टेढ़ी दुम: अमित की फ्लर्ट की आदत को संगीता ने कैसे छुड़ाया?

कालेज के दिनों में मैं ज्यादातर 2 सहेलियों के बीच बैठा मिलता था. रूपसी रिया मेरे एक तरफ और सिंपल संगीता दूसरी तरफ होती. संगीता मुझे प्यार भरी नजरों से देखती रहती और मैं रिया को. रही रूपसी रिया की बात तो वह हर वक्त यह नोट करती रहती कि कालेज का कौन सा लड़का उसे आंखें फाड़ कर ललचाई नजरों से देख रहा है. कालेज की सब से सुंदर लड़की को पटाना आसान काम नहीं था, पर उस से भी ज्यादा मुश्किल था उसे अपने प्रेमजाल में फंसाए रखना. बिलकुल तेज रफ्तार से कार चलाने जैसा मामला था. सावधानी हटी दुर्घटना घटी. मतलब यह कि आप ने जरा सी लापरवाही बरती नहीं कि कोई दूसरा आप की रूपसी को ले उड़ेगा.

मैं ने रिया के प्रेमी का दर्जा पाने के लिए बहुत पापड़ बेले थे. उसे खिलानेपिलाने, घुमाने और मौकेबेमौके उपहार देने का खर्चा उतना ही हो जाता था जितना एक आम आदमी महीनेभर में अपने परिवार पर खर्च करता होगा. ‘‘रिया, देखो न सामने शोकेस में कितना सुंदर टौप लगा है. तुम पर यह बहुत फबेगा,’’ रिया को ललचाने के लिए मैं ऐसी आ बैल मुझे मार टाइप बातें करता तो मेरी पौकेट मनी का पहले हफ्ते में ही सफाया हो जाता.

मगर यह अपना स्पैशल स्टाइल था रिया को इंप्रैस करने का. यह बात जुदा है कि बाद में पापा से सचझूठ बोल कर रुपए निकलवाने पड़ते. मां की चमचागिरी करनी पड़ती. दोस्तों से उधार लेना आम बात होती. अगर संगीता ने मेरे पीछे पड़पड़ कर मुझे पढ़ने को मजबूर न किया होता तो मैं हर साल फेल होता. मैं पढ़ने में आनाकानी करता तो वह झगड़ा करने पर उतर आती. मेरे पापा से मेरी शिकायत करने से भी नहीं चूकती थी.…

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स्वीकृति: डिंपल की सोई ममता कैसे जाग उठी

आशीष के जाते ही डिंपल दरवाजा बंद कर रसोईघर की ओर भागी. जल्दी से टिफिन अपने बैग में रख शृंगार मेज के समक्ष तैयार होते हुए वह बड़बड़ाती जा रही थी, ‘आज फिर औफिस के लिए देर होगी. एक तो घर का काम, फिर नौकरी और सब से ऊपर वही बहस का मुद्दा…’ 5 वर्ष के गृहस्थ जीवन में पतिपत्नी के बीच पहली बार इतनी गंभीरता से मनमुटाव हुआ था. हर बार कोई न कोई पक्ष हथियार डाल देता था, पर इस बार बात ही कुछ ऐसी थी जिसे यों ही छोड़ना संभव न था.

‘उफ, आशीष, तुम फिर वही बात ले बैठे. मेरा निर्णय तो तुम जानते ही हो, मैं यह नहीं कर पाऊंगी,’ डिंपल आपे से बाहर हो, हाथ मेज पर पटकते हुए बोली थी. ‘अच्छाअच्छा, ठीक है, मैं तो यों ही कह रहा था,’ आखिर आशीष ने आत्मसमर्पण कर ही दिया. फिर कंधे उचकाते हुए बोला, ‘प्रिया मेरी बहन थी और बच्चे भी उसी के हैं, तो क्या उन्हें…’

