Sad Hindi Love Story – बेवकूफियाँ

साथियों नमस्कार, कई बार हम किसी इंसान के साथ इस कदर एक तरफ़ा प्यार में पड़ जाते हैं की फिर हमें उस इंसान के अलावा कुछ नहीं दीखता। आज की हमारी खास कहानी “Sad Hindi Love Story – बेवकूफियाँ”  ऐसे ही एक प्रेम प्रसंग पर आधारित है। आपको हमारी यह कहानी कैसी लगती है हमें Comment Section में ज़रूर बताएं।

Sad Hindi Love Story – बेवकूफियाँ

सुबह सुबह ही दरवाज़े की घंटी ने मेरी नींद खराब कर दी था। आँखे मलते हुए दरवाज़ा खोला तो सामने वही जाना पहचाना चेहरा था,  “तू यहाँ इतनी सुबह” गुड मॉर्निंग हाय हेलो की जगह यही बात एकदम से मुँह से निकल गई।

वह भी कहाँ कम  थी। झट से बोली –  मतलब क्या है तेरा ?  मैं यहाँ  कोई घूमने फिरने नहीं आई हूँ। कल रात तू तेरी किताबें  मेरे ही घर छोड़ आया था। वही देने आई हूँ कॉलेज जाना है ना तुझे, भूल जाता तो तुझे ही प्रॉब्लम आती। किताबें किसी और की बोझ कोई और उठाता फिरे। वह इतना सब एक ही सांस में  बोल गई ।

अब मेरे पास कहने को सिर्फ सॉरी बचा था, पर वह भी उसे कहाँ हजम होने वाला था। बोली सॉरी-वोरी  से काम नहीं चलेगा बच्चू। मुझे चाय पीनी हैँ  चाय। तब ही माफ़ी मिलेगी। चाय बनाकर लाया तो उसमें  भी दस नखरे। सच में  बड़ी ही अजीब  लड़की थी वो। दिनभर बोलती ही रहती लगता  फुल्ली नहीं बल्कि ओवरचार्ज है।

चुप रहती तो अपने फ़ोन में लग जाती ना जाने किस घोचूँ को अपना सच्चा प्यार मान बैठी थी उसी से चेटिंग में लगी रहती मैं जब भी उसके बारे में  कुछ पूछता चिढ जाती थी-  तुझे क्या मतलब हैँ ? कहकर मुझे एक साइड में  रख देती थी।

पिछले कई सालों से साथ थे हम। उसकी एक-एक बात से मैं अच्छी तरह वाकिफ था। फिर भी लगता उसे अब तक जान नहीं पाया था। शॉपिंग का भूत  सवार था उस पर । हर दो-पाँच दिन में  कोई ना कोई जरूरत निकल ही आती थी उसकी। जरूरतें भी ऐसी जिन्हे जानकर  हँसी  छूटे  बिना ना रह पाए।

एक बार तो मुझे लेकर लिपस्टिक से मैचिंग जूते  के फ़ीते लेने निकल पड़ी बंदी । एक दो नहीं बल्कि पूरी आठ दुकानें  छान मारी थी उसने मेरे साथ। लेकिन मैचिंग फीते ढूंढ़ कर ही दम लिया। उसे खुद के बारे में  चाहे कुछ अता-पता  ना हो, फिर भी मेरा बड़ा ख्याल रखती थी …

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Doraemon की ये कहानी सुन रोना आ जाएगा – Death of Doraemon in Hindi

मैंने कई बार लोगों को पूछते देखा है कि kya doraemon mar chuka hai या kya doraemon sach mein mar gaya तो मेरा उनको सिर्फ यही जवाब होता है कि Doreamon मरा नहीं, वो अभी भी ज़िंदा है और जानने के लिए आपको ये doraemon nobita real story in hindi ज़रूर पढ़नी चाहिए.

