स्कूल सैड लव स्टोरी इन हिंदी | पहला प्यार

स्कूल सैड लव स्टोरी इन हिंदी | पहला प्यार

यूं तो दीवानगी की कोई हद कोई उम्र नहीं होती। पर जब ये अधूरी हो पूर्ण ही कहलाती तब वो इतिहास में एक अनोखी कहानी लिखी जाती। ऐसी ही एक कहानी है “स्कूल सैड लव स्टोरी इन हिंदी | पहला प्यार”। यह पूर्णतया काल्पनिक है इसमें इस्तमाल किए गए चरित्र काल्पनिक है धन्यवाद।

स्कूल सैड लव स्टोरी इन हिंदी | पहला प्यार

पहली किरण के साथ निकला टहलने मैं अद्वितीय स्फूर्ति जगा,  हवाओं की हस्ती में उड़ता चला जा रहा था,
यूं तो मन में नहीं उबाला था कि नैनों से घायल मैं हो पाऊंगा कभी पर क़िस्मत को तो मंजूर कुछ और ही था||

कदमों के उठा पटक के बीच अचानक ठहराव शब्द प्रधान बन गया, जब तक खुद को बता पाता समझ पाता…
मैं घायल हो चुका था, नजरों का बार बार टकराना दिल का सीने को धकेल.. धड़क उठना, चलता रहा-चलता रहा|

सड़क के उस पार एक ग्वाले का घर था जिनकी बेटी का विवाह होगा शायद, उनके घर खूब मस्ती माहौल था… गानों का रंगारंग कार्यक्रम चल रहा था|

उस वक़्त और भी शानदार लगने लगा जब मेरी और उसकी आंखें एक पल के लिए एक दूसरे में खो चली, अब ये करामात उस डीजे वाले की थी या क़िस्मत की, ये बात दोनों जाने|पर यहां हर गाना मेरे दिलों दिमाग़ को पढ़ कर ही बजता रहा|

“नहीं चल सकूँगा तुम्हारे बिना मैं मेरा तुम सहारा बनो इक तुम्हें चाहने के अलावा और कुछ हमसे होगा नहीं बोल दो ना ज़रा दिल में जो है छिपा मैं किसी से कहूँगा नही” शायद हम दोनों का गाने के बोल पे उतना ही ध्यान था जितना एक दूसरे पर और गाने के बोल सुन उनकी निगाहों पे वो तिलिस्मी मुस्कान और लज्जा के साथ हलकी हलकी पलकों को झुकाना|

मेरे दिल को बुरे तरीके से घायल करने के लिए काफी था| मानों वर्षों से थका सुकून की बारिश में भीग रहा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क वहां से कुछ कह रहा, मत कर बेमानी मुझसे वो पास है| मान लो मेरा आज एक अलग जगह है। लंबी लंबी सांसें छोड़ मैं उससे कह रहा- ऐ नादां दिल संभालो खुद को बेकाबू मत हो…तुम्हारी यही जगह है।

“ख़ामोशियाँ रखती हैं अपनी भी एक जुबां, ख़ामोशी को चुपके से सब कह जाने दो…
कुछ तो हुआ है ये क्या हुआ जो ना पता है, ये जो हुआ कुछ तो हुआ है समझो कुछ समझो ना”

और इस गाने ने तो जां …

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बात पते की “गुरु का स्थान” Guru Shishya ki Kahani in Hindi

Guru ka Sthan- Teacher and Student Story in Hindi

Guru Shishya ki Kahani

एक राजा था. उसे पढने-लिखने का बहुत शौक था. एक बार उसने मंत्री से कहकर एक शिक्षक की व्यवस्था की. शिक्षक राजा को पढ़ाने के लिए रोज आने लगा. राजा को शिक्षा ग्रहण करते हुए कई महीने बीत गए, मगर राजा को कोई लाभ नहीं हुआ. गुरु तो रोज खूब मेहनत कराते थे परन्तु राजा को उस शिक्षा का कोई लाभ नहीं हो रहा था. राजा इस बात से बड़ा परेशान रहने लगा, गुरु की प्रतिभा और योग्यता पर सवाल उठाना भी गलत था क्योंकि वो एक बहुत ही प्रसिद्द और योग्य गुरु थे. आखिर एक दिन उसने यह बात रानी को बताई तो रानी ने राजा को सलाह दी कि मेरे राजा आप इस सवाल का जवाब गुरु जी से ही पूछ कर देखिये.

