ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा

ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा
क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा

अपने साए से चौंक जाते हैं
उम्र गुज़री है इस क़दर तन्हा

रात भर बोलते हैं सन्नाटे
रात काटे कोई किधर तन्हा

दिन गुज़रता नहीं है लोगों में
रात होती नहीं बसर तन्हा

हमने दरवाज़े तक तो देखा था
फिर ना जाने गये किधर तन्हा

-गुलज़ार…

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चलो ना भटके 

चलो ना भटके
लफंगे कूचों में
लुच्ची गलियों के
चौक देखें
सुना है वो लोग
चूस कर जिन को वक़्त ने
रास्तें में फेंका था
सब यहीं आके बस गये हैं
यह छिलके हैं ज़िंदगी के
इन का अर्क निकालो
की ज़हर इन का
तुम्हारे जिस्मों में
ज़हर पलते हैं
और जितने वो मार देगा
चलो ना भटके
लफंगे कूचों में

-गुलज़ार…

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राज़ की बातें लिखी और खत खुला रहने दिया

राज़ की बातें लिखी और खत खुला रहने दिया
जाने क्यों रुसवां का सिलसिला रहने दिया

उम्र भर मेरे साथ रहकर वो ना समझा दिल की बात
दो दिलों के दरमियाँ इक फासला रहने दिया

अपनी फितरत वो बदल पाया ना इसके बावजूद
ख़त्म की रंजिश मगर गिला रहने दिया

मैं समझता था खुशी देगी मुझे “साबिर” फरेब
इस लिए मैं ने गमों से राब्ता रहने दिया

-साबिर जलालाबादी…

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तू कहीं भी रहे सर पे तेरे इल्ज़ाम तो है

तू कहीं भी रहे सर पे तेरे इल्ज़ाम तो है
तेरे हाथों की लकीरों में मेरा नाम तो है

मुझको तू अपना बना या ना बना तेरी खुशी
तू ज़माने में मेरे नाम से बदनाम तो है

मेरे हिस्से में कोई जाम ना आया ना सही
तेरी महफ़िल में मेरे नाम कोई शाम तो है

देख कर लोग मुझे नाम तेरा लेते हैं
इस पे मैं खुश हूँ मुहब्बत का ये अंजाम तो है

वो सीतमगार ही सही देख के उसको “साबिर”
शुक्र इस दिल-ए-बीमार को आराम तो है

-साबिर जलालाबादी

 …

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तुम्हारे खत में नया इक सलाम किस का था

तुम्हारे खत में नया इक सलाम किस का था
ना था रक़ीब तो आखिर वो नाम किस का था

वो क़त्ल कर के हर किसी से पूछते हैं
ये काम किस ने किया है ये काम किस का था

वफ़ा करेंगे निभाएँगे बात मानेंगे
तुम्हें भी याद है कुछ ये कलाम किस का था

रहा ना दिल में वो बे-दर्द और दर्द रहा
मुक़ीम कौन हुआ है मक़ाम किस का था

ना पूछ पूछ किसी की ना आव-भगत
तुम्हारी बज़्म में कल एहतमाम किस का था

हमारे खत के तो पुर्ज़े किए पढ़ा भी नहीं
सुना जो तुम ने बा-दिल वो पयाम किस का था

इन्हीं सिफ़त से होता है आदमी मशहूर
जो लुत्फ़ आप ही करते तो नाम किस का था

गुज़र गया वो ज़माना कहें तो किस से कहें
ख़याल मेरे दिल को सुबह-ओ-शाम किस का था

हर एक से कहते हैं क्या “दाग” बेवफा निकाला
ये पूछे इन से कोई वो गुलाम किस का था

-दाग देहलवी…

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बात निकली है तो दूर तक जानी चाहिये.

