राजा और गमले की कहानी |ईमानदारी का फल |

बहुत ही समय पहले की बात है एक राजा था जो की बहुत ही ईमानदार था और अपनी सी ईमानदारी के लिए उसकी प्रजा उसको भगवान् मानती थी | लेकिन राजा अब बूढ़ा हो चूका था और उसको कोई संतान नहीं थी और वह यही सोचता था की कौन उसका उत्तराधिकारी बनेगा | समय बहुत तेजी से बदल रहा था और राजा ने सोच ही लिया की इस राज्य के ही किसी को उत्तराधिकारी बनाऊंगा | इसके लिए राजा ने अपने राज्य के सभी होनहार बच्चो को बुलाया और बोला मई आप लोगो को एक – एक बीज देता हूँ आप लोगो का यह बीज ले जाकर गमले में उगाना है और चार महीने बाद हम सब लोग फिर इकठा होंगे और उनमे से ही कोई राजा बनेगा |

सब बच्चे बहुत ही खुश थे और सब राजा बनाने के लिए ही कड़ी मेहनत करने लगे , उनमे से एक लड़का था जिसका नाम अनय था और वह अपनी माँ के साथ आया और घर पर गमले में बीज को लगा दिया और हर दिन उसकी सेवा करता | जब एक महीना बीत गया और अनय के गमले से कोई पौधा ही नही निकला तो वह परेशान होने लगा क्युकी उसके साथ वालो के गमले से तो पौधे बड़े होने लग थे | वह मन ही मन सोचने लगा हो सकता है मेरा बीज कुछ और टाइम लेगा उगने में और वह हर दिन उसकी सेवा करता था ,ऐसा ही करते – करते चार महीना पूरा होने को आ गया और बीज ऊगा ही नहीं , जो भी बच्चा उसका गमला देखता वह हसने लगता | अनय को भी बहुत ही शर्म आ रही थी की अब वह राजा को क्या बोलेगा \ उसने सोच ही लिया की वह राजा के पास नहीं जायेगा और बोल देगा की वह बहुत ही बीमार है | लेकिन उसकी माँ ने उसको खूब समझाया और बोला की तुमको जाना ही पड़ेगा | अपनी माँ के जिद के आगे उनकी एक भी नहीं चली और वह बीज का गमला लेकर चल दिया |

सब लोग उसके गमले को देख कर है रहे थे , सबका गमला हरा भरा था और बहुत ही सुन्दर था | अनय यह देख कर बहुत ही निराश हो गया और अपने गमले के साथ नीचे ही बैठ गया | थोड़ी ही देर में राजा भी आ गया और बोला सब लोग अपने गमले के साथ आये है न , …

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एक झूठ को बार-बार बोला जाए.. Moral Story for True and Lie in Hindi

एक गाँव में सत्येंद्र शर्मा नामक एक ब्राह्मण रहता था । एक बार वह अपने यजमान से एक बकरा दान में पाकर अपने घर को जा रहा था । यह रास्ता लम्बा और सुनसान था । थोड़ी दूर आगे जाने पर रास्ते में उसे तीन माहिर ठग मिले । ब्राह्मण के कंधे पर बकरे को देखकर तीनो ने उसे हथियाने की एक योजना बना ली ।

योजना के अनुसार तीनो अलग-अलग हो गये । सबसे पहले एक ठग ने पंडित के पास से गुजरते हुए पंडित जी से कहा पंडित जी ये कंधे पर उठाकर क्या लेके जा रहे हो । यह क्या अनर्थ कर रहे हो? ब्राह्मण होकर एक कुत्ते को अपने कंधो पर उठा रखा है आपने । पंडित ने इससे झिड़कते हुए जवाब दिया ” कुछ भी अनाप शनाप बोल रहे हो, अंधे हो गये हो क्या? ये बकरा है तुम्हे दिखाई नहीं देता ?” इस पर ठग ने बनावटी चेहरा बनाते हुए जवाब दिया कि “मेरा क्या जाता है मेरा काम आपको बताना था आगे आपकी मर्ज़ी ।” अगर आपको कुत्ता ही अपने कंधो पर लेके जाना है तो मुझे क्या ? अपना काम आप जानो । यह कहकर वह निकल गया ।

