लफ़्ज़ों की शरारत – शरारत उर्दू शायरी

वो शरारत भी तेरी थी

वो मोहब्बत भी तेरी थी , वो शरारत भी तेरी थी
अगर कुछ बेवफाई थी , तो वो बेवफाई भी तेरी थी
हम छोड़ गए तेरा शहर , तो वो हिदायत भी तेरी थी
आखिर करते तो किस से करते तुम्हारी शिकायत
वो शहर भी तेरा था और वो अदालत भी तेरी थी


शरारत न होती

शरारत न होती , शिकायत न होती
नैनों में किसी के , नज़ाकत न होती
न होती बेकरारी , न होते हम तन्हा
अगर जहाँ में कम्बख्त ये मोहब्बत न होती


कोई शरारत करते

तुम पास होते तो कोई शरारत करते
तुझे बाँहों में भर मुहब्बत करते
देखते तेरी आंखों में नींद का खुमार
अपनी खोई हुई नींदो की शिकायत करते


आओ एक शरारत करते हैं

एक शरारत करते हैं आओ मोहब्बत करते हैं
हँसती आँखों से कह दो , दरिया हिजरत करते हैं ,
कुछ दिल ऐसे हैं जिन पर हम भी हुकूमत करते हैं


कौन कहता है शरारत से तुम्हें देखते हैं

कौन कहता है शरारत से तुम्हें देखते हैं
जान -ऐ -मन हम तो मोहब्बत से तुम्हें देखते हैं
तुम को मालूम नहीं तुम हो मुकद्दस कितने
देखने वाले भी तुम्हे अकीदत से तुम्हें देखते हैं


मोहब्बत में शरारत का मज़ा

मोहब्बत में शरारत का मज़ा कुछ और होता है
कहा क्या किसी ने और सुना दूजे ने कुछ और होता है
यही तो है अलग अंदाज़ जीने और मरने का
के दुनिया और कुछ समझे, हुआ कुछ और होता है


वो आँखों से शरारत करते है

वो आँखों से शरारत करते है
अदाओ से क़यामत करते है
निगाहे उनके चेहरे से हटती नहीं
और वो हमारी नज़रो से शिकायत करते है


लफ़्ज़ों की शरारत

यह लफ़्ज़ों की शरारत है , संभल कर कुछ भी लिखना तुम
मोहब्बत लफ्ज़ है लकिन यह अक्सर हो भी जाती है


शरारत यूँ नहीं करते

माना के प्यार करते है तुम्हे , हक़ है शरारत का
किसी की जान पर बन जाये , शरारत यूँ नहीं करते…

इश्क़ करने वाले आँखों की बात समझ लेते है – नशीली आँखों की शायरी

आँखों की बात

इश्क़ करने वाले आँखों की बात समझ लेते है
सपनो में यार आए तो उसे मुलाकात समझ लेते है
रूठता तो आसमान भी है अपनी ज़मीन के लिए
यह तो लोग ही उसे बरसात समझ लेते है

Aankhon ki Baat

Ishq karnewale Aankhon ki baat samajh lete hai
Sapno mein yaar aaye Toh usse mulakat samajh lete hai
Roota to aasman bhi hai Apni zameen ke liye
Yeh to log hi usse barsaat samajh lete hai…


नशीली ऑंखें

नशीली आँखों से वो जब हमें देखते हैं
हम घबराकर ऑंखें झुका लेते हैं
कौन मिलाए उनकी आँखों से ऑंखें
सुना है वो आँखों से अपना बना लेते है .

Nashili Ankhen

Nashili aankho se wo jab hamein dekhte hain,
hum ghabraakar ankhen jhuka leite hain,
kaun milaye unn ankhon se ankhen,
suna hai wo ankho se apna bana leite hai…


आँखों से बातें

कोई आँखों से बातें करता हैं
कोई आँखों से मुलाकाते करता हैं
बड़ा मुश्किल होता हैं जवाब देना
जब कोई चुप रह के सवाल करता हैं .