लेकिन राजा भी गुरूजी से यह बात पूछने पर संकोच करते थे, एक दिन हिम्मत करके गुरूजी के सामने अपनी जिज्ञासा रखी, ” हे गुरुवर , क्षमा कीजियेगा , मैं कई महीनो से आपसे शिक्षा ग्रहण कर रहा हूँ पर मुझे इसका कोई लाभ नहीं हो रहा है. ऐसा क्यों है ?”

गुरु जी ने बड़े ही शांत स्वर में जवाब दिया, ” मेरे राजा इसका कारण बहुत ही साधारण सा है…”

” गुरुवर कृपा कर के आप शीघ्र इस प्रश्न का उत्तर दीजिये “, राजा ने विनती करके पूछी.

गुरूजी ने कहा, “मेरे राजा बात बहुत छोटी है परन्तु आप अपने ‘बड़े’ होने के अहंकार के कारण इसे समझ नहीं पा रहे हैं और परेशान और दुखी हैं. माना कि आप एक बहुत बड़े राजा हैं. आप हर दृष्टि से मुझ से पद और प्रतिष्ठा में बड़े हैं परन्तु यहाँ पर आप का और मेरा रिश्ता एक गुरु और शिष्य का है. गुरु होने के नाते मेरा स्थान आपसे उच्च होना चाहिए, परन्तु आप स्वंय ऊँचे सिंहासन पर बैठते हैं और मुझे अपने से नीचे के आसन पर बैठाते हैं. बस यही एक कारण है जिससे आपको न तो कोई शिक्षा प्राप्त हो रही है और न ही कोई ज्ञान मिल रहा है. आपके राजा होने के कारण मैं आप से यह बात नहीं कह पा रहा था.

कल से अगर आप मुझे ऊँचे आसन पर बैठने पर गौर करे और स्वंय नीचे बैठें तो कोई कारण नहीं कि आप शिक्षा प्राप्त न कर पायें.”

राजा की समझ में ये सारी बात आ गई और उसने तुरंत अपनी गलती को स्वीकारा और गुरुवर से उच्च …

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एक सैनिक की दिल छू लेने वाली वाली कहानी – Army ki Emotional Kahani Hindi

(Army Motivational Story in Hindi)

दोस्तों यह कहानी (army ki kahani hindi) बहुत इमोशन दिल छूने वाली हैं। यह कहानी एक सीख भी प्रदान करती हैं। आइये जाने..

Army ki Emotional Kahani

ये कहानी एक सैनिक की है, जो बॉर्डर में युद्ध के लिए गया था. युद्ध समाप्त होने के बाद जब उसके घर लौटने की बारी आई, तो उसने अपने माता-पिता को कैंप से फ़ोन किया, “माँ और पिताजी!

उसने कहा – मैं घर आ रहा हूँ. लेकिन घर आने से पहले मुझे आपसे एक बात पूछनी है. मेरा एक दोस्त है, जिसे मैं अपने साथ घर लाना चाहता हूँ. क्या मैं उसे ला सकता हूँ?”

“बिल्कुल बेटा, ये भी कोई पूछने की बात है. हमें तुम्हारे दोस्त से मिलकर बहुत ख़ुशी होगी.” माता–पिता ने जवाब दिया.

बेटा बोला – “लेकिन पहले एक बात आप लोग जान लें. युद्ध में वह बहुत बुरी तरह घायल हो गया है. उसने एक बारूदी सुरंग पर पैर रख दिया था और उसमें उसने अपना एक हाथ और पैर गँवा दिया है. उसके पास कोई जगह नहीं है, जहाँ वो जा सके, इसलिये मैं उसे अपने साथ रहने के लिए लाना चाहता हूँ.”