Moral Story for True and Lie

थोड़ी दूर चलने के बाद ब्राह्मण को दूसरा ठग मिला । उसने ब्राह्मण से कहा ” पंडित जी क्या आप नहीं जानते उच्च कुल के लोगो को अपने कंधो पर कुता नहीं लादना चाहिए ।” पंडित ने उसे भी झिड़कते हुवे जवाब दिया और आगे बढ़ गया ।

यहां से थोड़ी दूर और आगे जाने के बाद पंडित से तीसरा ठग मिला और उसने पंडित से पूछा, पंडित जी आप एक ब्राह्मण होकर कुत्ता अपने कंधो पर लिए हुवे हैं, इसके पीछे कारण क्या हैं? तो पंडित के मन में आया कि हो न हो मेरी आंखे धोका खा रही है, इतने लोग झूट नहीं बोल सकते। लगता है कि ये कुत्ता ही है और उसने रास्ते में थोड़ा आगे जाकर बकरे को अपने कंधे से उतार दिया और वह घर को चला गया ।

तीनो ठग उसके पीछे ही थे, तीनो ठगों ने बकरे को मारकर खूब दावत उडाई । इसलिए कहा गया है बार बार झूट को भी मेजोरिटी में बोलने पर वह सच जैसा जान पड़ता है और लोग धोखे का शिकार हो जाते है ।

दोस्तों इसलिए हमें ऐसे लोगो से सतर्क रहना चाहिए, हमारे आस-पास कोई ऐसे लोग होते हैं जो अफवाह फैलाते हैं और हम यकीन कर …

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बात पते की “गुरु का स्थान” Guru Shishya ki Kahani in Hindi

Guru ka Sthan- Teacher and Student Story in Hindi

Guru Shishya ki Kahani

एक राजा था. उसे पढने-लिखने का बहुत शौक था. एक बार उसने मंत्री से कहकर एक शिक्षक की व्यवस्था की. शिक्षक राजा को पढ़ाने के लिए रोज आने लगा. राजा को शिक्षा ग्रहण करते हुए कई महीने बीत गए, मगर राजा को कोई लाभ नहीं हुआ. गुरु तो रोज खूब मेहनत कराते थे परन्तु राजा को उस शिक्षा का कोई लाभ नहीं हो रहा था. राजा इस बात से बड़ा परेशान रहने लगा, गुरु की प्रतिभा और योग्यता पर सवाल उठाना भी गलत था क्योंकि वो एक बहुत ही प्रसिद्द और योग्य गुरु थे. आखिर एक दिन उसने यह बात रानी को बताई तो रानी ने राजा को सलाह दी कि मेरे राजा आप इस सवाल का जवाब गुरु जी से ही पूछ कर देखिये.

लेकिन राजा भी गुरूजी से यह बात पूछने पर संकोच करते थे, एक दिन हिम्मत करके गुरूजी के सामने अपनी जिज्ञासा रखी, ” हे गुरुवर , क्षमा कीजियेगा , मैं कई महीनो से आपसे शिक्षा ग्रहण कर रहा हूँ पर मुझे इसका कोई लाभ नहीं हो रहा है. ऐसा क्यों है ?”

गुरु जी ने बड़े ही शांत स्वर में जवाब दिया, ” मेरे राजा इसका कारण बहुत ही साधारण सा है…”

” गुरुवर कृपा कर के आप शीघ्र इस प्रश्न का उत्तर दीजिये “, राजा ने विनती करके पूछी.

गुरूजी ने कहा, “मेरे राजा बात बहुत छोटी है परन्तु आप अपने ‘बड़े’ होने के अहंकार के कारण इसे समझ नहीं पा रहे हैं और परेशान और दुखी हैं. माना कि आप एक बहुत बड़े राजा हैं. आप हर दृष्टि से मुझ से पद और प्रतिष्ठा में बड़े हैं परन्तु यहाँ पर आप का और मेरा रिश्ता एक गुरु और शिष्य का है. गुरु होने के नाते मेरा स्थान आपसे उच्च होना चाहिए, परन्तु आप स्वंय ऊँचे सिंहासन पर बैठते हैं और मुझे अपने से नीचे के आसन पर बैठाते हैं. बस यही एक कारण है जिससे आपको न तो कोई शिक्षा प्राप्त हो रही है और न ही कोई ज्ञान मिल रहा है. आपके राजा होने के कारण मैं आप से यह बात नहीं कह पा रहा था.

कल से अगर आप मुझे ऊँचे आसन पर बैठने पर गौर करे और स्वंय नीचे बैठें तो कोई कारण नहीं कि आप शिक्षा प्राप्त न कर पायें.”

