आज भी भारत के एक रेलवे ट्रैक को साल की पूरी कमाई ब्रिटेन को क्यों देनी पड़ती हैं?

What Royalties does India still pay after Independence from Britain

भारत आज दुनिया के सबसे विकासशील देशों में से एक है लेकिन हम सभी जानते हैं की भारत 200 साल ब्रिटिश हुकुमत का गुलाम रहा है जिसे भारत को 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली थी। और हुकुमत के 200 साल जो ब्रिटिश ने नुकसान किया उसकी भरपाई भारत आज भी कर रहा है हालांकि अंग्रेज तो देश छोड़कर चले गए। लेकिन उनकी बहुत सी चीजें ऐसी है जो आज भी भारत में है भारत में रेल भी अंग्रजों ने ही शुरु की थी।

लेकिन आजादी के बाद रेलवे पर भारत सरकार का अधिकार हो गया। और भारत सरकार ने रेलवे का विकास किया। य़ही वजह है कि बजट सत्र में रेलवे का अलग बजट पेश किया जाता है। क्योंकि रेलवे भारत में यातयात का साधन है जिस पर सभी वर्ग के लोग सफर करते हैं। रेलवे हर साल भारत सरकार करोड़ो का पैसा भी कमाती है जिसे रेलवे स्टेशन की मरम्मत और जनकल्याण के कार्यों में लगाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते है कि भारतीय रेल के एक रेलवे ट्रैक की पूरी सालाना कमाई हर साल ब्रिटेन को जाती है।

आज भी भारत के एक रेलवे ट्रैक को साल की पूरी कमाई ब्रिटेन को क्यों देनी पड़ती हैं?

ऐसा इसलिए क्योंकि इस रेलवे ट्रैक पर आज भी ब्रितानी हुकुमत है चलिए आपको बताते है ये कौन सा रेलवे ट्रैक है और आज भी क्यों ब्रिटेन इस पर राज करता है।

भारत के महाराष्ट्र राज्य के अमरावती से मुर्ताजुपर के बीच बिठी नैरोगेज टैक 189 किलोमीटर लंबा है रिपोर्टस के अनुसार इस रेलवे ट्रैक पर केवल एक ही पैसेंजर ट्रेन चलती है। जिसकी कमाई भारत सरकार हरजाने के तौर पर हर साल ब्रिटेन की एक प्राइवेट कंपनी को देती है।

दरअसल रिपोर्टस के अनुसार अमरावती का ये इलाका ब्रिटिश काल के दौरान पूरे देश में कपास की खेती के लिए काफी मशहूर था। लेकिन मुंबई शहर से काफी दूर होने के कारण यहां से कपास को मुंबई लाने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। कपास के व्यापार को बढ़ाने के लिए अंग्रेजों ने यहां पर रेलवे ट्रैक बनाने का फैसला किया जो अमरावती को मुंबई पोर्ट से जोड़ता है।

इस रेलवे ट्रैक को बनाने का कोंट्रक अंग्रेजों ने ब्रिटेन की कंपनी क्लिक निक्सन को दिया। क्लिक निक्सन नाम की इस कंपनी ने इस रेलवे ट्रैक को बनाने का काम साल 1916 में पूरा कर लिया। निक्सन कंपनी …

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क्या आप जानते हैं टेलीफोन का अविष्कार किसने किया? | Who Invented the Telephone

Who Invented the Telephone

आज के टाइम में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसके पास मोबाइल फोन यानी स्मार्टफोन नहीं होगा या वो इसके बारे में नहीं जानता होगा। आधुनिकता के कारण आज हर किसी की जिंदगी इतनी सिमिट कर रह गई जिसकी शायद कभी किसी ने कल्पना तक नहीं की होगी। आज हम मोबाइल फोन्स के जरिए न केवल बात कर सकते हैं बल्कि वीडियो कॉल, ऑडियो रिकॉर्डिंग, मैसेज भेजना, गेम खेलना, डक्यूमेंट बनाना, गाने सुनना, फिल्में देखना ओर भी बहुत कुछ कर सकते है, जिन सब के लिए एक जमाने में अलग – अलग डिवाइज हुआ करते थे।