Doraemon Real Death Story in Hindi

एक दिन Nobita अपने स्कूल से घर आता है. हमेशा की तरह इस बार भी वो Gian से पिट कर आता है. अपने घर में आते ही वो Doreamon के पास जाता है  ताकि वो Gian से बदला ले सके लेकिन जैसे ही वो कमरे में अंदर आता है, वो देखता है की Doreamon ज़मीन पर गिरा पड़ा है. Nobita Doreamon को बहुत उठाने की कोशिश करता है लेकिन वो नहीं उठता.

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Death of Doraemon in Hindi

आखिरकार नोबिता अपना time television निकालता है और Doraemi (जो कि Doreamon की बहिन है ) को बुलाता है. Doraemi उसे अच्छी तरह देखती है और फिर नोबिता को समझती है कि Doreamon की बैटरी पूरी तरह से खराब हो चुकी है और इसलिए अब Doreamon कभी नहीं उठेगा. इतना सुनते ही नोबिता ज़ोर ज़ोर से रोने लगता है. Doraemi फिर नोबिता को समझती है कि Doreamon ठीक हो सकता है अगर कोई robotic इंजीनियर फिर से Doreamon की बैटरी बना दे.

Real Story of Doraemon Death in Hindi

इतना सुन कर नोबिता चुप हो जाता है और अब वो पूरे दिल से पढाई करने लगता है. अब वो एक अच्छा रोबोटिक इंजीनियर बनना चाहता है ताकि भविष्य में Doreamon की नयी बैटरी बना सके.

Doraemon Real Death Story in Hindi

इसी तरह कई साल गुज़र जाते है. अब नोबिता और उसके सभी दोस्त बड़े हो चुके है और नोबिता ने भी अपनी पढाई पूरी कर ली है. अपने कॉलेज के आखिरी दिन नोबिता शिजुका को शादी के लिए प्रोपोज़ करता है लेकिन Shizuka उससे कुछ वक्त मांगती है इस पर सोचने के लिए.

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अब Gian एक अमीर businessman बन चूका है नोबिता के सारे दोस्त अच्छी नौकरी कर रहे है लेकिन नोबिता अभी भी अपनी शोध में व्यस्त है. वह अपना ज़्यादातर वक्त Doreamon की बैटरी बनाने पर लगाता है क्यूंकि किसी भी हालत में वह Doreamon को वापिस पाना चाहता है.

Real Story of Doraemon Death in Hindi

नोबिता अभी भी वैसा ही चंचल स्वभाव का है और शिजुका भी उसे पसंद करती है. एक रात को शिजुका अपने माँ बाप के …

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पीरियड्स के वो 3 सबसे गंदे दिन – My First Period Story in Hindi

My First Period Story in Hindi Submitted by Shobha Minal

मेरा नाम शोभा मीनल है और मैं आपको My First Period Story in Hindi बताने जा रही हू. आपको बता दू कि मेरे पहले पीरियड्स के वो 3 दिन थे सबसे गंदे और तब से लेकर अब तक मुझे नफरत हैं जब भी मुझे पीरियड्स होते है.

जब भी मुझे पीरियड्स आते है तो मेरे पेट के निचले हिस्से में जोर का दर्द होता है. मुझे पहला पीरियड 14 साल की उम्र में हुआ था, उस वक़्त मैं 15 साल की थी और किस्मत से मेरी उस दिन स्कूल की छुट्टी थी. जब मुझे पेट में दर्द हुआ तो मुझे लगा कि शायद गैस है या मैंने सोचा कि कुछ गलत खा लिया लेकिन कुछ देर के बाद ही मुझे पता चल गया था कि मेरे पीरियड्स शुरू हो गए है.

पहले पीरियड में मुझे इतना जोर की पेट दर्द हुआ कि मुझे डॉक्टर के पास ले जाना पड़ा और दवाई खाने के बाद ही थोड़ा आराम आया.

