Bewafa shayari in hindi

Bewafa shayari in hindi

रूठ कर जो हमसे यूं मुँह मोड़ लेते हो,

खुद ही गमों से रिश्ता जोड़ लेते हो !
कभी करके गुफ्तगू बांट लिया करो गम,

क्यों गमों का दामन खुद पे ओढ़ लेते हो !!

वक़्त चल रहा था, लोग भी ठहरे नहीं थे,
खुली रहती थीं किबाड़, तब उतने पहरे नहीं थे।

खुला आसमान, ये चाँद और सितारे
बग़ीचे में मचलते ये रंगीन फ़व्वारे।

दरख़्तों से निकली हवा की ठंडी फ़ुहारें,
कहीं बच्चों के हाथों में रंगीन गुब्बारे।

पंछियों के गुटों का घर वापस आना,
माँ को देखकर बच्चों का यूँ खिल जाना।

काम से थके हारे लोगों घर वापस आना,
फिर चौपालों पर बैठकर ठहठहा लगाना।


गली नुक्कड़ पर बच्चों का हुजूम लग जाना,
फ़िर खेल-करतब करते-करते उनका थक जाना।

घर में घुसते ही भूख का ज़ोरों से दौड़ जाना,
फिर चूल्हे की रोटी और माँ के हाथ का खाना।

शाम अब भी वही है, लोग अब भी वहीं हैं,
अब बातें नई हैं और बदल गया है जमाना।

बात जब भी सुकून की होती है,
तब याद आता है वो गुजरा जमाना!
याद आता है वो गुजरा जमाना।


तेरे हाथों में मुझे अपनी, तकदीर नजर आती है ।
देखो मैं जो भी चेहरा ,तेरी तस्वीर नजर आती है।

ख्वाब आंखों में है, अब भी तेरे सजे हुए।
भले हकीकत में ,तुमने फेर ली नजरे।

हर दिल जख्म खाता है, जवानी में ।
मानो मोहब्बत मोहब्बत नहीं ,खंजर हो कोई ।

प्यार किया नहीं जाता ,हो जाता है ।
तब जिया नहीं जाता ,जब दिल खो जाता है।


यूं तो मिले हर बार ,धोखे ही मुझको ।
चलो एक बार कर लेते हैं ,एतबार और सही ।
उमर बीत गई मेरी ,पर तुम ना आए कभी।
दिल कहे फिर भी थोड़ा ,इंतजार और सही।

शिकवे है ढेरों कागज पर ,उतारने के लिए।
वक्त कम है पास मेरे ,कुछ विचार ने के लिए ।
गर् तेरे इंतजार मैं ,मुझे मौत भी आ गई ।
आंखें रहेंगी खुली, तुम्हें निहारने के लिए ।

तुमसे किया हर वादा ,निभाऊंगा मैं।
तेरे लिए दुनिया ,छोड़ जाऊंगा मैं ।
आने का वादा कर ,लौट के ना आए।
तेरे ही इंतजार में , मर जाऊंगा मैं।


अब भी रात दिन ,तेरा ही नाम जपती है जुबा ।
मेरे दिल मैं अब भी है ,तेरे दिए जख्मों के निशान ।

याद रखना तेरा इंतजार करेगा ,तब तक दीवाना।
फूक के जिस्म जब तक, ना निकलेगा धुआँ।

दिल तेरा तलबगार ,अब भी है।
मेरे लिए इसमें प्यार ,अब भी है ।
भले तुम ना आए ,जाकर दोबारा।
दीवाने को तेरा इंतजार ,अब भी है ।

तेरी राहों में, आँखें बिछाए बैठे हैं ।
तेरे आने की उम्मीद ,लगाए बैठे हैं ।
जो रहती है ,सांसे सीने में दिल के साथ ।
अब तो वो भी ,हम तुझपे लुटाए बैठे हैं ।

वादे किए हुए, मोहब्बत में निभाओगे कैसे ।
मेरे लिए इस दुनिया से, टकराओगे कैसे ।
पहरे बिठा दिए ,बना दिया एक कैदी।
पहरो को तोड़कर, तुम आओगे कैसे ।