और हम सब जानते है कि मोबाइल फोन्स के बाजार में आने से पहले लोग टेलीफोन के जरिए बात किया करते थे। और इन टेलीफोन्स में भी समय – समय पर अलग – अलग तरह के बदलाव देखने को मिले। आमतौर पर घरों में इसे लैंडलाइन फोन भी कहा जाता है जो अब केवल ऑफिस और कुछ घरों में देखने को मिलता है। लेकिन ये हम सब जानते है कि टेलीफोन के बिना मोबाइल फोन का अस्तित्व नहीं है टेलीफोन की टेक्नॉलोजी में ही बदलाव करके मोबाइल फोन का अविष्कार हुआ। लेकिन क्या आप जानते टेलीफोन का अविष्कार किसने और कब किया था ?

क्या आप जानते हैं टेलीफोन का अविष्कार किसने किया? – Who Invented the Telephone

टेलीफोन का अविष्कार साल 1876 में अमेरिका के रहने वाले वैज्ञानिक ऐलेक्जेंडर ग्राहम बेल – Alexander Graham Bell ने किया था। हालांकि कुछ इतिहासकारों का मानना था कि टेलीफोन का अविष्कार एलीसा ग्रे ने किया था। और यही वजह थी कि ऐलेक्जेंडर ग्राहम बेल और एलीसा ग्रे के बीच इसके पेंटेट को लेकर काफी बहस भी हुई थी। लेकिन अंत में ऐलेक्जैंडर ग्राहम बेल ने 7 मार्च 1876 को अपने नाम कर लिया। हालांकि इस जीत के लिए ऐलेक्जैंडर ग्राहम बेल ने ऐलीशा ग्रे के साथ 600 मुकदमें लड़े। और उसके बाद उन्हें ये जीत मिली।

किसने सबसे पहली बार बोला फोन पर हैलो – Who was The First Person to say Hello

टेलीफोन के अविष्कार के बाद जब टेलीफोन का उपयोग शुरु हुआ तो उसके साथ एक शब्द भी मशहूर हुआ ये शब्द था हैलो। आज भी बहुत सारे लोग फोन उठाते ही सबसे पहले हैलो बोलते है। लेकिन आप क्या जानते है टेलीफोन पर सबसे पहले हैलो किसने क्यों बोला ?

दरअसल साइंटिस्ट ऐलेक्जैंडर ग्राहम बैल की गर्लफ्रेंड का नाम मारग्रेट हैलो – Margaret Hello था मारग्रेट हैलो को …

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भारतीय इतिहास की महान महिलाये | Great women of India

Great women of India

भारत एक ऐसा देश जहाँ औरत को दुर्गा का दर्जा दिया गया है और औरतो ने भी इस इस दर्जे की अहमियत रखते हुए इस देश को बहुत कुछ दिया है। अलग अलग क्षेत्रो की ऐसी बहुत सारी महिलाये है जिन्होंने भारत के इतिहास में अपना नाम दर्ज करवाया। भारत की वो महिलाएं जो हमेशा हमेशा के लिए लोगो में जेहन में बसी हुई है।

भारतीय इतिहास की महान महिलाये – Great women of India

रानी लक्ष्मीबाई – Rani Lakshmibai

“खूब मादी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी”

ये कविता शायद ही किसी ने ना पढ़ी हो और ऐसा था भी। अंग्रेजो के नाक में दम कर देने वाली रानी लक्ष्मीबाई को उनके साहस, युद्ध कौशल और जोशीले अंदाज के लिए जाना जाता है।

विजय लक्ष्मी पंडित – Vijaya Lakshmi Pandit

दुनिया की पहली महिला जो संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष बनी। भारत की पहली महिला जो केन्द्रीय मंत्री बनी। विजय लक्ष्मी पंडित का नाम आज भी यादगार है।

मीराबाई – Mirabai

अपनी भक्ति के दम पर भगवान् का आस्तित्व बता पाना वो भी कलियुग में ऐसा शायद ही किसी के साथ हुआ हूँ लेकिन मीराबाई उन्ही में से एक थी। भगवान् श्री कृष्ण की अनन्य भक्त मीराबाई की हमेशा के लिए याद किया जाएगा।