My First Period Story in Hindi

जब पहली बार मुझे पीरियड्स हुआ था तो ऐसा लगा था जैसे किसी ने खंजर मार दिया हो क्यूंकि बहुत खून आ रहा था. खून इतना ज़्यादा था कि मैं घबरा गयी. जब खून मेरी जांघो तक पहुंचा तो मुझे बहुत बेचैनी हुई थी, उस दिन मुझे खुद से जैसे नफरत सी हो रही थी और मैं सोच रही थी कि भगवान् ने मुझे लड़की क्यों बनाया।

my first period story in hindi

मेरा नया पजामा तो खून की वजह से खराब हो गया था लेकिन मुझे पूरा दिन ये डर लग रहा था कि अगर मैं बेड पर बैठ गयी तो बेडशीट भी खराब हो जायेगी इसलिए काफी देर तो मैं बैठी ही नहीं. आज भी जब अचानक से मुझे पीरियड्स आते है तो अंडरवियर या पैंट ज़रूर खराब होती है.

जब मैंने पहली बार मेंसेस में पैड पहना तो वो बहुत ही बेकार अनुभव था. उस वक़्त मुझे ये टेंशन थी कि पैड पहन कर मैं बाहर कैसे जाउंगी क्यूंकि मुझे चलने में बहुत दिक्कत हो रही थी. वो पैड मेरी जांघो के बीच चिपके हुए ऐसा लग रहा था जैसे मैंने कोई बच्चे का डायपर (Diaper) पहना हुआ हो.  मुझे पैड लगाना बहुत बेकार लगता है लेकिन ये मेरी मजबूरी है. और सबसे गन्दी बात ये है कि आप चाहे दिन में जितने मर्जी पैड बदल लो, खून का कोई न कोई दाग मेरी अंडरवियर या पैंट में लग …

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अमित और श्रुति की अधूरी प्रेम कहानी – Amit and Shruti True Love Story in Hindi

Amit and Shruti True Emotional Love Story in Hindi

Amit and Shruti True Love Story

अमित और श्रुति एक दूसरे से बेपनाह मोहब्बत करते थे और शादी करना चाहते थे, लेकिन एक दूसरे के माता-पिता इस शादी के लिए राज़ी नहीं थे और ये दोनों अपने परिवार के खिलाफ जाकर शादी नहीं करना चाहते थे। उन दोनों ने हर कोशिश की पर बात नहीं बनी।

दोनों एक दूसरे से आखिरी बार मिलने का फैसला किया, दोनों मिलकर खूब रोये और दोनों ने एक दूसरे से वादा किया कि अब ज़िन्दगी में दोबारा कभी नहीं मिलेंगे। अमित ने अपना पर्स निकला जिसमे अमित और श्रुति की एकसाथ वाली फोटो थी। अमित ने उस फोटो को बीच में से काट दिया और श्रुति की तस्वीरअपने पर्स में डाल ली।

ये देखकर श्रुति ने अमित से रोते हुए पूछा “तुमने मेरी तस्वीरअपने पर्स में क्यों डाली है?”

अमित ने जवाब दिया: ताकि मेरा जब भी मन करे तुम्हे देखने का मैं तुम्हारी तस्वीर देखकर वो साथ बिताये लम्हे याद कर सकू।

इसके बाद दोनों एक दूसरे के गले मिले और अपने-अपने रास्ते चल दिए।

1 साल बीतने के बाद…

श्रुति के जाने के 1 महीने बाद तक अमित उदास था लेकिन वो कहते है ना कि वक़्तहर ज़ख्म भर देता है। अमित के साथ भी वही हुआ, वह अब खुशरहना सीख लिया था और काफी खुश रहता था। वो पूरी तरह बदल चूका था। वो अपनी जॉब टाइम पर जाता था, हंसी मज़ाक और वो सब कुछ करता था जो उसने आज तक नहीं किया था।

