Rajputana Poetry Hindi About Great Rajputana Glory.

Read Rajputana poem is dedicated to those heroes who laid down their lives for the glory of Rajputana. and those rajput women who did johar for glory of rajputana.

जलती रही जौहर मे नारियां, भेड़िये फिर भी मौन थे |
हमे पढ़ाया अकबर महान, तो फिर ‘महाराणा’ कौन थे?

क्या वो नहीं महान हो बड़ी बड़ी ,सेनाओ पर चढ़ जाता था |
या फिर वो महान था जो सपने मे, प्रताप को देख कर दर जाता था |

रणभूमि मे जिनके हौसले, दुश्मनों पर भारी पड़ते थे |
ये वो भूमि है जहां पर नरमुण्ड़, घंटो तक लड़ते थे ||

रानियो का सोन्दर्य सुनकर , वो वहसी कई बार यहाँ आए |
धन्य थी वो स्त्रियाँ , जिनकी अस्थियाँ तक छू नहीं पाये ||

अपने सिंहो को वो सिहनियाँ , फौलाद बना देती थी |
जरूरत जब पड़ती , काटकर शीश थाल सजा देती थी |

पराजय जिनको कभी सपने मे स्वीकार नही थी |
अपने प्राणो का मोह करे, वो पीढ़ी इतनी गद्दार नहीं थी ||

वो दुश्मनों को पकड़कर निचोड़ दिया करते थे |
पर उनकी बेगमों को भी, माँ कहकर छोड़ दिया करते थे |

तो सुनो यारों एसे वहशी , दरिंदों का जाप मत करो |
वीर सपूतो को बदनाम करने का पाप अब मत करो |…

Read More

Maa – Most Important In Life

लेती नहीं दवाई “माँ”,
जोड़े पाई-पाई “माँ”।

दुःख थे पर्वत, राई “माँ”,
हारी नहीं लड़ाई “माँ”।

इस दुनियां में सब मैले हैं,
किस दुनियां से आई “माँ”।

दुनिया के सब रिश्ते ठंडे,
गरमागर्म रजाई “माँ” ।

जब भी कोई रिश्ता उधड़े,
करती है तुरपाई “माँ” ।

बाबू जी तनख़ा लाये बस,
लेकिन बरक़त लाई “माँ”।

बाबूजी थे सख्त मगर ,
माखन और मलाई “माँ”।

बाबूजी के पाँव दबा कर
सब तीरथ हो आई “माँ”।

नाम सभी हैं गुड़ से मीठे,
मां जी, मैया, माई, “माँ” ।

सभी साड़ियाँ छीज गई थीं,
मगर नहीं कह पाई “माँ” ।

घर में चूल्हे मत बाँटो रे,
देती रही दुहाई “माँ”।

बाबूजी बीमार पड़े जब,
साथ-साथ मुरझाई “माँ” ।

रोती है लेकिन छुप-छुप कर,
बड़े सब्र की जाई “माँ”।

लड़ते-लड़ते, सहते-सहते,
रह गई एक तिहाई “माँ” ।

बेटी रहे ससुराल में खुश,
सब ज़ेवर दे आई “माँ”।

“माँ” से घर, घर लगता है,
घर में घुली, समाई “माँ” ।

बेटे की कुर्सी है ऊँची,
पर उसकी ऊँचाई “माँ” ।

दर्द बड़ा हो या छोटा हो,
याद हमेशा आई “माँ”।

घर के शगुन सभी “माँ” से,
है घर की शहनाई “माँ”।

सभी पराये हो जाते हैं,
होती नहीं पराई “मां”।।…

Read More

Hindi Love Poem on Vo ek Chehra

 

सब कुछ तो है क्या ढूँढ़ती रहती हैं निगाहें,
क्या बात है मैं वक़्त पे घर क्यों नहीं जाता,
वो एक ही चेहरा तो नहीं सारे जहाँ में,
जो दूर है, वो दिल से उतर क्यों नहीं जाता,
वो ख़्वाब जो बरसों से न चेहरा, न बदन है,
वो ख़्वाब हवाओं में बिखर क्यों नहीं जाता..

