ओलंपिक में मशाल क्यों जलाई जाती है | Olympic Flame

Olympic Flame

विश्वभर में प्रख्यात ओलंपिक खेल हर चार साल में आयोजित होता है। ओलंपिक में किसी खिलाड़ी का मेडल जीतना उस देश और उस खिलाड़ी के लिए बहुत ही गर्व की बात मानी जाती है। ओलंपिक में मेडल जीतना यानी विश्व स्तर पर अपनी एक पहचान बनना। और यही कारण है कि विश्व का कोई भी खिलाड़ी फिर चाहे वो खेल के किसी क्षेत्र से क्यों ना हो उसका सपना ओलंपिक में मेडल जीतना होता है। तभी उसकी प्रतिभा को असल पहचान मिल पाती है।

ओलपिंक को विश्व का सबसे बड़ा खेल समारोह माना जाता है। जिसमें विश्व के 206 देश हिस्सा लेते है। लेकिन ओलंपिक से कुछ महत्पूर्ण और रोचक प्रथाएं और धाराणाएं जुड़ी है जो इस खेल समारोह को ओर भी दिलचस्प बना देती है। और इन्ही में से एक है ओलपिंक के दौरान मशाल जलाकर मेजबानी करने वाले देश तक ले जाने की प्रथा। चलिए आपको बताते है Olympic Flame – ओलंपिक में ये मशाल क्यों जलाई जाती है और इसका क्या इतिहास है?

ओलंपिक में मशाल क्यों जलाई जाती है – Olympic Flame

ओलंपिक खेलों की शुरुआत साल 1896 में यूनान की राजधानी एँथेस से हुई थी लेकिन उस समय ओलंपिक में मशाल जलाने की कोई प्रथा नहीं थी ओलंपिक में मशाल जलाने की प्रथा 1936 में ओलंपिक के ओलंपिया शहर से शुरु हुई।

मान्य़ताओं के अनुसार ग्रीस के लोग आग को बहुत पवित्र मानते थे। और अपने मंदिरों में निरंतर आग जलाकर रखते थे। और यही कारण है कि ग्रीस में पूजे जाने वाली देवी हेस्टिया, देवता जूयस और हेरा के टेम्पलस में भी निरंतर आग जलती रहती है। ओलंपिक में भी ये प्रथा इसी धारणा को लेकर शुरु हुई की। आग से खेल की पवित्रता बनी रहेगी।

ओलंपिक की मशाल – Olympic Torch को जलाकर ले जाने की शुरुआत देवता हेरा के मंदिर से शुरु की गई थी। उस समय ओलंपिक की मशाल – Olympic Flame में आग सूर्य की किरणों के जरिए लगाई जाती थी। ऐसा इसलिए क्योंकि सूर्य कि किरणों को काफी पवित्र माना जाता था। जिस साल ओलंपिया शहर से ओलंपिक मशाल जलाने की शुरुआत हुई थी उस साल ओलंपिक खेलों की मेजबानी बर्लिन ने की थी।

इसके बाद साल 1952 में ओस्लो ओलंपिक के दौरान पहली बार ओलंपिक मशाल को हवाई यात्रा के जरिए ले जाया गया था। हालांकि उस समय तक दुनियाभर में संचार के साधन उतने विकसित नहीं थे जिस वजह से कभी ओलंपिक में टेलीविजन पर …

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क्या आप जानते हैं एससी एसटी एक्ट क्या हैं | What is SC-ST Act

SC-ST Act

पूरे देश में पिछले कुछ समय से एससी एसटी एक्ट को लेकर काफी विवाद देखने को मिल रहा है केंद्र सरकार की दखल अंदाजी के बाद सुप्रीम कोर्ट दारा एससी एसटी एक्ट में किया गया बदलाव बहाल हो जाएगा इसी को लेकर कुछ लोग इसके पक्ष में नजर आ रहे है तो कई लोग इसके विपक्ष में नजर आ रहे हैं।