एक दिन अमित ने अपने दोस्तों को घर पार्टी पर बुलाया। ऑफिस के दोस्तों ने पूछा कि पार्टी किस ख़ुशी में है तो उसने बताया कि काफी दिन हो गए थे पार्टी किये को, बस इसलिए पार्टी है। इस पार्टी में अमित ने अपनी एक बचपन की दोस्त रुचिका को भी बुलाया था। रुचिका ने पुछा कि तुम ये पार्टी किस लिए दे रहे हो तो अमित ने कहा कि ऑफिस के चक्कर में अपने दोस्तों के साथ वक़्त बिताने का मौका नहीं मिलता, बस इसीलिए सोचा कि एक छोटी सी पार्टी कर लेते है।

सब ने पार्टी में बहुत मज़े किये। ड्रिंक्स, खाना और म्यूजिक वाली इस पार्टी में सबको मज़ा आया। खाना खा कर जब सब लोग जा रहे थे तो हर एक ने अमित को पार्टी के लिए थैंक्स किया।

आखिरी में रुचिका और अमित रह गए। जाते वक़्त रुचिका ने अमित को गले लगाया और कहा “अमित…मैं खुश हूँ …

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“मम्मी पापा, मुझे माफ़ कर देना” Emotional Suicide Story in Hindi

Suicide Story in Hindi

ये suicide letter to parents in hindi पढ़ कर आप इमोशनल ज़रूर हो जाओगे. Real Suicide Note Hindi, Suicide Note for Parents in Hindi, Real Suicide Letter in Hindi.

16 साल की एक लड़की ने प्यार में मिले धोखे की वजह से नदी में कूद कर अपनी जान दे दी. आज भी जब उसके माँ बाप उस लड़की द्वारा लिखा हुआ सुसाइड  नोट पढ़ते है तो उनकी आँखों से आंसू झलक उठते है.

ये Suicide Case Hindi है मिताली का.

दोपहर 2:30 बजे का टाइम था जब मिताली (नाम बदला हुआ है) ने अपनी स्कूटी स्टार्ट की और नदी के पुल के पास खड़ी कर दी. अपनी चप्पल उतारी, सुसाइड नोट अपनी स्कूटी पर रखा और नदी मे कूद गयी. 1 घंटे की मशक्कत के बाद मिताली का शव बाहर निकाला गया. मिताली ने अपनी स्कूटी पर अपना मोबाइल और सुसाइड नोट रखा था जिसमे उसने अपने प्यार की दर्दभरी दास्तान लिखी थी.

Suicide Story in Hindi

Suicide Story in Hindi

साथ ही मिताली ने सुसाइड नोट में लिखा था कि अनुभव (जिससे वो प्यार करती थी) ने उसे धोखा दिया और इसलिए मैं सुसाइड कर रही हूँ. अनुभव को सजा मिलनी चाहिए ताकि फिर  किसी और लड़की के साथ ऐसा ना कर पाए.

क्या लिखा था मिताली ने जानिये इस suicide letter to parents in hindi के ज़रिये:

“मम्मी पापा मुझे माफ़ कर देना लेकिन मैं मजबूर हु ये कदम उठाने के लिए. मैंने अनुभव को दिल से प्यार किया लेकिन बदले में उसने मुझे सिर्फ धोखा दिया. हर कदम पर उसने मुझे धोखा दिया। मैं ये कदम उठाने के लिए मजबूर हू, अनुभव से प्यार करना मेरी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी गलती थी. मैंने उससे इतना प्यार किया और जब वो मेरी ज़िन्दगी में ही नहीं तो मुझे जीने का कोई मतलब नहीं लगता. आप लोग प्लीज अनुभव को सजा ज़रूर दिलवाना ताकि फिर कभी वो किसी और लड़की के साथ ऐसा ना कर पाए. मम्मी पापा मैंने आपको बहुत ज़्यादा हर्ट किया है और अब मैं आपका सामना नहीं कर सकती इसलिए सुसाइड करने  हूँ.”