 
Read More

Tere Ishq Ki Inteha Chahta Huun, Meri Sadgi Dekh

Tere Ishq Ki Inteha Chahta Huun
Meri Sadgi Dekh Kya Chahta huun
sitam ho ki ho vada-e-be-hijabi
koi baat sabr-azma chahta huun
ye jannat mubarak rahe zahidon ko
ki main aap ka samna chahta huun
zara sa to dil huun magar shoḳh itna
vahi lan-tarani suna chahta huun
koi dam ka mehman huun ai ahl-e-mahfil
charagh-e-sahar huun bujha chahta huun
bhari bazm men raaz ki baat kah di
bada be-adab huun saza chahta huun

तिरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँ
मिरी सादगी देख क्या चाहता हूँ
सितम हो कि हो वादा-ए-बे-हिजाबी
कोई बात सब्र-आज़मा चाहता हूँ
ये जन्नत मुबारक रहे ज़ाहिदों को
कि मैं आप का सामना चाहता हूँ
ज़रा सा तो दिल हूँ मगर शोख़ इतना
वही लन-तरानी सुना चाहता हूँ
कोई दम का मेहमाँ हूँ ऐ अहल-ए-महफ़िल
चराग़-ए-सहर हूँ बुझा चाहता हूँ
भरी बज़्म में राज़ की बात कह दी
बड़ा बे-अदब हूँ सज़ा चाहता हूँ

ترے عشق کی انتہا چاہتا ہوں
مری سادگی دیکھ کیا چاہتا ہوں
ستم ہو کہ ہو وعدۂ بے حجابی
کوئی بات صبر آزما چاہتا ہوں
یہ جنت مبارک رہے زاہدوں کو
کہ میں آپ کا سامنا چاہتا ہوں
ذرا سا تو دل ہوں مگر شوخ اتنا
وہی لن ترانی سنا چاہتا ہوں
کوئی دم کا مہماں ہوں اے اہل محفل
چراغ سحر ہوں بجھا چاہتا ہوں
بھری بزم میں راز کی بات کہہ دی
بڑا بے ادب ہوں سزا چاہتا ہوں…

Read More

Ek sabd hai

एक शब्द है ( मोहब्बत )
इसे कर के देखो तुम
तड़प ना जाओ तो कहना,
एक शब्द है ( मुकद्दर )
इससे लड़कर देखो तुम
हार ना जाओ तो कहना,
एक शब्द है ( वफा )
जमाने में नहीं मिलती कहीं
ढूंढ पाओ तो कहना,
एक शब्द है ( आँसू )
दिल में छुपा कर रखो
तुम्हारी आँखों से ना निकल जाए तो कहना,
एक शब्द है ( जुदाई )
इसे सह कर तो देखो
तुम टूट कर बिखर ना जाओ तो कहना,
एक शब्द है ( ईश्वर )
इसे पुकार कर तो देखो
सब कुछ पा ना लो तो कहना…..…

Read More

Read Harivansh Rai Bachchan poems in hindi

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है।
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है।
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है,
जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है।
मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में,
बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में।
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो।
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,
संघर्ष का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम।
कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।…

Read More

Sarfaroshi ki Tamanna – By Bismil Azimabadi

Sarfaroshi ki tamanna ab hamaare dil mein hai
Dekhna hai zor kitna baazu-e-qaatil mein hai

Ek se karta nahin kyun doosra kuch baat-cheet
Dekhta hun main jise woh chup teri mehfil mein hai
Aye shaheed-e-mulk-o-millat main tere oopar nisaar
Ab teri himmat ka charcha ghair ki mehfil mein hai
Sarfaroshi ki tamanna ab hamaare dil mein hai

Waqt aanay dey bata denge tujhe aye aasman
Hum abhi se kya batayen kya hamare dil mein hai
Khainch kar layee hai sab ko qatl hone ki ummeed
Aashiqon ka aaj jumghat koocha-e-qaatil mein hai
Sarfaroshi ki tamanna ab hamaare dil mein hai

