Hindi Poem on Daughter | में बेटी हूँ

साथियों नमस्कार, आज हम आपके लिए एक ऐसी कविता “Hindi Poem on Daughter | में बेटी हूँ” लेकर आएं हैं जिसे पढ़कर आपको बेटियों पर गर्व महसूस होगा|


Hindi Poem on Daughter | में बेटी हूँ

जी हाँ! में बेटी हूँ,
जिसके जन्म लेती ही…
माता पिता करने लगते हैं उसके दहेज़ की व्यवस्था|

जी हाँ! में वही बेटी हूँ,
में जनि जाती हूँ लक्ष्मी के रूप में भले…
पर मुझ पर किए जाते हैं अन्याय अनेक|

जी हाँ! में बेटी हूँ,
जिसके लिए नारे लगाए जाते हैं कई…
परन्तु कोख में ही ख़त्म कर दिया जाता है मुझे!
और तो और पढने से भी वंचित रखा जाता है मुझे|

जी हाँ! में वही बेटी हूँ,
पढ़ लिख कर आगे बढ़ना चाहती हूँ में,
समाज की इस व्यवस्था को बदलना चाहती हूँ में|

रचयिता – सपना कुमारी साह


बेटी

चहकतेविहान का आफ़ताब है बेटी,
महकते शाम का महताब है बेटी|

ज़िन्दगी के छंदों का अलंकार है बेटी,
कविता के पन्नों का संस्कार है बेटी|

वत्सल के श्रृंगार का रस है बेटी,
कल के संसार का यश है बेटी||


तुम मेरी सखी बनोंगी ना

सुख में दुःख में संग मेरे रहना,
तुम मेरी सखी बनोंगी ना!

जब में रुठुं, तुम मुझे मानाने आना…
हंस दो न बस एक बार,
बोल-बोल कर मुझको गले लगाना…
बोलो ऐसा करोगी ना,
तुम मेरी सखी बनोंगी ना!!

माँ, आज यह पहनों…आज यह ओढो,
कहकर मुझसे लाड जाताना…
आज यह खाना…आज वह खाना,
अपनी फरमाइशें बताना…
खूब प्यार में करती तुमसे,
तुम भी इतना प्यार करोगी ना ?
तुम मेरी सखी बनोंगी ना||

रचयीता – निभा अम्बुज जैन


अन्याय देखकर आंख उठाती,

नही तो लज्जा का अवतार है।

कितने कष्ट भी उसने झेले,

पर सहनशीलता भरमार है।

टूटने लगता जो कभी हौसला,

तो बनती सच्ची ढार है।

छेड़ो कभी जो राक्षस बनकर,

तो “दुर्गा” सी अंगार है।

रचयिता – प्रिया त्रिपाठी


कहर कोरोना, विनती मेरे मालिक तुम मेहर करो ना

हे ईश्वर आन पड़ा है कहर कोरोना
विनती मेरे मालिक तुम मेहर करोना

भूल गए थे हम हस्ती तुम्हारी
मालिक संभाल ले अब कश्ती हमारी
अपने बच्चों को अब और सीख मत दो ना
विनती मेरे मालिक तुम मेहर करोना

प्रकृति की वेदना हम क्यों ना सुन पाए
आज अपनों की चीखे हमें यह बताएं
बहुत बड़ा ऋण प्रकृति का है चुकाना
विनती मेरे मालिक तुम मेहर करोना

रूह कांप जाती है आज ऐसी घड़ी है
फिर भी तेरी रहमत की आशा सबसे बड़ी है
ऐ विधाता विधि का यह लेख बदल दो ना
विनती मेरे मालिक तुम मेहर करोना

मोल क्या है अपनों का आज तूने सिखाया
घर बंद कर दिल के दरवाजों को खुलवाया
मकसद तेरा था हम सोते हुए को जगाना
विनती मेरे मालिक तुम मेहर करोना

आज हिंदू मुस्लिम सिख हो या इसाई
सबकी आंखें करुणा से हैं भर आई
कितना मुश्किल है अपनों से दूर जाना
विनती मेरे मालिक तुम मेहर करोना

नतमस्तक हम देश के उन रख वालों के
खुद को भूल जो लगे हैं लड़ने महामारी से
इनके नाम जले दियो को मत बुझाना
विनती मेरे मालिक तुम मेहर करोना

