बशीर बद्र – उर्दू शायरी & ग़ज़ल

हमा वक़्त रंज-ओ-मलाल क्या , जो गुज़र गया सो गुज़र गया
उसे याद कर के न दिल दुखा , जो गुज़र गया सो गुज़र गया ।

                  न गिला किया न खफा हुए , यूं ही रास्ते में जुदा हुए
                  न तू बेवफा न में बेवफा , जो गुज़र गया सो गुज़र गया ।

वो ग़ज़ल की एक किताब था , वो गुलाबों में एक गुलाब था
ज़रा देर का कोई ख्वाब था , जो गुज़र गया सो गुज़र गया ।

                   मुझे पतझड़ों की कहानिया , न सुना सुना कर उदास कर
                   तू ख़िज़ाँ का फूल है मुस्कुरा , जो गुज़र गया सो गुज़र गया ।

वो उदास धूप समेट कर , कहीं वादियों में उतर चूका
उसे अब न दे मेरे दिल सदा ,जो गुज़र गया सो गुज़र गया ।

                  यह सफर भी कितना तवील है , यहाँ वक़्त कितना क़लील है
                 कहाँ लौट कर कोई आएगा , जो गुज़र गया सो गुज़र गया ।

वो वफ़ाएँ थी या जफायें थी , यह न सोच किस की खतायें थी
वो तेरे है उस को गले लगा , जो गुज़र गया सो गुज़र गया ।

                  तुझे ऐतबार -ओ -यकीन नहीं , न ही दुनिया इतनी बुरी नहीं
                  न मलाल कर मेरे साथ आ , जो गुज़र गया सो गुज़र गया ।


Hama Waqt Ranj-O-Malaal Kya , Jo Guzaar Gaya So Guzar Gaya
Usay Yaad Kar Key Na Dil Dukha , Jo Guzaar Gya So Guzar Gaya

                    Na Gila Kiya Na Khafa Hue, Yoon Hi Raastey Mein Juda Hue
                    Na Tu Bewafa Na Mein Bewafa, Jo Guzaar Gya So Guzar Gaya

Wo Gazal Ki Ek Kitab Tha , Wo Gulabon Mein Ek Gulab Tha
Zara Der Ka Koi Khwaab Tha, Jo Guzaar Gya So Guzar Gaya

                    Mujhey Patjharon Ki Kahaniya , Na Suna Suna Kar Udaas Kar
                    Tu Kizaan Ka Phool Hai Muskura, Jo Guzaar Gya So Guzar Gaya

Wo Udaas Dhoop Samait Kar , Kahin Wadiyon Mein Utaar Chuka
Usay Ab Na Dey Mere Dil Sada,Jo Guzaar Gya So Guzar Gaya

                    Yeh Safaar Bhi Kitna Taweel Hai, Yahan Waqt Kitna Qaleel Hai
                   Kahan Laut Kat Koi Ayee Ga , Jo Guzaar Gya So Guzar Gaya

Wo Wafaein Thi Ya Jafaien Thi, Yeh Na Soch Kis Ki Khataien Thi
Wo Tere Hai Us Ko Gale Laga, Jo Guzaar Gya So Guzar Gaya

                  Tujhe Aitbar-O-Yakeen Nahin, Na Hi Duniya Itni Buri Nahi
                  Na Malaal Kar Mere Saath Aa , Jo Guzaar Gya So …

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यह इश्क़ वाले हैं जो हर चीज़ लूटा देते हैं – ग़ालिब

यह इश्क़ वाले

अक़्ल वालों के मुक़द्दर में यह जूनून कहाँ ग़ालिब
यह इश्क़ वाले हैं जो हर चीज़ लूटा देते हैं ….

Yeh Ishq Wale

Aqal Walon ke Muqaddar mein Yeh Junoon Kahan Ghalib,
Yeh Ishq Wale hain Jo Har cheez Luta Deta Hain…..


ज़ाहिर है तेरा हाल

ग़ालिब न कर हुज़ूर में तू बार बार अरज़
ज़ाहिर है तेरा हाल सब उन पर कहे बग़ैर

Zaahir Hai Tera Haal

Ghalib na kar huzoor mein tu bar bar arz,
Zaahir hai tera haal sab un par kahe baghair !!