Aankho se Batein

Koi aankho se batein karta hain
Koi aankhon se mulakate karta hain
Bada mushkil hota hain jawab dena
Jab koi chup raheke sawaal karta hain…


दिल की दूरिया

दूरियों की न कभी परवाह कीजिये
दिल जब भी पुकारे बुला लीजिए
हम ज़्यादा दूर नहीं है आपसे
बस अपनी आँखों को पलकों से मिला लीजिए

Dil Ki Duriya

Duriyo ki na kabhi parwah kijiye
Dil jab bhi pukare bula lijiye
Hum ziyada dur nahi hai aapse
Bus apani aankho ko palko se mila lijiye…


आँखों की तड़प

वो तो पानी की बूँद है जो आँखों से बह जाये
आँसू तो वो है जो तड़प के आँखों में ही रह जाये
वो प्यार क्या जो लफ्ज़ो में बयाँ हो
प्यार वो है जो आँखों में नज़र आए .

Aankho ki Tadap

Wo to pani ki boond hai jo aankho se beh jaye,
Aansu to wo hai jo tadap ke aankhon mein hi reh jaye,
Wo pyaar kya jo lafzo mein bayan ho,
Pyaar wo hai jo aankho mein nazar aaye……

हर धड़कन में एक राज़ होता है – धड़कन उर्दू शायरी

बहुत देर कर दी तुमने मेरी धड़कन महसूस करने में
वो दिल नीलाम हो गया जिस को कभी हसरत तुम्हारे दीदार की थी

हर धड़कन में एक राज़ होता है

हर धड़कन में एक राज़ होता है
हर बात कहने का एक अंदाज़ होता है
जब तक ठोकर न लगे इश्क़ में
हर किसी को अपने महबूब पे नाज़ होता है

Har Dhadkan Mein Ek Raaz Hota Hai

Har Dhadkan mein ek raaz hota hai
Har baat kehne ka ek andaaz hota hai
Jab tak thokar na lage ishq mein
Har kisiko apne mehboob pe naaz hota hai


धड़कन ज़रा थम जा

शोर न कर धड़कन ज़रा थम जा कुछ पल के लिए
बड़ी मुश्किल से मेरी आँखों में उसका खवाब आया है

Dhadkan Zara Tham Ja

Shor Na Kar Dhadkan Zara Tham Ja Kuch Pal Ke Liye
Badi Muskil Se Meri Aankhon Mein Uska Khawab Aaya hai


दिल की धड़कन को धड़का गया कोई

दिल की धड़कन को धड़का गया कोई
मेरे ख्वाबों को जगा गया कोई
हम तो अनजाने रास्तो पे यूं ही चल रहे थे
अचानक ही प्यार का मतलव भी सीखा गया कोई

Dil ki Dhadkan ko Dhadka Gaya Koi

Dil ki dhadkan ko dhadka gaya koi
Mere khawaboon ko jgaa gaya koi
Hum to anjane rasto pe yoon hi chal rahe the
Achanak hi pyar ka matlab sikha gaya koi


दिल का धड़कना माँगोगे

मेरी धड़कनो से दिल का धड़कना माँगोगे
एक दिन तुम मुझसे मेरा प्यार उधर माँगोगे
मैं वो फूल हूँ जो तेरे चमन से न खिलेगा
एक दिन तुम अपनी वीरान ज़िन्दगी के लिए बहार माँगोगे

Dil Ka Dhadknaa Mangoge

Meri Dhadkano Se Dil Ka Dhadknaa Mangoge
Ek Din Tum Mujhse Mera Pyaar Udhar Mangoge
Main Wo Phool Hoon Jo Tere Chaman Se Na khilega
Ek din tum Apni Viran Zindagi Ke Liye Bhaar Mangoge