बीच में ही बात काटती डिंपल बोल पड़ी, ‘मैं यह मानती हूं, पर हमें बच्चे चाहिए ही नहीं. मैं यह झंझट पालना ही नहीं चाहती. हमारी दिनचर्या में बच्चों के लिए वक्त ही कहां है? क्या तुम अपना वादा भूल गए कि मेरे कैरियर के लिए हमेशा साथ दोगे, बच्चे जरूरी नहीं?’ आखिरी शब्दों पर उस की आवाज धीमी पड़ गई थी. डिंपल जानती थी कि आशीष को बच्चों से बहुत लगाव है. जब वह कोई संतान न दे सकी तो उन दोनों ने एक बच्चा गोद लेने का निश्चय भी किया था, पर……

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क्या यही प्यार है ?। स्कूल लव स्टोरी इन हिंदी। Love feeling best romantic love story । Hindi love stories। classmate ke sad love story in hindi

“भाई साथ में तुम भी चलो ना !  तुमको तो पता है, तुम्हारे बिना में कहीं भी नहीं जाता हूं। और वैसे तुम्हें याद है ना, खुशबू को प्रपोज करते वक्त तुम भी मेरे साथ ही था तो फिर आज उसके साथ घूमने जा रहा हूं तो तुम्हे भी मेरे साथ चलना चाहिए। प्लीज चलो ना यार…  साथ में चलते हैं”  अभिषेक ने  लगभग मुझे प्रार्थना करते हुए बोला।

उस दिन अभिषेक  को अपने गर्लफ्रेंड खुशबू के साथ राजगीर घूमने जाने का प्लान था वैसे प्लान के वक्त से ही अभिषेक मुझे अपने साथ ले जाने की जिद करता आ रहा था। मगर मैं इन लड़कियों के घूमने-फिरने के चोचलेवाजी के चक्रों से हमेशा दूर रहना चाहता था। मैं नहीं चाहता था कि अपने सारा कामकाज पढ़ाई-लिखाई को छोड़कर इन लडकियों के पीछे सारा वक्त जाया करें। मगर मेरा मित्र या यूं कहें कि मेरा रूम पार्टनर अभिषेक को इन लड़कियों में कुछ ज्यादा ही दिलचस्पी शुरू से ही रहा है। हम दोनों बचपन के दोस्त हैं । हम-दोनों ने क्लास नर्सरी से लेकर ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई एक ही कॉलेज और एक ही स्कूल से किया है और आज एक ही साथ एक ही रूम में रहकर कंपटीशन की तैयारी कर रहा हूं। इन्हीं कंपटीशन कोचिंग में अभिषेक की  मुलाकात खुशबू से हुआ था। खुशबू नाम जितनी  प्यारी है उतनी ही उसके चेहरे भी हसीन थे ।वह हर  लड़कियों से बिल्कुल अलग थी उसकी बात-विचार बिहेवियर एकदम से पर्फेक्ट है। वह पढ़ने-लिखने में भी अच्छी लड़की थी। शायद यही कारण रहा होगा कि अभिषेक उसे पसंद करने लगा था वरना अभिषेक को मैं बचपन से ही जानता हूं वह कभी लड़कियों को भाव तक नहीं देता था । जब अभिषेक ने मुझे बताया था कि वह खुशबू को पसंद करने लगा है तो मैंने ही उसे उसकी टूटी-फूटी हिम्मत को मैंने मोहब्बतें की  शाहरुख खान वाली प्रवचन देकर उसे भी मजनूं बना दिया था। यहां तक उसका लव लेटर देने वक्त यानी कि प्रपोज करते समय मैं भी उसके साथ ही था वरना यह साला फट्टू लव लेटर क्या कभी कॉपी तक एक्सचेंज नहीं करता। खैर यह बात तो बहुत पुरानी हो गई। उस दिन जब मैं सो रहा था तब वह मुझे अपने साथ राजगीर की पहाड़ी वादियों में अपने गर्लफ्रेंड खुशबू के साथ मुझे भी साथ ले जाना चाह रहा था। अभिषेक मेरा बचपन का सबसे प्यारा सबसे सच्चा मित्र है जो अक्सर मेरे बुरे और अच्छे …

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मीनू: एक सच्ची कहानी

लेखक- मुकेश कुमार डेवट

बात उन दिनों की है, जब मैं मिलिटरी ट्रेनिंग के लिए 3 एमटीआर मडगांव, गोवा गया हुआ था. कुछ दिनों के लिए मिलिटरी अस्पताल, पणजी में मैं अपने पैरदर्द के इलाज के लिए रुका हुआ था.