वो आये घर में  हमारे

यह जो हम हिज्र में दीवार-ओ -दर को देखते हैं
कभी सबा को कभी नामाबर को देखते हैं

वो आये घर में  हमारे , खुदा की कुदरत है
कभी हम उन को कभी अपने घर को देखते हैं

नज़र लगे न कहीं उसके दस्त-ओ -बाज़ू को
ये लोग क्यों मेरे ज़ख्म-ऐ -जिगर को देखते हैं

तेरे जवाहीर-ऐ- तरफ ऐ-कुलाह को क्या देखें
हम ओज-ऐ-ताला- ऐ-लाल-ओ-गुहार को देखते हैं

Wo Aaye Ghar Mein Hamaare

Ye jo ham hijr mein diivaar-o-dar ko dekhate hain
kabhii sabaa ko kabhii naamaabar ko dekhate hain

Wo aaye ghar mein hamaare, Khudaa kii kudarat hai
kabhii ham un ko kabhii apane ghar ko dekhate hain

nazar lage na kahii.n usake dast-o-baazuu ko
ye log kyon mere zaKhm-e-jigar ko dekhate hain

tere javaahiir-e- tarf-e-kulah ko kyaa dekhein
ham auj-e-taalaa- e-laal-o- guhar ko dekhate hain…..…

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खुदा तो मिलता है , इंसान ही नहीं मिलता

खुदा तो मिलता है , इंसान ही नहीं मिलता ,
यह चीज़ वो है जो देखी कहीं कहीं मैंने ..

Khudaa to milta hai, Insaan hi nahi milta,
Yeh cheez woh hai jo dekhi kahin kahin meine…


जिन के आँगन में अमीरी का शजर लगता है ,
उन का हर ऐब भी ज़माने को हुनर लगता है …

Jin ke angan mein Ameeri ka shajar lagta hai,
Un ka har aaib bhi zamane ko hunar lagta hai…


तेरी बन्दा परवारी से मेरे दिन गुज़र रहे हैं
न गिला है दोस्तों का , न शिकायत -ऐ -ज़माना

Teri Banda Parwari Se Mere Din Guzaar Rahe Hain
Na Gila Hai Doston Ka, Na Shikayat-e-Zamana…


और भी कर देता है दर्द में इज़ाफ़ा
तेरे होते हुए गैरों का दिलासा देना

Aur bhi kar daita hai Dard mein Izafa
Tere hote huwe Gairoon ka Dilasa daina…

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वक़्त की क़ैद में ज़िन्दगी – फैयाज़ शायरी

तुझसे मिलकर


तुझसे मिलकर हमें रोना था बहुत रोना था,
तंगी-ए-वक़्त-ए-मुलाक़ात ने रोने न दिया.

हिंदी और उर्दू शायरी – वक़्त शायरी – तुझसे मिलकर हमें रोना था बहुत रोना था

Tujhase Milakar

Tujhase milakar hamene ronaa thaa bahut ronaa thaa
tangii-ae-waqt-ae-mulaaqaat ne rone na diyaa

Hindi and urdu shayari – Waqt Shayari – tujhase milakar hamene ronaa thaa bahut

वक़्त की क़ैद में ज़िन्दगी

वक़्त की क़ैद में ज़िन्दगी है मगर,
चंद घड़ियाँ यही हैं जो आज़ाद हैं,
इन को खो कर अभी जान-ए-जाँ,
उम्र भर न तरसते रहो.

– फैयाज़
हिंदी और उर्दू शायरी – वक़्त शायरी – वक़्त की क़ैद में ज़िन्दगी है मगर

Waqt ki Qaid Mein Zindagi

waqt ki qaid mein zindagi hai magar
chand ghadiyaan yahi hain jo aazaad hai
In ko khoo kar abhi jaan-e-jaaN
umar bhar na taraste raho –

–Faiyaz
Hindi and urdu shayari – Waqt Shayari – waqt ki qaid mein zindagi hai magar
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दुःख दे कर सवाल करते हो – उर्दू शायरी

दुःख दे कर सवाल करते हो ,
तुम भी ग़ालिब ! कमाल करते हो ..

Dukh Day Kar Sawaal Kartay ho,
Tum Bhe GHAALiB ! Kamaal Kartay ho..

यह हम ही जानते हैं जुदाई के मोड़ पर ,
इस दिल का जो भी हाल तुझे देख कर हुआ ..

Yeah hum hi jantey hain judaai ke mod par,
Is dil ka jo bhi haal tujhe dekh kar hua..