राजा की समझ में ये सारी बात आ गई और उसने तुरंत अपनी गलती को स्वीकारा और गुरुवर से उच्च …

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When liers are lovers part-1

“kabhi kabhi lagta hai, jiski painting itni Sundar hai wo khud jitni Sundar hogi.” Drishti said while looking the comments section below my recent post.

“drawing aur drawing k banane wale se kya taaluq hai. bewakoof hai wo Insaan, jisne bhi likha hai.” Maine kaha.

“but look at his posts, how cute he is, isn’t he?” Drishti asked me.
“so you are surfing his profile? I don’t want to see him, anyway. I’m not interested in the guys.” Maine Bina uske taraf mude kaha, aur main wahan se utth gyi.

“I had send a msg to him, hope you don’t mind.” Drishti said.

“tum Aisa kaise kar sakti ho? wo bhi mujhse puche bina. Maine apni profile sirf dekhne k liye Diya hai, ye sb karne k liye nhi.” Maine gusse mein kaha.

“chup raho,” usne kaha “dekho uska reply bhi aagaya.”

“itni jaldi??” Maine hairani se kaha.

“kya pata wo tumhare intezaar kar raha ho, kb tum usse msg karo.” usne kaha.

“kya chal raha hai yahan par? kya poori raat jag kar bitana hai?” Ishani, ye kehte hue humare pass aayi.

“dekh na yrr, kitna cute Banda hai. aur ye Bandi isse bhaav nhi de rhi hai.” Drishti ne mujhe Sunate hue Ishani se kaha.

“shi mein yarr, itna handsome hai, Aisa toh hoga nhi ki iski gf na ho. but phir bhi ek baar puch na. apni single friend Ko double kar dete hain.” ishani ne kaha.

Maine unn dono ki baaton ko ignore Kiya.

“koi fyda nhi hai. ye toh uski photo tk dekh nhi rhi hai. Main toh Abhi se iss par fida hoon.” drishti ne kaha.

“Drishti, mera phone wapas kar mujhe, abhi, issi waqt.” maine gambhir awaaz mein usse kaha. usne mujhe mera phone wapas Kiya. main apna insta hatane hi wali thi ki maine dekha ki chat box mein koi msg aaya hai. maine inbox check kiya hi ki tabhi ek anzaan number se mujhe call aane Laga.
“ye kya hai Drishti? tum kis se baat kar rhi thi?” maine Drishti k taraf dekhte hue pucha, hi ki usne meri baat kaat-te hue kahi, “lagta hai, usi ka call hai.”
“kiska?”
“arrey ussi ladke ka, jisne tere comment section mein comment kiya tha.” usne kaha.
“ab main kya karun? tune seriously use msg kiya? mera number bhi tune hi diya hoga?” Maine gusse mein kaha.
“HN, yrr. karna kya hai? baat karna …

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एक सैनिक की दिल छू लेने वाली वाली कहानी – Army ki Emotional Kahani Hindi

(Army Motivational Story in Hindi)

दोस्तों यह कहानी (army ki kahani hindi) बहुत इमोशन दिल छूने वाली हैं। यह कहानी एक सीख भी प्रदान करती हैं। आइये जाने..

Army ki Emotional Kahani

ये कहानी एक सैनिक की है, जो बॉर्डर में युद्ध के लिए गया था. युद्ध समाप्त होने के बाद जब उसके घर लौटने की बारी आई, तो उसने अपने माता-पिता को कैंप से फ़ोन किया, “माँ और पिताजी!

उसने कहा – मैं घर आ रहा हूँ. लेकिन घर आने से पहले मुझे आपसे एक बात पूछनी है. मेरा एक दोस्त है, जिसे मैं अपने साथ घर लाना चाहता हूँ. क्या मैं उसे ला सकता हूँ?”

“बिल्कुल बेटा, ये भी कोई पूछने की बात है. हमें तुम्हारे दोस्त से मिलकर बहुत ख़ुशी होगी.” माता–पिता ने जवाब दिया.

बेटा बोला – “लेकिन पहले एक बात आप लोग जान लें. युद्ध में वह बहुत बुरी तरह घायल हो गया है. उसने एक बारूदी सुरंग पर पैर रख दिया था और उसमें उसने अपना एक हाथ और पैर गँवा दिया है. उसके पास कोई जगह नहीं है, जहाँ वो जा सके, इसलिये मैं उसे अपने साथ रहने के लिए लाना चाहता हूँ.”