और कई लोग इस फैसले का विरोध करे या फिर इसके पक्ष में है लेकिन उन्हें इस एक्ट के बारे में पूरी जानकारी नहीं है केवल आधी अधूरी खबरों को सुनकर वो पक्ष या विरोध में हो गए है लेकिन इसकी कानून का विरोध करने से पहले उसके बारे में पूर्ण जानकारी होना बहुत जरुरी है तभी आपको अपने अधिकारों का सही फायदा मिल पाएगा तो चलिए आपको बताते है एससी एसटी एक्ट – SC ST Act के बारे में।

क्या आप जानते हैं एससी एसटी एक्ट क्या हैं – SC-ST Act

एससी एसटी के पुराने नियम – SC-ST Old Act

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम 1989 के अनुसार ये कानून था कि अगर देश में कोई भी व्यक्ति जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल करते हुए गाली गलौच करता है उसे उसी समय एससी एसटी एक्ट के तहत गिरफ्तार किया जाएगा। एससी एसटी एक्ट के पुराने नियम के तहत इस मामले में केवल हाइकोर्ट से ही जमानत का प्रवाधान था साथ ही इस एक्ट से जुड़े किसी भी केस की जांच का अधिकार इंस्पेक्टर पद के अधिकारी को था।

एससी एसटी एक्ट के नए नियम – SC-ST New Act

लेकिन इस साल सुप्रीम कोर्ट ने इसमें बदलाव करने का फैसला किया। दरअसल इस साल एससी एसटी एक्ट के दुरुपयोग के कारण सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा करने का फैसला किया था।

इस साल महाराष्ट्र के एक केस की सुनावई करते हुए सुप्रीम कोर्ट को एहसास हुआ कि एससी एसटी एक्ट के तहत कई फर्जी केस भी दर्ज कराए जाते है और इस कानून के दुरुपयोग के कारण कई लोगों की जिंदगी खराब हो रही है।

सुप्रीम कोर्ट उस समय इस पर चिंता भी जताई थी और एससी एसटी एक्ट में बदलाव करते हुए इसमें कुछ नियम लागू किए थे ताकि इस कानून का गलत उपयोग न किया जा सकें।

सुप्रीम कोर्ट ने एससी एसटी एक्ट में बदलाव करते हुए इस एक्ट से जुड़े केस में तुरंत गिरफ्तारी के प्रवाधान को खत्म कर दिया था साथ ही इस एक्ट से जुड़े केस की जांच का अधिकार वरिष्ठ पुलिस अधिकारी …

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आख़िर क्या होता है साइबर क्राइम | What is Cyber Crime

Cyber Crime

आज के युग को आधुनिक युग कहा जाता है क्योंकि आज के समय में तकनीक के क्षेत्र में दुनिया ने इतनी ज्यादा तरक्की कर ली है जिसकी शायद एक समय में कल्पना करना भी मुश्किल था। आज के समय में तकनीकी विकास के कारण लोगों के बीच की दूरियां भी पूरी तरह खत्म हो चुकी है आप घर बैठे दूसरे देश या दूसरे राज्य में बैठे अपने दोस्त, परिवार जनों से आसानी से बात कर सकते है चैट कर सकते है और वीडियो कॉल भी कर सकते है।

इसके अलावा सोशल मीडिया के कारण आज के समय में लोग उन लोगों को भी ढ़ूढ लेते है जिनसे किसी कारण वो दूर हो गए थे इसके अलावा आजकल लोग अनजान लोगों के साथ भी दोस्ती कर लेते है। हालांकि हर बार अनजान व्यक्ति से दोस्ती करना गलत नहीं होता। लेकिन अक्सर देखा जाता है कि अनजान व्यक्ति पर जल्दी विश्वास करने से अक्सर लोग मुसीबत में पड़ जाते है।

इसी तरह सोशल साइटस और कंप्यूटर के कई ओर भी ओर नुकसान है जो अक्सर लोगों के अस्तित्व, आर्थिक स्थिति, मान सम्मान को हानि पहुंचाते है। कंप्यूटर और सोशल साइटस के जरिए होने वाले अपराधों को कानून की भाषा में साइबर क्राइम – Cyber Crime कहा जाता है।