Suicide Story in Hindi

मिताली ने अपने सुसाइड लेटर में ये भी लिखा कि उसकी दो फ्रेंड्स रेनू और पूजा को सब कुछ पता है, आप उनसे सब कुछ लेना। पूजा को अनुभव के बारे में सब कुछ पता है. आखिर में मिताली ने सुसाइड नोट में ये भी लिखा कि “मैं आपसे बहुत प्यार करती हू और आप इस दुनिया के …

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काश एक ओर ज़िन्दगी मिल जाये – HIV Story in Hindi

HIV Story in Hindi Submitted by an Unknown Author

हम जैसे लोग जिन्हे HIV होता है, उनके लिए shortstoriesinhindi.com जैसे वेबसाइट सबसे उत्तम जगह है जहाँ हम अपने दिल का हाल सुना सकते है. मैं अपना नाम नहीं बता सकता क्यूँकि मैं नहीं चाहता कि मेरे दोस्त या कोई और मेरे बारे में जान सके. आज कल लोग बहुत judgemental है, HIV वाले मरीज़ के पास तो कोई व्यक्ति आने से भी डरता है.

HIV Real Story in Hindi

मैं 26 साल का हू, जब मैं 2 साल का था तब मेरी माँ का देहांत हो गया था, पिता ने तो मेरे जन्म से पहले ही किसी और औरत के साथ शादी कर ली थे. मैं अपने मामा के साथ रहता हू जिन्होंने बचपन से मुझे पाला पोसा.

HIV Story in Hindi

AIDS Full Story in Hindi

2015 में मुझे पता चला कि मैं HIV से ग्रस्त हू. मुझे न्युमोनिआ हुआ था और इसलिए मैं हॉस्पिटल में दाखिल था. मेरा न्युमोनिआ तो काफी हद तक ठीक हो गया था लेकिन डॉक्टर ने मुझे किसी टेस्ट के लिए हॉस्पिटल में रोक रखा था. मैंने डॉक्टर को पुछा कि कौनसा टेस्ट करना बाकी है तो उसने बताया “HIV”

एड्स पर कहानी

उस समय मैंने सोचा कि शायद न्युमोनिआ में HIV का टेस्ट करते होंगे और इसलिए मैं बेफिक्र था क्यूंकि मुझे यकीन था कि मुझे HIV तो हो ही नहीं सकता लेकिन जब टेस्ट का रिजल्ट आया तो मेरे पैरो टेल ज़मीन ही खिसक गयी. मैं तो जैसे ज़मीन पर गिरने ही वाला था कि डॉक्टर ने मुझे संभाला. एक पल में मनो मेरे सारे  गए और मुझे मेरी आंखों के सामने अपनी मौत दिखने लगी.

HIV Aids ki Kahani

मैंने डॉक्टर को घबराते हुए कहा ” सर, हो सकता है कोई गलती हो, मुझे कैसे HIV हो सकता है?”

डॉक्टर ने मेरे कंधे पर हाथ रखा और कहा “तुम्हे HIV है बेटा लेकिन घबराओ मत, आजकल दवाइयों के ज़रिये इस बीमारी पर काबू किया जा सकता है.”

HIV Story in Hindi

जब मैं घर आया तो मैंने रोते हुए अपने मामा को सब कुछ बताया और सोचा कि उन्हें बहुत धक्का लगेगा ये सब जानकार लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा. एक मिनट चुप रहकर मेरे मामा ने मुझे कहा ” बेटा, मैंने तुम्हे कभी बताया नहीं लेकिन आज बताना चाहता हूँ. तुम्हारी माँ को भी HIV था और उन्हें ये बीमारी तुम्हारे पिता से मिली थी.