उसकी यह बात सुनकर उसकी माँ बोली, “बेटा! तुम्हारे दोस्त के बारे में जानकर हमें बहुत दुःख हुआ. हो सकता है, हम उसके रहने के लिये कोई जगह तलाश कर सकें.”

बेटा बोला – “नहीं माँ! मैं चाहता हूँ कि वो हमारे साथ रहे.”

माँ बोली –  “लेकिन बेटा!” अब पिता ने कहा, “तुम समझ नहीं रहे हो कि तुम क्या चाह रहे हो? इस तरह का अपाहिज व्यक्ति हमारे लिए कितना बड़ा बोझ होगा. हमारी अपनी ज़िंदगी है, जीने के लिए और हम नहीं चाहते कि इस तरह की कोई भी परिस्थिति हमारी ज़िंदगी में दखल दे. मेरे हिसाब से तुम्हें अकेले घर आना चाहिए और अपने दोस्त को वहीँ छोड़ देना चाहिए. वह अपनी ज़िंदगी जीने के लिए कोई न कोई रास्ता निकाल ही लेगा.”

यह सुनकर उस सैनिक ने फ़ोन रख दिया. कुछ दिनों बाद, उसके माता-पिता को आर्मी हेड ऑफिस से एक संदेश मिला. जिसमें उन्हें बताया गया कि उनके बेटे की एक बिल्डिंग से गिरकर मौत हो गई है. पुलिस के हिसाब से ये एक सुसाइड केस था.

दु:खी माता-पिता ने तुरंत ही जाने के लिए फ्लाइट बुक कराई और वहां पहुँच गए. वहाँ उन्हें शहर के मुर्दाघर ले जाया गया, ताकि वे अपने बेटे की पहचान कर सकें. उन्होंने उसकी पहचान कर ली, किंतु ये देखकर उनकी कंपकंपी …

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“समयनिष्ठता” खुशहाल जीवन का राज – समय का महत्व पर कहानी

प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में, चाहे वह विद्यार्थी हों, काम काजी व्यक्ति हो या घर पर ही रहने वाली आम गृहणी हों समयनिष्ठता का स्थान सर्वोपरि है|समयनिष्ठता अर्थात समय का पाबंद होना| यदि आप दिया गया काम तय समय सीमा में पूरा करते हैं तो इसका अर्थ है कि आप समय के पाबंद हैं| समय के पाबंद व्यक्ति की हर स्थान पर प्रशंसा होती है| समय निष्ठ व्यक्ति जीवन में सफल और प्रसिद्ध होते हैं| कोई व्यक्ति कितना भी ज्ञानी क्यों ना हो यदि उसे समय की कद्र नहीं तो ज्ञान धरा का धरा रह जाता है|

वक़्त के महत्व पर शोर्ट कहानी

Samay ka Sadupyog Story in Hindi

मान लीजिए आपने परीक्षा की बहुत बढ़िया तैयारी की है लेकिन यदि समय से परीक्षा कक्ष तक नहीं पहुंचे तो ऐसी पढ़ाई का क्या तात्पर्य?  आप बहुत अच्छे डॉक्टर हैं लेकिन समय से अगर हॉस्पिटल ना पहुँच सके तो मरीज की तो मौत हो जायेगी |  आप बहुत बढ़िया कुक हैं लेकिन बारात के पहुँचने तक खाना नहीं बना पाये तो क्या आपके गुण की कोई कीमत होगी??  अतः जीवन में आगे बढ़ने के लिए समय का पाबंद होना बहुत ही जरूरी है|

समय के पाबंद बनने में आलस्य और सुस्ती दो बड़े शत्रु हैं| अतः यदि आप समय निष्ठ बन कर एक प्रभावशाली व्यक्तित्व के धनी बनना चाहते हैं तो सबसे पहले किसी भी कार्य को करने के लिए आप योजना बनाइये| योजनाबद्ध तरीके से आलस्य और सुस्ती को पीछे छोड़ते हुए आप अनुमान लगाइए कि अमुक कार्य को पूरा करने में कितना समय लगेगा| इस अनुमानित समय पर आप कार्य करना प्रारम्भ करेंगे तो निश्चित ही समय पर पूरा कर सकेंगे| समय की महत्ता को कहानी के माध्यम से समझते हैं|

