Hindi Poem on Deewana Tumhara Koi Aur Nahi

मौसम को इशारों से बुला क्यों नहीं लेते,
रूठा है अगर वो तो मना क्यों नहीं लेते,
तुम जाग रहे हो मुझको अच्छा नहीं लगता,
चुपके से मेरी नींद चुरा क्यों नहीं लेते,
दीवाना तुम्हारा कोई गैर नहीं,
मचला भी तो सीने से लगा क्यों नहीं लेते,
खत लिखकर कभी खत को जला क्यों नहीं लेते..

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