आख़िर क्या होता है साइबर क्राइम – What is Cyber Crime

जब कोई अपराध कंप्यूटर और इंटरनेट, सोशल साइटस के जरिए होता है उसे साइबर क्राइम कहते है। साइबर क्राइम के जरिए किसे अकाउंट से पैसे चोरी करना, किसी महत्वपूर्ण वेबसाइट का डाटा चोरी करना, किसी जानकारी को मिटाना या उसमें फेरबदल करना शामिल है। इसके अलावा सोशल साइटस के जरिए किसी को ब्लैकमैल करना, किसी की अश्लील तस्वीरें या वीडियो इंटरनेट पर अपलोड करना या फिर किसी के मान सम्मान को ठेस पहुंचाना साइबर क्राइम कहलता है। स्पैम ईमेलिंग, फिशिंग, हैंकिग, वायरस डालना और कई तरह के साइबर क्राइम होते है।

साइबर क्राइम के लिए सूचना तकनीक कानून 2000 के अंतर्गत प्रावाधान – IT Act 2000

सूचना तकनीक कानून 2000 के अंतर्गत अलग – अलग तरह के साइबर क्राइम के लिए अलग – अलग धाराओं है जैसे किसी कंप्यूटर से छेड़छाड़ की कोशिश धारा 65 और कंप्यूटर हैक कर करने की कोशिश धारा 66 के तहत दर्ज किए जाते है, वहीं प्रतिबंधित सूचनाएं यानी ऐसी सूचनाएं जिन्हें देने की इजाजत न हो उन्हें किसी ओर को संवाद के जरिए भेजना धारा 66A, ऑनलाइन किसी की पहचान चोरी करना धारा 66B, साइबर …

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जानिए क्या हैं अखण्ड भारत का इतिहास | Akhand Bharat History

Akhand Bharat

भारत का इतिहास कितना अद्भुत है ये हम सभी जानते हैं भारत के इतिहास के बारे में कोई कितनी भी खोज क्यों न करें ले लेकिन फिर भी कुछ ना कुछ रह ही जाता है। इसलिए भारत के इतिहास के कई पन्ने ऐसे भी है जिनके बारे में लोग या तो बहुत कम जानते है या फिर कुछ जानते ही नही है।

इतिहास के उन्ही पन्नों में से एक अखण्ड भारत का इतिहास। कई बार आपने टीवी न्यूज चैनल्स या किन्ही बुद्धीजीवियों को अखण्ड भारत की बात करते सुना होगा। लेकिन अखण्ड भारत का पूर्ण इतिहास क्या है शायद ही किसी ने आपको बताया होगा ? दरअसल अखण्ड भारत का इतिहास क्या है इसकी पुष्टि तो आपको कोई भी नहीं कर सकता क्योंकि अखण्ड भारत – Akhand Bharat  की उत्पत्ति करोड़ो साल पुरानी है।

जानिए क्या हैं अखण्ड भारत का इतिहास – Akhand Bharat History

अखण्ड भारत का धार्मिक इतिहास – Religious history of Akhand Bharat

हिंदुआ कथाओं में माना जाता है कि प्राचीनकाल में देवता और असुर ही रहा करते थे जिनके बीच देवताओं की राजधानी इंद्रलोक के लिए लड़ाई होती थी। ये इंद्रलोक हिमालय पर्वत की किसी श्रृंखला में था जिस वजह से पूरे मध्य दक्षिण एशिया में देवताओं की संस्कृति के अवशेष मिलते है।

माना ये भी जाता है कि इंद्र किसी देवता का नाम नहीं है बल्कि ये एक पद है जिस पर द्वापर युग तक कई देवता विराजमान हुए। वहीं दूसरी तरफ असुरों ने इन संस्कृतियों पर अपना अधिपत्य साबित करने के लिए युद्ध किए और इन्ही देवताओं और असुरों ने अलग – अलग संस्कृतियों और धर्मों को जन्म दिया। उस समय पूरा मध्य और दक्षिण भारत एक ही था।

अखण्ड भारत का वास्तविक इतिहास – Real History of Akhand Bharat

धार्मिक इतिहास के बाद जब हम असल इतिहास पर आते है। तो ये इतिहास भी काफी हद तक धार्मिक इतिहास से मेल खाता है लेकिन इसके तथ्य और प्रमाण मौजूद है और अखण्ड भारत के टूटने के कारण भी। आज के मौजूदा समय में भारत के सभी पड़ोसी देश फिर चाहे वो पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश हो या फिर श्रींलका, म्यांमार, अफगानिस्तान, इरान तार्जकिस्तान, बर्मा इंडोनेशिया सभी भारत का ही हिस्सा थे।

