मैं हूँ इक ख्वाब मगर जागती आँखों का – Ameer Qazalbash Shayari

आरज़ू-ऐ-साहिल

उनकी बेरुखी में भी इल्तेफ़ात शामिल है
आज कल मेरी हालत देखने के काबिल है

क़त्ल हो तो मेरा सा मौत हो तो मेरी सी
मेरे सोगवारों में आज मेरा क़ातिल है

मुजतरीब हैं मौजें क्यों उठ रही हैं तूफ़ान क्यों
क्या किसी सफ़ीने को आरज़ू-ऐ-साहिल है

सिर्फ राहजन ही से क्यों “अमीर ” शिकवा हो
मंज़िलों की राहों में राहबर भी शामिल है

Aarazuu-ae-saahil

unki berukhi mein bhi iltefaat shaamil hai
aaj kal meri haalat dekhne ke kabil hai

 

Qatal ho to mera sa maut ho to meri si
mere sog vaaron mein aaj meraa qaatil hai

muztarib hain maujen kyun uth rahe hain tuufaan kyun
kya kisi safine ko aarazuu-ae-saahil hai

sirf rahzan hi se kyon “Ameer” shikva ho
manzilon ki raahon mein raahbar bhi shaamil hai


कभी सोचा न था

जगमगाते शहर की रंगीनियों में क्या न था
ढूंढने निकला था जिस को मैं , वही चेहरा न था

रेत पर लिखे हुए नामों को पढ़ कर देख लो
आज तनहा रह गया हूँ कल मगर ऐसा न था

हम वही तुम भी वही मौसम वही मंज़र वही
फासला बढ़ जाएगा इतना कभी सोचा न था

Kabhi Socha na Tha

Jagmagaate shehar ki ranginiyon mein kya na tha
dhundhane nikala tha jis ko main wahi chehara na tha

ret pe likhe huye naamon ko padh kar dekh lo
aaj tanhaa reh gayaa hoon kal magar aisa na tha

hum wahi tum bhi wahi mausam wahi manzar wahi
fasla bad jaayega itana kabhi socha na tha


तू एक दरिया

आज की रात भी गुज़री है मेरी कल की तरह
हाथ आये न सितारे तेरे आँचल की तरह

रात जलती हुई इक ऐसी चिता है जिस पर
तेरी यादें हैं सुलगते हुए संदल की तरह

तू एक दरिया है मगर मेरी तरह प्यासा है
मैं तेरे पास चला आऊंगा बादल की तरह

मैं हूँ इक ख्वाब मगर जागती आँखों का “अमीर ”
आज भी लोग छोड़ दे न मुझे कल की तरह

To Ek Dariya Hai

Aaj ki raat bhi guzari hai meri kal ki tarah
haath aaye na sitaare tere aanchal ki tarah

raat jalti hui ik aisi chitaa hai jis par
teri yaadein hain sulagate huye sandal ki tarah

to ek dariyaa hai magar meri tarah pyaasa hai
main tere paas chalaa aaunga baadal ki tarah

main hoon ik khwab magar jaagati ankhon ka “Ameer”
aaj bhi log chod de na mujhe kal ki tarah…

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ऐ दिल है मुश्किल शायरी – आज जाने की जिद न करो

ऐ दिल है मुश्किल

जब प्यार में प्यार न हो
जब दर्द में यार न हो
जब आँसूओ में मुस्कान न हो
जब लफ़्ज़ों में जुबान न हो
जब साँसे बस यूं ही चले
जब हर दिन में रात ढले
जब इंतज़ार सिर्फ वक़्त का हो
जब याद उस कमबख्त की हो
क्यों वो हो राही जो हो किसी और की मंजिल
जब धड़कनों ने साथ छोड़ दिया
ऐ दिल है मुश्किल , ऐ दिल है मुश्किल

AE Dil Hai Muskil

jab pyar mein pyar na ho
jab dard mein yaar na ho
jab anssooao mein muskan na ho
jab lafzzo main jubaan na ho
jab sanse bas yoon hi chale
jab har din main raat dhale
jab intezaar sirf waqt ka ho
jab yaad us kambaqat ki ho
kyon wo ho raahi jo ho kisi aur ki manjil
jab dhadkno ne sath chod diya
AE dil hai muskil , AE dil hai muskil


जनून हद से बढ़ चला है

बात बस से निकल चली है
दिल की हालत संभल चली है
अब जनून हद से बढ़ चला है
अब तबियत निहाल हो चली है

Janoon Haad se Bhad Chala Hai

Baat bas se nikal chali hai
Dil ki halat sambhal chali hai
Ab janoon haad se bhad chala hai
Ab Tabiyat Nihal ho chali hai


सौ अंधेरों में भी रोशन हूँ

सौ अंधेरों में भी रोशन हो उस हक़ीक़त की तलाश है
तेरी दहलीज़ पर छोड़ आए उस मोहब्बत की तलाश है
झुके तो इबादात समझे जमाने वाले
मिटने पे जो हासिल हो उस ज़नत की तलाश है

Sau Andheron Mein Bhi Roshan Hain

Sau andheron mein bhi roshan ho uss haqiqaat ki talash hai
Teri dehleez par chod aaie us mohabbat ki talash hai
Jhuke to Ibaadaat samjhe jamaane wale
Mitne pe jo hasil ho us janat ki talash hai


एक तरफ़ा प्यार

एक तरफ़ा प्यार की ताक़त ही कुछ और होती है
वो रिश्तों की तरह दो लोगो में नहीं बंटती
सिर्फ मेरा हक़ है इस पर सिर्फ मेरा