क्या ज़रूरी है के हम हार के जीतें, ताबिश
इश्क़ का खेल बराबर भी तो हो सकता है…

Kia Zaroori Hai Ke Hum Haar Ke Jeetien Tabish
Ishq Ka Khel Baraber Bhi To Ho Sakta Hai…

तुम आज हँसते हो हँस लो मुझ पर ये आजमाइश न बार बार होगी
मैं जनता हूँ मुझे खबर है के कल फ़िज़ा खुशगवार होगी .

Tum Aj Hanste Ho Hans Lo Mujh Par Ye Ajamaish Naa Bar Bar Hogi
Main Janta Hun Mujhe Khabar Hai Ki Kal Faza Khushgawar Hogi.

लगा न दिल को क्या सूना नहीं तूने ,
जो कुछ के मीर का इस आशिक़ी ने हाल किया ..

Laga na dil ko kya sunaa nahin tu ne,
Jo kuch ke Meer ka is aashqi ne haal kiya..

इश्क़ माशूक़ इश्क़ आशिक़ है ,
यानी अपना ही मुबतला है इश्क़ .
इश्क़ है तर्ज़ -ओ -तौर इश्क़ के ताईं ,
कहीं बंदा कहीं खुदा है इश्क़ .

Ishq maashuq ishq aashiq hai,
Yaani apna hi mubtala hai ishq.
Ishq hai tarz-o-taur ishq ke taeen,
Kahin banda kahin Khuda hai ishq.

बस के दुस्बार है हर काम का आसान होना ,
आदमी को भी मुयस्सर नहीं इंसान होना ,

मेरे कत्ल के बाद उसने की जफ़ा से तौबा ,
हाय उस जोर पशेमान का पशेमान होना ,

है उस चारगिरह कपड़े की क़िस्मत ‘ग़ालिब ,
जिस की क़िस्मत में हो आशिक़ का गिरेवान होना ..!!

Bus ke Dushwaar hai har kaam ka Asaan hona,
Admi ko bhi muyassar nahin insaaN hona,

ki Mere Qatal ke baad Usne jafa se Tauba,
Haye Us zoad pasheman ka pasheman hona,

Haif us chaar girah kaprhe ki Qismat ‘GHalib,
Jis ki Qismat main ho Ashiq ka GarebaN hona..!!

जो काम आसान समझ रहे हो वो काम मुमकिन नहीं रहेगा
वफ़ा का काग़ज़ तो भीग जाएगा बदगुमानी की बारिशों में
खतों की बातें तो ख्वाब होंगी पयाम मुमकिन नहीं रहेगा
में जानती हूँ मुझे यक़ीन है अगर कभी तू मुझे भुला दे
तो तेरी आँखो में रौशनी का क़याम मुमकिन …

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हमारे दिल ने अगर हौसले किये होते – Noshi Gilani ki Shayari

मेरी सांसें

यह नामुमकिन नहीं रहेगा , मुक़ाम मुमकिन नहीं रहेगा
ग़रूर लहजे में आ गया तो कलाम मुमकिन नहीं रहेगा
तुम अपनी साँसों से मेरी सांसें अलग तो करने लगे हो लेकिन
जो काम आसान समझ रहे हो वो काम मुमकिन नहीं रहेगा

Meri Saansain

Yeh Nammumkin Nahi rahega, Muqaam Mumkin Nahi rahega
Gharoor Lehjay Mein Aa Gaya To Kalaam Mumkin Nahi rahega
Tum Apni Saanson Se Meri Saansain Alag To Karnay Lagay ho Laikin
Jo Kaam Aasaan Samajh Rahay ho Wo Kaam Mumkin Nahi rahega…


एहले-ऐ-इश्क़

कभी यह चुप में कभी मेरी बात बात में था
तुम्हारा अक्स मेरी सारी क़ायनात में था
हम एहले-ऐ-इश्क़ बहुत बदगुमाँ होते हैं
इसी तरह का कोई वस्फ तेरी ज़ात में था ..

Ehle-ae-ishq

Kahbi yeh chup main kabhi meri baat baat main tha,
Tumhara akss meri saari kayenaat mein tha,
Hum ehle-ae-ishq bahut bdgumaan hote hain,
isi tarah ka koi vasf teri zaat mein tha…


अगर हौसले किये होते

हमारे बस में अगर अपने फैसले होते
तो हम कभी के घरों को पलट गए होते

करीब रह के सुलगने से कितना बेहतर था
किसी मुक़ाम पर हम तुम बिछड़ गए होते

हमारे नाम पे कोई चिराग तो जलता
किसी जुबान पर हमारे भी तजकरे होते

हम अपना कोई अलग रास्ता बना लेते
हमारे दिल ने अगर हौसले किये होते

Agar Hoslay Kye Hotay

Hamaray Bas Mein Agar Apne Faislay Hotay
Tou Hum Kubhi Ke gharon Ko Palat Gaye Hotay