एक दिन यों ही मैं अपने एक दोस्त साजन के साथ कंडोलिम बीच की तरफ घूमने निकला था. पहले हम मिलिटरी अस्पताल से बस ले कर फैरी टर्मिनल पहुंचे. फिर हम ने पंजिम का मांडोवी दरिया फैरी से पार किया. फिर वहां से हम दोनों कंडोलिम बीच के लिए बस में बैठ गए.

आप को बता दूं कि कंडोलिम बीच पंजिम से 13 किलोमीटर दूर है. साथ ही, यह भी बता दूं कि पणजी को ही आम बोलचाल में पंजिम कहा जाता है.

खैर, हम बस में सवार हो चुके थे. हम 3 सवारी वाली सीट पर बैठ गए थे. तीसरी सवारी कोई और थी. वह मर्द था.

मेरा दोस्त साजन शीशे की तरफ वाली सीट पर बैठ गया था. मैं बीच वाली सीट पर बैठ गया.

अचानक मेरी नजर हम से अगली सीट पर बैठी लड़की पर गई. उस पर सिर्फ एक ही सवारी बैठी थी. वह 18-19 साल की लड़की थी. उस का रंग सांवला था. उस के हाथ में गोवा मैडिकल कालेज और अस्पताल का कार्ड था. कार्ड पर उस का नाम मीनू लिखा हुआ था.

मैं ने अचानक ही पूछ लिया, ‘‘आप जीएमसी से आ रही हैं?’’

उस ने कहा, ‘‘हां.’’

मैं ने कहा, ‘‘मैं भी इलाज के लिए जीएमसी में जाता रहता हूं.’’

मैं ने एकदम पूछ लिया, ‘‘आप को क्या हुआ है?’’

वह बोली, ‘‘छाती में दर्द है.’’

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माँ की ममता तो पिता का क्या ??…….Very Good Story in Hindi

Very Good Story in Hindi

Submitted by Renuka Jain

रोहित अपने पिता के साथ बाज़ार में था. रोहित के पिता बाजार में घर के सामान की कुछ खरीददारी कर रहे थे. जब रोहित के पिता सब सामान लेकर अपना बिल देने लगे तो रोहित ने कहा “पापा एक चॉक्लेट भी ले लो”. उसके पिता ने दुकानदार को एक चॉकलेट देने को कहा. तभी रोहित ने पिता को फिर कहा “पापा…एक और चॉकलेट लेनी है…” उसके पिता ने हँसते हुए दोनों चॉकलेट रोहित को दे दी. रोहित के चेहरे की मुस्कान देख कर उसके पिता भी खुश हो रहे थे.

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Very Good Story in Hindi

घर आते ही रोहित भागते हुए अपनी मम्मी के पास गया और कहा ” मम्मी…देखो आज मैं तुम्हारे लिए चॉकलेट लेकर आया हूँ”. रोहित ने एक चॉकलेट अपनी मम्मी को दी और एक चॉकलेट अपने पास रख ली. वो चॉकलेट उसकी मम्मी को भी अच्छी लगती थी इसलिए उसकी माँ भी खुश हो गयी. रोहित और उसकी माँ बहुत खुश लग रहे थे, रोहित की माँ ने उसे खूब प्यार किया और कहा “मेरा राजा बेटा मेरा कितना ख्याल रखता है.”

Very Good Story in Hindi

तभी रोहित की मम्मी ने अपने पति यानि की रोहित के पापा को टोकते हुए कहा “देखो … तुम्हारा बेटा जानता है कि मुझे क्या अच्छा लगता है लेकिन तुम्हे नहीं पता यार.”

रोहित के पिता ने अपना एक हाथ अपनी पैंट की दायिनी जेब में डाला हुआ था क्यूंकि एक चॉकलेट अलग से वो रोहित की मम्मी के लिए भी लाये थे. लेकिन उन्होंने चॉकलेट निकाली नहीं क्यूंकि वो रोहित और उसकी माँ के प्यार को वहां खड़े महसूस कर रहे थे और उन्हें ये देख कर बड़ा सकून मिल रहा था.