गाते पंछी, निर्मल नदिया वायु बिन जहर
बरसों के बाद आज देखी ऐसी सहर
साफ खुला आसमाँ कहे अब तो समझोना
विनती मेरे मालिक तुम मेहर करोना

मानते हम हुई भूल हमसे बड़ी है
माफ बच्चों को करना जिम्मेदारी तेरी है
हाथ जोड़े इन बेबस बच्चों को क्षमा दो ना
विनती मेरे मालिक तुम महर करोना

हे ईश्वर आन पड़ा है कहर कोरोना
विनती मेरे मालिक तुम मेहर करो ना

CA CS Nisha Patel

Diye Jalaye Ki nahi

वो कहता है कि थाली बजाओ
भाई लोग परातें फोड़ देते हैं

वो कहता है दिए जलाओ
भाई लोग बम पटाखे फोड़ देते हैं

ये परम्परा अनादि काल से चली आ रही है
प्रभु ने कहा था, हनुमान,
मैया सीता का पता लगाकर लाओ
और हनुमान जी लंका फूंक आये थे
प्रभु ने कहा कि संजीवनी बूटी लाओ
हनुमानजी पूरा पहाड़ उठा लाये

आज हमरा कोनो गलती नाही है
हम तो हनुमानजी के भक्त है…

Hindi Poem / हिंदी कविता

बिल्ली और चुहिया

बिल्ली बोली चुहिया से
क्या मुझे दोस्त बनाओगी?
चुहिया बोली नहीं दीदी,
कभी नहीं बनाऊँगी।
दोस्त बनाकर तुम मुझको,
अपने पास बुलाओगी।
पास अगर मैं आई तुम्हारे,
झट से चट कर जाओगी।

इंद्रधनुष

सात रंगों से मिलके बना है,
इंद्रधनुष का रंग।
बैंगनी, आसमानी, हरा,
पीला, नारंगी, लाल, नीला।
इन्हीं रंगों से मिलके बना है,
रंगों का संसार।
एक से दूजा मिलकर,
बन जाएँ रंग हजार।

डाकिया

देखो एक डाकिया आया,
थैला अपने साथ में लाया।
पहनी है वो खाकी कपड़े,
चिट्ठी कई हाथ में पकड़े।
बॉट रहा है घर-घर में चिट्ठी,
मुझको भी दी लाकर चिट्ठी।
चिट्ठी में संदेशा आया,
शादी में है हमें बुलाया।

टेलीफोन

बड़ा अनोखा टेलीफोन,
आती है आवाज कहाँ से?
जो है मीलों दूर यहाँ से,
उसके बहुत पास होने का!
देता धोखा टेलीफोन,
इस पर छपे हुए नंबर
शायद वे ही हैं जादूगर,
सब वे हाल जान लेने का,
एक झरोखा टेलीफोन।

वर्षा

चम चम चम चम बिजली चमके,
रिमझिम रिमझिम बादल बरसे।
गरज गरज कर करते शोर,
छायी काली घटा घनघोर ।
प्यारी धरती की प्यास बुझाने,
आयी वर्षा में भिगोने।
मैं तो हूँ इसकी दीवानी,
सबसे प्यारी वर्षा रानी।

तितली रानी

तितली रानी इतने सुंदर,
पंख कहाँ से लाई हो?
क्या तुम कोई शहजादी हो?
परी-लोक से आई हो।
फूल तुम्हें अच्छे लगते,
फूल हमें भी भाते हैं।
वे तुम को कैसे लगते जो,
फूल तोड़ ले जाते हैं।

चंदा मामा

चंदा मेरा मामा,
मुझे देख मुस्काता है।
रोज रात चुपके-चुपके,
आसमान में आता है।
आकर लोरी गाता है.
मुझको गले लगाता है।
प्यार से थपकी देकर,
मामा मुझे सुलाता है।

सपना

मुझको नींदिया आती है,
सपने भी दे जाती है।
सपने में जो आती है,
सुंदर परी कहलाती है।
जब वह छड़ी घुमाती है,
मिठाई-खिलौने बनाती है।
तो गड़बड़ हो जाती है,
जब आकर मम्मी जगाती है।

बैंगन राजा

बैंगन राजा कुछ तो बोल,
क्यों लगता है गोल-मटोल।
क्या तेरी मर्जी है बोल,
ना कर अब तू टालमटोल।
कहता झटपट मुझको तोल,
बीच बाजार में यह मत बोल।
खोल के रख दी मेरी पोल,
मैं तो हूँ बस गोल-मटोल।