इंदिरा गाँधी – Indira Gandhi

एक राजनीतिक पुरोधा जिसे आयरन लेडी कहा जाता था और अटल बिहारी ने इन्हें दुर्गा का नाम दिया था। भारत की पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न से सम्मानित इंदिरा गाँधी ने ये साबित कर दिया की अगर एक महिला राजनीति में आ जाए तो उसकी कला के आगे बड़े बड़े लोग धूल चाटते नजर आते है।

दुर्गावती – Rani Durgavati

गोंड की महारानी दुर्गावती ने अकबर के खिलाफ मोर्चा खोला था। सबसे बहादुर और युद्ध कौशल में निपुण महिलाओ की श्रेणी में इनका नाम लिया जाता है।

आनंदी गोपाल जोशी – Anandi Gopal Joshi

भारत की पहली महिला डॉक्टर जिन्होंने एलोपैथी की डिग्री अपने नाम की थी। इसके अलावा कहा जाता है की अमेरिका जाने वाली भी वो पहली हिन्दू महिला थी।

बेगम हजरत महल – Begum Hazrat Mahal

आजादी के लिए लड़ी जानी वाली लड़ाइयों में एक ऐसी महिला जिसने अंग्रेजो को नाको चने चबा दिए। बेगम हजरत महल लखनऊ में नए सिरे से शासन सँभालने वाले महिला भी थी।

सरोजिनी नायडू – Sarojini Naidu

अपने लेखन शैली से लोगो के दिलो में अलख जगाने वाली इस महिला को शायद ही इतिहास भूल पाए। …

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आख़िर कैसे हुई मानवों की उत्पत्ति…

History of Human Evolution

इंसान क्या है? कैसे वह पृथ्वी पर आया?  उसका इतिहास क्या है? क्या वास्तव में बंदर था  आज का इंसान? ऐसे अनेक सवाल हर मनुष्य के मन में अपने जीवन काल के दौरान आते ही हैं। पर इस विषय पर धर्म और विज्ञान के द्वारा सटीक जवाब नहीं मिल पायें हैं। इसी कारण वैज्ञानिकों और धर्म गुरुओं के बीच में इस मुद्दे को लेकर बहस भी होती रहती है। विज्ञान और धर्म अपने-अपने तरीके से मानव शरीर की रचना के पीछे तथ्य देते हैं।

आख़िर कैसे हुई मानवों की उत्पत्ति – History of Human Evolution

वैज्ञानिक दृष्टि से मानव की उत्पत्ति – Human Evolution in Science

विज्ञान ने मानव जाति के आविष्कार को समझने के लिए कई प्रयास किये हैं जिसके सफल परिणाम भी प्राप्त हुए हैं। विज्ञान के अनुसार मानव का इतिहास समुंद्र से जुड़ा है। सबसे पहले पानी में रहने वाली प्रजातियों ने जन्म लिया जैसे मछली, पानी में रहने वाले कीटाणु आदि।

धीरे धीरे समय का चक्र बढ़ता रहा। जल एवं थल में रहने वाले जीव आये और अपना जीवन यापन करने लगे ये जीव थे जैसे मेंढ़क, केकड़ा आदि। समय बदलता रहा और प्रकृति अपना काम कर रही थी कभी बाढ़ तो कभी सूखा, जीवो की जन्म और मृत्यु हो रही थी।

इसी दौर में कई प्रजातियां विकसित हुई और कईंयों का नामो निशान खत्म हो गया है। यह क्रम ऐसे ही चलता रहा और डायनासोर, वानर, चिम्पैंजी, वनमानुष आये और इसके बाद हुआ दो पैर वाले मनुष्य का विकास।

वैज्ञानिक मान्यता के अनुसार बंदर ही मानव जाति के रचनाकर है। सोचने समझने की शक्ति से धीरे – धीरे बंदर जैसा प्राणी दो पैरों का इस्तेमाल करना सीख गया और पृथ्वी से जुड़े पेड़ों के फल, सब्जियाँ  तोड़कर अपनी भूख को शांत करने लगा।