मेरी साँसे उसकी धड़कन में बस्ती है

आज भी मेरे दिल में वो रहती है
आज भी मेरे सपनो में वो दिखती  है
क्या हुआ अब हम दूर है एक दुसरे से पर
आज भी मेरी साँसे उसकी धड़कन में बस्ती है

Meri Saanse Uski Dhadkan Mein Basti Hai

Aaj Bhi Mere Dil Mein Wo rehti Hai
Aaj Bhi Mere Sapno Me Wo Dikhti Hai
Kya Hua Ab Hum Door Hai Ek Dosre Se Par
Aaj Bhi Meri Saanse Uski Dhadkan mein basti Hai


धड़कन है मेरे दिल की

धड़कन है मेरे दिल की तू आँखों का …

मेरे मेहबूब की खूबसूरती में चुनिदां शायरी की पंक्तियाँ

नज़र इस हुस्न पर ठहरे तो आखिर किस तरह ठहरे
कभी जो फूल बन जाये कभी रुखसार हो जाये

तुम्हारा चाँद सा चेहरा

फिज़ाओ में रंग बिखेरे तुम्हारा चाँद सा चेहरा
मुझे बेचैन कर जाये तुम्हारा मासूम चाँद सा चेहरा
मेरी खातिर सँवरता है तुम्हारा चाँद सा चेहरा


ऐसी कशिश उस चेहरे में

उस हसीन चेहरे की क्या बात है
हर दिल अज़ीज़ , कुछ ऐसी उसमें बात है
है कुछ ऐसी कशिश उस चेहरे में
के एक झलक के लिए सारी दुनिया बर्बाद है


तेरा होंठो की पंखुडियो

तेरा होंठो की पंखुडियो को तू गुलाब न कहना
वो तो मुरझा जाते है
इनकी लाली को देखकर लगता है
गुलाब भी अपना रंग यही से चुरा कर लाये है


मेहबूब की तारीफ

मेरे मेहबूब की बस इतनी सी तारीफ है
चेहरा जैसे रोशन चाँद शरबती उसकी ऑंखें है ​
नाज़ुक होंठ कलियों जैसे , दाँत जैसे सफ़ेद मोती है
लंबी घनी ज़ुल्फ़ें उसकी काली , उस पे अदा निराली है ​


मेरे सपनो की रानी

जब चलती है गुलशन में बहार आती है
बातों में जादू और मुस्कराहट बेमिसाल है ​
उसके अंग अंग की खुश्बू मेरे दिल को लुभाती है
यारो यही लड़की मेरे सपनो की रानी है


वो मेरी बाहों में है

ऐ वक़्त ज़रा ठहर जा के वो मेरी बाहों में है
जिस्म है ज़मीन पर और रूह हवाओं में है
हसीन वादियां देखूँ या हुस्न -ऐ-हसीन तेरा
तुझ में है वो सब नज़ारे जो फ़िज़ाओं में है
नासाज़ तबियत की फ़िक्र तुझे क्यों मेरे दोस्त”
उनके दीदार में है वो शिफ़ा जो दुआओ में है


फूलों से खूबसूरत

फूलों से खूबसूरत कोई नहीं
सागर से गहरा कोई नहीं
अब आपकी क्या तारीफ करू
खूबसूरती में आप जैसा जैसा कोई नहीं


खुद को भूल जाता हूँ

नज़र जब तुमसे मिलती है मैं खुद को भूल जाता हूँ
बस इक धड़कन धड़कती है मैं खुद को भूल जाता हूँ
मगर जब भी मैं तुमसे मिलता हूँ मैं खुद को भूल जाता हूँ


तुम्हारे चाहने वाले

हमने सोचा की तुम्हारे चाहने वाले सिर्फ हम है
लेकिन तुम्हारे चाहने वालों का काफिला निकला
जब हमने शिकायत की खुदा से
तो वो खुदा भी तुम्हारा आशिक निकला…