HIV Story in Hindi

मेरे मामा ने फिर मुझे …

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हाँ, मुझे दहेज़ चाहिए …. Dowry Story in Hindi

Dowry Story in Hindi Submitted by Anil Ratra

मेरा नाम अनिल है. मैं एक बड़े परिवार से हूँ. मेरे पिता जी एक्सपोर्ट का बिज़नेस है और साफ़ साफ़ बताऊ तो हम अपने इलाके में काफी अमीर लोगों में आते है. मैं IT Consultant हू और महीने के 2 लाख रुपये से ज़्यादा कमा लेता हूँ.

Dahej pratha story in hindi

मैं और मेरे घरवाले कानपूर में एक लड़की देखने गए. लड़की बहुत सुन्दर थी और मुझे देखते ही पसंद आ गयी. हमारे माँ बाप ने हमें अकेले बात करने के लिए घर के बाहर गार्डन में भेज दिया. लड़की ने मुझसे जॉब और मेरी तनख्वाह के बारे में पुछा, घर के बारे में पुछा और फिर कहा कि मैं हमेशा से चाहती थी कि मेरी जिससे शादी हो उसके पास बड़ा घर हो, गाडी और अच्छे पैसे कमाता हो.

dowry story in hindi

Dowry Story in Hindi

फिर लड़की ने अपनी मॉडर्न सोच के बारे में बताया और थोड़ी देर बाद कहा कि मैं दहेज़ (Dowry) के सख्त खिलाफ हूँ.

इससे आगे वो लड़की और कुछ बोलती, मैंने तुरंत कहा “लेकिन मुझे तो दहेज़ चाहिए”

Dahej pratha story in hindi

लड़की ने 10 सेकंड के लिए मेरी तरफ देखा और फिर कहा “शर्म नहीं आती, आप शरेआम दहेज़ मांग रहे हो?”

Dowry Story in Hindi

मैंने भी लड़की की तरफ 5 सेकंड देखा और फिर कहा “तुम्हे अपने होने वाले पति से सब कुछ चाहिए, बड़ा घर, बड़ी गाडी, मोटी तनख्वाह लेकिन अगर मैंने थोड़ा दहेज़ क्या मांग लिया तो मैं बेशर्म हो गया…”

Dahej pratha story in hindi

दोस्तों ये कोई नयी कहानी नहीं, बल्कि ये तो आजकल बड़ी आम बात है. इसमें कोई दोराय नहीं कि आजकल की लड़कियां हमेशा उस लड़के से शादी करना चाहती है जिनकी आमदनी बहुत ज़्यादा हो, कई लड़किया तो ये भी चाहती है कि शादी के बाद लड़का अपने घरवालों से अलग फ्लैट लेकर रहे. लड़कियां अपने पति से सब कुछ चाहती है, अमीर घराना, मोटी कमाई ….. तो क्यों लड़कियां दहेज़ के खिलाफ है. लड़कियों को पति से तो सब कुछ चाहिए लेकिन देना  चाहती, आजकल प्यार से कुछ नहीं होता जनाब !

Dowry Story in Hindi

मैं भी दहेज़ के खिलाफ हू और मैं उस लड़की से बिलकुल दहेज़ नहीं लूँगा जो मुझसे मेरी तनख्वाह पूछे बिना शादी करेगी. जो लड़की अमीर घराना या ज़्यादा तनख्वाह वाला पति चाहती है, वो उस लड़के को उसी वक़्त छोड़ कर चली जायेगी जब उसकी नौकरी या …

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“अगला दरवाज़ा” एक लघुकथा

Best short stories in hindi with moral

अगला दरवाज़ा

के बात सै भाई? पिछला दरवज्जा ना दिखै?”
ड्राईवर से डांट खाकर हरीश चुपचाप नीचे उतर कर पिछले दरवाज़े की तरफ़ लपका, लेकिन उसके चढ़ पाने से पहले ही बस गति पकड़ चुकी थी I