बंदर वाली बुद्धि का विकास होने लगा और यह एक मनुष्य का रूप लेने में सक्षम होने लगा और चार पैरों का उपयोग छोड़ दो पैरों की सहायता से चलने फिरने लगा। अब यह मानव शरीर के सभी अंगों का प्रयोग करने लगा था। पूँछ किसी इस्तेमाल में ना आने की वजह से खत्म हो गयी पर मानव शरीर की रीढ़ की हड्डी के अंतिम छोर पर उसके अवशेष अब भी पाये जाते हैं।

इस प्रकार मानव समाज का विकास होता गया और मानव एक बुद्धिजीवी जीव बन गया है जिसने अपना जीवन सरल करने के लिए अपनी शैतानी बुद्धि का उपयोग कर के प्रकृति द्वारा दिये गए …

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संत एकनाथ का जीवन परिचय – Sant Eknath Information in Hindi

Sant Eknath Information

महाराष्ट्र महान लोगो की जन्मभूमि है। महाराष्ट्र एक ऐसा महान राज्य है जहा आज तक हजारों महान लोग जन्म ले चुके है। इसे संत लोगो की जन्मभूमि भी कहा जाता है। संत ज्ञानेश्वर से लेकर संत तुकाराम महाराज, संत नामदेव तक, और संत जनाबाई से लेकर संतगाडगे महाराज तक सभी ने लोगो को सुधारने की कोशिश की।

आज महाराष्ट्र हर क्षेत्र में सबसे आगे है। लेकिन इसका सारा श्रेय उन सब संत लोगो को जाता हैं क्योंकी उन्होंने अपने ग्रंथ और कविताओ के माध्यम से लोगो को मार्गदर्शन किया। इन सबसंत और ऋषि में संत एकनाथ महाराज – Eknath Maharaj  का भी बड़ा महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने समय रहते लोगो को भगवान और भक्ति का महत्व समझाया।

हिन्दू धर्म में भक्ति आन्दोलन को आगे ले जाने में उन्होंने जो योगदान दिया वह बहुमूल्य है। आज इसी महान संत और ऋषि एकनाथ के बारे में हम आपको बतानेवाले है। इस महान संत की सारी महत्वपूर्ण जानकारी निचे दी गयी है।

संत एकनाथ का जीवन परिचय – Sant Eknath Information in Hindi

नामसंत एकनाथ महाराज
जन्म ई. स. 1533
जन्मस्थानपैठन
मातारुक्मिणी
पितासूर्यनारायण
मृत्युई. स. 1599
गुरुजनार्दन स्वामी

संत एकनाथ के जीवन बारे में ज्यादा जानकारी मिल पाना काफी मुश्किल है क्यों की उनके बारे में कहापरभी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं। लेकिन ऐसा कहा जाता है की वे 16 वी सदी में थे और उस वक्त उन्होंने आखिर तक भक्ति आन्दोलन को बढ़ावा दिया।

संत एकनाथ का जन्म महाराष्ट्रके पैठण गाव में एक देशस्थ ऋग्वेदी परिवार में हुआ था। इनके घर के लोग एकविरा देवी के बड़े भक्त थे। संत एकनाथ के बचपन मे ही उनके माता पिता गुजर गए थे जिसकी वजह से वे अपने दादाजी भानुदास के साथ में रहते थे। उनके दादाजी भानुदास भी वारकरी संप्रदाय से थे। ऐसा कहा जाता है की संत जनार्दन एकनाथ के गुरु थे और वे सूफी संत थे।

एक बार की बात है जब एक नीची जाती के व्यक्ति ने संत एकनाथ को उनके घर खाना खाने के लिए बुलाया था। संत एकनाथ उस व्यक्ति के घर गए थे और वहा पर जाकर उन्होंने खाना भी खाया था।

इस पर उन्होंने एक कविता भी लिखी थी और उसमे कहा था की, जो इन्सान नीची जाती के होने के बाद भी जो पुरे मन से भगवान की भक्ति करता है, अपना सब कुछ भगवान को अर्पण करता है, ऐसा व्यक्ति किसी ब्राह्मण से भी बड़ा …

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रहस्यों से भरा “नॉर्थ सेंटिनल द्वीप”