समय पर छोटी कहानी – Best Stories About Value of Time in Hindi

रमेश पढ़ने में बहुत होशियार था| इंजीनियरिंग की डिग्री उसने अच्छे अंको के साथ हासिल की| बचपन से ही उसका सपना था कि पिताजी की कम्पनी में ही वो भी नौकरी करे| बहुत प्रयत्न किए लेकिन नौकरी पाने में नाकाम रहा| एक दिन पिताजी ने बताया कि कंपनी में एक व्यक्ति के लिए स्थान रिक्त हुआ है मैनेजर से बात भी कर ली है कल 10 बजे उसको इंटरव्यू के लिए बुलाया गया है|

रमेश ने इंटरव्यू की पूरी तैयारी की लेकिन वो दस बजे नहीं पहुँच सका| 10:30 पर वह कम्पनी पहुँचा तो पता चला कि किसी और को उस पद के लिए चुन लिया गया है| रमेश को बहुत …

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माइंड फ्रेश करना हो तो ये 2 मजेदारी कहानी पढ़े – Majedar Kahani

माइंड फ्रेश करना हो तो ये 2 मजेदारी कहानी पढ़े – Majedar Kahani

1). दुनिया गोल है! – Hansi Wali Kahaani

बॉस (अपने सेक्रेटरी से): हमलोग दोनों एक हफ्ते के लिए लंदन जा रहे हैं। ज़रूरी मीटिंग है।

सेक्रेटरी (पति से): ऑफिस के काम से मुझे बॉस के साथ एक हफ्ते के लिए लंदन जाना है। जरूरी मीटिंग है।

पति (अपनी गर्लफ्रेंड से, जो एक टीचर है): मेरी बीवी एक हफ्ते के लिए बाहर जा रही है। उसके जाते ही तुम घर आ जाना।

गर्लफ्रेंड (स्टूडेंट्स से): बच्चो, मैं एक हफ्ते के लिए बाहर जा रही हूं, इसलिए तुम्हारी एक हफ्ते की छुट्टी।

एक स्टूडेंट (अपने पिता से, जो कि बॉस है): डैड, मेरी एक हफ्ते की छुट्टी है। मैं घर आ रहा हूं, आप कहीं मत जाना।

बॉस (सेक्रेटरी से): मेरा बेटा आ रहा है। लंदन जाना कैंसल।

सेक्रेटरी (पति से): लंदन जाना कैंसल हो गया।

पति (गर्लफ्रेंड से, जो कि टीचर है): पत्नी नहीं जा रही। हमारा प्रोग्राम कैंसल।

टीचर (स्टूडेंट्स से): बच्चो, आपकी छुट्टियां कैंसल।

स्टूडेंट (पिता से, जो कि बॉस है): पापा, मैं घर नहीं आ सकता। छुट्टियां कैंसल हो गईं।

2). बेचारा पति क्या करे ? – New Funny Hindi

1. सन्डे के दिन पति अगर देर तक सोया रहे तो :-
बीवी : अब उठ भी जाओ ! तुम्हारे जैसा भी कोई है क्या ? छुट्टी है तो इसका मतलब यह नहीं कि सोते ही रहोगे।

2. सन्डे के दिन पति अगर जल्दी उठ जाये तो :-
बीवी: पिछले जन्म में मुर्गे थे क्या ? एक दिन तो चैन से सोने को मिलता है, उसमें भी ठीक 5:30 बजे उठ कर कुकडू-कू करने लगते हो। इतना जल्दी उठकर क्या पहाड़ तोड़ लाओगे ?