पिंजरे के अंदर

पिंजरे के अंदर एक तोता,
बैठा-बैठा रोता रहता।

एक दिन एक कौआ आया।
आकर उसको समझाया।
ची-ची करके गिरो धड़ाम,
ऐसा लगे कि मर गए तुम।
बात मान लो मेरी नेक,
मालिक देगा तुमको फेंक।
तभी फुर्र से उड़ जाना,
लड़की अपने घर जाना।

मेरी प्यारी नानी

मेरी प्यारी अच्छी नानी,
सुनाओ ऐसी एक कहानी।
जिसमें …

Poem on Nature in Hindi

साथियों नमस्कार, हिंदी कहानियों, कविताओं की सबसे बड़ी वेबसाइट “हिंदी शोर्ट स्टोरीज़” पर आपका स्वागत है| आज के इस अंक में हम आपके लिए प्रकृति के ऊपर “Poem on Nature in Hindi | प्रकृति पर कविता” कुछ खास कविताओं को लेकर आएं हैं आशा है आपको हमारा यह संकलन बहुत पसंद आएगा| धन्यवाद!

“Poem on Nature in Hindi | प्रकृति पर कविता”

वाह प्रकृति तेरी लीला न्यारी
कहीं मड़ते बादल,
कहीं बरसता पानी,
कभी चलती तेज हवाएं,
कभी बिल्कुल थम जाती,
वाह प्रकृति तेरी लीला न्यारी,
कभी सूरज की रोशनी ,
तेज चिलचिलाती,
घनी अंधेरी रातों में,
चाँद तारे की रोशनी टिमटिमाती,
वाह प्रकृति तेरी लीला न्यारी, 
कहीं काले आसमां,
तो कहीं सफेद का रूप ले लेती,
कहीं फूल मुरझाये,
तो कहीं नयी कलियाँ खिलती प्यारी,
वाह प्रकृति तेरी लीला न्यारी,
कहीं सर्दी में लकड़ियाँ जलती,
कहीं वर्फ से ढकी गालियाँ मिलती,
हर समय, हर छड़,
तू बदलती प्यारी,
वाह प्रकृति तेरी लीला न्यारी, 
कहीं सुबह ओस की बूंदे,
तो कहीं सूरज की किरणें दिखलाती प्यारी,
जंगलों में मोर नाचता,
और आसमां में चिड़ियाँ चहचहाती प्यारी,
वाह प्रकृति तेरी लीला न्यारी, 
 अजय राजपूत (झाँसी)

“Small Poem on Nature | प्रकृति पर कविता”

किसी ने तुझे तू कहा
तो तुझे सारी रात नींद न आई
सोचता हूँ उसने कैसे
ज़िन्दगी दरवाज़े के बाहर
गुजारी होगी

आदमी चाँद पर पहुँच कर
क्या इतराता है
जब आदमी आदमी का ही
पेट भर न सका

आदमी वो है
जिसने चिड़ियों से दाने छीने
आदमी वो है
जिसने बादलों से पेड छीने

कोई पतंगा घर में घुस आया
तो सहन नहीं कर पाता
आदमी पतंगे के घर में घुस आया है
यह सच भी पचा न सका

नदी को कोसता है
की उसका घर बहा ले गई
सच यह है की
आदमी ने नदियों से रास्ता छिना

फिर भी किस बात पर
इतराता है आदमी
किसी का क्या हुआ जो
आदमी आदमी का न हुआ


Pankaj Mishra Poems in Hindi

मेरी प्यारी पीहू मुस्कुराने लगी है…..!!

फूल सी कोमल ओस सी नाजुक पीहू
रिस्तो की पगडंडियों पर मुस्कुराने लगी है
सुबह अपनी मम्मी से पहले आके
पापा पापा बोल के जगाने लगी है
गुस्सा हो जाती है फिर देखती नही
अपने पापा को देखो सताने लगी है
आफिस से आते ही एक प्यारी सी मिठ्ठी
पापा के दिल को बहलाने लगी है
मेरी दुआओ में शामिल मेरे दिल की धड़कन
मेरी प्यारी पीहू मुस्कुराने लगी है..!!

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मेरा हाल ऐ दिल बताता है…..!!

