JANU KO GALE LAGA KE – Akash

Pahali bar mile apani jan se muskura ke,
Dur hone ka man nhi kr raha tha pass aa ke,
Dil ki sari bechaini dur karani thi,
Bas ek bar apane janu ko gale laga ke…

Vo rat bhar mere pass soi. Rato ko sapano me khoi,
Sari duriya mita gaya vo lamha,
Jb vo soi mere pass aa ke…

Dil kr raha tha gale laga ke sou,
Sari rat usake sath sapano me khou,
Ji bhar ke sukun ki sans lu,
Usako apani banho me sama ke…

Subah jb jgaya mujhe to, sab khali-khali sa tha,
Bas waha vo thi aur mai tha,
Labo par ek jam chaha aur muskurakar diya usane…

Pass aya mai usake apane sare dard bhula ke,
Janu bani vo meri. Meri dilo jan me sama ke,
Bate karata hu ab mai sabase muskura ke,
Bas khvahish hai meri,
Ek aur jam mil jaye,
Gale laga ke… !!!…

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जहाँ सूर्य की कीरण हो

जहाँ सूर्य की कीरण हो…
वही प्रकाश होता है…
जहाँ मां बाप का सम्मान हो…
वही भव पार होता है…
जहाँ संतो की वाणी हो…
वही उद्धार होता है…
और…
जँहा प्रेम की भाषा हो…
वही परीवार होता है…!!…

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Motivational Quotes in Hindi

साथियों नमस्कार, आज के इस अंक में हम आपके लिए लेकर आएं हैं कुछ ऐसे “Motivational Quotes in Hindi” लेकर आएं हैं जिन्हें पढने के पास आपके जीवन में एक नई प्रेरणा का संचार होगा| इन “Motivational Quotes in Hindi on Success” को आप अपने Facebook, Whatsapp की मदद से अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों को भी भेज सकते हैं|

ख्वाहिशें भले छोटी हो लेकिन उन्हें पूरी करने के लिए दिल जिद्दी होना चाहिए!

हौसला होना चाहिए बस, जिंदगी तो कहीं से भी शुरू हो सकती है!

हर छोटा बदलाव बड़ी कामयाबी का हिस्सा होता है |

इंसान को कठिनाइयों की आवश्यकता होती है, क्योंकि सफलता का आनंद उठाने कि लिए ये ज़रूरी हैं।

किसी भी काम में अगर आप अपना 100% देंगे तो आप सफल हो जाएंगे।

किस्मत तो उनकी भी होती है, जिनके हाथ नहीं होते।

हर वो कामयाबी हार है, जिसका मक़सद किसी को नीचा दिखाना है|

अगर आप उस इंसान की तलाश कर रहे हैं जो आपकी ज़िन्दगी बदलेगा, तो आईने में देख लें।

हर छोटे बदलाव बड़ी कामयाबी का हिस्सा है|

मुस्कराना हर किसी के बस की बात नहीं है… मुस्करा वो ही सकता है जो दिल का अमीर हो।

एक सफल व्यक्ति बनने की कोशिश मत करो, बल्कि मूल्यों पर चलने वाले व्यक्ति बनो।

जीवन को इतना शानदार बनाओ,की आपको याद करके किसी निराश व्यक्ति की आखों में भी चमक आ जाए!
हर एक व्यक्ति को परमात्मा सुबह दो रास्ते देते है उठिए और अपने मनचाहे सपने पुरे कीजिये…सोते रहिये और मनचाहे सपने देखते रहिये!
वक्त की एक आदत बहुत अच्छी है, जैसा भी हो, गुजर जाता है! कामयाब इंसान खुश रहे ना रहे, खुश रहने वाला इंसान कामयाब जरूर हो जाता है!

स्वभाव भी इंसान की अपनी कमाई हुयी सबसे बड़ी दौलत है।

तारीफ़ अपने आपकी करना फ़िज़ूल है, ख़ुशबू तो ख़ुद ही बता देती है,कौन सा फ़ूल है!
बुराई वही करते है जो बराबरी नही कर सकते!
आंखो को अक्सर वही चीज़ पसंद आती है, जिसका मिलना मुश्किल हो!

जिंदगी में खत्म होने जैसा कुछ नहीं होता हमेशा एक नई शुरुआत आपका इंतजार करती है!

संघर्ष करते हुए मत घबराना क्योंकी संघर्ष के दौरान ही इंसान अकेला होता है सफलता के बाद तो सारी दुनिया साथ होती है!

मिलता तो बहुत कुछ है इस ज़िन्दगी में “बस हम गिनती उसी की करते है जो हासिल ना हो सका”!

