगल पर्व के रूप में मनाया जाता है। पंजाब और हरियाणा में इस समय नई फसल का स्वागत किया जाता है और लोहड़ी पर्व मनाया जाता है, वहीं असम में बिहू के रूप में इस पर्व को उल्लास के साथ मनाया जाता है। हर प्रांत में इसका नाम और मनाने का तरीका अलग-अलग होता है।

अलग-अलग मान्यताओं के अनुसार इस पर्व के पकवान भी अलग-अलग होते हैं, लेकिन दाल और चावल की खिचड़ी इस पर्व की प्रमुख पहचान बन चुकी है। विशेष रूप से गुड़ और घी के साथ खिचड़ी खाने का महत्व है। इसेक अलावा तिल और गुड़ का भी मकर संक्राति पर बेहद महत्व है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर तिल का उबटन कर स्नान किया जाता है। इसके अलावा तिल और गुड़ के लड्डू एवं अन्य व्यंजन भी बनाए जाते हैं। इस समय सुहागन महिलाएं सुहाग की सामग्री का आदान प्रदान भी करती हैं। ऐसा माना जाता है कि इससे उनके पति की आयु लंबी होती है।

मकर संक्रांति को स्नान और दान का पर्व भी कहा जाता है। इस दिन तीर्थों एवं पवित्र नदियों में स्नान का बेहद महत्व है साथ ही तिल, गुड़, खिचड़ी, फल एवं राशि अनुसार दान करने पर पुण्य की प्राप्ति होती है। ऐसा भी माना जाता है कि इस दिन किए गए दान से सूर्य देवत प्रसन्न होते हैं।

इन सभी मान्यताओं के अलावा मकर संक्रांति पर्व एक उत्साह और भी जुड़ा है। इस दिन पतंग उड़ाने का भी विशेष महत्व होता है और लोग बेहद आनंद और उल्लास के साथ पतंगबाजी करते हैं। इस दिन कई स्थानों पर पतंगबाजी के बड़े-बड़े आयोजन भी किए जाते हैं।

Short essay on makar sankranti in hindi

‘मकर संक्रान्ति’ हिंदुओं का एक प्रसिद्द त्यौहार है। यह भारत के कई हिस्सों में और भी कुछ अन्य भागों में मनाया जाता है। मकर संक्रान्ति आम तौर पर हर साल 14 जनवरी को मनाया जाता है। यह त्यौहार उन कुछ चुने हुए भारतीय हिंदू त्यौहारों में से एक है जो निश्चित तिथि को मनाये जाते हैं।

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार पौष मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है तभी इस त्यौहार को मनाया जाता है। इस त्यौहार के दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है। मकर संक्रान्ति के दिन से ही सूर्य की उत्तरायण गति भी प्रारम्भ होती है। इसलिये इस पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायणी भी कहते हैं।

मकर संक्रान्ति मुख्य रूप से ‘दान का पर्व’ है। माघ मेले का पहला स्नान मकर संक्रान्ति से शुरू होकर शिवरात्रि के आख़िरी स्नान तक चलता है। मकर संक्रान्ति के दिन स्नान के बाद दान देने की भी परम्परा है। भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में इस त्यौहार को खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन खिचड़ी खाने एवं खिचड़ी दान देने का अत्यधिक महत्व होता है।

Makar sankranti festival full essay in hindi language

भारत में अनेक पर्व-त्यौहार मनाए जाते हैं और इन सब के पीछे ज्ञान-विज्ञान, स्वास्थय एवं प्रकृति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बाते होती हैं.

इन्ही में से एक पर्व है मकर संक्रांति जो पूरे भारतवर्ष में विभिन्न नामों से मनाया जाता है. यह पर्व सूर्य के माघ मास में मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाया जाता है. इसलिए इसे मकर संक्रांति कहते हैं. ये अलग-अलग प्रांतों में भिन्न-भिन्न नामों से वहाँ की परंपराओं के अनुसार मनाया जाता है जो अपने आप में अनूठा है.

वैसे तो संक्रांति साल में 12 बार हर राशि में प्रवेश करती है लेकिन मकर और कर्क राशि में इसके प्रवेश का विशेष महत्व है. मकर राशि के साथ बढ़ती गति के चलते दिन बड़ा और रात छोटी हो जाती है और कर्क राशि में रात बड़ी और दिन छोटा हो जाता है. इस वजह से मकर संक्रांति किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है. इस दिन किसान अपनी फसल काटते हैं. सूर्य का हिन्दु धर्म में बहुत महत्व है उन्हें रौशनी, ऊर्जा, उम्मीद और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है. वैसे ही मकर संक्राति नए कार्य की शुरूआत का प्रतीक है. ये भारत का एक मात्र एैसा पर्व है जो हर वर्ष एक ही तारीख को मनाया जाता है.

इस दिन सूर्योदय से पहले स्नान कर सूर्य को जल अर्पण करने के पश्चात् तिल, गुड़-चुड़े के साथ इच्छानुसार दान दिया जाता है. फिर दही-गुड़-चुड़ा और तिलकूट खाया जाता है साथ ही दिन में सूर्य को खिचड़ी का भोग लगाकर खिचड़ी खाया जाता है. इस दिन खिचड़ी के दान का भी महत्व है. जिस कारण इसे खिचड़ी पर्व भी कहा जाता है. कुछ जगहो में पतंग उड़ा कर भी इसे मनाते हैं. गुजरात में खासकर पतंग उड़ाने की प्रतियोगिता भी रखी जाती है. पंजाब में लोहड़ी जलाकर उत्सव मनाया जाता है.

इस पर्व को पूरे देश में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है जैसे;

मकर संक्रांति पर निबंध

प्रांत                         नाम

राजस्थान एवं गुजरात        – उत्तरायण
हिमाचल प्रदेश और हरियाणा   – मगही
पंजाब                     –  लोहड़ी
असम                     – माघ बिहु
कश्मीर                    –  शिशुर सेक्रांत
उत्तर प्रदेश एवं पश्चिमी बिहार   –  खिचड़ी
कर्नाटक और आँध्रप्रदेश        – मकर संक्रमामा
बिहार, झारखण्ड, गोवा, महाराष्ट्र, – मकर संक्रांति

भारत के अलावा दुसरे देशों में ये अलग-अलग नामों से प्रचलित है जैसे;

देश       नाम

नेपाल    – माघे संक्रांति
श्री लंका  – उलावर थिरूनाल
थाईलैंड   – सोंगकर्ण
मयंमार   – थिंगयान
कंबोडिया  – मोहा संगकर्ण

इस प्रकार ये पर्व विभिन्न नामों से मनाया जाता है पर उद्देश्य एक होता है सूर्य की रौशनी का स्वागत करना.

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