इक़ आईना है , जो मुझ से , मेरा हाल ऐ दिल बताता है
इक़ मैं हु ,जो खुद से ,हर दर्द ऐ दिल छुपता हु
इक़ जख्म है ,जो चीख कर मेरे अश्को को बुलाते है
इक़ लब है, मुस्का के जो हर दर्द को छुपाते है
एक मैं हु जो इश्क़ को दफ़ना चुका हु अंदर तक.
एक आंखे है , हर सख़्श को मेरा हाल ऐ दिल बताती है..!!

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तुझको एक दिन जमीं पे लाऊँगा….!!

हिना का रंग हूँ, हाथो में समेट ले मुझको
खुसबू हु फिजाओ में बिखर जाऊँगा
सोख मदहोशी हु छुपा ले मुझको आँखों में
वादा है हँसी बनके लबो पे आऊँगा
तू जीता है मेरी आँखों में हँसी ख्वाब की तरह
जिद है अपनी भी ख्वाब को हकीकत बनाऊँगा
माना की जन्नत की परी है तू
यकीं है तुझको एक दिन जमीं पे लाऊँगा..!!

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2 Line Shayari in Hindi Pankaj Mishra

जाते हुए तेरी नजरो का असर, की रात सारी तेरे खवाबो में गुजरी,

लम्हा लम्हा तेरे ना होने की बेचैनी, कतरा कतरा तेरे यादो में गुजरी..!!

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भुला दो तुम मुझे लेकिन इतना याद रखना,

कुछ वादे तुम्हारे हैं जो अब भी अधूरे हैं..!!

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स्वतंत्रता दिवस पर कविता | 5+ Best Independence Day Poems in Hindi

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स्वतंत्रता दिवस पर देशभक्ति की कवितायें

1. Latest poems on independence day in hindi 

 
हम नन्हें-मुन्ने हैं बच्चे,
 
आजादी का मतलब नहीं है समझते।
 
इस दिन पर स्कूल में तिरंगा है फहराते,
 
गाकर अपना राष्ट्रगान फिर हम,
 
तिरंगे का सम्मान है करते,
कुछ देशभक्ति की झांकियों से
 
दर्शकों को मोहित है करते
 
हम नन्हें-मुन्ने हैं बच्चे,
 
आजादी का अर्थ सिर्फ यही है समझते।
 
वक्ता अपने भाषणों में,
 
न जाने क्या-क्या है कहते,
 
उनके अन्तिम शब्दों पर,
 
बस हम तो ताली है बजाते।
 
हम नन्हें-मुन्ने है बच्चे,
 

आजादी का अर्थ सिर्फ इतना ही है समझते।

 
विद्यालय में सभा की समाप्ति पर,
 
गुलदाना है बाँटा जाता,
 
भारत माता की जय के साथ,
 
स्कूल का अवकाश है हो जाता,
 
शिक्षकों का डाँट का डर,
 
इस दिन न हमको है सताता,
 
छुट्टी के बाद पतंगबाजी का,
 
लुफ्त बहुत ही है आता,
 
हम नन्हें-मुन्ने हैं बच्चे,
 
बस इतना ही है समझते,
 
आजादी के अवसर पर हम,
 
खुल कर बहुत ही मस्ती है करते।।
 

…………………………………………भारत माता की जय।

 