3. सन्डे के दिन पति अगर घर पे ही रहे तो :-
बीवी: कुछ काम भी कर लिया करो। हफ्ते भर बाट देखते है तुम्हारे सन्डे की, उसे भी तुम केवल नहाने धोने में ही लगा देते हो।

4. सन्डे के दिन पति अगर घर से देर तक बाहर रहे तो :-
बीवी : कहाँ थे तुम आज पूरा दिन ? आज सन्डे है, कभी मुँह से भगवान का नाम भी ले लिया करो।

5. सन्डे के दिन पति अगर पूजा करे तो :-
बीवी : ये घन्टी बजाते रहने से कुछ नहीं होने वाला। अगर ऐसा होता तो इस दुनिया के रईसों में टाटा या बिल गेट्स का नाम नहीं होता बल्कि किसी पुजारी का नाम होता।

6. अगर टाटा या बिल गेट्स जैसा बनने के लिए पति दिन रात मेहनत करे तो …

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कोरा कागज़ ! kora Kagaz ! school love Story in Hindi ! बेस्ट लव स्टोरी हिंदी में ! best sad story in hindi! लव स्टोरी हिंदी में!

कोरा कागज़ ! kora Kagaz ! school love Story in Hindi ! बेस्ट लव स्टोरी हिंदी में ! best sad story in hindi! लव स्टोरी हिंदी में!

इस 4 वर्षीय इंजीनियरिंग कोर्स ने हमें बहुत कुछ दिया है। बहुत सारा पैसा , खूबसूरत पत्नी, हाई लेवल के दोस्त, इज्जत और अपने रिश्तेदारों में हमेशा चर्चा में बने रहने के मौके। शायद जिंदगी जीने के लिए किसी भी इंसान को ये सारी चीजें पर्याप्त है।
               मैंने लोगों को अक्सर  कहते  सुना है, “जिसके पास खूब सारा पैसा और खूबसूरत पत्नी हो तो उसे लाइफ से किसी भी तरह की कोई टिस नहीं रह जाती है।”
वैसे लोगों का यह कहना भी सत्य है। आखिर लोग पैसे भी तो इसलिए ही कमाते  हैं  कि उनके फैमली को किसी चींज की कमी ना हो या यूँ कह लीजिये, उनकी  खूबसूरत पत्नी और फैमली को सारी उम्र खर्च करने के लिए पैसे कम ना हो। 
शायद मैं भी उन्हीं में से एक हूं क्योंकि मेरा भी यही मानना है।
                  बचपन से ही इच्छा थी खूब पैसे कमायूं , गाड़ियां खरीदूं,विदेशों में सैर करूँ और इसी इच्छा को पुरे करने के लिए मैंने गुली-डंडे , गली क्रिकेट,लुक्का-छिपी खेल के अलावे लाइफ के बहुत सारे महत्वपूर्ण  चीजें को पीछे छोड़ आया हूँ जो शायद वो सभी अमूल्य थी। 
            मेरी इंजीनियरिंग पूरा होते ही एक सॉफ्टवेयर कम्पनी में सॉफ्टवेयर डेवल्पर के रूम में मेरी प्लेसमेंट हो गयी। नौकरी मिल जाने के कारण घर वालों ने मेरी शादी तय कर दी। लड़की दूर के रिश्तेदार की फैमली से थी। उसके घर वाले काफी पैसे वाले थे जिसके कारण गिफ्ट के रूप में कुछ दहेज भी मिल गये थे। 
इस शादी से मैं काफी खुश था। अब जिन्दगी से कोई शिकायत नही रह गयी थी. क्योंकि एक  अच्छे करियर के साथ-साथ एक अच्छी लाइफ पार्टनर भी मिल गयी थी।
                   शादी के बाद मैं अपनी पत्नी के साथ दिल्ली में ही शिफ्ट हो गया था और तब से लेकर अब तक अपनी पत्नी प्रतिमा के साथ दिल्ली में ही रहता हूँ । अब मेरा एक बेटा भी है जो पिछले महीने ही अपने उम्र के 10 वर्ष पूरे किए है। जब से दिल्ली में शिफ्ट हुआ हूँ तब से कभी वापस अपने गाँव जाने का दिल नही किया है, वहां के टूटी सड़के और पिछड़े बस्तियां मुझे कभी अपने ओर वापस आने के लिए उत्साहित नही है। यही कारण है जॉब के बाद कभी वापस अपने गाँव नही गया हूँ।
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हनुमान जी के चमत्कार की कहानी – जब मुझे और मेरे बच्चे को बचाया बजरंगबली ने