Very Good Story in Hindi

ऐसा अक्सर हम अपने घर में देखते है. बच्चे का लगाव और प्यार ज़्यादातर माँ के प्रति होता है. पिता अपने काम काज और परिवार की ज़रूरतों को पूरा करने में लगा होता है और इसीलिए वो अपने बच्चो को ज़्यादा वक़्त नहीं दे पाता लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि वो अपने परिवार से प्यार नहीं करता.

पिता ज़्यादातर अपने प्यार को जताते नहीं है और माँ हर वक़्त अपने बच्चो को प्यार देती है.

Very Good Story in Hindi

किसी ने बिलकुल सही कहा है कि माँ तो 9 महीने बच्चे को अपने पेट में रखती है लेकिन एक पिता पूरी उम्र अपने बच्चो का ख्याल अपने दिमाग में रखता …

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अपने कर्मो का फल इसी जन्म में भुगतना पड़ेगा – Real Story in Hindi

Real Story in Hindi

Submitted by Rohan Bhardwaj

मेरा नाम रोहित शुक्ला है. मेरे पिता और मेरी माँ की अरेंज्ड मैरिज हुई थी. शादी के कुछ सालो तक तो सब ठीक था लेकिन शादी के 5 साल के बाद मेरी माँ को पता चला कि मेरे पिता का किसी और लड़की के साथ अफेयर है. जब मेरी माँ को इस बात का पता चल तो मेरे माँ और पिता के बीच लड़ाईयां होने लगी. जल्द ही मेरे पिता ने मेरी माँ को छोड़ दिया और अपनी गर्लफ्रेंड के साथ शादी कर ली.

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Real Story in Hindi

इस का मेरी माँ पर इतना गहरा सदमा लगा कि वे हर वक़्त उदास रहने लगी. वे अपने आप को बंद अँधेरे कमरे में बंद लेती थी और घंटो रोती थी. उस दिन के बाद मुझे मेरे पिता से नफरत हो गयी थी क्यूंकि मेरे पिता ने अपने स्वार्थ के लिए मुझे और मेरी माँ को धोखा दिया. मेरे पिता का अच्छा ख़ासा बिज़नेस था और इसलिए वो और उनकी दूसरी पत्नी अमरीका में जा कर बस गए. मेरे दादा दादी यही दिल्ली में रहते थे और वो भी अपने बेटे से नाराज़ थे लेकिन वो उससे बात ज़रूर करते थे क्यूंकि मेरे पिता उन्हें हर महीने पैसे भेजते रहते थे.

Real Story in Hindi

समय बीतता गया और मेरी माँ की हालत बद से बदतर हो गयी. उनका बहुत इलाज करवाया गया लेकिन वो डिप्रेशन में रहती थी. वो अपना रिश्ता टूटने के गम से बाहर ही नहीं निकल सकी. मैं अब 20 साल का हो चूका हूं और दोस्तों इतने सालो से मैं अपनी माँ के साथ ही रह रहा हूँ. यूँ कहे कि इतने साल माँ ने नहीं बल्कि मैंने माँ का ख्याल रखा और इसका ज़िम्मेदार सिर्फ मेरे पिता है. मेरी माँ डिप्रेशन में सिर्फ मेरे पिता की वजह से गयी और इस बीमारी से वे कभी उभर ही नहीं पाई. आज भी उनका इलाज चल रहा है. ना तो मुझे माँ का अच्छे से प्यार मिला और ना ही मैं अपनी पढाई पर ढंग से फोकस कर पाया.