Hai liye hathiyaar dushman taak mein baitha udhar
Aur hum taiyyaar hain seena liye apna idhar
Khoon se khelenge holi gar vatan muskhil mein hai
Sarfaroshi ki tamanna ab hamaare dil mein hai

Haath jin mein ho junoon katt te nahi talvaar se
Sar jo uth jaate hain voh jhukte nahi lalkaar se
Aur bhadkega jo shola-sa humaare dil mein hai
Sarfaroshi ki tamanna ab hamaare dil mein hai

Hum to ghar se nikle hi the baandhkar sar pe kafan
Jaan hatheli par liye lo barh chale hain ye qadam
Zindagi to apni mehmaan maut ki mehfil mein hai
Sarfaroshi ki tamanna ab hamaare dil mein hai

Yuun khadaa maqtal mein qaatil kah rahaa hai baar baar
Kya tamannaa-e-shahaadat bhi kisee ke dil mein hai
Dil mein tuufaanon ki toli aur nason mein inqilaab
Hosh dushman ke udaa denge humein roko na aaj
Duur reh paaye jo humse dam kahaan manzil mein hai

Wo jism bhi kya jism hai jismein na ho khoon-e-junoon
Kya lade toofaanon se jo kashti-e-saahil mein hai

Sarfaroshi ki tamanna ab hamaare dil mein hai.


सरफ़रोकरता नहीं क्यूँ दूसरा कुछ बातचीत,
देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है
ऐ शहीद-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत, मैं तेरे ऊपर निसार,
अब तेरी हिम्मत का चरचः ग़ैर की महफ़िल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

वक़्त आने पर बता देंगे तुझे, ए आसमान,
हम अभी से क्या बताएँ क्या हमारे दिल में है

खेँच कर लाई है सब को क़त्ल होने की उमीद,
आशिक़ोँ का आज जमघट कूचः-ए-क़ातिल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

है लिए हथियार दुशमन ताक में बैठा उधर,
और हम तय्यार हैं सीना लिये अपना इधर.
ख़ून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है,
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

हाथ, जिन में हो जुनून, …

Read More

ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा

ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा
क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा

अपने साए से चौंक जाते हैं
उम्र गुज़री है इस क़दर तन्हा

रात भर बोलते हैं सन्नाटे
रात काटे कोई किधर तन्हा

दिन गुज़रता नहीं है लोगों में
रात होती नहीं बसर तन्हा

हमने दरवाज़े तक तो देखा था
फिर ना जाने गये किधर तन्हा

-गुलज़ार…

Read More

चलो ना भटके 

चलो ना भटके
लफंगे कूचों में
लुच्ची गलियों के
चौक देखें
सुना है वो लोग
चूस कर जिन को वक़्त ने
रास्तें में फेंका था
सब यहीं आके बस गये हैं
यह छिलके हैं ज़िंदगी के
इन का अर्क निकालो
की ज़हर इन का
तुम्हारे जिस्मों में
ज़हर पलते हैं
और जितने वो मार देगा
चलो ना भटके
लफंगे कूचों में

-गुलज़ार…

Read More

तू कहीं भी रहे सर पे तेरे इल्ज़ाम तो है

तू कहीं भी रहे सर पे तेरे इल्ज़ाम तो है
तेरे हाथों की लकीरों में मेरा नाम तो है

मुझको तू अपना बना या ना बना तेरी खुशी
तू ज़माने में मेरे नाम से बदनाम तो है

मेरे हिस्से में कोई जाम ना आया ना सही
तेरी महफ़िल में मेरे नाम कोई शाम तो है

देख कर लोग मुझे नाम तेरा लेते हैं
इस पे मैं खुश हूँ मुहब्बत का ये अंजाम तो है

वो सीतमगार ही सही देख के उसको “साबिर”
शुक्र इस दिल-ए-बीमार को आराम तो है

-साबिर जलालाबादी

 …

Read More