2. Best indian independence day poems in hindi 

 
स्वतंत्रता दिवस का पावन अवसर है,
 
विजयी-विश्व का गान अमर है।
 
देश-हित सबसे पहले है,
 
बाकि सबका राग अलग है।
 
स्वतंत्रता दिवस का……………………….।
 

आजादी के पावन अवसर पर,

 
लाल किले पर तिरंगा फहराना है।
 
श्रद्धांजलि अर्पण कर अमर ज्योति पर,
 
देश के शहीदों को नमन करना है।
 
देश के उज्ज्वल भविष्य की खातिर,
 
अब बस आगे बढ़ना है।
 
पूरे विश्व में भारत की शक्ति का,
 
नया परचम फहराना है।
 
अपने स्वार्थ को पीछे छोड़ककर,
 
राष्ट्रहित के लिए लड़ना है।
 
बात करे जो भेदभाव की,
 
उसको सबक सिखाना है।
 
स्वतंत्रता दिवस का पावन अवसर है,
 
विजयी विश्व का गान अमर है।
 
देश हित सबसे पहले है,
 
बाकी सबका राग अलग है।।
 
…………………………जय हिन्द जय भारत।
 

3. Desh bhakti poems in hindi by rabindranath tagore 

 
15 अगस्त का दिन है आया,
 
लाल किले पर तिरंगा है फहराना,
 
ये शुभ दिन है हम भारतीयों के जीवन का,
 
सन् 1947 में इस दिन के महान अवसर पर,
 
वतन हमारा आजाद हुआ था,
 
न जाने कितने अमर देशभक्त शहीदों के बलिदानों पर,
 

न जाने कितने वीरों की कुर्बानियों के बाद,

हमने आजादी को पाया था,
 
भारत माता की आजादी की खातिर,
 
वीरों ने अपना

15 अगस्त शायरी – 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर कविता

15 अगस्त शायरी , 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर कविता और “15 अगस्त स्टेट्स” का यह पोस्ट  Indian Independence Day पर आधारित हैं.  
इसमें आप पढ़ सकते हैं, 15 अगस्त पर शायरी वॉलपेपर इमेज के साथ.   72nd India Independence day 2018 Status में. 
जैसा की आप सभी देश वासी जानते है की हमारा भारत, अंग्रेजो के हाथों गुलाम था, और अंग्रेजी हुकुमत हमेशा हिन्दुस्तानियों पर अत्याचार करती रही. 
 
और इस अत्याचार के खि़लाफ 10 मई 1857 मे सबसे पहली बार आज़ादी का बिगुल बजा. 
 
इसी के साथ देश की आजादी को लेकर ज्वाला सुलग गई और यह ज्वाला धीरे धीरे ज्वालामुखी बन गई. 
 
भारत माता की आजादी के लिए ना जाने कितने  देश के महान सपूतों ने हॅसते हॅसते अपने प्राणों की आहुति दे डाली. 
 
अंग्रेजों के खिलाफ ना जाने कितने आन्दोलन चलाये गये और एक दिन अंग्रेजी हुकुमत ने हार मान ली और भारत के महान सपूतो ने अपने देश को आजाद करा लिया अंग्रेजी हुकुमत के हाथों से.
 
15 अगस्त 1947 को अपना देश स्वतंत्र हो गया. और इस दिन भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु ने लालकिले पर राष्ट्रीय ध्वज फहरा कर स्वाधीनता का ऐलान किया.
 
और इसी के साथ हर वर्ष 15 अगस्त को देश की आजादी का जश्न मनाया जाता है पुरे भारतवर्ष में, बडे ही धूम धाम के साथ. जिसमे हर वर्ग हर धर्म के लोग शामिल होते हैं. और देश की स्वतंत्रता का यह पर्व मनाते है. 
 
और इस दिन अपने देश के खातिर बलिदान हुए शहीदों को याद करते है जिन्होने अपने प्राणों की आहुति देकर देश को आजाद कराया.
तो आईये शुरुवात करते है आज की यह देश वासियों को समर्पित इस पोस्ट की और पढ़ते है. आजादी पर शायरी को और संकल्प  लेते हैं स्वच्छ भारत, सुन्दर भारत, प्रदूषण मुक्त भारत  बनाने का.
 
दोस्तों अगर   “15 अगस्त शायरी” –  स्वतंत्रता दिवस  पर कविता  का पोस्ट पसंद आये तो  शेयर करना ना भूले अपने दोस्तों को Goole Plus, Facebook और Whatsapp पर.. जय हिन्द, जय भारत. वन्देमातरम 
1
भूल न जाना भारत मां के सपूतों का बलिदान,
इस दिन के लिए हुए थे जो हंसकर कुरबान,
आजादी की ये खुशियां मनाकर लो ये शपथ,
कि बनाएंगे देश भारत को और भी महान
 
दे सलामी इस तिरंगे को, जिस से  शान तेरी
सर हमेशा ऊँचा इसका रखना, 
जब तक जिस्म में  जान तेरी .
 