इस दिल का क्या करें ,जो उन्हें ही पुकारता है।
हर पल उसकी ही ,तस्वीर को निहारता है ।
शायद कभी तो वो ,मुझसे मिलने को आएंगे
इसी उम्मीद पे हर पल, हर दिन गुजारता है ।

शेरों में गम ,उतारा करता हूं ।
अश्कों से अरफात ,संवारा करता हूं ।
मैं यह जानता हूं कि, तुम नहीं आओगे ।
फिर भी तुम्हें ,पुकारा करता हूं।


बरसों बीत गए ,तेरे इंतजार में बैठे बैठे ।
क्या तेरा न आने का ,वही बहाना अब भी है ।

हर तरफ है मुर्दों से ,शमशान भरा हुआ ।
इन मुर्दों मैं जिंदा ,तेरा दीवाना अब भी है ।

बेवफा कर गई, मेरा कुछ हाल ऐसा।
मेरी रूह भी तड़पती है ,उसके प्यार में ।
जिस्म भले ही ,तब्दील हो चुका लाश मैं।
आंखें खुली हैं अब भी ,उसके इंतजार में।

तड़पती है आज भी रुह ,आधी रात में ।
निकल पड़ते हैं आंख से आंसू, आधी रात में ।
इंतजार में तेरे ,बरसों बीत गए सनम मेरे।
दिल को है आस आएगी तू ,आधी रात को ।

आंख अब भी है खुली, तेरे इंतजार में ।
ये बात और है कि, हमें मौत आ गई।
तेरे मिलने की हर उम्मीद ,खाक हो गई ।
जाने क्यों दिल को है, इंतजार तेरे आने का ।

रोकते नहीं वो हमारे लिए, कदम तो हम क्या करें ।
शायद मुड़कर आएंगे ,हमारे लिए इसी का इंतजार है।


शायद मेरे नसीब में ना प्यार तुम्हारा था
शायद मेरे नसीब में ना दीदार तुम्हारा था
तभी तो दूर चले गए आज तुम
हमसे शायद हमें मिलना न तुम्हें गवारा था

मौत ने भी अपना आया मुझको
यारों जिंदगी के ठुकराने के बाद
एक ही खुशी थी जीवन में मेरे
वह भी मिट गई उसके जाने के बाद

तेरे शहर में आकर हम यह जान गए
यहां किसी से दिल लगाना ठीक नहीं
करते हैं बर्ताव यहां सब गैरों की तरह
बेवफाओं की तस्वीर दिल में बसाना ठीक नहीं


जिक्र ना करो उनका यू सरे बाजार में
कि हम पागल हो गए आज उनके प्यार में
वादा किया था उनको रुसवा ना होने देंगे
खुद को रुसवाई से बचाना नहीं इस प्यार में

माना सितम तेरे मुझको बर्बाद करते हैं
होके बर्बाद हम तेरी खुशी की फरियाद करते हैं
कभी कोई ना लेगा नाम तेरा मेरी बर्बादी में
हम अपनी कहानी से तुम्हें आजाद करते हैं


हम मरे या जिए हमारी बला से
अब तुझको मेरा फिक्र ही क्या
ए हमें छोड़कर जाने वाली
करें अब तेरा जिक्र ही क्या

गर चले गए हो मेरी जिंदगी से
तो याद बनकर तड़पाते क्यों हो
कह दो अपनी यादों से छोड़ दे दामन
यूं हर पल मुझको रुलाते क्यों हो

दफा करो इन हुस्न की परियों को
जो खुद पर इतना नाज़ करती हैं
इंतहा करती हैं अक्सर बेवफाई पर
जबकि वफा से आगाज करती हैं

या खुद जानू या खुदा जाने
कुछ ना जाने यह खुदाई
कितना तड़पते हैं वफा करने वाले
यह खूब जानती है बेवफाई

दिल लगाने से पहले मैं शायर ना था
तेरे ठुकराने से पहले मैं शायर ना था
तेरे हिजर ने सिखा दी हमें शायरी
कलम उठाने से पहले मैं शायर ना था


वह हमें भूल जाते हैं जिन्हें हम याद करते हैं

दिल से चाहता है वही बर्बाद करते हैं

उनका हर सितम याद बनकर रहता है

सीने में उनके हर सितम की शेरो में ही याद करते हैं

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