उसकी यह बात सुनकर उसकी माँ बोली, “बेटा! तुम्हारे दोस्त के बारे में जानकर हमें बहुत दुःख हुआ. हो सकता है, हम उसके रहने के लिये कोई जगह तलाश कर सकें.”

बेटा बोला – “नहीं माँ! मैं चाहता हूँ कि वो हमारे साथ रहे.”

माँ बोली –  “लेकिन बेटा!” अब पिता ने कहा, “तुम समझ नहीं रहे हो कि तुम क्या चाह रहे हो? इस तरह का अपाहिज व्यक्ति हमारे लिए कितना बड़ा बोझ होगा. हमारी अपनी ज़िंदगी है, जीने के लिए और हम नहीं चाहते कि इस तरह की कोई भी परिस्थिति हमारी ज़िंदगी में दखल दे. मेरे हिसाब से तुम्हें अकेले घर आना चाहिए और अपने दोस्त को वहीँ छोड़ देना चाहिए. वह अपनी ज़िंदगी जीने के लिए कोई न कोई रास्ता निकाल ही लेगा.”

यह सुनकर उस सैनिक ने फ़ोन रख दिया. कुछ दिनों बाद, उसके माता-पिता को आर्मी हेड ऑफिस से एक संदेश मिला. जिसमें उन्हें बताया गया कि उनके बेटे की एक बिल्डिंग से गिरकर मौत हो गई है. पुलिस के हिसाब से ये एक सुसाइड केस था.

दु:खी माता-पिता ने तुरंत ही जाने के लिए फ्लाइट बुक कराई और वहां पहुँच गए. वहाँ उन्हें शहर के मुर्दाघर ले जाया गया, ताकि वे अपने बेटे की पहचान कर सकें. उन्होंने उसकी पहचान कर ली, किंतु ये देखकर उनकी कंपकंपी …

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Mai nd niky

Niky aj tumhary dead body mere samne padi h nd ma kuch nahi kah pa rahi na ji pa rahi hoo na mar pa rahi hoo tumhare bina yeh zindgi kaise kategi.
Mujheyad h humary woh pahli mulaqat jab tum mujhe dekhne aye they mujhe pata tha mery pasand na pasand koi meaning nahi rakhti h phir bhi yeh ek formelty thi jo mujhe karni thi uske tum mujhe pasand napasand karte mummy papashadi krte na karte unki mrzi thi m abhi padna chahti thi kuch banna ch\hti thi mama kar rahu thi scl me teaching kar rahi khud ko finance bhi kar rahi thi .
Magar kismat ko kuch aur manzoor nahi tha tum mujhe pasand kR gays nd maine tumko nazar utha kar bhi nahi dekha tha tum meri imagination me bhi nahi aate they tumhare ammi papa zaroor aate the meri pic ld gaye they tumhare pas to pic bhi thi per mere pas imagination bhi nai thiek anjane adme ke saath bandhne ja rahi thi itni qualified hone ke bad bhi ek cow ki tarah bandhne j rahi jis ki koi marzi nahi thi hahi ka option nahi tha yeh2003 chal raha tha nd w0th centuary me bhi ek ladki ek janwar se zyada kuch nahi thi ma bap bhi kya karte papa k bypass open heart srgery ho chuki thi woh kahte they ma kab chala jao.
finally humary marriage arrange ho gaye bin dekhe bin jane ek anjane se
One year ka time fix hua shadi ke liye aap soach rahe hoge isme kya khas aise to apne india me. her dusry ladki ke saath hota h nahi per aisa nahi tha mery life n turn  liya turn abhi kya kadam kadam pe turn liya tujh se naraz nahi zindgi haran hoo jeene ke liye ocha hi nahi khair jaane do apko yaad ho to khud hi aage ki lyrics samajh lena
Ha to turning point yaha se shuru hota h
Humary bhabhi yani humare niky ke bhai ki wife ne ph pe mujhse bat ki us zamane landline ka zamana tha mobiles naye aye the humare yaha landline tha halaki inke pas mobile tha
Bhabhiji ne ph niky ko pakda diya salam dua hue bas
Phir kya tha meri sis akser unse bat kara deti thi humare yaha shadi se pahle batcheet ka riwaz nahi tha hum chory chory bat karte ths papa …