बेटी निकलती है तो कहते हो छोटे कपड़े पहन कर मत जाओ,
पर बेटे से नहीं कहते हो की नज़रों मैं गंदगी मत लाओ.
बेटी से कहते हो की कभी घर की इज़्ज़त खराब मत करना.
बेटे से क्यों नहीं कहते की किसी के घर
की इज़्ज़त से खिलवाड़ नहीं करना?
हर वक़्त हो नज़र बेटी के फोनपे पर,
ये भी तो देखो बेटा क्या करता है इंटरनेटपे.
किसी लड़के से बात करते देख जो भाई भड़कता है,
वोही भाई अपनी गर्लफ्रेंड के
किस्से घर मैं हंस हंस कर सुनाता है.
बेटा घूमे गर्लफ्रेंड के साथ तो कहते हो
अरे बेटा बड़ा हो गया.
बेटी अपने अगर दोस्त से भी बातें
करें तो कहते हो बेशर्म हो गयी,
इसका दिमाग खराब हो गया.
पहले शोषण घर से बंद करो तब
शिकायत करना समाज से.
हर बेटे से कहो की हर बेटी की इज़्ज़त करे आज से,
बात निकली है तो दूर तक जानी चाहिये.
#Tushidha
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JANU KO GALE LAGA KE – Akash

Pahali bar mile apani jan se muskura ke,
Dur hone ka man nhi kr raha tha pass aa ke,
Dil ki sari bechaini dur karani thi,
Bas ek bar apane janu ko gale laga ke…

Vo rat bhar mere pass soi. Rato ko sapano me khoi,
Sari duriya mita gaya vo lamha,
Jb vo soi mere pass aa ke…

Dil kr raha tha gale laga ke sou,
Sari rat usake sath sapano me khou,
Ji bhar ke sukun ki sans lu,
Usako apani banho me sama ke…

Subah jb jgaya mujhe to, sab khali-khali sa tha,
Bas waha vo thi aur mai tha,
Labo par ek jam chaha aur muskurakar diya usane…

Pass aya mai usake apane sare dard bhula ke,
Janu bani vo meri. Meri dilo jan me sama ke,
Bate karata hu ab mai sabase muskura ke,
Bas khvahish hai meri,
Ek aur jam mil jaye,
Gale laga ke… !!!…

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जहाँ सूर्य की कीरण हो

जहाँ सूर्य की कीरण हो…
वही प्रकाश होता है…
जहाँ मां बाप का सम्मान हो…
वही भव पार होता है…
जहाँ संतो की वाणी हो…
वही उद्धार होता है…
और…
जँहा प्रेम की भाषा हो…
वही परीवार होता है…!!…

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Motivational Quotes in Hindi

साथियों नमस्कार, आज के इस अंक में हम आपके लिए लेकर आएं हैं कुछ ऐसे “Motivational Quotes in Hindi” लेकर आएं हैं जिन्हें पढने के पास आपके जीवन में एक नई प्रेरणा का संचार होगा| इन “Motivational Quotes in Hindi on Success” को आप अपने Facebook, Whatsapp की मदद से अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों को भी भेज सकते हैं|

ख्वाहिशें भले छोटी हो लेकिन उन्हें पूरी करने के लिए दिल जिद्दी होना चाहिए!

हौसला होना चाहिए बस, जिंदगी तो कहीं से भी शुरू हो सकती है!

हर छोटा बदलाव बड़ी कामयाबी का हिस्सा होता है |

इंसान को कठिनाइयों की आवश्यकता होती है, क्योंकि सफलता का आनंद उठाने कि लिए ये ज़रूरी हैं।

किसी भी काम में अगर आप अपना 100% देंगे तो आप सफल हो जाएंगे।

किस्मत तो उनकी भी होती है, जिनके हाथ नहीं होते।

हर वो कामयाबी हार है, जिसका मक़सद किसी को नीचा दिखाना है|

अगर आप उस इंसान की तलाश कर रहे हैं जो आपकी ज़िन्दगी बदलेगा, तो आईने में देख लें।

हर छोटे बदलाव बड़ी कामयाबी का हिस्सा है|

मुस्कराना हर किसी के बस की बात नहीं है… मुस्करा वो ही सकता है जो दिल का अमीर हो।

एक सफल व्यक्ति बनने की कोशिश मत करो, बल्कि मूल्यों पर चलने वाले व्यक्ति बनो।

जीवन को इतना शानदार बनाओ,की आपको याद करके किसी निराश व्यक्ति की आखों में भी चमक आ जाए!
हर एक व्यक्ति को परमात्मा सुबह दो रास्ते देते है उठिए और अपने मनचाहे सपने पुरे कीजिये…सोते रहिये और मनचाहे सपने देखते रहिये!
वक्त की एक आदत बहुत अच्छी है, जैसा भी हो, गुजर जाता है! कामयाब इंसान खुश रहे ना रहे, खुश रहने वाला इंसान कामयाब जरूर हो जाता है!