North Sentinel Island

उत्तर सेंटिनल द्वीप – North Sentinel Island बंगाल की खाड़ी में स्थित अंडमान द्वीप समूह का एक द्वीप है। यह  नॉर्थ सेंटिनल द्वीप, भारतीय संघ राज्य क्षेत्र के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के दक्षिण अंडमान प्रशासनिक जिले के अंतर्गत आता है।

रहस्यों से भरा “नॉर्थ सेंटिनल द्वीप” – North Sentinel Island

उत्तर सेंटिनल द्वीप ख़ूबसूरती से भरपूर द्वीप है। यह किसी जन्नत से कम नही है यहां खुला नीले रंग का आसमान और शांतिपूर्ण माहौल है, बर्फ की चादर ओढ़े सफेद पहाड़ हैं, हरे भरे जंगल और पानी की लहरों की आवाजें मन को काफी शांत और सकारात्मक ऊर्जा पहुंचाती हैं।

यह प्रकृति का एक आकर्षक चेहरा है। इतनी ख़ूबसूरती का जिक्र सुनकर यहां हर कोई आना पसंद करेगा। पर सेंटिनल द्वीप पर आना मौत को गले लगाने जैसा है। इसकी वजह है यहां पर रहने वाली एक खतरनाक जनजाति – (North Sentinel Island Natives )।

जनजाति, जनसंख्या अनुमानित 100-200 के करीब – North Sentinel Island People

इस ख़ूबसूरती भरे द्वीप पर एक जनजाति कई सालों से अपना कब्ज़ा जमाये हुए है। यहां रह रहे लोगों ने अपनी ही एक ऐसी दुनिया बसा ली है जहां किसी भी बाहरी व्यक्ति का हस्तक्षेप वे लोग बर्दाश तक नही कर पाते हैं।

इन लोगों को आधुनिक दुनिया से कोई वास्ता नहीं है। ना तो ये लोग बाहरी दुनिया से कोई सम्पर्क रखते हैं और ना ही किसी को अपने से सम्पर्क रखने की इजाज़त देते हैं। इस जनजाति को “लॉस्ट ट्राइब” के नाम से जाना जाता है।

यह लोग अपना जीवन वैसे ही व्यतीत कर के खुश हैं जैसे उनके पूर्वज रहा करते थे। इनका रहन सहन, संस्कृति, खाना पीना, बोल चाल की भाषा बिलकुल अलग है न तो इन लोगों के पास रहने के लिए घर हैं और ना ही कपड़े।  सेंटिनल द्वीप पर रह रहे ये लोग खाने के लिए सिर्फ शिकार पर निर्भर हैं।

कई ऐसी जनजातियां हैं जिन्होंने अपने आपको आधुनिक युग से जोड़ लिया है पर इस जनजाति के लोग आज भी अपने आप को ऐसे ही सुरक्षित महसूस करते हैं।

खुंखार जनजाति – Uncontacted peoples

लॉस्ट ट्राइब नाम की यह जनजाति बेहद खतरनाक है। अगर इनके क्षेत्र के आस पास कोई हवाई जहाज़ दिख जाये तो ये लोग आग के गोलों से उनका स्वागत करते हैं। इस जन जाति के लोग तीर चलाने मे माहिर हैं।

2006 में जनजाति ने कई मछुहारों को बहुत बेहरमी से मार गिराया था। जो भी पर्यटक …

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रहस्य भरी दुनिया का एक और हिस्सा “बरमूडा ट्रायंगल” क्या हैं इसका रहस्य?

Bermuda Triangle ka Rahasya

संसार में अनगिनत रहस्य हैं जो एक ऐसी पहेलियाँ बन गयी हैं जिन्हें आधुनिक तकनीकों की मदद से भी सुलझाया नही जा सका है। ऐसे ही रहस्यों में छिपा है अमेरिका के दक्षिण पूर्वी तट पर बना बरमूडा ट्रायंगल।

इस इलाके में आज तक बड़े से बड़े हवाई जहाज़ आश्चर्यजनक रूप से गायब हो गये हैं व दल और बल दोनों की सहायता से आज तक उनका पता नही लगाया जा सका है।

रहस्य भरी दुनिया का एक और हिस्सा “बरमूडा ट्रायंगल” क्या हैं इसका रहस्य? – Bermuda Triangle