माना जाता है कि पिछले 2500 सालों में अखण्ड भारत पर कई हमले हुए जिन्होनें भारत के 24 विभाजन किए जिनसे भारत के पड़ोसी देश बने। इन विभाजनों में से ज्यादातर लोग केवल पाकिस्तान और बांग्लादेश विभाजन के बारे में …

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जानिए आख़िर क्या हैं अफस्पा कानून? – AFSPA Act

AFSPA Act

देश में अक्सर कानून व्यवस्था को सही ढंग से बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों की नियुक्ति की जाती है। ताकि आपातकाल या युद्ध की स्थिति में सुरक्षा बल लोगों की रक्षा कर सके। भारत में आमतौर पर सेना की नियुक्ति उन इलाकों में ज्यादा होती है जहां पर आतंकी हमले या नक्सली हमलों का खतरा बना रहता है।

लेकिन कई बार सेना को इनसे निपटने के लिए कुछ आँतरिक समस्याओँ का सामना भी करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में हालात काबू से बाहर हो जाएं और सभी को एक साथ नियंत्रित करना जरुरी हो जाए तो उस स्थिति में सैनिकों को कुछ खास अधिकार दिए जाते है जिन्हें अफल्पा कानून – AFSPA Act कहा जाता है।

हालांकि अफस्पा कानून केवल कुछ चुने हुए राज्यों में ही लागू किए जा सकते है जिन्हें डिस्टर्ब क्षेत्र घोषित किया जा चुका हो। अफस्पा कानून क्या होता है। इसे समझने से पहले ये जानना जरुरी है कि डिस्टर्ब क्षेत्र कौन से होते है?

जानिए आख़िर क्या हैं अफस्पा कानून? – AFSPA Act

डिस्टर्ब क्षेत्र

डिस्टर्ब क्षेत्र उन क्षेत्रों को घोषित किया जाता है जहां पर बाहर से आंतकवादी हमले अधिक होते है या फिर जहां पर धार्मिक, नस्लीय, भाषा, जातियों या समुदायों के बीच अधिक मतभेद देखने को मिलते है। ऐसे क्षेत्रों को राज्य या केंद्र सरकार डिस्टर्ब क्षेत्र घोषित करती है।

मौजूद समय में जम्मू कश्मीर, भारत के उत्तर पूर्वी राज्य असम, अरुणाचल प्रदेश के कुछ क्षेत्र, नागालैंड, मेघालय के कुछ क्षेत्र, मणिपुर ( राजधानी इंफाल को छोड़कर ) डिस्टर्ब क्षेत्र के दायरे में है।

अफस्पा एक्ट क्या है – What is AFSPA Act

अफ्सपा यानी Armed Forces Special Powers Act – आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट 1958 के तहत लागू किया जाता है ये एक फौजी कानून है जिसके अंतगर्त भारतीय सुरक्षा बलों को डिस्टर्ब क्षेत्रों में कुछ विशेष अधिकार दिए जाते है। ताकि राज्य में व्यवस्था बनाने में आसानी हो। अफ्सपा को केंद्र सरकार और राज्य सरकार किसी भी डिस्टर्ब क्षेत्र में लागू कर सकती है।

एक बार अफस्पा एक्ट लागू होने के बाद उस क्षेत्र में कम से कम 3 महीने तक सुरक्षा बलों को तैनात किया जाता है इस एक्ट को सबसे पहली बार 1 सिंतबर 1958 को भारत के उत्तर पूर्वी राज्य असम, मणिपुर, नागलैंड, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, त्रिपुरा में लागू किया गया था।

इसके बाद इसे पूर्वोत्तर राज्यों में हिंसा रोकने के लिए भी पंजाब और चंडीगढ में लागू किया गया था। लेकिन …

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आईये जानते हैं क्या हैं धारा 377 | What is Section 377