तेरी ज़ुल्फे खुली हो जैसे – तेरी ज़ुल्फे उर्दू शायरी

मेरे मर जाने की वो सुन के खबर आई  “मोहसिन”
घर से रोते हुए वो बिन ज़ुल्फ़ सँवारे निकले

ज़ुल्फ़ खुली हो जैसे

ऐसा लगता है तेरी ज़ुल्फ़ खुली हो जैसे
होके गुलशन से सबा आज चली हो जैसे
अध खुले होंठ सियाह ज़ुल्फ़ और गज़ली ऑंखें
किसी शायर ने कोई ग़ज़ल तर्ज़ की हो जैसे

Zulf khuli ho jaise

Aisa lagta hai teri zulf khuli ho jaise
Hoke Gulshan se saba aaj chali ho jaise
Adh khule hont siyah zulf aur gazali ankheN
Kisi shayar ne koi gazal tarz ki ho jaise…


ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाये

यह ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाये तो अच्छा है
इस रात की तक़दीर सँवर जाये तो अच्छा है
जिस तरह से थोड़ी सी ज़िन्दगी तेरे साथ कटी है
बाकी भी उसी तरह गुज़र जाये तो अच्छा है
वैसे तो तुम्ही ने मुझे बर्बाद किया है
इल्ज़ाम किसी और के सिर जाये तो अच्छा है

Zulf Agar Khul ke Bikhar Jaye

Yeh zulf agar khul ke bikhar jaye to accha hai
Is raat ki takdir sanwar jaye to accha hai
Jis tarah se thodi si zindagi tere saath kati hai
Baaki bhi usi tarah guzar jaye to accha hai
Waise to tumhi ne mujhe barbaad kiya hai
Ilzaam kisi aur ke sar jaye to accha hai….


परेशान ज़ुल्फ़-ऐ-यार

छलके हुए थे जाम परेशान थी ज़ुल्फ़-ऐ-यार
कुछ ऐसे हादसात से घबरा के पी गया
कांटे तो खैर कांटे हैं इस का गिला ही क्या
फूलों की वारदात से घबरा के पी गया .

Pareshaan Zulf-AE-Yaar

Chhalke hue the jaam pareshaan thi zulf-AE-yaar
kuchh aise haadsaat se ghabra ke pee gaya
Kaante to khair kaante hain iss ka gila hi kya
phoolon ki waardaat se ghabra ke pee gaya…


ज़ुल्फ़ रातों सी

ज़ुल्फ़ रातों सी , रंगत है उजालों जैसी
पर तबियत है वही , भूलने वालों जैसी
ढूढ़ता फिरता हूँ , लोगों में शबाहत उसकी
के वो ख्वाबों में भी लगती है , ख्यालों जैसी

Zulf Raaton Si

Zulf raaton si, rangat hai ujaalon jaisi
par tabiyat hai wohi, bhulne walon jaisi
?Dhoonta phirta hun, logon mein shabahat uski?
ke wo khwabon mein bhi lagti hai, khayalon jaisi….


चेहरे पे मेरे ज़ुल्फ़

चेहरे पे मेरे ज़ुल्फ़ को फैलाओ किसी दिन
क्यों रोज़ गरजते हो बरस जाओ किसी दिन
राज़ों की तरह उतरो मेरे दिल में किसी शब्
दस्तक पे मेरे हाथ की खिल जाओ किसी दिन

Chehre pe mere Zulf

Chehre pe …

दिल तो जले मगर ‘राख ‘ न हो – महफ़िल शायरी

दिल मौजूद न था

उन को देखा तो कुछ खोने का एहसास हमे हुआ
हाथ सीने पे जो गया तो दिल मौजूद न था

Dil Maujood Na Tha

Un Ko Dekha To kush khone ka Ehsaas hume Hua
Hath Seene Pe jo gaya to Dil Maujood Na Tha


बस दुआ है

और कुछ नहीं चाहती मैं इस ज़िन्दगी में ‘मेरे रब ’
बस दुआ है के किसी के दुःख की वजह मेरी ज़ात न बने

Bas Dua Hai

Aur Kuch Nahi Chahti Main is Zindagi Mein ‘Mere Rab’
bas Dua Hai Ke Kisi Ke Dukh Ki wajha Meri Zaat Na Ho..