3
मैं भारत बरस का हरदम अमित सम्मान करता हूँ
यहाँ की

आजादी पर 5 देश भक्ति गीत ( Desh Bhakti Geet in Hindi )

ये देश भक्ति गीत उन शहीदों को समर्पित हैं जिन्होंने अपने लहू की बूंदों से आजाद भारत की धरती को सींचा है| इन लोकप्रिय Desh Bhakti Geet in Hindi और गानों के माध्यम से हम आजादी के उन दीवानों को नमन करते हैं जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए हँसते हँसते अपने प्राणों की आहुति दे दी| ये सभी देश भक्ति गीत फिल्मों से और विभिन्न लेखों से लिए गये हैं –

अपनी आजादी को हम हरगिज मिटा सकते नहीं

अपनी आज़ादी को हम हरगिज़ मिटा सकते नहीं
सर कटा सकते हैं लेकिन, सर झुका सकते नहीं

हमने सदियों में ये आज़ादी की नेमत पाई है
सैकड़ों कुर्बानियां देकर ये दौलत पाई है
मुस्कुराकर खाई है सीनों पे अपने गोलियां
कितने वीरानों से गुज़रे हैं तो जन्नत पाई है
ख़ाक में हम अपनी इज़्ज़त को मिला सकते नहीं
अपनी आज़ादी…

 

क्या चलेगी ज़ुल्म की अहले वफ़ा के सामने
आ नहीं सकता कोई शोला हवा के सामने
लाख फ़ौजें ले के आए अम्न का दुश्मन कोई
रुक नहीं सकता हमारी एकता के सामने
हम वो पत्थर हैं जिसे दुश्मन हिला सकते नहीं
अपनी आज़ादी…

वक़्त की आवाज़ के हम साथ चलते जाएंगे
हर क़दम पर ज़िन्दगी का रुख बदलते जाएंगे
गर वतन में भी मिलेगा कोई गद्दारे वतन
अपनी ताकत से हम उसका सर कुचलते जाएंगे
एक धोखा खा चुके हैं और खा सकते नहीं
अपनी आज़ादी…
(वन्दे मातरम)

 

हम वतन के नौजवां हैं हमसे जो टकराएगा
वो हमारी ठोकरों से ख़ाक में मिल जाएगा
वक़्त के तूफ़ान में बह जाएंगे ज़ुल्मों-सितम
आसमां पर ये तिरंगा उम्र भर लहराएगा
जो सबक बापू ने सिखलाया भुला सकते नहीं
सर कटा सकते

जहाँ डाल-डाल पर सोने की चिड़ियां करती है बसेरा

जहाँ डाल-डाल पर
सोने की चिड़ियां करती है बसेरा
वो भारत देश है मेरा

जहाँ सत्य, अहिंसा और धर्म का
पग-पग लगता डेरा
वो भारत देश है मेरा

ये धरती वो जहाँ ऋषि मुनि
जपते प्रभु नाम की माला
जहाँ हर बालक एक मोहन है
और राधा हर एक बाला
जहाँ सूरज सबसे पहले आ कर
डाले अपना फेरा
वो भारत देश है मेरा

अलबेलों की इस धरती के
त्योहार भी है अलबेले
कहीं दीवाली की जगमग है
कहीं हैं होली के मेले
जहाँ राग रंग और हँसी खुशी का
चारो और है घेरा
वो भारत देश है मेरा

जहाँ आसमान से बाते करते
मंदिर और शिवाले
जहाँ किसी नगर मे किसी द्वार पर
कोई न ताला डाले
प्रेम की बंसी जहाँ …

ज़माने ने मुझे चोट दी है – दुःख व् गहराई भरी कविता

चले हैं लोग मैं रस्ता हुआ हूं
मुद्दत से यहीं ठहरा हुआ हूं

ज़माने ने मुझे जब चोट दी है
मैं जिंदा था नहीं जिंदा हुआ हूं

मैं पहले से कभी ऐसा नहीं था
मैं तुमको देखकर प्यारा हुआ हूं

मैं कागज सा न फट जाऊं
ए लोगो उठाओ ना मुझे भीगा हुआ हूं

मेरी तस्वीर अपने साथ लेना
अभी हालात से सहमा हुआ हूं

कभी आओ इधर मुझको समेटो
मैं तिनकों सा कहीं बिखरा हुआ हूं

चलो अब पूछना तारों की बातें
अभी मैं आसमां सारा हुआ हूं

मुसलसल बात तेरी याद आई गया
वो वक़्त मैं उलझा हुआ हूं

बुरा कोई नहीं होता जन्म से
मुझे ही देख लो कैसा हुआ हूं

ज़माने ने मुझे जितना कुरेदा
मैं उतना और भी गहरा हुआ हूं

~ सुरेश सांगवान (saru)…