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“समयनिष्ठता” खुशहाल जीवन का राज – समय का महत्व पर कहानी

प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में, चाहे वह विद्यार्थी हों, काम काजी व्यक्ति हो या घर पर ही रहने वाली आम गृहणी हों समयनिष्ठता का स्थान सर्वोपरि है|समयनिष्ठता अर्थात समय का पाबंद होना| यदि आप दिया गया काम तय समय सीमा में पूरा करते हैं तो इसका अर्थ है कि आप समय के पाबंद हैं| समय के पाबंद व्यक्ति की हर स्थान पर प्रशंसा होती है| समय निष्ठ व्यक्ति जीवन में सफल और प्रसिद्ध होते हैं| कोई व्यक्ति कितना भी ज्ञानी क्यों ना हो यदि उसे समय की कद्र नहीं तो ज्ञान धरा का धरा रह जाता है|

वक़्त के महत्व पर शोर्ट कहानी

Samay ka Sadupyog Story in Hindi

मान लीजिए आपने परीक्षा की बहुत बढ़िया तैयारी की है लेकिन यदि समय से परीक्षा कक्ष तक नहीं पहुंचे तो ऐसी पढ़ाई का क्या तात्पर्य?  आप बहुत अच्छे डॉक्टर हैं लेकिन समय से अगर हॉस्पिटल ना पहुँच सके तो मरीज की तो मौत हो जायेगी |  आप बहुत बढ़िया कुक हैं लेकिन बारात के पहुँचने तक खाना नहीं बना पाये तो क्या आपके गुण की कोई कीमत होगी??  अतः जीवन में आगे बढ़ने के लिए समय का पाबंद होना बहुत ही जरूरी है|

समय के पाबंद बनने में आलस्य और सुस्ती दो बड़े शत्रु हैं| अतः यदि आप समय निष्ठ बन कर एक प्रभावशाली व्यक्तित्व के धनी बनना चाहते हैं तो सबसे पहले किसी भी कार्य को करने के लिए आप योजना बनाइये| योजनाबद्ध तरीके से आलस्य और सुस्ती को पीछे छोड़ते हुए आप अनुमान लगाइए कि अमुक कार्य को पूरा करने में कितना समय लगेगा| इस अनुमानित समय पर आप कार्य करना प्रारम्भ करेंगे तो निश्चित ही समय पर पूरा कर सकेंगे| समय की महत्ता को कहानी के माध्यम से समझते हैं|

समय पर छोटी कहानी – Best Stories About Value of Time in Hindi

रमेश पढ़ने में बहुत होशियार था| इंजीनियरिंग की डिग्री उसने अच्छे अंको के साथ हासिल की| बचपन से ही उसका सपना था कि पिताजी की कम्पनी में ही वो भी नौकरी करे| बहुत प्रयत्न किए लेकिन नौकरी पाने में नाकाम रहा| एक दिन पिताजी ने बताया कि कंपनी में एक व्यक्ति के लिए स्थान रिक्त हुआ है मैनेजर से बात भी कर ली है कल 10 बजे उसको इंटरव्यू के लिए बुलाया गया है|

रमेश ने इंटरव्यू की पूरी तैयारी की लेकिन वो दस बजे नहीं पहुँच सका| 10:30 पर वह कम्पनी पहुँचा तो पता चला कि किसी और को उस पद के लिए चुन लिया गया है| रमेश को बहुत …

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Beintehaa

Assalam’o alaikum …
Mai aj ap sbhi ko meri kahani btane ja rhe hu jismai khub sara pyar,takrar,shikayat,mohobbat,trust sb kch hai …

Wo din 20 dec 2016 jisse mai kbhi bhul nii skti …waqt 2:30 pm dhopr ho rhe thi aur maine unhe haa mai apna jawab diya ….hum dono bht khush hai aj bhi In Sha Allah aage bhi hoge…
Humara long distance relationship hai..humri pheli mulakat social site pr hui thi..maine haa bhi text msg pr hi kaha tha 🥰waqt gujar rha tha hum dono ek dusre se beinteha pyar krne lge aj bhi krte hai…vo meri hr baat mnta hai,meri hr zid puri krta hai,meri hr khwaish puri krta hai,mujse khub sara pyr bhi krta hai 💞