मुस्कराहट बनाए रखो

हर एक ख्याल को ज़ुबान नहीं मिलती
हर एक आरज़ू को दुआ नहीं मिलती
मुस्कराहट बनाए रखो तो दुनिया है साथ
आँसुओ को तो आँखों में भी पनाह नहीं मिलती

Muskurahat Banaye Rakho

Har Ek khyal Ko Zuban Nahi Milti
Har Ek Aarzu Ko Dua Nahi Milti
Muskurahat Banaye Rakho To Duniya Hai Sath
Aansoo Ko To Ankhoo Mein Bhi Panah Nahi Milti…


मोहब्बत की आग

करते है मोहब्बत और जताना भूल जाते है
पहले खफा होते हैं फिर मनना भूल जाते है
भूलना तो फितरत सी है ज़माने की
लगाकर आग मोहब्बत की बुझाना भूल जाते है

Mohabbat ki Aag

Karte hai mohabbat aur jtana bhool jate hai
Pehle khfa hote hain fir manana bhool jate hai
Bhulna to fitrat si hai zamane ki
Lagakar aag mohabbat ki bujhana bhool jate hai…


दिल तो जले

वो शमा की महफ़िल ही क्या
जिसमे परवाना जल कर ‘ख़ाक’ न हो
मज़ा तो तब आता है चाहत का मेरे यार
जब दिल तो जले मगर ‘राख ‘ न हो

Dil To Jale

Wo Shama Ki Mehfil Hi Kya
Jisme parvana Jal Kar ‘Khaak’ Na Ho
Maza To Tab Aata Hai Chahat Ka mere yaar
Jab Dil To Jale Magar ‘Raakh’ Na Ho…

SAAKI AUR JAAM SHAYARI – साक़ी ओर पिला की पीने पिलाने की रात है

वो पिला कर जाम

वो पिला कर जाम “लबों ” से अपनी मोहब्बत का “मोहसिन”
और , अब कहते हैं के नशे की आदत अच्छी नहीं होती ।

Wo Pila Kar “Jaam” Labon Se Apni Muhabbat Ka “Mohsin”
Aur , Ab Kehte Hain Ke Nashay Ki Aadat Acchi Nahi Hoti.


जाम पे जाम

जाम पे जाम पीने से क्या फ़ायदा
रात गुज़री तो फिर उतर जाएगी
पीना है तो किसी की आँखों से पियो
उम्र सारी नशे में गुज़र जाएगी ।

Jaam Pe Jaam Pene Se Kya Faida
Raat Guzri To Phir Utar Jayegi
Peena Hai To Kisi Ki Ankhon Se Piyo
Umar Sari Nashay Mein Guzar Jayegi.


जाम आँखों से पिलाया किसी ने

कल जो जाम आँखों से पिलाया किसी ने
मदहोश पड़ा रहा , न उठाया किसी ने

 

मुझे भी कुछ ज़्यादा शौक़ था पीने का
पीने के बाद जो हुआ , न बताया किसी ने

कभी मस्जिद , कभी मंदिर मैं घूमता रहा रात भर
कभी मुस्लमान , कभी हिन्दू बनाया किसी ने

आदि बना के महखाना छीन लिया गया मुझसे
कुछ इस तरह मुझे सताया किसी ने

Kal Jo Jaam Aankhon Se Pilaya Kisi Ne
MadHosh Pada Raha, Na Uthaya Kisi Ne

Mujhe Bhi Kuch Ziada Shoq Tha Pene Ka
Pene Ke Bad Jo Hua, Na Bataya Kisi Ne

Kabhi Masjid, Kabhi Mandir Main Ghoomta Raha Rat Bhar
Kabhi Musalman, Kabhi Hindu Banaya Kisi Ne

Aadi Bana Ke MayKahaana Cheen Liya Gaya Mujhse
Kuch Is Tarha Mujhe Staya Kisi Ne.