Hanuman Ji ke Chamatkar ki Kahani

ये बात है 2015 की गर्मियों की. मैं शादी के 5 साल बाद प्रेग्नेंट हुई थी, सब बहुत खुश थे. लेकिन हमारी ख़ुशी ज़्यादा दिन नहीं रही जब एक दिन मुझे प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में ब्लीडिंग होने लगी. मैं और मेरे पति फ़ौरन हॉस्पिटल के लिए रवाना हो गए. रास्ते में मेरे पति लगातार हनुमान चालीसा पढ़ रहे थे. जब हम हॉस्पिटल पहुंचे तो डॉक्टर ने चेक किया और कहा कि सब ठीक है, बस थोड़ा आराम की ज़रूरत है. उस दिन पहली बार मुझे लगा कि बजरंगबली ने मेरे बच्चे को बचा लिया.

Hanuman Ji ke Chamatkar ki Kahani

Hanuman Ji ke Chamatkar ki Kahani

अभी एक संकट ख़त्म ही हुआ था कि एक महीने बाद फिर से मेरे हाथो और पैरो में सूजन आ गयी. मुझे डायबिटीज तो पहले से ही थी और अब ब्लड प्रेशर भी होने लगा था. मुझे डॉक्टर ने कहा था कि अपना ब्लड प्रेशर कण्ट्रोल करना है लेकिन लाख कोशिश के बावजूद भो बीपी कण्ट्रोल में नहीं आ रहा था. यही नहीं मेरे दांत में भी असहनीय दर्द होने लगा था. इन सभी तकलीफो के बावजूद मैं हर रात अपने होने वाले बच्चे के लिए हनुमान चालीसा पढ़ती थी. कभी मैं पढ़ती थी तो कभी मेरे पति.

Hanuman Ji ke Chamatkar ki Kahani

प्रेगनेंसी के 6 महीने बाद मेरी हालत और भी ज़्यादा बिगड़ गयी क्यूंकि मेरा ब्लड प्रेशर ठीक नहीं हो रहा था. डॉक्टर ने बोल दिया था कि नार्मल डिलीवरी बहुत मुश्किल है. महीने में मैं कम से कम 6 बार तो डॉक्टर के पास जाती थी क्यूंकि कभी कुछ दिक्कत आ जाती थी तो कभी कुछ.

प्रेगनेंसी के आखिरी दिनों में मेरे शरीर में बहुत ज़्यादा सूजन आ गयी और डॉक्टर भी अब घबराने लगी थी लेकिन हनुमान जी पर  विश्वास था. आखिरकार मेरी नार्मल डिलीवरी हुई जो कि एक डायबिटीज वाली औरत के लिए बहुत कम देखने को मिलता है. मैंने बहुत ही प्यारे लड़के को जन्म दिया और मेरे शरीर की सूजन भी धीरे धीरे कम हो गयी.

Hanuman Ji ke Chamatkar ki Kahani

आज मैं, मेरे पति और सभी घरवाले बहुत खुश है और ये सब हनुमान जी के चमत्कार के कारण ही हुआ. डिलीवरी के वक़्त भी मेरे पति लगातार हनुमान चालीसा पढ़ते रहे और इसी वजह से सब कुछ ठीक रहा.

मेरा मानना है कि विश्वास बहुत ज़रूरी है क्यूंकि अगर विश्वास है तो आप पर्वत भी हिला सकते हो.

मुझे लगता है कि …

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किन्नर की दुनिया जन्म से मौत तक – Kinner Life & Death Story in Hindi

Hum aapke liye laye hai Kinner ki Life Story in Hindi aur Kinner Death Story in Hindi taki aap jaan sake ki kinner ke janm se maut tak ka safar kaisa hota hai.