Section 377

मनुष्य का रंग, लम्बाई, लिंग कुछ ऐसी चीजें है जो प्राकृतिक है जिसे कोई नहीं बदल सकता और ना ही किसी मनुष्य के रंग, लिंग या उसकी की प्राकृति भावनाओं के लिए उसे दोषी ठहराया जा सकता है हालांकि हम लोग ही समाज के दायरे बनाते बनाते इस बात को भुल जाते है। और उन सभी प्राकृतिक चीजों पर अंगुली उठाते है जिस पर किसी का भी बस नहीं है।

शायद यही वजह से कई सौ सालों के बाद हमारे समाज के एक महत्वपूर्ण वर्ग को उसका अधिकार प्राप्त हुआ जब सुप्रीम कोर्ट व्दारा भारत में धारा 377 – Dhara 377 को खत्म करने का आदेश दिया गया। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जिस्टस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा ने पांच जजों वाली बेंच की अगुवाई में इस फैसले की घोषणा की अब आईपीसी की धारा 377 – Section 377 को खत्म कर दिया जाएगा। हालांकि हमें से कई लोग धारा 377 – Dhara 377 से अनजान है चलिए आपको बताते है आखिर धारा 377 है क्या और वो कौन सा वर्ग जिसमें इस धारा के खत्म होने से सबसे ज्यादा खुशी है।

आईये जानते हैं क्या हैं धारा 377 – What is Section 377

ये हम सभी जानते है हमारे देश ब्रिटिश का गुलाम था लेकिन 1947 में आजादी के बाद भी भारतीय दंड संहिता में कई धाराएं ब्रिटिश कानून से ली गई है जिनमें से एक समलैंगिगता को अपराध मानने वाली धारा 377 भी थी समलैंगिगकता का कानून भारत में साल 1862 में ब्रिटिश ने बनाया था।

इस धारा के अनुसार दो समलैंगिक लोगों का शादी करना या यौन संबंध बनाना कानून अपराध था। क्योंकि दो समलैंगिग के यौन संबंधो को अप्राकृतिक यौन संबंध माना जाता था जो गैर कानूनी था। इस अपराध के लिए दोषी को 10 साल की सजा और जुर्माने का प्रवाधान है।

हालांकि यहां पर ये बात भी आप लोगों को जानना जरुरी है कि धारा 377 – Article 377 कें अंतर्गत केवल समलैंगिगक के यौन संबंध को गैरकानूनी नहीं माना जाता था। बल्कि किसी जानवर और बच्चों के साथ अप्राकृतिक यौन हिंसा को भी अपराध माना जाता था और इस धारा के अँतर्गत सजा और जुर्माने का प्रवाधान था।

इस धारा से जुड़ी एक अहम बात ये भी है कि इस धारा के लिए किसी वॉरेट की जरुरत नहीं होती थी केवल शक के आधार पर या फिर गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस किसी को भी गिरफ्तार कर सकती थी। जिस …

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क्या आप जानते हैं टेलीफोन का अविष्कार किसने किया? | Who Invented the Telephone

Who Invented the Telephone

आज के टाइम में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसके पास मोबाइल फोन यानी स्मार्टफोन नहीं होगा या वो इसके बारे में नहीं जानता होगा। आधुनिकता के कारण आज हर किसी की जिंदगी इतनी सिमिट कर रह गई जिसकी शायद कभी किसी ने कल्पना तक नहीं की होगी। आज हम मोबाइल फोन्स के जरिए न केवल बात कर सकते हैं बल्कि वीडियो कॉल, ऑडियो रिकॉर्डिंग, मैसेज भेजना, गेम खेलना, डक्यूमेंट बनाना, गाने सुनना, फिल्में देखना ओर भी बहुत कुछ कर सकते है, जिन सब के लिए एक जमाने में अलग – अलग डिवाइज हुआ करते थे।

क्या आप जानते हैं टेलीफोन का अविष्कार किसने किया? | Who Invented the Telephone

और हम सब जानते है कि मोबाइल फोन्स के बाजार में आने से पहले लोग टेलीफोन के जरिए बात किया करते थे। और इन टेलीफोन्स में भी समय – समय पर अलग – अलग तरह के बदलाव देखने को मिले। आमतौर पर घरों में इसे लैंडलाइन फोन भी कहा जाता है जो अब केवल ऑफिस और कुछ घरों में देखने को मिलता है। लेकिन ये हम सब जानते है कि टेलीफोन के बिना मोबाइल फोन का अस्तित्व नहीं है टेलीफोन की टेक्नॉलोजी में ही बदलाव करके मोबाइल फोन का अविष्कार हुआ। लेकिन क्या आप जानते टेलीफोन का अविष्कार किसने और कब किया था ?