स्वभाव भी इंसान की अपनी कमाई हुयी सबसे बड़ी दौलत है।

तारीफ़ अपने आपकी करना फ़िज़ूल है, ख़ुशबू तो ख़ुद ही बता देती है,कौन सा फ़ूल है!
बुराई वही करते है जो बराबरी नही कर सकते!
आंखो को अक्सर वही चीज़ पसंद आती है, जिसका मिलना मुश्किल हो!

जिंदगी में खत्म होने जैसा कुछ नहीं होता हमेशा एक नई शुरुआत आपका इंतजार करती है!

संघर्ष करते हुए मत घबराना क्योंकी संघर्ष के दौरान ही इंसान अकेला होता है सफलता के बाद तो सारी दुनिया साथ होती है!

मिलता तो बहुत कुछ है इस ज़िन्दगी में “बस हम गिनती उसी की करते है जो हासिल ना हो सका”!

जिंदगी छोटी नहीं होती हैं.. लोग जीना ही देरी से शुरू करते हैं, जब …

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Hindi Poem on Daughter | में बेटी हूँ

साथियों नमस्कार, आज हम आपके लिए एक ऐसी कविता “Hindi Poem on Daughter | में बेटी हूँ” लेकर आएं हैं जिसे पढ़कर आपको बेटियों पर गर्व महसूस होगा|


Hindi Poem on Daughter | में बेटी हूँ

जी हाँ! में बेटी हूँ,
जिसके जन्म लेती ही…
माता पिता करने लगते हैं उसके दहेज़ की व्यवस्था|

जी हाँ! में वही बेटी हूँ,
में जनि जाती हूँ लक्ष्मी के रूप में भले…
पर मुझ पर किए जाते हैं अन्याय अनेक|

जी हाँ! में बेटी हूँ,
जिसके लिए नारे लगाए जाते हैं कई…
परन्तु कोख में ही ख़त्म कर दिया जाता है मुझे!
और तो और पढने से भी वंचित रखा जाता है मुझे|

जी हाँ! में वही बेटी हूँ,
पढ़ लिख कर आगे बढ़ना चाहती हूँ में,
समाज की इस व्यवस्था को बदलना चाहती हूँ में|

रचयिता – सपना कुमारी साह


बेटी

चहकतेविहान का आफ़ताब है बेटी,
महकते शाम का महताब है बेटी|

ज़िन्दगी के छंदों का अलंकार है बेटी,
कविता के पन्नों का संस्कार है बेटी|

वत्सल के श्रृंगार का रस है बेटी,
कल के संसार का यश है बेटी||


तुम मेरी सखी बनोंगी ना

सुख में दुःख में संग मेरे रहना,
तुम मेरी सखी बनोंगी ना!

जब में रुठुं, तुम मुझे मानाने आना…
हंस दो न बस एक बार,
बोल-बोल कर मुझको गले लगाना…
बोलो ऐसा करोगी ना,
तुम मेरी सखी बनोंगी ना!!

माँ, आज यह पहनों…आज यह ओढो,
कहकर मुझसे लाड जाताना…
आज यह खाना…आज वह खाना,
अपनी फरमाइशें बताना…
खूब प्यार में करती तुमसे,
तुम भी इतना प्यार करोगी ना ?
तुम मेरी सखी बनोंगी ना||

रचयीता – निभा अम्बुज जैन


अन्याय देखकर आंख उठाती,

नही तो लज्जा का अवतार है।

कितने कष्ट भी उसने झेले,

पर सहनशीलता भरमार है।

टूटने लगता जो कभी हौसला,

तो बनती सच्ची ढार है।

छेड़ो कभी जो राक्षस बनकर,

तो “दुर्गा” सी अंगार है।

रचयिता – प्रिया त्रिपाठी


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