Real Story in Hindi

खैर… कुछ दिन पहले मुझे दादा जी का फ़ोन आया और उन्होंने बताया कि मेरे पिता की हालत बहुत खराब है. उन्हें कैंसर हो गया है और मेरे दादा जी अगले हफ्ते उनसे मिलने अमरीका जा रहे है. दादा जी चाहते थे कि मैं भी उनके साथ चलु क्यूंकि वे ज़्यादा पढ़े लिखे नहीं है और उन्हें …

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मेरी पहली प्रेगनेंसी थी सबसे ख़ास, गर्भावस्था की कहानी – Pregnancy Story in Hindi

Pregnancy Story in Hindi

ये मेरी रियल Pregnancy Story in Hindi है जो मैं इस वेबसाइट पर शेयर करने जा रही हूँ. हालांकि ये प्रेगनेंसी मेरे लिए बहुत खास है लेकिन मैं अपना असली नाम यहाँ शेयर नहीं करुँगी क्यूंकि हम चाहे कितने भी एडवांस्ड हो गए हो, कुछ लोगों की सोच आज भी पुराने ज़माने की है. खैर, मैं ये गर्भावस्था की कहानी खासकर उन महिलाओं के लिए शेयर करना चाहती हूँ जो प्रेग्नेंट होना चाहती है या पहली बार प्रेग्नेंट है. उन महिलाओं को ये कहानी काफी रोचक लगेगी, इसलिए अंत तक ज़रूर पढ़ना. तो आईये पढ़ते है ये दिलचस्प पहली प्रेगनेंसी पर कहानी।

मेरा नाम मीरा है और मैं इंदौर से हूँ. मेरी शादी को 3 साल हो चुके है और सच बताऊ तो मेरी पहली प्रेगनेंसी बहुत मुश्किल से हुई थी.

Pregnancy Story in Hindi

मैं और मेरे पति को 2 साल तक बच्चा नहीं हुआ था, हमने बहुत try किया, कई तरह की दवाईया खाई और कई तरह के इलाज भी करवाए लेकिन फिर भी बच्चा नहीं हो रहा था. शादीशुदा होते हुए मुझे पता है कि जब किसी महिला को बच्चा ना हो तो उसे कितनी मानसिक पीड़ा होती है और आस पास के लोग जो ताने मारते है, वो अलग !

मुझे याद है कि मेरी सास हर दूसरे दिन कोई ना कोई बच्चा होने का उपाय बताती थी लेकिन सब व्यर्थ. वो कहते है ना जब सही समय होता है तभी सब काम बनते है.

उस समय शायद मेरा शरीर प्रेगनेंसी के लिए तैयार नहीं था. 2 साल तक कोशिश करने के बाद हमें एक बेटा हुआ लेकिन उसके पीछे भी एक कहानी है.

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Pregnancy Story in Hindi

दीवाली का दिन था और मैं और मेरे पति शाम को पूजा के बाद घर में बैठे बाते कर रहे थे. अचानक मेरे पेट में थोड़ा दर्द सा उठा और मुझे थोड़ी उलटी भी आयी.

उस समय मुझे प्रेगनेंसी की बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी, मैंने सोचा की त्यौहार का दिन है, शायद कुछ गलत खाने की वजह से पेट गड़बड़ है.

जब मैं वाशरूम से वापिस आयी तो मेरे पति ने मुझसे पुछा की क्या हुआ तो मैंने बताया कि पेट थोड़ा गड़बड़ है और थोड़ी उलटी भी आई है.

मेरे पति को जैसे एक उम्मीद की किरण दिख रही थी लेकिन मैंने कहा कि कुछ गलत खा लिया होगा।

पति ने मेरी बात नहीं मानी और फ़ौरन प्रेगनेंसी चेक करने वाली किट …

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तू आज भी मुझमे कहीं ज़िंदा है – Dard Bhari Kahani Breakup Story

Dard Bhari Kahani

Submitted by Azhar Mehmood

दोस्तों, ये एक breakup story in hindi जो कि काफी इमोशनल है. ये एक ज़ख़्मी दिल की कहानी है जिसने समाज के लिए अपना प्यार खो दिया. ये कहानी मेरे दिल के बहुत करीब है क्यूंकि ये मेरी real Hindi story है.

Dard Bhari Kahani

आँखें मूँद कर जब इस बारिश को महसूस करता हूँ…

तो ऐसा लगता है उसने मेरा हाथ थाम रखा है..

इस सन्नाटे में भी ऐसा लगता है वो मुझे बुला रही है.