क्या आप जानते हैं टेलीफोन का अविष्कार किसने किया? – Who Invented the Telephone

टेलीफोन का अविष्कार साल 1876 में अमेरिका के रहने वाले वैज्ञानिक ऐलेक्जेंडर ग्राहम बेल – Alexander Graham Bell ने किया था। हालांकि कुछ इतिहासकारों का मानना था कि टेलीफोन का अविष्कार एलीसा ग्रे ने किया था। और यही वजह थी कि ऐलेक्जेंडर ग्राहम बेल और एलीसा ग्रे के बीच इसके पेंटेट को लेकर काफी बहस भी हुई थी। लेकिन अंत में ऐलेक्जैंडर ग्राहम बेल ने 7 मार्च 1876 को अपने नाम कर लिया। हालांकि इस जीत के लिए ऐलेक्जैंडर ग्राहम बेल ने ऐलीशा ग्रे के साथ 600 मुकदमें लड़े। और उसके बाद उन्हें ये जीत मिली।

किसने सबसे पहली बार बोला फोन पर हैलो – Who was The First Person to say Hello

टेलीफोन के अविष्कार के बाद जब टेलीफोन का उपयोग शुरु हुआ तो उसके साथ एक शब्द भी मशहूर हुआ ये शब्द था हैलो। आज भी बहुत सारे लोग फोन उठाते ही सबसे पहले हैलो बोलते है। लेकिन आप क्या जानते है टेलीफोन पर सबसे पहले हैलो किसने क्यों बोला ?

दरअसल साइंटिस्ट ऐलेक्जैंडर ग्राहम बैल की गर्लफ्रेंड का नाम मारग्रेट हैलो – Margaret Hello था मारग्रेट हैलो को …

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संत एकनाथ का जीवन परिचय – Sant Eknath Information in Hindi

Sant Eknath Information

महाराष्ट्र महान लोगो की जन्मभूमि है। महाराष्ट्र एक ऐसा महान राज्य है जहा आज तक हजारों महान लोग जन्म ले चुके है। इसे संत लोगो की जन्मभूमि भी कहा जाता है। संत ज्ञानेश्वर से लेकर संत तुकाराम महाराज, संत नामदेव तक, और संत जनाबाई से लेकर संतगाडगे महाराज तक सभी ने लोगो को सुधारने की कोशिश की।

आज महाराष्ट्र हर क्षेत्र में सबसे आगे है। लेकिन इसका सारा श्रेय उन सब संत लोगो को जाता हैं क्योंकी उन्होंने अपने ग्रंथ और कविताओ के माध्यम से लोगो को मार्गदर्शन किया। इन सबसंत और ऋषि में संत एकनाथ महाराज – Eknath Maharaj  का भी बड़ा महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने समय रहते लोगो को भगवान और भक्ति का महत्व समझाया।

हिन्दू धर्म में भक्ति आन्दोलन को आगे ले जाने में उन्होंने जो योगदान दिया वह बहुमूल्य है। आज इसी महान संत और ऋषि एकनाथ के बारे में हम आपको बतानेवाले है। इस महान संत की सारी महत्वपूर्ण जानकारी निचे दी गयी है।

संत एकनाथ का जीवन परिचय – Sant Eknath Information in Hindi

नामसंत एकनाथ महाराज
जन्म ई. स. 1533
जन्मस्थानपैठन
मातारुक्मिणी
पितासूर्यनारायण
मृत्युई. स. 1599
गुरुजनार्दन स्वामी

संत एकनाथ के जीवन बारे में ज्यादा जानकारी मिल पाना काफी मुश्किल है क्यों की उनके बारे में कहापरभी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं। लेकिन ऐसा कहा जाता है की वे 16 वी सदी में थे और उस वक्त उन्होंने आखिर तक भक्ति आन्दोलन को बढ़ावा दिया।