बरमूडा ट्रायंगल क्या हैं – What is Bermuda Triangle

बरमूडा को यह नाम 1964 में मिला था। बरमूडा त्रिभुज अमेरिका के फ्लोरिडा,प्यूर्टोरिको और बरमूडा द्वीप इन तीनों जगहों को जोड़ने वाला एक काल्पनिक ट्रायंगल है। इसे शैतान के त्रिकोण यानी Devil’s Triangle भी कहते हैं।

हादसा: अचानक जहाज़ और यात्री गायब – Bermuda Triangle Stories

बरमूडा ट्रायंगल पर 05 दिसंबर 1945 में एक ऐसा हादसा हुआ था। जिससे दुनिया भर के वैज्ञानिक सिर्फ सोच विचार ही करते रह गए थे। हुआ यूँ था की अमेरिका नेवी के पांच पेशेवर पायलट अपनी प्रशिक्षण अभ्यास के दौरान बरमूडा त्रिकोण की ओर निकल पड़े थे।

लेकिन सिर्फ एक घंटा 45 मिनट के बाद फ्लाइट लीडर लेफ्टिनेंट चार्ल्स टेलर ने नियंत्रण केंद्र में संदेश पहुंचाया कि यहां कुछ अजीब और गरीब गतिविधियां घटित हो रही हैं। चार्ल्स ने बताया की उनके पास तीन कंपास (Navigational Compasses) हैं जिन्होंने काम करना बंद कर दिया है। उन्हें नही मालूम था की वह कौन सी दिशा में हैं।

समुन्दर का रूप भी बेहद अलग था। थोड़ी ही देर बाद उनका सम्पर्क नियंत्रण केंद्र से टूट गया था। इस घटना में पायलट कहां लापता हो गए किसी को नही पता चल पाया।

चार्ल्स के दल को ढूंढ़ने के लिए दूसरा विमान भी भेजा गया पर महज़ 27 मिनट में उसका सम्पर्क भी कंट्रोल सेंटर से टूट गया और जहाज़ और पायलटों का कोई सुराग तक नही मिल पाया था। त्रिकोण से सम्बंधित ऐसी अनेक घटनायें हैं जिनके कारण बरमूडा अभी तक एक रहस्य बना हुआ है।

त्रिकोण से जुड़े दस्तावेज़, क्रिस्टोफर कोलंबस – Bermuda Triangle Theories

बरमूडा त्रिकोण के बारे में अद्भुत और अविश्वसनीय दस्तावेज़ प्रस्तुत करने वाला सबसे पहला व्यक्ति क्रिस्टोफर कोलंबस था। कोलंबस ने बताया था कि उसने और उसके साथियों ने क्षितिज पर बिजली का एक अजीब सा करतब देखा था। उन्हें आसमान में आग की कुछ लपटें भी दिखाई दी थी।…

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क्या आप जानते हैं आख़िर क्या हैं हरित क्रांति?

Green Revolution

भारत जो की एक कृषि प्रधान देश है। भारत कृषि के क्षेत्र में दुनिया भर में 15 वें स्थान पर आता है। इसका श्रेय किसी न किसी रूप में हरित क्रांति को भी जाता है। हरित क्रांति के फलस्वरूप देश के कृषि क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण प्रगति है। हरित क्रांति  से कृषि उत्पादन में एक बहुत बड़ा बदलाव आया है।

क्या आप जानते हैं आख़िर क्या हैं हरित क्रांति – Green Revolution

कृषि में परम्परागत तरीकों से हट कर उसकी जगह नवीनतम तरीके अपनाये गए जैसे आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया जाने लगा, कीटनाशक दवाइयों प्रयोग में आई, उन्नत बीजों का समावेश किया गया, विस्तृत सिंचाई परियोजनाओं आदि के प्रयोग को बढ़ावा मिला। हरित क्रांति  से एक नये युग का निर्माण हुआ है। हरित क्रांति  के आने से उत्पादकों में भी काफी वृद्धि हुई साथ ही अधिक मात्रा में बेहतरीन गुणवत्ता के साथ उत्पादन किया जाने लगा।