जिंदगी छोटी नहीं होती हैं.. लोग जीना ही देरी से शुरू करते हैं, जब …

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Hindi Poem on Daughter | में बेटी हूँ

साथियों नमस्कार, आज हम आपके लिए एक ऐसी कविता “Hindi Poem on Daughter | में बेटी हूँ” लेकर आएं हैं जिसे पढ़कर आपको बेटियों पर गर्व महसूस होगा|


Hindi Poem on Daughter | में बेटी हूँ

जी हाँ! में बेटी हूँ,
जिसके जन्म लेती ही…
माता पिता करने लगते हैं उसके दहेज़ की व्यवस्था|

जी हाँ! में वही बेटी हूँ,
में जनि जाती हूँ लक्ष्मी के रूप में भले…
पर मुझ पर किए जाते हैं अन्याय अनेक|

जी हाँ! में बेटी हूँ,
जिसके लिए नारे लगाए जाते हैं कई…
परन्तु कोख में ही ख़त्म कर दिया जाता है मुझे!
और तो और पढने से भी वंचित रखा जाता है मुझे|

जी हाँ! में वही बेटी हूँ,
पढ़ लिख कर आगे बढ़ना चाहती हूँ में,
समाज की इस व्यवस्था को बदलना चाहती हूँ में|

रचयिता – सपना कुमारी साह


बेटी

चहकतेविहान का आफ़ताब है बेटी,
महकते शाम का महताब है बेटी|

ज़िन्दगी के छंदों का अलंकार है बेटी,
कविता के पन्नों का संस्कार है बेटी|

वत्सल के श्रृंगार का रस है बेटी,
कल के संसार का यश है बेटी||


तुम मेरी सखी बनोंगी ना

सुख में दुःख में संग मेरे रहना,
तुम मेरी सखी बनोंगी ना!

जब में रुठुं, तुम मुझे मानाने आना…
हंस दो न बस एक बार,
बोल-बोल कर मुझको गले लगाना…
बोलो ऐसा करोगी ना,
तुम मेरी सखी बनोंगी ना!!

माँ, आज यह पहनों…आज यह ओढो,
कहकर मुझसे लाड जाताना…
आज यह खाना…आज वह खाना,
अपनी फरमाइशें बताना…
खूब प्यार में करती तुमसे,
तुम भी इतना प्यार करोगी ना ?
तुम मेरी सखी बनोंगी ना||

रचयीता – निभा अम्बुज जैन


अन्याय देखकर आंख उठाती,

नही तो लज्जा का अवतार है।

कितने कष्ट भी उसने झेले,

पर सहनशीलता भरमार है।

टूटने लगता जो कभी हौसला,

तो बनती सच्ची ढार है।

छेड़ो कभी जो राक्षस बनकर,

तो “दुर्गा” सी अंगार है।

रचयिता – प्रिया त्रिपाठी


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Pankaj Mishra Poems in Hindi

मेरी प्यारी पीहू मुस्कुराने लगी है…..!!

फूल सी कोमल ओस सी नाजुक पीहू
रिस्तो की पगडंडियों पर मुस्कुराने लगी है
सुबह अपनी मम्मी से पहले आके
पापा पापा बोल के जगाने लगी है
गुस्सा हो जाती है फिर देखती नही
अपने पापा को देखो सताने लगी है
आफिस से आते ही एक प्यारी सी मिठ्ठी
पापा के दिल को बहलाने लगी है
मेरी दुआओ में शामिल मेरे दिल की धड़कन
मेरी प्यारी पीहू मुस्कुराने लगी है..!!

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मेरा हाल ऐ दिल बताता है…..!!

इक़ आईना है , जो मुझ से , मेरा हाल ऐ दिल बताता है
इक़ मैं हु ,जो खुद से ,हर दर्द ऐ दिल छुपता हु
इक़ जख्म है ,जो चीख कर मेरे अश्को को बुलाते है
इक़ लब है, मुस्का के जो हर दर्द को छुपाते है
एक मैं हु जो इश्क़ को दफ़ना चुका हु अंदर तक.
एक आंखे है , हर सख़्श को मेरा हाल ऐ दिल बताती है..!!

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तुझको एक दिन जमीं पे लाऊँगा….!!

हिना का रंग हूँ, हाथो में समेट ले मुझको
खुसबू हु फिजाओ में बिखर जाऊँगा
सोख मदहोशी हु छुपा ले मुझको आँखों में
वादा है हँसी बनके लबो पे आऊँगा
तू जीता है मेरी आँखों में हँसी ख्वाब की तरह
जिद है अपनी भी ख्वाब को हकीकत बनाऊँगा
माना की जन्नत की परी है तू
यकीं है तुझको एक दिन जमीं पे लाऊँगा..!!

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2 Line Shayari in Hindi – Pankaj Mishra

जाते हुए तेरी नजरो का असर, की रात सारी तेरे खवाबो में गुजरी,

लम्हा लम्हा तेरे ना होने की बेचैनी, कतरा कतरा तेरे यादो में गुजरी..!!

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भुला दो तुम मुझे लेकिन इतना याद रखना,

कुछ वादे तुम्हारे हैं जो अब भी अधूरे हैं..!!