Haa mai bht jyada immature hu aise sbhi khete hai..aur mere sis khete hai pta nii vo tuje kaise zhelta hai aur ab tk kaise zhelte aa rha hai😅sach khu toh waqai koi bhi shaq itna nii brdash kr skta…mai hr chiz ko lekr overthink krti hu…gusse mai toh hdd se jyada bol deti hu ..pr vo humesha muje sun leta hai..aj hum itne salo se sth hai pr aj tk naa mujse kbhi uchi awaz mai bt ki hai..naa mujse kbhi ladai ki hai💖wo mai hi jo hr chiz pr ladai krti hu mere khadus se💕

Mujse sb khete hai ki vo muje bht chahta hai yaha tk k mai roi toh kdh bhi ro deta hai 🙈
Hum jyada toh sal mai ek br hi milte hai …vo meri zindagi hai 😘😘hum dono jante hai humre ghr wale humre liyea nii mnege …naa mai apne ammi abbu k khilaf ja skti hu naa woh …mujse humesha kheta hai mai tumhare sth humesha nii rhuga,tum bht masoom hu,tumhe duniya ki smj nii hai,mai tumhe humesha khush dekhna cahahata hu,tum apni zindagi khub acche se gujarna…jb woh mujse aise kheta hai tb meri jan nikal jati hai..mai usse kbhi alag hone k bre mai nii soch skti..

Meri bht parwah krta hai mera khadus…humesha muje fruits khane apna dhyn rkne time pr sone aur study krne kheta hai🙈jb mai hostel mai hoti hu toh mujse clg bunk krne nii deta 😣vaise toh meri clg mai bht km frz hai isliyea mujse kheta hai tum apna khyl rkha kro,chahe kch bhi ho tumhe jo chiz prsn kr ri hai wo sb mujse khena hai 🤗

Hum dono bht cute couple …

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माइंड फ्रेश करना हो तो ये 2 मजेदारी कहानी पढ़े – Majedar Kahani

माइंड फ्रेश करना हो तो ये 2 मजेदारी कहानी पढ़े – Majedar Kahani

1). दुनिया गोल है! – Hansi Wali Kahaani

बॉस (अपने सेक्रेटरी से): हमलोग दोनों एक हफ्ते के लिए लंदन जा रहे हैं। ज़रूरी मीटिंग है।

सेक्रेटरी (पति से): ऑफिस के काम से मुझे बॉस के साथ एक हफ्ते के लिए लंदन जाना है। जरूरी मीटिंग है।

पति (अपनी गर्लफ्रेंड से, जो एक टीचर है): मेरी बीवी एक हफ्ते के लिए बाहर जा रही है। उसके जाते ही तुम घर आ जाना।

गर्लफ्रेंड (स्टूडेंट्स से): बच्चो, मैं एक हफ्ते के लिए बाहर जा रही हूं, इसलिए तुम्हारी एक हफ्ते की छुट्टी।

एक स्टूडेंट (अपने पिता से, जो कि बॉस है): डैड, मेरी एक हफ्ते की छुट्टी है। मैं घर आ रहा हूं, आप कहीं मत जाना।

बॉस (सेक्रेटरी से): मेरा बेटा आ रहा है। लंदन जाना कैंसल।

सेक्रेटरी (पति से): लंदन जाना कैंसल हो गया।

पति (गर्लफ्रेंड से, जो कि टीचर है): पत्नी नहीं जा रही। हमारा प्रोग्राम कैंसल।

टीचर (स्टूडेंट्स से): बच्चो, आपकी छुट्टियां कैंसल।

स्टूडेंट (पिता से, जो कि बॉस है): पापा, मैं घर नहीं आ सकता। छुट्टियां कैंसल हो गईं।

2). बेचारा पति क्या करे ? – New Funny Hindi

1. सन्डे के दिन पति अगर देर तक सोया रहे तो :-
बीवी : अब उठ भी जाओ ! तुम्हारे जैसा भी कोई है क्या ? छुट्टी है तो इसका मतलब यह नहीं कि सोते ही रहोगे।

2. सन्डे के दिन पति अगर जल्दी उठ जाये तो :-
बीवी: पिछले जन्म में मुर्गे थे क्या ? एक दिन तो चैन से सोने को मिलता है, उसमें भी ठीक 5:30 बजे उठ कर कुकडू-कू करने लगते हो। इतना जल्दी उठकर क्या पहाड़ तोड़ लाओगे ?