मेरा नाम अज़हर मेहमूद है. मुझसे ज़िन्दगी में सिंर्फ एक गलती हो गयी कि मैंने हिन्दू लड़की से प्यार कर लिया, उसका नाम आस्था था. मैंने अपनी ज़िन्दगी में इतना प्यार शायद कभी किसी से नहीं किया था जितना आस्था को करता था. हमारा कॉलेज ख़त्म हुआ, जॉब लग गयी और वो दिन आ गया जिस दिन हमने फैसला किया कि एक दूसरे क घरवालों को अपने रिश्ते के बारे में बताये. 1 जुलाई 2018 का दिन था जब मैंने अपने घरवालों को आस्था के बारे में बताया.

Dard Bhari Kahani

अम्मी अब्बू तो जैसे सदमे में चले गए थे. मैंने अपना पूरा दिल खोलकर उनके सामने रख दिया था लेकिन अब्बू तो मानने के लिए तैयार ही नहीं थे. वहीँ आस्था के घरवाले भी इस रिश्ते के बिलकुल खिलाफ थे.

अब हम बड़ी दुविधा में फंसे हुए थे. हर पल बस यही सोचते थे कि घरवालों को निकाह के लिए कैसे राज़ी करवाया जाए. मैंने बहुत कोशिश की लेकिन ना तो अम्मी मानी और अब्बू तो बहुत ही ज़्यादा खिलाफ थे इस निकाह के.

Dard Bhari Kahani

हार कर मैंने आस्था को घर छोड़ कर शादी करने के लिए कहा लेकिन एक लड़की के लिए ये बहुत मुश्किल होता है और मैं उसकी बात समझता था. इसलिए मैंने और आस्था ने मिलकर ये फैसला किया कि हम दोनों अपने घरवालों की ख़ुशी के लिए अलग हो जाएंगे और हमने ये वादा किया कि अब एक दूसरे से कभी नहीं मिलेंगे.

हालांकि मुझे आस्था से दूर हुए अभी 2 ही दिन हुए थे, मेरा दिल बहुत मचल रहा था. वो कहते है न जिसके साथ आपने पूरी ज़िन्दगी बिताने का फैसला किया हो, उसे भूलना इतना आसान नहीं होता साहब. बस आस्था की बाते, उसका चेहरा, उसकी मुस्कराहट हर समय मुझे याद आती थी. लेकिन करता भी क्या, माँ बाप की इज़्ज़त और उनकी ज़िद्द के आगे मैं हार चूका था.

Dard Bhari Kahani

लेकिन 10 दिन के बाद …

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नए ज़माने की नैतिक कहानियां – New Moral Stories in Hindi

New Moral Stories in Hindi 

Submitted by Manju Das

1st Naitik Kahani – डर के आगे जीत है

कीर्ति जब 6 साल की हुई तो उसके पापा ने बर्थडे पर उसे एक साइकिल गिफ्ट की. साइकिल देख कर करती बहुत खुश हुई. जब उसने पहली बार साइकिल चलाने की कोशिश की तो गिर गयी और उसे चोट भी लग गयी. उस चोट का डर उसके दिल  गया कि दोबारा उसने साइकिल चलाने की हिम्मत नहीं की. कीर्ति की माँ को ये बात अच्छी नहीं लगी और उन्होंने कीर्ति को बहुत समझाया कि सिर्फ एक बार गिरने व चोट लगने से उसे साइकिल चलाने की कोशिश नहीं छोड़नी चाहिए.

New Moral Stories in Hindi

New Moral Stories in Hindi

शाम को जब कीर्ति के पिता घर आये तो उन्होंने कीर्ति को कहा कि चलो आज हम साइकिल चलने बाहर चलते है. लेकिन कीर्ति चोट के डर से घबरा रही थी और इसलिए उसने मना कर दिया. लेकिन कीर्ति के पिता ने समझाया कि वह उसके साथ रहेंगे और उसे गिरने नहीं देंगे.