डीo टीo सीo की बसों में सफ़र करना भी कोई मामूली बात नहींI अब उसी भीड़ भरे स्टैंड पर खड़ा वह किसी दूसरी बस का इंतज़ार कर रहा था I अपनी उम्र का लगभग एक तिहाई हिस्सा उसने बसों की इंतज़ार में, या उनके अन्दर, गुज़ार दिया था I अगली किसी ख़ाली बस की उम्मीद में वह अक्सर बसों को छोड़ता रहता… मगर दिल्ली में ख़ाली बस, मुंबई में ख़ाली मकान की तरह, नसीब से ही मिलती है! हाँ, अगले दरवाज़े से अगर चढ़ पाएं तो बात कुछ और है…

.               आख़िर घड़ी पर एक नज़र डाल, अपने बॉस की डांट-डपट याद आते ही बेचारा हरीश किसी भीड़-भाड़ वाली बस के पीछे ही भागने लगता… इसी तरह एक सुबह अगले दरवाज़े से उतार दिए जाने पर बस के पीछे भागते-भागते वह संतुलन खोकर गिर पड़ा I

पीछे से तेज़ी से आकर रूकती एक दूसरी बस ने ब्रेक लगने से पहले ही अपना ‘काम’ कर डाला…

भाग्यवश, हरीश की जान बच गई…

.             और अब वह बसों के अगले दरवाज़े से भी बिना रोक-टोक चढ़ सकता है – अपनी बैसाखियाँ टेकता हुआ!

҈  ҉  ҈     ҈  ҉  ҈     ҈  ҉

Regards,
eMKay
(Mohanjeet Kukreja)

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जब एक लड़के ने अपना सर मेरे कंधे पर रख दिया – Emotional True Story in Hindi

True Story in Hindi

Submitted by Harshita Mehra

मेरा नाम हर्षिता मेहरा है और मैं आपको अपनी एक सच्ची घटना सुनाने जा रही हू जो की ऑटो रिक्शा में मेरे साथ हुई.

शाम का वक्त था, मैं अपने ऑफिस से घर जाने के लिए ऑटो रिक्शा का इंतज़ार कर रही थी. जैसे ही मैंने ऑटो रिक्शा लिया तभी मेरे साथ एक लड़का और चढ़ गया. जहाँ मुझे जाना था, उसे उससे कुछ दूरी आगे पर जाना था. उस लड़के को देखते ही मुझे पता चल गया कि वो बिलकुल थका हुआ है. उसके कपडे थोड़ा गंदे थे, ऐसा लग रहा था जैसे वो पूरा दिन नौकरी की तलाश में था.

True Story in Hindi

ऑटो रिक्शा में बैठने के 5 मिनट बाद ही उस लड़को को नींद आने लगी थी. वो कोशिश कर रहा था कि ना सोये लेकिन उसकी आँखें बंद हो रही थी. 2 मिनट में ही उसे नींद आ गयी और उसने अपना सर मेरे कंधे पर लगा दिया.

मुझे एहसास था कि ये बेचारा थका हुआ है इसलिए मैंने कुछ नहीं कहा. 5 मिनट के बाद थोड़ा उबड़-खाबड़ सड़क आ गयी और एक झटका लगने से उस लड़के की नींद खुल गयी.

जब एक लड़के ने अपना सर मेरे कंधे पर रख दिया – Emotional True Story in Hindi

True Story in Hindi

उसे एहसास हुआ कि उसने अपना सर मेरे कंधो पर रखा हुआ था. जैसे ही वो होश में आया, मुझसे माफ़ी मांगने लगा और गिड़गिड़ाने लगा कि “मुझे माफ़ कर दीजिये प्लीज, गलती हो गयी. मैं बहुत शर्मिंदा हू, प्लीज मुझे कर दीजिये”

वो लगातार मुझसे हाथ जोड़कर माफ़ी मांगता रहा. मैंने कहा “अरे, माफ़ी मांगिये, मैंने देखा कि आप काफी थके हुए लग रहे थे, मैंने तो सिर्फ 5 मिनट के लिए अपना कन्धा ही दिया, इसमें माफ़ी मांगने वाली कोई चीज़ नहीं, तुम क्यों इतनी माफ़ी मांग रहे हो?”