Kinner Life Story in Hindi

ज़्यादातर लोग किन्नर की ज़िन्दगी और मौत से जुड़े पहलु नहीं जानते। आज भी भारतीय समाज में किन्नर की ज़िन्दगी एक रहस्य बानी हुई है लेकिन हम इस पोस्ट के ज़रिये आपको किन्नर की ज़िन्दगी से लेकर मौत तक की पूरी कहानी बताने जा रहे है.

कैसे होता है किन्नर का जन्म ?

Kinner Life Story in Hindi – भ्रूण के विकास के दौरान अगर शुक्राणु अस्पष्ट रूप से अंडे में हो तो किन्नर का जन्म होता है. किन्नर में एक औरत और मर्द की विशेषताएं होती है यानी किन्नरों में लिंग और योनि दोनों होती है लेकिन उनमे असामान्य सेक्स हॉर्मोन होते है जिसकी वजह से वे ना तो औरत में गिने जाते है और न मर्दो में. ज़्यादातर किन्नर मर्द की तरह दीखते है लेकिन उनका शरीर एक औरत की तरह होता है. भारतीय इतिहास में किन्नर पुरातनकाल से मुजूद है. ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति अपने इस जन्म में बहुत ज़्यादा पाप करता है वो अगले जन्म में किन्नर के रूप में पैदा होता है. Kinner Death Story in Hindi

किन्नर का आशीर्वाद

Kinner ki Life Story – किन्नर यदि किसी को दिल से आशीर्वाद दे दें तो उसके लिए बहुत शुभ होता है. इसीलिए किन्नर हमेशा शादी में नए जोड़े और बच्चे के जन्म के समय उसे अपना आशीर्वाद देने आते है. घर में आये किन्नर को कभी खाली हाथ नहीं भेजना चाहिए.

कई लोग अपनी मर्जी से भी किन्नर बनते है

Kinner Life Story in Hindi

जी हाँ, ये सुनने में थोड़ा अजीब है लेकिन सच है. कई लोग अपनी मर्जी से भी किन्नर बनते है और इसका भी एक अनुष्ठान है. इस रिवाज़ के अनुसार नपुंसक मर्द किन्नरों के पास जाता है और उनसे अनुरोध करता है कि किन्नर उसे अपना चेला बना ले. फिर रीती रिवाज़ो के अनुसार उस नपुंसक मर्द को औरत के कपडे व पूरा साज सिंगार करके कमाख्या माता की पूजा में बैठना होता है. भारत में कई ऐसे किस्से देखने को मिले है जिनमे एक मर्द को किन्नर बनाया जाता है. यही नहीं कई मर्द सर्जरी का सहारा लेकर अपना लिंग शरीर से निकलवा देते है ताकि वे पूरी तरह किन्नर बन सके. नीचे हमने दो videos दिखाई है जिससे आपको पता चल जाएगा …

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जब पति को बचाने के लिए 3 KM दौड़ी 66 वर्षीय लता – Motivational Story in Hindi

Motivational Story in Hindi

Submitted by Prashant

Motivational Story in Hindi

जब पति को बचाने के लिए 3 KM दौड़ी 66 वर्षीय लता – Motivational Story in Hindi

सुबह 8 बजे का वक़्त था, मैं हर रोज़ सुबह सुबह जॉगिंग (Jogging) के लिए जाता हू और उस दिन भी मैं बाहर दौड़ के लिए जाने लगा था अचानक पड़ोस के शर्मा जी ने बताया पास में ही एक मैराथन दौड़ हो रही है. मैराथन दौड़ वो होती है जिसमे हज़ारो लोग किसी नेक काम के लिए दौड़ते है ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग उस उद्देश्य के लिए जागरूक हो सके.

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बस फिर क्या था, मैं भी मैराथन दौड़ में भाग लेने के लिए चला गया. वो मैराथन दौड़ 3 किलोमीटर की थी और मुझे यकीन था कि मैं बड़ी आसानी से कर लूंगा. जब रेस शुरू होने लगी तो मैंने देखा कि एक बुजुर्ग औरत जो कि करीबन 60-65 साल की होगी, वो भी मैराथन दौड़ में हिस्सा लेने के लिए खड़ी थी. सिर्फ यही बात की हैरानी नहीं थी मुझे, उस औरत ने चप्पलें नहीं डाली थी और वो साडी पहने हुए थी. मैंने दिल में सोचा “साडी में कौन दौड़ता है??”