कसूर शराब का नहीं

मदहोश हम हरदम रहा करते हैं,
और इल्ज़ाम शराब को दिया करते हैं ,
कसूर शराब का नहीं , उनका है यारों ,
जिनका चेहरा हम हर जाम में तलाश किया करते हैं ।

Madhhosh Hum Hardam Raha Karte Hain,
Aur Ilzaam Sharaab Ko Diya Karte Hain,
Kasoor Sharaab Ka Nahi, Unka Hai Yaron,
Jinka Chehra Hum Har Jaam Mein Talaash Kiya Karte Hain.


मोहब्बत और जाम

आशिकों को मोहब्बत के आलावा अगर कुछ काम होता ,
तो मयख़ाने जा के हर रोज़ यूँ बदनाम न होता ,
मिल जाती चाहने वाली उसे भी कहीं राह में कोई ,
अगर क़दमों में उसके नशा और हाथ में जाम न होता ।

Aashikon Ko Mohabbat Ke Alava Agar Kuchh Kaam Hota,
To Maikhane Ja ke Har Roz Yun Badnam Na Hota,
Mil Jaati Chahne Wali Usse Bhi Kahin Raah Mein Koi,
Agar Kadmon Mein Nasha Aur Hath Mein Jaam Na Hota.


हाथ में

फेसबुक चुनिंदा शायरी – अरज़ किया है

   मुझे ज़रा खुदा से हमकलाम होने दो …
   तुम्हारा ज़िकर भी इसी गुफ्तगू में है

मेरी शामें

खुद को खुद से हमकलाम कर के देखना
कितना मुश्किल है यह सफर तय कर के देखना
किस क़दर उदास गुज़रती हैं मेरी शामें
याद किसी को किसी शाम कर के देखना


कफ़न अगर तुम्हारा होगा

आँखें अगर तुम्हारी होगी तो आंसू हमारे होंगे
दिल अगर तुम्हारा होगा तो धड़कन हमारी होगी
ख्वाहिश है ..कफ़न अगर तुम्हारा होगा तो मयत हमारी होगी


कफ़न न डालो मेरी मयत पर

कफ़न न डालो मेरे चेहरे पे
मुझे आदत है मुस्कुराने की
कफ़न न डालो मेरी मयत पर
मुझे इंतज़ार है उसके आने का


उनके सदके जान है मेरी

शिकायत ये नहीं के वो नाराज़ है हमसे
शिकायत इस बात की है वो आज भी अनजान है हमसे
दिल तोडा , जज़्बात बिखेरे , फिर भी वो दिलजान है मेरे
मांग ले वो कभी जान भी मेरी , उनके सदके जान है मेरी


अश्क आँख से ढल गए

कभी आह लब पे मचल गई कभी अश्क आँख से ढल गए
वो तुम्हारे ग़म के चिराग़ हैं कभी बुझ गए कभी जल गए
जो फना हुए ग़म-ऐ -इश्क़ में , उन्हें ज़िंदगी का न ग़म हुआ
जो अपनी आग में जल न सके, वो पराई आग में जल गए


देख लो खवाब मगर

देख लो खवाब मगर , ख्वाब का चर्चा न करो
लोग जल जाएंगे सूरज की तमन्ना न करो
बे-ख्याली में कभी उंगलियां जल जाएंगी
राख गुज़रे हुए लम्हों की कुरेदा न करो


मोहब्बत उसे भी थी

देखा पलट के उसने के हसरत उसे भी थी
हम जिस पे मिट गए थे मोहब्बत उसे भी थी
ये सोच कर अँधेरे गले से लगा लिए
रातों को जागने की आदत उसे भी थी
वो रो दिया था मुझ को परेशान देख कर
उस दिन राज़ खुला के मेरी ज़रुरत उसे भी थी