संत एकनाथ का जन्म महाराष्ट्रके पैठण गाव में एक देशस्थ ऋग्वेदी परिवार में हुआ था। इनके घर के लोग एकविरा देवी के बड़े भक्त थे। संत एकनाथ के बचपन मे ही उनके माता पिता गुजर गए थे जिसकी वजह से वे अपने दादाजी भानुदास के साथ में रहते थे। उनके दादाजी भानुदास भी वारकरी संप्रदाय से थे। ऐसा कहा जाता है की संत जनार्दन एकनाथ के गुरु थे और वे सूफी संत थे।

एक बार की बात है जब एक नीची जाती के व्यक्ति ने संत एकनाथ को उनके घर खाना खाने के लिए बुलाया था। संत एकनाथ उस व्यक्ति के घर गए थे और वहा पर जाकर उन्होंने खाना भी खाया था।

इस पर उन्होंने एक कविता भी लिखी थी और उसमे कहा था की, जो इन्सान नीची जाती के होने के बाद भी जो पुरे मन से भगवान की भक्ति करता है, अपना सब कुछ भगवान को अर्पण करता है, ऐसा व्यक्ति किसी ब्राह्मण से भी बड़ा …

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रहस्यों से भरा “नॉर्थ सेंटिनल द्वीप”

North Sentinel Island

उत्तर सेंटिनल द्वीप – North Sentinel Island बंगाल की खाड़ी में स्थित अंडमान द्वीप समूह का एक द्वीप है। यह  नॉर्थ सेंटिनल द्वीप, भारतीय संघ राज्य क्षेत्र के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के दक्षिण अंडमान प्रशासनिक जिले के अंतर्गत आता है।

रहस्यों से भरा “नॉर्थ सेंटिनल द्वीप” – North Sentinel Island

उत्तर सेंटिनल द्वीप ख़ूबसूरती से भरपूर द्वीप है। यह किसी जन्नत से कम नही है यहां खुला नीले रंग का आसमान और शांतिपूर्ण माहौल है, बर्फ की चादर ओढ़े सफेद पहाड़ हैं, हरे भरे जंगल और पानी की लहरों की आवाजें मन को काफी शांत और सकारात्मक ऊर्जा पहुंचाती हैं।

यह प्रकृति का एक आकर्षक चेहरा है। इतनी ख़ूबसूरती का जिक्र सुनकर यहां हर कोई आना पसंद करेगा। पर सेंटिनल द्वीप पर आना मौत को गले लगाने जैसा है। इसकी वजह है यहां पर रहने वाली एक खतरनाक जनजाति – (North Sentinel Island Natives )।

जनजाति, जनसंख्या अनुमानित 100-200 के करीब – North Sentinel Island People

इस ख़ूबसूरती भरे द्वीप पर एक जनजाति कई सालों से अपना कब्ज़ा जमाये हुए है। यहां रह रहे लोगों ने अपनी ही एक ऐसी दुनिया बसा ली है जहां किसी भी बाहरी व्यक्ति का हस्तक्षेप वे लोग बर्दाश तक नही कर पाते हैं।

इन लोगों को आधुनिक दुनिया से कोई वास्ता नहीं है। ना तो ये लोग बाहरी दुनिया से कोई सम्पर्क रखते हैं और ना ही किसी को अपने से सम्पर्क रखने की इजाज़त देते हैं। इस जनजाति को “लॉस्ट ट्राइब” के नाम से जाना जाता है।

यह लोग अपना जीवन वैसे ही व्यतीत कर के खुश हैं जैसे उनके पूर्वज रहा करते थे। इनका रहन सहन, संस्कृति, खाना पीना, बोल चाल की भाषा बिलकुल अलग है न तो इन लोगों के पास रहने के लिए घर हैं और ना ही कपड़े।  सेंटिनल द्वीप पर रह रहे ये लोग खाने के लिए सिर्फ शिकार पर निर्भर हैं।

कई ऐसी जनजातियां हैं जिन्होंने अपने आपको आधुनिक युग से जोड़ लिया है पर इस जनजाति के लोग आज भी अपने आप को ऐसे ही सुरक्षित महसूस करते हैं।

खुंखार जनजाति – Uncontacted peoples

लॉस्ट ट्राइब नाम की यह जनजाति बेहद खतरनाक है। अगर इनके क्षेत्र के आस पास कोई हवाई जहाज़ दिख जाये तो ये लोग आग के गोलों से उनका स्वागत करते हैं। इस जन जाति के लोग तीर चलाने मे माहिर हैं।

2006 में जनजाति ने कई मछुहारों को बहुत बेहरमी से मार गिराया था। जो भी पर्यटक …

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रहस्य भरी दुनिया का एक और हिस्सा “बरमूडा ट्रायंगल” क्या हैं इसका रहस्य?