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खैर, रेस शुरू हुई और मैं काफी आगे निकल गया …… लेकिन 5 मिनट में मैंने जो देखा वो देख कर मेरी आँखे फटी की फटी रह गयी. वो इतनी बुजुर्ग औरत अब एक ओलिंपिक खिलाडी की तरह दौड़ते हुए हर एक को पीछे छोड़ती जा रही थी. 2 किलोमटेर दौड़ने के बाद मैं थोड़ा slow हो गया लेकिन वो औरत भागते जा रही थी और आखिरकार उसने वो मैराथन रेस पूरी कर ली. वो औरत पहले नंबर पर थी और ये देख कर वह मुजूद सभी हैरान परेशान थे.

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उस बूढी औरत ने जैसे ही पहले स्थान के साथ मैराथन पूरी की, तभी सभी पत्रकार उसकी तरफ भाग पड़े और तरह-तरह के सवाल पूछने लगे. एक पत्रकार ने पुछा “आप बिना चप्पलो के मैराथन जीत गयी, कैसा लगा रहा है, आपको किसने प्रोत्साहित किया और आपका नाम क्या है?”

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उस बूढी औरत ने बताया कि उसका नाम लता करे (Latha Kare) है और उसकी उम्र 66 साल है. उसने बताया कि उसके पति बहुत बीमार है और हॉस्पिटल में दाखिल है. उस औरत ने आगे कहा ” मेरे पास अपने पति के इलाज के पैसे नहीं है और इसलिए मैंने कुछ पैसे कमाने के …

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अपने ही पति के मौत की रिपोर्टिंग एंकर द्वारा – Great Story in Hindi

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Submitted by Roshan Dhall

ये जो आप ऊपर तस्वीर देख रहे हो, ये है सुखप्रीत कौर. ये IBC 24 न्यूज़ चैनल की रिपोर्टर है.

एक दिन सामान्य रूप से सुखप्रीत अपनी रिपोर्टिंग कर रही थी. ये एक न्यूज़ पर चर्चा कर रही थी जिसमे कि दो लोग घायल और एक आदमी की मौत हो गयी थी.

ये न्यूज़ थी मध्य प्रदेश के पिथोरा जिले की.

न्यूज़ की रिपोर्टिंग करते करते सुखप्रीत को याद आया कि उसका पति भी पिथोरा में है और जो कार टीवी पर दिखाई जा रही थी, उसके पति भी वैसी ही कार में सफर कर रहे थे. धुंधली सी उस एक्सीडेंट की वीडियो में से सुखप्रीत ने अपने पति को पहचान लिया.

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हालांकि, सुखप्रीत को पता चल गया था कि इस हादसे में उसके पति की मौत हो चुकी है लेकिन बजाये कि घबराने या रोने के, सुखप्रीत अपनी रिपोर्टिंग करती रही और दर्शकों को उस एक्सीडेंट के बारे में बताती रही. रिपोर्टिंग के दौरान सुखप्रीत के आँखों से एक भी आंसू नहीं निकला लेकिन जैसे ही सुखप्रीत ने अपनी रिपोर्टिंग पूरी की वो अपने जज्बात पर काबू ना कर पायी और रो दी.

अपने काम के प्रति ऐसी निष्ठा बहुत कम देखने को मिलती है. इस घटना के बाद IBC 24 न्यूज़ चैनल के सभी कर्मचारियों ने सुखप्रीत के साहस की तारीफ जकी और इस दुखद घटना में सुखप्रीत का पूरा साथ भी दिया.

दोस्तों यह रियल स्टोरी के बारे में आप क्या सोचते हैं हमें कमेंट में जरूर बताएं. आपके पास भी कोई रियल स्टोरी हो तो हमें भेजे।…

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