मोहब्बत की नई बुनियाद

चलो मोहसिन मोहब्बत की नई बुनियाद रखते हैं
खुद पाबंद रहते हैं , उसे आज़ाद रखते हैं
हमारे खून में खुदा ने यही तासीर रखी है
बुराई भूल जाते हैं अच्छाई याद रखते हैं
मोहब्बत में कहीं हम से गुस्ताखी न हो जाए
हम अपना हर क़दम उसके क़दम के बाद रखते हैं


दिल से दिल

दिल से दिल बड़ी मुश्किल से मिलते है
तूफान में साहिल बड़ी मुश्किल से मिलते है
यूँ तो मिल जाते है कई लोग राहो में मगर
आप जैसे दोस्त बड़ी मुश्किल से मिलते है…

यादों का आईना – Unique Collection of Pakistani Urdu Shayari and Poetry

तेरे शोख तासुबर में

ख़ामोश थे लव और मैं गुफ़्तार में गुम थी
पलके न झमकती थी के मैं दीदार में गुम थी
तन मन ने सजाये है तेरे शोख तासुबर में
यादों का आईना था मैं सिंगार में गुम थी

 

Tere Shokh Tasubur Mein

khamosh the luv aur main guftar mein gum thi
palke na Jhamkti thi ke main didar mein ghum thi
tan man ne sajaye hai tere shokh tasubur mein
yadon ka aiina tha main shingar mein gum thi

 


जुदाई के मौसम

जुदाई के मौसम सताने लगे है
वो फिर टूट कर याद आने लगे है
तख़्युल के परवाज़ को कैसे रोकू
वो गोया मेरे घर फिर आने लगे है
निशो रोक लो वो जाने लगे है
मनाने में जिन को ज़माने लगे है

 

Judai ke Mausam

judai ke mausam satane lage hai
wo phir toot kar yaad ane lage hai
takhayul ke parwaz ko kaise roku
wo goya mere ghar phir ane lage hai
nisho rok lo wo jane lage hai
manane main jin ko jamane lage hai

 


ज़िन्दगी-ऐ-ज़िन्दगी

हम तेरी धुन मैं परेशान ज़िन्दगी-ऐ-ज़िन्दगी
और तू हम से गुरेजा ज़िन्दगी-ऐ-ज़िन्दगी
तू कहीं साकी गली में खो गयी है और यहाँ
डंस गया इंसान को इंसान ज़िन्दगी-ऐ-ज़िन्दगी

 

Zindagi-ae-zindagi

hum teri dhun main preshan zindagi-ae-zindagi
Aur tu hum se gujejan zindagi-ae-zindagi
tu kahin saki gali mein khow gayi hai aur yahan
das gaya insaan ko insaan zindagi-ae-zindagi

 


दीवानगी

होश मंदी का सीला है शायद
यह जो दीवानगी अब तारी है
मेह्बे नज़ारा है वो आँख अभी
सो तमाशा भी अभी जारी है

 

Diwangi

hosh mandi ka sila hai shayad
yeah jo diwangi ab tari hai
mehbe nazara hai wo ankh abhi
so tamasha bhi abhi zaari hai

 


ख्याल और किसी का

ऐसा नहीं देखा कहीं हाल किसी और का
पहलू में कोई और ख्याल और किसी का

 

Khyal Aur Kisi Ka

aisa nahi dekha kahin haal kisi aur ka
pehlu mein koi aur khyal aur kisi ka

 


फैसला दिल का

फकत निगाह से होता है फैसला दिल का
न हो निगाह में शोखी तो दिलबरी क्या है

 

Faisla Dil Ka

fakat nigah se hota hai faisla dil ka
na ho nigah main shokhi to dilbari kya hai…