इस पर कीर्ति मान गयी और साइकिल सीखने और चलाने अपने पापा के साथ चली गयी. शुरू में तो वो थोड़ा डर रही थी लेकिन जब ज़रा सी साइकिल चलानी आ गयी तो उसका साहस खुल गया. अब वो और भी ज़्यादा विश्वास के साथ साइकिल चलाने लगी और सिर्फ 2 दिनों में बड़े अच्छे से साइकिल सीख ली.

New Moral Stories in Hindi

जब उसे अच्छी तरह साइकिल चलाना आ गयी तो कीर्ति को समझ आ गया कि लगातार कोशिश करने से ही अपने अंदर के डर को बाहर निकाला जा सकता है. उस दिन के बाद कीर्ति खुली हवा में और ख़ुशी के साथ साइकिल चलाती थी.

कहानी का मोरल / सार : कोशिश करना कभी ना छोड़े और दिल में डर को जगह कभी ना दे क्यूंकि डर से निकल कर ही आप जीत हासिल कर सकते हो. 

2nd Naitik Kahani – मधुमक्खी की कहानी

एक बार एक चिड़िया और एक मधुमक्खी बैठ कर बाते कर रही थी. तभी चिड़ियाँ ने कहा “तुम इतनी मेहनत से अपना शहद बनती हो और ये इंसान एक पल में तुम्हारा शहद चुरा कर ले जाते है, क्या तुम्हे बुरा नहीं लगता?”

New Moral Stories in Hindi

मधुमक्खी ने बहुत सुन्दर जवाब दिया : नहीं मुझे बुरा नहीं लगता क्यूंकि ये इंसान मेरा शहद तो चुरा सकते है लेकिन शहद बनाने की मेरी कला नहीं चुरा सकते.

सार/मोरल कहानी का : आपकी कला …

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मनुष्य की कीमत – Best Moral Story in Hindi Short

Best Moral Story

एक बार की बात हैं, अपने पिता के साथ लोहे की दुकान में काम कर रहे एक बालक ने अचानक ही अपने पिता से पुछा – “पिताजी इस दुनिया में मनुष्य की क्या कीमत होती है ?”

पिताजी एक छोटे से बच्चे से ऐसा गंभीर सवाल सुन कर हैरान रह गये।

फिर वे बोले “बेटे एक मनुष्य की कीमत आंकना बहुत मुश्किल है, क्यूंकि वो तो अनमोल है।”

बालक – क्या सभी उतना ही कीमती और महत्त्वपूर्ण हैं ?

पिताजी – हाँ बेटे।

बालक कुछ समझा नही उसने फिर सवाल किया – तो फिर इस दुनिया मे कोई गरीब तो कोई अमीर क्यो है? किसी की कम रिस्पेक्ट तो कीसी की ज्यादा क्यो होती है?

सवाल सुनकर पिताजी कुछ देर तक शांत रहे और फिर बालक से स्टोर रूम में पड़ा एक लोहे का रॉड लाने को कहा।

रॉड लाते ही पिताजी ने पुछा – इसकी क्या कीमत होगी?

बालक – 200 रूपये।

पिताजी – अगर मै इसके बहुत से छोटे-छटे कील बना दू तो इसकी क्या कीमत हो जायेगी ?

बालक कुछ देर सोच कर बोला – तब तो ये और महंगा बिकेगा लगभग 1000 रूपये का।

पिताजी – अगर मै इस लोहे से घड़ी के बहुत सारे स्प्रिंग बना दूँ तो?

बालक कुछ देर गणना करता रहा और फिर एकदम से उत्साहित होकर बोला ” तब तो इसकी कीमत बहुत ज्यादा हो जायेगी।”

फिर पिताजी उसे समझाते हुए बोले – “ठीक इसी तरह मनुष्य की कीमत इसमे नही है की अभी वो क्या है, बल्की इसमे है कि वो अपने आप को क्या बना सकता है।”

बालक अपने पिता की बात समझ चुका था।

बात पते की – 

दोस्तों मनुष्य अपना वैल्यू खुद बनाता और बिगाड़ता हैं। अगर आप म्हणत करोगी तो इसका लाभ जरूर मिलेगा और आपकी कीमत और क्वालिटी इम्प्रूव होगी।

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