love in train – मेरा प्यार ट्रेन में मिला

जनशताब्दी अपने तेज रफ्तार से चल रही थी. छोटी-छोटी स्टेशन हवा में ही पार हो जा रहे थे. मैं, मेरी मम्मी और पापा chair यान में बैठे थे. तभी हमारे पास ही एक छोटी सी बच्ची ने उलटी कर दी. कुछ छीटे मेरे पर भी आ गया. उसे देख कर मुझे भी उलटी जैसा होने लगा. मैं जल्द ही वहाँ से हट गई और कपड़ो पर पड़े छीटे धोने के लिए वाश बेसिन के तरफ चली गई.

तभी मेरी नजर एक लड़के पर गई. उस डिब्बे के सबसे अंतिम सिट पर वह बैठा था. कुछ गुमसुम, अकेला. जैसे किसी सोच में हो, बहुत भारी उदास मन में लेकर बैठा हो. मैं अपने कपड़ो पर पड़े छीटे धो कर आ गई. मगर उस लड़के से आगे मेरे पैर बढ़ ही नहीं रहे थे. उसके बड़ी-बड़ी आँखे गोरा गाल, बिलकुल क्यूट लग रहा था. मैं बस उसे देखते जा रही थी. और वो कभी देखता और कभी अपने नजरे झुका लेता. मैं उसके दुसरे तरफ वाली सिट से दो सिट आगे जा कर बैठ गई. मैं वहाँ जाना नहीं चाहती थी. मैं उसे बस देखते रहना चाहती थी.

love in train – मैं शुरू किया बात

ट्रेन अब भी अपने रफ्तार से चल रही थी. हमलोग को कही और जाना था शादी में. इसलिए इस ट्रेन को छोड़ कर दूसरी ट्रेन पकड़ना था. स्टेशन आने में बस कुछ ही समय बचा था. लगभग आधा घंटा बचा होगा. उसके दिल में क्या चल रहा था पता नहीं मगर मैं उसे अपना दिल दे चुकी थी. पहली नजर का प्यार हो गया था मुझे उस से. मैं उस से बात करना चाहती थी क्योंकि मुझे पता था की स्टेशन जल्द ही आ जाएगा. मैं जाकर उसके बगल वाली सिट पर बैठ गई. वह अब भी ऐसे ही शांत बैठा था. बिना किसी भाव के.

“हाय, कहाँ जा रहे है” मैंने बात शुरू करते हुए बोली.

“जी” उसने मेरी तरफ देखा और अनसुने भाव से बोला.

“आप कहाँ जा रहे है.” मैंने अपना बात फिर से दोहराई.

“मैं तो बहुत दूर जा रहा हूँ.” उसने मेरे तरफ देखते हुए बोला –“अगले स्टेशन पर जाकर मुझे गाड़ी change करनी है.”

मेरे दिल में कुछ हुआ. क्योंकी मुझे भी अगले स्टेशन से गाड़ी change करनी थी.

“कौन सी गाड़ी पकडनी है.” मैंने उसे दुबारा पूछी.

love in train – दोनों का ट्रेन एक ही था

उसके जवाब ने मेरे चेहरे पर मुस्कान ला दिया. रब भी किस से कब मिलये पता नहीं चलता. शायद वह मेरे लिए ही चला था. उसे भी वही ट्रेन पकडनी थी जो हमलोग पकड़ने वाले थे.

हमलोग के बातो का सिलसिला चल पड़ा. मैंने उसका number भी ले लिया. जल्द ही हमारा स्टेशन भी आ गया. जहाँ से हमलोग की गाड़ी change करना था. मगर अब कोई डरने की बात नहीं थी क्योंकि हमलोग एक दुसरे को जान गये थे. और इतना लम्बा सफर साथ ही तो जाना था. मैं बहुत खुश थी.

वह पढने के लिए हमारे शहर में रहता था. और गर्मी की छुट्टी के लिए अपने घर जा रहा था. उसकी दो गाड़िया पहले छुट चुकी थी क्यों की उसमे उसका टिकट नहीं हुआ था. शायद भगवान भी हमे मिलाना चाहते हो. मगर इसमें एक दिक्कत आ गई. उसका सिट, स्लीपर में था जबकि हमारा AC में था. मैं सोच कर थोड़ी उदास हो गई. मगर ख़ुशी भी था की कम-से-कम एक ट्रेन में तो है.

love in train – फिर वो दूर चला गया

हमारी love story शुरू हो चुकी थी. जहाँ भी स्टेशन आता हमलोग आकर एक दुसरे से मिलते. फिर अपने अपने सिट पर चले जाते. ऐसे ही हमारा सफर कटता रहा. रास्ते का पता ही नहीं चल रहा था. सारा समय खुशी से बीत रहा और इतना लम्बा सफर हमने ऐसे ही काट दिया. जल्द ही वह स्टेशन आ गया. जहाँ हमे उतरना था. वह भी उतर गया और हम भी. वहाँ उनको कही और जाना था.

हमारी मुलाकात अब नहीं होने वाली थी. क्यों की हमारा घर दुसरे स्टेट में था और उसका दुसरे स्टेट में. मैं नजरे उठाकर उसे देखा. वह भी उदास मन से मुझे देख रहा था. मिलकर अब दूर जाने का मन नहीं कर रहा था. फिर उसकी ट्रेन आई और वह चला गया. मैं उस से देखते रह गई. हमारा प्यार का समय भले ही छोटा हो मगर हमदोनो इस पल की जीवन में कभी नहीं भूलेंगे. प्यार दिल में हमेशा ऐसे ही रहेगा. चाहे कितनी भी दूरियां आये.

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