3. सन्डे के दिन पति अगर घर पे ही रहे तो :-
बीवी: कुछ काम भी कर लिया करो। हफ्ते भर बाट देखते है तुम्हारे सन्डे की, उसे भी तुम केवल नहाने धोने में ही लगा देते हो।

4. सन्डे के दिन पति अगर घर से देर तक बाहर रहे तो :-
बीवी : कहाँ थे तुम आज पूरा दिन ? आज सन्डे है, कभी मुँह से भगवान का नाम भी ले लिया करो।

5. सन्डे के दिन पति अगर पूजा करे तो :-
बीवी : ये घन्टी बजाते रहने से कुछ नहीं होने वाला। अगर ऐसा होता तो इस दुनिया के रईसों में टाटा या बिल गेट्स का नाम नहीं होता बल्कि किसी पुजारी का नाम होता।

6. अगर टाटा या बिल गेट्स जैसा बनने के लिए पति दिन रात मेहनत करे तो …

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हनुमान जी के चमत्कार की कहानी – जब मुझे और मेरे बच्चे को बचाया बजरंगबली ने

Hanuman Ji ke Chamatkar ki Kahani

ये बात है 2015 की गर्मियों की. मैं शादी के 5 साल बाद प्रेग्नेंट हुई थी, सब बहुत खुश थे. लेकिन हमारी ख़ुशी ज़्यादा दिन नहीं रही जब एक दिन मुझे प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में ब्लीडिंग होने लगी. मैं और मेरे पति फ़ौरन हॉस्पिटल के लिए रवाना हो गए. रास्ते में मेरे पति लगातार हनुमान चालीसा पढ़ रहे थे. जब हम हॉस्पिटल पहुंचे तो डॉक्टर ने चेक किया और कहा कि सब ठीक है, बस थोड़ा आराम की ज़रूरत है. उस दिन पहली बार मुझे लगा कि बजरंगबली ने मेरे बच्चे को बचा लिया.

Hanuman Ji ke Chamatkar ki Kahani

Hanuman Ji ke Chamatkar ki Kahani

अभी एक संकट ख़त्म ही हुआ था कि एक महीने बाद फिर से मेरे हाथो और पैरो में सूजन आ गयी. मुझे डायबिटीज तो पहले से ही थी और अब ब्लड प्रेशर भी होने लगा था. मुझे डॉक्टर ने कहा था कि अपना ब्लड प्रेशर कण्ट्रोल करना है लेकिन लाख कोशिश के बावजूद भो बीपी कण्ट्रोल में नहीं आ रहा था. यही नहीं मेरे दांत में भी असहनीय दर्द होने लगा था. इन सभी तकलीफो के बावजूद मैं हर रात अपने होने वाले बच्चे के लिए हनुमान चालीसा पढ़ती थी. कभी मैं पढ़ती थी तो कभी मेरे पति.

Hanuman Ji ke Chamatkar ki Kahani

प्रेगनेंसी के 6 महीने बाद मेरी हालत और भी ज़्यादा बिगड़ गयी क्यूंकि मेरा ब्लड प्रेशर ठीक नहीं हो रहा था. डॉक्टर ने बोल दिया था कि नार्मल डिलीवरी बहुत मुश्किल है. महीने में मैं कम से कम 6 बार तो डॉक्टर के पास जाती थी क्यूंकि कभी कुछ दिक्कत आ जाती थी तो कभी कुछ.

प्रेगनेंसी के आखिरी दिनों में मेरे शरीर में बहुत ज़्यादा सूजन आ गयी और डॉक्टर भी अब घबराने लगी थी लेकिन हनुमान जी पर  विश्वास था. आखिरकार मेरी नार्मल डिलीवरी हुई जो कि एक डायबिटीज वाली औरत के लिए बहुत कम देखने को मिलता है. मैंने बहुत ही प्यारे लड़के को जन्म दिया और मेरे शरीर की सूजन भी धीरे धीरे कम हो गयी.

Hanuman Ji ke Chamatkar ki Kahani

आज मैं, मेरे पति और सभी घरवाले बहुत खुश है और ये सब हनुमान जी के चमत्कार के कारण ही हुआ. डिलीवरी के वक़्त भी मेरे पति लगातार हनुमान चालीसा पढ़ते रहे और इसी वजह से सब कुछ ठीक रहा.

मेरा मानना है कि विश्वास बहुत ज़रूरी है क्यूंकि अगर विश्वास है तो आप पर्वत भी हिला सकते हो.

मुझे लगता है कि …

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