स्कूल सैड लव स्टोरी इन हिंदी | पहला प्यार

स्कूल सैड लव स्टोरी इन हिंदी | पहला प्यार

यूं तो दीवानगी की कोई हद कोई उम्र नहीं होती। पर जब ये अधूरी हो पूर्ण ही कहलाती तब वो इतिहास में एक अनोखी कहानी लिखी जाती। ऐसी ही एक कहानी है “स्कूल सैड लव स्टोरी इन हिंदी | पहला प्यार”। यह पूर्णतया काल्पनिक है इसमें इस्तमाल किए गए चरित्र काल्पनिक है धन्यवाद।

स्कूल सैड लव स्टोरी इन हिंदी | पहला प्यार

पहली किरण के साथ निकला टहलने मैं अद्वितीय स्फूर्ति जगा,  हवाओं की हस्ती में उड़ता चला जा रहा था,
यूं तो मन में नहीं उबाला था कि नैनों से घायल मैं हो पाऊंगा कभी पर क़िस्मत को तो मंजूर कुछ और ही था||

कदमों के उठा पटक के बीच अचानक ठहराव शब्द प्रधान बन गया, जब तक खुद को बता पाता समझ पाता…
मैं घायल हो चुका था, नजरों का बार बार टकराना दिल का सीने को धकेल.. धड़क उठना, चलता रहा-चलता रहा|

सड़क के उस पार एक ग्वाले का घर था जिनकी बेटी का विवाह होगा शायद, उनके घर खूब मस्ती माहौल था… गानों का रंगारंग कार्यक्रम चल रहा था|

उस वक़्त और भी शानदार लगने लगा जब मेरी और उसकी आंखें एक पल के लिए एक दूसरे में खो चली, अब ये करामात उस डीजे वाले की थी या क़िस्मत की, ये बात दोनों जाने|पर यहां हर गाना मेरे दिलों दिमाग़ को पढ़ कर ही बजता रहा|

“नहीं चल सकूँगा तुम्हारे बिना मैं मेरा तुम सहारा बनो इक तुम्हें चाहने के अलावा और कुछ हमसे होगा नहीं बोल दो ना ज़रा दिल में जो है छिपा मैं किसी से कहूँगा नही” शायद हम दोनों का गाने के बोल पे उतना ही ध्यान था जितना एक दूसरे पर और गाने के बोल सुन उनकी निगाहों पे वो तिलिस्मी मुस्कान और लज्जा के साथ हलकी हलकी पलकों को झुकाना|

मेरे दिल को बुरे तरीके से घायल करने के लिए काफी था| मानों वर्षों से थका सुकून की बारिश में भीग रहा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क वहां से कुछ कह रहा, मत कर बेमानी मुझसे वो पास है| मान लो मेरा आज एक अलग जगह है। लंबी लंबी सांसें छोड़ मैं उससे कह रहा- ऐ नादां दिल संभालो खुद को बेकाबू मत हो…तुम्हारी यही जगह है।

“ख़ामोशियाँ रखती हैं अपनी भी एक जुबां, ख़ामोशी को चुपके से सब कह जाने दो…
कुछ तो हुआ है ये क्या हुआ जो ना पता है, ये जो हुआ कुछ तो हुआ है समझो कुछ समझो ना”

और इस गाने ने तो जां …

Read More

Best Hindi Dharmik Kahani | मन्नत

आदरणीय पाठक, आज के इस अंक में हम आपके लिए लेकर आएं हैं एक ऐसी कहानी “Best Hindi Dharmik Kahani | मन्नत” जिसे पढ़कर आप हिन्दू संस्कृति और हिंदुत्व को और भी बारीकी से जान पाएँगे| आपको यह कहानी कैसी लगती है हमें “Comment Section” में ज़रूर बताएं|

Best Hindi Dharmik Kahani | मन्नत

पता है वो पड़ोस वाली सरिता क्या बता रही थी ?

मुझे कहाँ से पता होगा | तुमसे बोला तो तुम जानो रमेश ने कहा|

अनीता – तुम अपने व्यंग बाण हर समय चला दिया करो, ये भी नहीं कि जरा देख लो की सामने वाले की बातो मे कितनी गंभीरता है|

रमेश – अच्छा भागवान गलती हो गयी, बताओ क्या कहना है?

अनीता – सरिता बता रही थी, कि उसकी नन्द के कई साल से संतान नहीं थी फिर वह फलां शहर से कोई 20-25 किलोमीटर आगे किसी गाँव मे टेकरी पर “हर सिद्धि “ माता का मंदिर है वहाँ गयी थी| कहते है वहां मन्नत पुरी होती है| हम भी जाकर आयें क्या?

रमेश – अच्छा तुम्हें बस मन्नत पुरी हो जाये इसलिए जाना है?

साधारणत: ऐसा कोई मनुष्य नहीं होगा जिसके पास कोई इच्छा न हो जिसे वह पुरा करना चाहता हो| जब उसे पता चले कि फलां जगह जाने से वह इच्छा पुरी भी हो जाएगी तो बेचारा भला मानुस वहां जाने से क्यों चुकने लगा| इससे अच्छा मार्केटिंग का तरीका कोई हो भी नहीं सकता| मन्नत पुर्ती के नाम पर कुछ भी आसानी से  बिक सकता है|

बड़े धार्मिक लोग है अपने देश के भगवान के नाम पर किसी तर्क के लिए अपने दिमाग मे स्थान नहीं रखते बस मन्नत पुरी हो जाये तो काहे का तर्क और काहे का वितर्क| रमेश का तो यही मानना था |

अनीता – इनसे तो बस बहस करवा लो, सारी दुनिया कह रही है पर वो सब तो बेवकुफ है| भगवान ने सारी समझदारी का ठेका तो बस इन्हे ही दे दिया है|

स्त्रीहट और बालहट के आगे भला किसकी चलती है रमेश को तो अनुमति देनी ही थी| अगले रविवार को जाना तय हुआ|

रमेश और अनीता की बच्ची बबली बड़ी खुश थी कि अगले रविवार को हम घुमने जाने वाले है| बच्चो को क्या मतलब कि कहाँ जाना है| उनके लिए तो बाहर जाना मतलब मनोरंजन है क्योंकि बबली के लिए अभी तक बाहर जाने का अनुभव केवल नानी के घर जाने का था लेकिन इस बार तो नानी के …

Read More