True Story in Hindi

जब मैंने अपनी बात ख़त्म की तो उस लड़के ने थोड़ा राहत की सांस ली और मुझे कहा “मैडम, आप अच्छी इंसान है. मैं डर गया था कि कही आप मुझे आवारा और बदचलन लड़का ना समझ ले. आपने तो इसका बुरा तक नहीं माना लेकिन अगर कोई और लड़की होती तो वो मेरी इस हरकत पर पुलिस में मेरी रिपोर्ट कर देती. मैं अच्छे परिवार से हूँ और अभी कुछ दिन पहले ही मुझे मार्केटिंग की जॉब मिली है. मैं डर गया था कि अगर आप मेरी पुलिस में रिपोर्ट कर देती तो मेरा करियर, मेरी ज़िन्दगी सब खराब हो जाता। आजकल मैं सोशल …

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पीरियड्स (Menses) नहीं आफत !!… Period Pain Story in Hindi

Period Pain Story in Hindi

Submitted By Vineeta Ghai

Jo log bolte hai ki periods me koi zyada dikkat nahi hoti, wo log bilkul jhooth bolte hai. Aajkal TV ads me aksar dikhate hai ki ladki apne periods me bhi khush hai aur badi aasani se yaha waha ghoom rahi hai, aapko bata du ki aisi TV ads me sab kuch bilkul jhooth batate hai.

Periods maheene ke wo 2 ya 3 din hote hai jo ladki ke liye sabse gande din hote hai. Jee haan, har ladki ko 12 ya 14 saal ke beech me periods aane shuru ho jaate hai aur ye silsila 45 se 50 saal ki umar tak chalta hai aur itne saalo take k ladki ko ye sab jhelna padta hai.

Mera naam Vineeta Ghai hai aur main aapko apni period pain story in Hindi batane jaa rahi hu. Sirf aur sirf ek ladki hi jaanti hai ki periods me use kitni mushkilo ka saamna karna padta hai.

Periods me sabse badi problem ye hoti hai ki hum kisi aur cheez ke bare me theek tarah soch nahi paati. Poora din hamare dimag me bas periods pain aur period stains ki chinta rehti hai. Kabhi kabhi ye bhi tension rehti hai ki kahi pad idhar udhar na ho jaaye jisse stains ka darr bana rehta hai.

Period Pain Story in Hindi

Period Pain Story in Hindi

Agar ladki kahi baahar ho ya office ho fir to badi mushkil ho jaati hai.

Periods me emotions par koi control nahi rehta. Kabhi to main kisi baat par jor jor se hans deti hu aur kabhi koi reaction nahi deti.

Period cramps or period pain ha dusri sabse badi mushkil. Mujhe periods me sirf kamar (waist) hi nahi balki poora badan (body) dard karta hai. Aise me main bahut chidchidi (irritate) bhi ho jaati hu.

Periods me main kabhi bhi freely ghoom nahi sakti kyunki har waqt mujhe pad khisakne ki tension rehti hai. Aur pad pehan kar chalna to bahut hi mushkil hai. Main har roz mandir jaati hu lekin periods me meri maa (mother) mujhe mandir nahi jaane deti. Yahi nahi naa main ghar ke mandir me jaa sakti hu aur na hi rasoi (kitchen) me.

Period Pain Story in Hindi

Mujhe pata hai ki periods me hum ladkiyo ko bahut mushkil hoti hai maheene (month) ke ye 2-3 din hamari zindagi ke sabse gande din hote hai. Lekin main khush …

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