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Upside Down Moments | A Poem by P.K. Deb

Ever-biting alcoholic molecules are poured in a glass
As a fool rides on his self-made upside down moments
Of hesitation and tension, he is not to be conscious
The memories are to be suspended for which he laments.

As the colourful glass is lifted near to his lips to sip
Heart becomes scared and raises its palpitation,
Nevertheless, alcohol is poured in to the deep
Of his mouth to suffer its biting with no hesitation.

The poor tongue and its mouth-mates shrivel in ache
Start weeping for help and instant relief,
Ignoring it behind alcohol reaches to stomach
With liquid fire and fills it with pain and grief.

The courageous and helpful blood cells attend in hurry
Start absorbing the poisonous molecules and pain
Stomach gets both relief and stain of alcoholic injury
But the blood cells rush as the biting they also gain.

Heart, liver, pancreas and kidney-the life organs
Become restless as alcohol bites them with stain
Hence, abnormal they become in their performance
And all together push the blood up to the brain.

For the locks of all organs, the brain is the master key
Gets extra- pressure as the blood waves rush to it
Becomes very scared and escapes to the knee
For normal duty where it is absolutely unfit.

Hence it produces illusions and sends to the fool
Makes him happy as the weeping was unheard
Composes a temporary heaven with his alcoholic tool
And becomes flexible physically and mentally smart.

Heart snatches excessive emotions from the brain
So the fool laughs, cries and roars with no grammar
The same lunatic process continues again and again,
Makes him unconscious as the brain gets a hammer.

No one is allowed to disturb him, even the dream
only flies are around his face, landing and flying,
May God bless him and bring him to the right-stream
as he is supposed to support his family from destroying.…

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You’re My Reason for Living | A Poem by Joseph Romano

Every placed I go your fair face beams.
You are a beautiful woman, you’re the woman of my dreams.
Your heart is loving and tender and forever forgiving.
You’re the reason I’m here, you’re my reason for living.
You opened your heat and gave me a new life.
Then you made me the happiest the day you became my wife.
And just when I thought you made me the happiest man in the world.
You presented us both with a new baby girl.

And just when I thought we had all the happiness and joy.
You presented us both with a new baby boy.…

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Me and My Two Friends | A Poem by P.K. Deb

Boiling of blood in the burning sun
cooks the earnings for the three friends —
me, my Heart and my Soul.
Nevertheless, quite active we have been
and blissful too in spite of sweat- bathing
and inhuman fast breathing
for making passive the curse of scarcity,
well integrated we have been
with all sorts of co-operation, care and love
for disintegrating the black shadows of misfortunes
and united we have been
in expecting a golden hunger to be gifted
to us for enjoying the poor dish as a royal one.

Hence, we have been blessed to sit comfortably
surrounding a discoloured wooden dining table
with an ocean of hunger to float away
all the poor dishes in a blink of the eyes
with all the eagerness and satisfaction.
Me and my two friends feed one another, feel good
and sketch a blissful smile on our bright faces,
thankful to divinity and dignity of work
who bestow the suitable dishes for solicited hunger.

Slowly and silently our dreamful slumber appears,
invades each and every rooms of our entities
and all the pains and strains gained disappear,
replacing peace and comfort on a hard bed.
Heart and soul lie keeping me in the mid,
embracing me with their magical hands
and hand over me to the beautiful slumber
for rejuvenation and vitality.
Slowly I reach a dreamful world to knit
a tomorrow with more of work, hunger and slumber.
Lucky I am and grateful too to God
as I am ever accompanied by my two friends —
Heart and Soul in every walk of life – painful or gainful,
May God bestow everybody with such heart and soul.…

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Bitter Sweet | A Poem by Anthony Cannon

Can you taste this?
They wanna know how I feel about it.
How I feel about holding back my pain and thankfulness for so many
remorseful years.
I account for the misery and woe in my bed sheets,
All of the nights of losing sleep and waking up feeling so
incomplete.
But then again…
The times I’m glad I’m still in God’s favor,
Still sitting on my throne over a pristine spotless temple.
Not ashamed of the tread of my feet I trod.
This potent wine I spill from my abode freezes solid-
Hard as rocks as they drop to deliver panic and unnecessary
persecution!
This is bitter sweet.
I’ve been picked over, left for dead, dissed at and forgotten,
They say my time has ran out,
But how could I believe this nonsense I’m reciting to you?
Can you believe this?
I rise up and stay above it,
Thinking to myself I’m on my own island of continuation…
That this lonesome, dark, pitch black nightmare will never end.
Go all the way to gehenna and back and still ceases to not exist.
This is bitter sweet.
Like how I’m ecstatic but it breaks my bones and crushes the marrow.
As I put my heart in this,
I love the sweet,
But I despise the bitter.
Thank you for tasting my bitter sweet.…

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