Barish shayari – बारिश शायरी

Looking for the best barish shayari ? If yes then you are in right place because here we have collected barish ki shayari. Read these shayari on barish and share with friends, relative and social media also. thanks

barish ki shayari

—#1—

जितनी बारिश की बूंदे बरस रही है
बस इतना ही प्यार है मुझे तुमसे

—#2—

ख़ुद को इतना भी न बचाया कर,
बारिशें हुआ करे तो भीग जाया कर।

—#3—

पूछते थे ना कितना प्यार है तुम्हे हम से,
लो अब गिन लो… बारिश की ये बूँदें।

—#4—

ज़रा ठहरो ✧ बारिश थम जाये
तो फिर चले जाना ✧
किसी का ✧ तुझ को छू लेना
मुझे ✧ अच्छा नहीं लगता ✧

—#5—

पहले बारिश होती थी तो ✧ याद आते थे ,
अब याद आते हो ✧ तो बारिश होती है ✧

—#6—

मौसम-ए-इश्क़ है तू एक कहानी बन के आ,
मेरे रूह को भिगो दें जो तू वो पानी बन के आ! ?

Mausam-e-ishq hai too ek kahaani ban ke aa,
mere rooh ko bhigo den jo too wo paani ban ke aa! ?

—#7—

कैसी बीती रात किसी से मत कहना
सपनों वाली बात किसी से मत कहना
कैसे उठे बदल और कहां जाकर टकराए
कैसी हुई बरसात किसी से मत कहना

—#8—

ए बादल इतना बरस की नफ़रतें धुल जायें,
इंसानियत तरस गयी है प्यार पाने के लिये..!!

Aye badal itna baras ki nafrate dhul jaye,
Insaniyat taras gayee hai pyaar paane ke liye..!!

—#9—

आज मौसम कितना खुश गंवार हो गया
ख़त्म सभी का इंतज़ार हो गया
बारिश की बूंदे गिरी इस तरह से
लगा जैसे आसमान को ज़मीन से पियार हो गया

—#10—

अर्ज़ किया है-
बारिश की बूंदे लाती है बहार,
दे जाती एक अनजाना-सा करार.
जब पड़ती है चेहरे के ऊपर,
गीला कर उसे और बना देती सुन्दर.

—#11—

खूब हौसला बढ़ाया आँधियों ने धुल का
मगर दो बूंदे बारिश ने औकात बता दी

बारिश शायरी

—#12—

सुना है बहुत बारिश है तुम्हारे शहर में,
ज्यादा भीगना मत..
अगर धूल गई सारी ग़लतफहमियां,
तो फिर बहुत याद आएंगे हम!!

—#13—

जब भी होगी पहली बारिश, तुमको सामने पायेंगे,
वो बूंदों से भरा चेहरा तुम्हारा हम देख तो पायेंगे।

—#14—

तुमको बारिश पसंद है मुझे बारिश में तुम,
तुमको हँसना पसंद है मुझे हस्ती हुए तुम,
तुमको बोलना पसंद है मुझे बोलते हुए तुम,
तुमको सब कुछ पसंद है और मुझे बस तुम।

—#15—

कहीं फिसल न जाऊं तेरे ख्यालों में चलते चलते,
अपनी यादों को रोको मेरे शहर में बारिश हो रही है।

—#16—

हैरत से ताकता है सहरा बारिश के नज़राने को,
कितनी दूर से आई है ये रेत से हाथ मिलाने को।

—#17—

बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने,
किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है।

—#18—

वो मेरे रु-बा-रु आया भी तो बरसात के मौसम में,
मेरे आँसू बह रहे थे और वो बरसात समझ बैठा।

—#19—

सुना है ✧ बारिश मे दुआ क़ुबूल होती है ✧
अगर इज़ाज़त हो तो ✧ मांग लू तुम्हे ✧

—#20—

इस बारिश के मौसम में अजीब सी कशिश है,
न चाहते हुए भी कोई शिद्दत से याद आता है!