हरित क्रांति की शुरुआत – Green Revolution in India

1947 में देश आजाद होने के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने भी कृषि क्षेत्र में बढ़ोतरी के लिए काफी प्रयास किया था। लेकिन उस समय भी किसानों को खेती पुराने तरीकों से करनी पड़ रही थी जिसके परिणाम नकारात्मक ही निकल रहे थे।

कृषि क्षेत्र उस दौर में इस कदर कमज़ोर था की कई फसलों को आयात भी करना पड़ता था। उस समय में गेंहु की फसल को बढ़ाना एक बहुत बड़ी चुनौती थी और इसकी बहुत जरूरत भी थी।

हरित क्रांति के दौरान 1965 में कृषि मंत्री सी सुब्रमण्यम थे। सुब्रमण्यम ने नई किस्म के अनाज के लिए 18 हज़ार बीज आयात किये और कृषि को चरम सिमा तक ले जाने के लिए कई सुधार किये सिंचाई के लिए नहरें बनवाई, किसानों को उनके द्वारा उत्पादन माल का उचित मूल्य देने का वादा किया और सबसे मुख्य अनाज को सुरक्षित रखने के लिए गोदाम बनवाये।

इन सब प्रयासों के बहुत बढ़िया परिणाम निकले फलस्वरूप भारत अब पहले की तुलना में अधिक मात्रा में फसल करने लगा था।

भारत में हरित क्रांति की शुरुआत वर्ष 1966 -67 में हुई थी। हरित क्रांति का प्रारम्भ नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर नारमन बोरलॉग द्वारा किया गया था। हरित क्रांति से तात्पर्य देश के कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति से है।

हरित क्रांति के सफल परिणाम – Results of Green Revolution

उन्नतशील बीज: हरित क्रांति  के तत्पश्चात अब फसलों के लिए उन्नत बीजों का प्रयोग किया जाने लगा और नई व बेहतरीन बीजों …

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एक शहीद सैनिक जो आज भी देश सेवा में डयूटी पर हैं…

Baba Harbhajan Singh

अपनी जान की परवाह किए बिना सीमा पर तैनात होकर, देश का वीर जवान, सरहद की रक्षा करते हैं, ताकि हम सुकुन से रह सकें और बिना किसी डर के अपना जीवन व्यतीत कर सकें। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कोई सैनिक शहीद होने के बाद भी अपने देश की रक्षा के लिए सीमा पर मुस्तैद हो और पूरी कर्तव्य निष्ठा से अपनी ड्यूटी निभा रहा हो।

ये बात सुनने में अटपटी और बेतुकी जरूर है। लेकिन आज हम आपको अपने इस आर्टिकल में भारतीय सेना के एक ऐसे साहसी सैनिक की दास्तान बता रहे हैं जो वास्तविक होकर भी अविश्वनीय है।

एक शहीद सैनिक जो आज भी देश सेवा में डयूटी पर हैं – Baba Harbhajan Singh

एक शहीद सैनिक जो आज भी देश सेवा में डयूटी पर हैं – Baba Harbhajan Singh

सिक्किम से सटी भारत-चीन सीमा पर एक ऐसे शहीद वीर जवान की दास्तान जिसने अपने जीवन में पूरी निष्ठा और कर्तव्य के साथ देश की सुरक्षा की लेकिन मौत के बाद, आज भी उसकी आत्मा सरहद की सुरक्षा बड़े ही मुस्तैदी से कर रही है।

हैरत करने वाली बात तो यह है कि इसके लिए उसे सैलरी भी मिलती है और उसका प्रमोशन भी होता है और तो और इस शहीद सैनिक की याद में एक मंदिर भी बनाया गया है जो कि लाखों लोगों की आस्था का केन्द्र बना हुआ है। इसकी पुष्टि बात की भारतीय सेना के कई जवान और चीन के सेना ने की है।

भारतीय पुलिस या फिर सेना जैसे सतर्क और बेहद संजीदा विभागों में अंधविश्वास नाम की कोई जगह नहीं होती, लेकिन यह वाकई हैरत में डालने वाली कहानी है। भारतीय सेना के फौजी बाबा हरभजन सिंह – Baba Harbhajan Singh की कहानी। जिसमें भारतीय सेना का विश्वास भी टिका  हुआ है, और यह कहानी वास्तविक होकर भी अविश्वनीय है।