Qareeb Reh Ke Sulaghnay Se Kitna Behtar Tha
Kisi Muqaam Per Hum Tum Bicharr Gaye Hotay

Hamaray Naam Pe Koi Charaagh Tou Jalta
Kisi Zabaan Pe Hamaray Bhi Tazkaray Hotay

Ham Apna Koi Alag Raasta Bana Letay
Hamaray Dil Ne Agar Hoslay Kye Hotay……

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अगर न बदलू तेरी खातिर हर एक चीज़ तो कहना – आलम इक़बाल की शायरी

अगर न बदलू तेरी खातिर हर एक चीज़ तो कहना

मुहब्बत की तमना है तो फिर वो वस्फ पैदा कर
जहां से इश्क़ चलता है वहां तक नाम पैदा कर

अगर सचा है इश्क़ में तू ऐ बानी आदम
निग़ाह -ऐ -इश्क़ पैदा कर

मैं तुझ को तुझसे ज़्यादा चाहूँगा
मगर शर्त ये है के अपने अंदर जुस्तजू तो पैदा कर

अगर न बदलू तेरी खातिर हर एक चीज़ तो कहना
तू अपने आप में पहले अंदाज़ -ऐ -वफ़ा तो पैदा कर

Agar Na Badlu Teri Khatir Har Ek Cheez To Kehna

Muhabbt Ki Tamna Hai To Phir Wo Vasf Peda Kar
Jahan Se Ishq Chalta Hai Wahan Tak Naaam Peda Kar

Agar Sacha Hai Ishq Mein Tu Ae Bani ADAM
Nighah-E-Ishq Peda Kar

Main Tujh Ko Tujh Se Ziada Chahunga
Magar Shart Yeh Hai Ki Apne Andar Justju To Pedaa Kar

Agar Na Badlu Teri Khatir Har Ek Cheez To Kehna
Tu Apne Aap Mein Pehle ANDAAZ-AE-Wafa To Paida Kar

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Best Ever Shayari Colletion of Munir Niazi – मुनीर नियाज़ी शायरी मजमूआ

उसके जाने का रंज

मेरी सदा हवा में बहुत दूर तक गयी
पर मैं बुला रहा था जिसे , वो बेखबर रहा
उसकी आखिरी नज़र में अजब दर्द था “मुनीर”
उसके जाने का रंज मुझे उम्र भर रहा

Uske Jaane Ka Ranj

Meri Sada Hawa Mein Bohat Door Tak Gayi
Par Main Bula Raha Tha Jise, wo Bekhabar Raha
Uski Aakhiri Nazar Mein Ajab Dard Tha “Munir”
Uske Jaane Ka Ranj Mujhe Umar Bhar Raha


हम जवाब क्या देते

किसी को अपने अमल का हिसाब क्या देते
सवाल सारे ग़लत थे, हम जवाब क्या देते
हवा की तरह मुसाफिर थे, दिलबरों के दिल
उन्हें बस एक ही घर का अजाब क्या देते

Hum Jawab Kya Dete

Kisi Ko Apnay Amal Ka Hisaab Kya Dete
Sawaal Saare Ghalat The, Hum Jawab Kya Dete
Hawa Ki Tarha Musafir The, Dilbaron Ke Dil
Unhain Bus Ak Hi Ghar Ka Azaab Kya Dete


ज़ुल्म मेरे नाम

शहर में वो मोअतबर मेरी गवाही से हुआ
फिर मुझे इस शहर में नमोअतबर उसी ने किया
शहर को बर्बाद करके रख दिया उस ने “मुनीर”
शहर पर यह ज़ुल्म मेरे नाम पर उसने किया

Zulam Mere Naam

Shehar mein wo moatbir meri gawahi se huwa
Phir mujhe is shehar mein namoatbir usi ne kiya
Shehar ko barbaad kar kay rakh diya us ne “Munir”
Shehar par yeh zulam mere naam per usi ne kiya


ऐसे भी हम नहीं

ग़म से लिपट जाएंगे ऐसे भी हम नहीं
दुनिया से कट ही जाएंगे ऐसे भी हम नही
इतने सवाल दिल में हैं और वो खामोश देर
इस देर से हट जाएंगे ऐसे भी हम नहीं