Bermuda Triangle ka Rahasya

संसार में अनगिनत रहस्य हैं जो एक ऐसी पहेलियाँ बन गयी हैं जिन्हें आधुनिक तकनीकों की मदद से भी सुलझाया नही जा सका है। ऐसे ही रहस्यों में छिपा है अमेरिका के दक्षिण पूर्वी तट पर बना बरमूडा ट्रायंगल।

इस इलाके में आज तक बड़े से बड़े हवाई जहाज़ आश्चर्यजनक रूप से गायब हो गये हैं व दल और बल दोनों की सहायता से आज तक उनका पता नही लगाया जा सका है।

रहस्य भरी दुनिया का एक और हिस्सा “बरमूडा ट्रायंगल” क्या हैं इसका रहस्य? – Bermuda Triangle

बरमूडा ट्रायंगल क्या हैं – What is Bermuda Triangle

बरमूडा को यह नाम 1964 में मिला था। बरमूडा त्रिभुज अमेरिका के फ्लोरिडा,प्यूर्टोरिको और बरमूडा द्वीप इन तीनों जगहों को जोड़ने वाला एक काल्पनिक ट्रायंगल है। इसे शैतान के त्रिकोण यानी Devil’s Triangle भी कहते हैं।

हादसा: अचानक जहाज़ और यात्री गायब – Bermuda Triangle Stories

बरमूडा ट्रायंगल पर 05 दिसंबर 1945 में एक ऐसा हादसा हुआ था। जिससे दुनिया भर के वैज्ञानिक सिर्फ सोच विचार ही करते रह गए थे। हुआ यूँ था की अमेरिका नेवी के पांच पेशेवर पायलट अपनी प्रशिक्षण अभ्यास के दौरान बरमूडा त्रिकोण की ओर निकल पड़े थे।

लेकिन सिर्फ एक घंटा 45 मिनट के बाद फ्लाइट लीडर लेफ्टिनेंट चार्ल्स टेलर ने नियंत्रण केंद्र में संदेश पहुंचाया कि यहां कुछ अजीब और गरीब गतिविधियां घटित हो रही हैं। चार्ल्स ने बताया की उनके पास तीन कंपास (Navigational Compasses) हैं जिन्होंने काम करना बंद कर दिया है। उन्हें नही मालूम था की वह कौन सी दिशा में हैं।

समुन्दर का रूप भी बेहद अलग था। थोड़ी ही देर बाद उनका सम्पर्क नियंत्रण केंद्र से टूट गया था। इस घटना में पायलट कहां लापता हो गए किसी को नही पता चल पाया।

चार्ल्स के दल को ढूंढ़ने के लिए दूसरा विमान भी भेजा गया पर महज़ 27 मिनट में उसका सम्पर्क भी कंट्रोल सेंटर से टूट गया और जहाज़ और पायलटों का कोई सुराग तक नही मिल पाया था। त्रिकोण से सम्बंधित ऐसी अनेक घटनायें हैं जिनके कारण बरमूडा अभी तक एक रहस्य बना हुआ है।

त्रिकोण से जुड़े दस्तावेज़, क्रिस्टोफर कोलंबस – Bermuda Triangle Theories

बरमूडा त्रिकोण के बारे में अद्भुत और अविश्वसनीय दस्तावेज़ प्रस्तुत करने वाला सबसे पहला व्यक्ति क्रिस्टोफर कोलंबस था। कोलंबस ने बताया था कि उसने और उसके साथियों ने क्षितिज पर बिजली का एक अजीब सा करतब देखा था। उन्हें आसमान में आग की कुछ लपटें भी दिखाई दी थी।…

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