—#21—

रास्तो में सफ़र करने का
मज़ा आ जाता है
जब बारिश का सुहाना
मौसम हो जाता है

—#22—

अब भी बरसात की रातों में बदन टूटता है,
जाग उठती हैं अजब ख़्वाहिशें अंगड़ाईयों की।

—#23—

खुद भी रोता है,
मुझे भी रुला के जाता है,
ये बारिश का मौसम,
उसकी याद दिला के जाता है।

—#24—

हम भीगते हैं जिस तरह से तेरी यादों में डूबकर,
इस बारिश में कहाँ वो कशिश तेरे ख्यालों जैसी।

—#25—

ये बारिश की बूंदे नहीं
ये तो मेरे आंसू है
जो बह रहे है तुम्हारी याद में

—#26—

ये ही एक फर्क है तेरे और मेरे शहर की बारिश में
तेरे यहाँ ‘जाम’ लगता है, मेरे यहाँ ‘जाम’ लगते हैं।

—#27—

आज भीगी है पलके किसी की याद में
आकाश भी सिमट गया हैं अपने आप में
ओस की बूँद ऐसी गिरी है ज़मीन पर
मानो चाँद भी रोया हो उनकी याद में!

—#28—

रहने दो कि अब तुम भी मुझे पढ़ न सकोगे,
बरसात में काग़ज़ की तरह भीग गया हूँ मैं।

Best Barish Shayari in Hindi

—#29—

रिमझिम तो है मगर सावन गायब है,
बच्चे तो हैं मगर बचपन गायब है..!!
क्या हो गयी है तासीर ज़माने की यारों
अपने तो हैं मगर अपनापन गायब है !

—#30—

बादलों से कह दो,
जरा सोच समझ के बरसे,
अगर हमें उसकी याद आ गई,
तो मुकाबला बराबरी का होगा! ⛈

—#31—

पीने से कर चुका था मैं तौबा दोस्तों,
बादलों का रंग देख नियत बदल गई।

—#32—

कितनी जल्दी ज़िन्दगी गुज़र जाती है,
प्यास भुझ्ती नहीं बरसात चली जाती है,
तेरी याद कुछ इस तरह आती है,
नींद आती नहीं मगर रात गुज़र जाती है।

—#33—

कल उसकी याद पूरी रात आती रही,
हम जागे पूरी दुनिया सोती रही,
आसमान में बिजली पूरी रात होती रही,
बस एक बारिश थी जो मेरे साथ रोती रही! ?

—#34—

धूप सा रंग है और खुद है वो छाँवो जैसा
उसकी पायल में बरसात का मौसम छनके
– क़तील शिफ़ाई

—#35—

उस ने बारिश में भी खिड़की खोल के देखा नहीं
भीगने वालों को कल क्या क्या परेशानी हुई
– जमाल एहसानी

—#36—

गर मेरी चाहतों के मुताबिक,
जमाने की हर बात होती,
तो बस में होता तुम होती,
और सारी रात बरसात होती।

—#37—

बारिश में आज भीग जाने दो,
बूंदों को आज बरस जाने दो,
न रोको यूँ खुद को आज,
भीग जाने दो इस दिल को आज।

—#38—

शायद कोई ख्वाहिश रोती रहती है,
मेरे अन्दर बारिश होती रहती है
– अहमद फ़राज़

—#39—

आज की इस बारिश में
साथ तुम नहीं हो तो,
आँख नम सी कितनी है
सांस तंग सी कितनी है,
रूह प्यासी कितनी है
ये उदासी कितनी है,
आज की इस बारिस में।

—#40—

काश कोई इस तरह भी वाकिफ हो
मेरी जिंदगी से,
कि मैं बारिश में भी रोऊँ और
वो मेरे आँसू पढ़ ले।

—#41—

पीने से कर चुका था मैं तौबा दोस्तों,
बादलों का रंग देख नियत बदल गई।

—#42—

बरस जाये यहाँ भी कुछ नूर की बारिशें,
के ईमान के शीशों पे बड़ी गर्द जमी है,
उस तस्वीर को भी कर दे ताज़ा,
जिनकी याद हमारे दिल में धुंधली सी पड़ी है।

—#43—

इन बारिशों से दोस्ती अच्छी नहीं फ़राज़,
कच्चा माकन है तेरा कुछ तो ख्याल कर।

—#44—

मेरे ख्यालों में वही सपनो में वही,
लेकिन उनकी यादों में हम थे ही नहीं,
हम जागते रहे दुनियां सोती रही,
एक बारिश ही थी जो हमारे साथ रोती रही।

—#45—

बारिशें कुछ इस तरह से होती रहीं मुझ पे,
ख्वाहिशें सूखती रहीं और पलकें रोतीं रहीं।