Aise Bhi Hum Nahi

Gham say lipat jaingay Aise bhi hum nahi
Duniya say kat hi jaingay Aise b hum nahi
Itnay sawal dil mein hain or wo khamosh der
Is der say hat jaingay Aise bhi hum nahi


गम की बारिश

गम की बारिश ने भी तेरे नक़्श को धोया नहीं
तूने मुझ को खो दिया मैंने तुझे खोया नहीं
जानता हूँ एक ऐसे शख्स को मैं भी “मुनीर”
गम से पत्थर हो गया लेकिन कभी रोया नहीं

Gam Ki Barish

Gam ki barish ne bhi tere naqsh ko dhoya nahin
Tune mujh ko khoo diya mainne tujhe khoya nahin
Janata hoon Ek aise shaKhs ko main bhi “Munir”
Gam se patthar ho gaya lekin kabhi roya nahin


शहर-ऐ-संगदिल

इस शहर-ऐ-संगदिल को जला देना चाहिए
फिर इस की ख़ाक को भी उड़ा देना …

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Mirza Ghalib – मिर्ज़ा ग़ालिब

तू तो वो जालिम है

तू तो वो जालिम है जो दिल में रह कर भी मेरा न बन सका , ग़ालिब
और दिल वो काफिर, जो मुझ में रह कर भी तेरा हो गया..


हजारों ख्वाहिशें

हजारों ख्वाहिशें ऐसी की हर ख्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मेरे अरमान , लेकिन फिर भी कम निकले..


खुदा की कुदरत

वो आये घर में हमारे , खुदा की कुदरत है
कभी हम उन्हें कभी अपने घर को देखते है..


जहाँ खुदा नहीं है

पीने दे शराब मस्जिद में बैठ के , ग़ालिब
या वो जगह बता जहाँ खुदा नहीं है..


यूं होता तो क्या होता

हुई मुद्दत के ग़ालिब मर गया, पर याद आती है
जो हर एक बात पे कहना की यूं होता तो क्या होता..


इश्क़ पर जोर नहीं

इश्क़ पर जोर नहीं , यह तो वो आतिश है,  ग़ालिब
के लगाये न लगे और बुझाए न बुझे..


आह को चाहिए एक उम्र

आह को चाहिए एक उम्र असर होने तक
कौन जीता है तेरी जुलफ के सर होने तक

हमने माना की तग़ाफ़ुल न करेंगे लेकिन
खाक हो जायगे हम तुम्हे खबर होने तक

आशिक़ी सब्र -तलब और तमना बेताब
दिल का  क्या रंग करू, खून-ऐ-जिगर होने तक…

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Wasi Shah Shayari – Ankhon Se Meri is Liye Lali Nahi Jati


आँखों से मेरी इस लिए लाली नहीं जाती
यादों से कोई रात जो खाली नहीं जाती

अब उम्र न मौसम न वो रास्ते के वो पलटे
इस दिल की मगर खामं ख्याली नही जाती

मांगे तू अगर जान भी हंस के तुझे दे दें
तेरी तो कोई बात भी टाली नहीं जाती

अब आए कोई आकर यह तेरे दर्द संभाले
अब हम से तो यह ज़ागीर संभाली नहीं जाती

मालूम हमें भी हैं बहुत से तेरे क़िस्से
हर बात तेरी हम से उछाली नही जाती

हमराह तेरे फूल खिलाती थी जो दिल में
अब शाम वही दर्द से खाली नहीं जाती

हम जान से जायेंगे तभी बात बनेगी
तुम से तो कोई राह  निकली नहीं जाती ….!!!

Ankhon Se Meri is Liye Lali Nahi Jati
Yadoon Se Koi Raat jo Khali Nahi Jati

Ab Umar Na Mosam Na Woh Rastey Ke wo palte
Iss Dil Ki Magar Khaam Khayali Nahe Jati

Maange Tu Agar Jaan Bhi Hans kay tujhay De-Dein
Teri To Koi Baat Bhi Taali Nahi Jaati

Aya Koi Aaker Yeh Tere Dard Sambhaley
Hum Sai To Yeh Jageer Sambhali Nahi Jati

Maloom Humen Bhi Hain Bahut Se Tere Qissay
Har Baat Teri Hum Se Uchhali Nahi Jati

Humrah Tere Phool Khilaati Thi Jo Dil Mein
Ab Shaam Wahi Dard Se Khaali Nahi Jati

Hum Jaan Se Jayainge Tabhi Baat Banegi
Tum Se To Koi Raah Nikali Nahi Jati

Shayari Writen By – Wasi Shah…

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