कौन थे फौजी बाबा हरभजन सिंह ? – Who is Baba Harbhajan Singh

इस रहस्यमयी फौजी बाबा हरभजन सिंह का जन्म 30 अगस्त 1946 में पंजाब के सदराना गांव में हुआ था जो कि अब पाकिस्तान में है।

बाबा हरभजन सिंह की पढा़ई- लिखाई – Baba Harbhajan Singh Education

बाब हरभजन सिंह ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा गांव के ही एक स्कूल से प्राप्त की थी। वहीं मार्च, 1955 में उन्होंने ‘डी.ए.वी. हाई स्कूल’, पट्टी से मेट्रिकुलेशन किया था।

फौजी बाबा हरभजन सिंह का भारतीय सेना में प्रवेश

हरभजन सिंह  9 फरवरी 1966 को भारतीय सेना के पंजाब रेजिमेंट में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे। इसके बाद 1968 में वो …

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जानिए भारत के यातायात के कौनसे नियम हैं?

Traffic Rules in India

दुनिया भर में वाहनों के लिए अलग अलग नियम कायदे बनाये गए है। जिसका मुख्य उद्देश्य होता है की हर नागरिक अपनी सिमा में रह कर सड़क पर वाहन चलाये व अपनी और दुसरो की जान जोखिम में ना डाले। भारत में भी यातायात को सही रूप देने के लिए निम्न लिखित नियम और कायदे है जिनका उल्लंघन करने पर आरोपी को औपचारिक तरिके से जुर्माना देना पड़ता है।

जानिए भारत के यातायात के कौनसे नियम हैं? – Traffic Rules in India

  • वन वे – One Way

इस नियम के तहत आपको अपने वाहन को एक ही दिशा में चलाना है वो भी अपनी ही साइड में नाकि अपने से विपरीत दिशा में। भारत में सिंगल रोड पर बाएं ओर गाड़ी चलाने का नियम है। ऐसा ना करने पर सड़क पर चल रहे दूसरे वाहन के लिए भी खतरा बन सकते हो और भारी चालान भी झेलना पड़ सकता है।

  • यू टर्न – U Turn

भारत में ज्यादा तर लोग यू टर्न का नियम तोड़ते है कुछ ही वक्त बचाने के कारण जल्दबाज़ी में बीच सड़क पर गाड़ी घुमा देते है और ट्रैफिक पुलिस की पकड़ में आ जाते है। साथ ही किसी बड़ी दुर्घटना का शिकार भी हो जाते है।

  • गति नियंत्रण – Speed Control

सड़क सुरक्षा नियम के तहत गाड़ियों की गति तय की गयी है। स्पीड गाडी के पहियों और साइज़ को ध्यान में रख कर डीसाइड की जाती है। दो पहिया वाहन के लिए अलग और चार पहिया वाहन के लिए अलग अलग गति निर्धारित है और साथ ही हाईवे और सिंगल सड़को के लिए भी अलग अलग स्पीड है।

  • हेलमेट और सीट बेल्ट – Helmet and Seat Belt

भारत में जितने भी चालान काटे जाते है उनमे सबसे ज्यादा लोग वो ही होते है जो सड़क पर ड्राइविंग के दौरान ना तो हेलमेट पहनते और न ही सीट बेल्ट का प्रयोग करते है। जिसके वजह से सड़क दुर्घटना में जान चले जाने का मुख्य कारण भी इन दो चीज़ो की कमी होती है।

  • कागज़ी दस्तावेज़ – Paper Document

सड़क पर पुलिस कभी भी आपको रोक कर आपकी गाडी के कागज़ पूछ सकती है एवं कागज़ पुरे ना होने पर चालान भी काट सकती है इस परस्तिथि में घर से गाडी लेकर जाने से पहले अपने कागज़ो की जांच पड़तां करलें जिसमे लाइसेंस,आर सी, प्रदूषण, गाडी का बिमा आदि होना शामिल है।

ट्रैफिक साइन और अर्थ  – Traffic Signs and Meanings

सड़क …

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