Ek Tarfa Pyar

Ek tarfa pyar ki taqat hi kuch aur hoti hai
Wo rishton ki tarah do logo main nahi bantti
sirf mera haq hai is par sirf mera


बाज़ी इश्क़ की

अगर बाज़ी इश्क़ की बाज़ी है
तो जो चाहे लगा लो दिल के सिबा
तो अगर जीत गए तो क्या कहना
अगर हारे भी तो बाज़ी मात नहीं

Baazi Ishq Ki

Agar Baazi ishq ki …

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हमे तो प्यार की गहराइयाँ मालूम करनी थी “फ़राज़”

प्यार की गहराइयाँ

हमे तो प्यार की गहराइयाँ मालूम करनी थी “फ़राज़”
यहाँ नहीं डूबता तो कहीं और डूबे होते

Pyar ki Gehraiya

hume to pyar ki gehraiya maaloom karni thi “FARAZ”
yahan nhi dubte to kahin aur dube hote


मेरी ख़ामोशी

वो अब हर एक बात का मतलब पूछता है मुझसे “फ़राज़”
कभी जो मेरी ख़ामोशी की तफ्सील लिखा करता था

Meri Khamoshi

woh ab har ek baat ka matlab poochta hai mujhse “FARAZ”
kbhi jo meri khamoshi ki tafseel likha karta tha…


लफ़्ज़ों की तरतीब

लफ़्ज़ों की तरतीब मुझे बांधनी नहीं आती “ग़ालिब”
हम तुम को याद करते हैं सीधी सी बात है

Lafzon ki Tarteeb

Lafzon ki tarteeb mujhe bandhni nahi aati “GHALIB”
Hum tum ko yaad karte hain sidhi si baat hai…


इंतज़ार

तेरे जाने के बाद बस इतना सा गिला रहा हमको “मोहसिन “
तू पलट कर देख जाता तो सारी ज़िन्दगी इंतज़ार में गुज़ार देते .

Intezar

Tere jane ke bad bus itna sa gila raha humko “mohsin”
tu palat kar dekh jata to sari zindagi intezar mein guzar dete…


ज़ख़्म खिल उठे

लाज़िम था गुज़ारना ज़िन्दगी से
बिन ज़हर पिये गुज़ारा कब था

कुछ पल उसे देख सकते
अश्कों को मगर गवारा कब था

हम खुद भी जुदाई का सबब थे
उस का ही क़सूर सारा कब था

अब औरों के साथ है तो क्या दुःख
पहले भी कोई हमारा कब था

एक नाम पे ज़ख़्म खिल उठे
क़ातिल की तरफ इशारा कब था

आए हो तो रौशनी हुई है
इस बाम में कोई सितारा कब था

देखा हुआ घर था हर किसी ने
दुल्हन की तरह संवारा कब था

Zakham Khil Uthe

Lazim Tha Guzarna Zindagi Se
Bin Zehar Piye Guzara Kab Tha

Kuch Pal Use Dekh Sakte
Ashkoon Ko Mager Gawara Kab Tha

Ham Khud Bhi Judai Ka Sabab The
Us Ka Hi Qasoor Sara Kab Tha

Ab Auron Ke Sath Hai To Kya Dukh
Phele Bhi Koi Hamara Kab Tha

Ek Naam Pe Zakham Khil Uthe
Qatil Ki Taraf Eshara Kab Tha

Ayee Ho To Roshni Hui Hai
Is Baam Main Koi Setara Kab Tha

Dekha Hua Ghar Tha Har Kisi Ne
Dulhan Ki Tarah Sanwara Kab Tha…

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हर धड़कन में एक राज़ होता है – धड़कन उर्दू शायरी

बहुत देर कर दी तुमने मेरी धड़कन महसूस करने में
वो दिल नीलाम हो गया जिस को कभी हसरत तुम्हारे दीदार की थी

हर धड़कन में एक राज़ होता है

हर धड़कन में एक राज़ होता है
हर बात कहने का एक अंदाज़ होता है
जब तक ठोकर न लगे इश्क़ में
हर किसी को अपने महबूब पे नाज़ होता है

Har Dhadkan Mein Ek Raaz Hota Hai

Har Dhadkan mein ek raaz hota hai
Har baat kehne ka ek andaaz hota hai
Jab tak thokar na lage ishq mein
Har kisiko apne mehboob pe naaz hota hai


धड़कन ज़रा थम जा

शोर न कर धड़कन ज़रा थम जा कुछ पल के लिए
बड़ी मुश्किल से मेरी आँखों में उसका खवाब आया है

Dhadkan Zara Tham Ja

Shor Na Kar Dhadkan Zara Tham Ja Kuch Pal Ke Liye
Badi Muskil Se Meri Aankhon Mein Uska Khawab Aaya hai


दिल की धड़कन को धड़का गया कोई

दिल की धड़कन को धड़का गया कोई
मेरे ख्वाबों को जगा गया कोई
हम तो अनजाने रास्तो पे यूं ही चल रहे थे
अचानक ही प्यार का मतलव भी सीखा गया कोई

Dil ki Dhadkan ko Dhadka Gaya Koi

Dil ki dhadkan ko dhadka gaya koi
Mere khawaboon ko jgaa gaya koi
Hum to anjane rasto pe yoon hi chal rahe the
Achanak hi pyar ka matlab sikha gaya koi


दिल का धड़कना माँगोगे

मेरी धड़कनो से दिल का धड़कना माँगोगे
एक दिन तुम मुझसे मेरा प्यार उधर माँगोगे
मैं वो फूल हूँ जो तेरे चमन से न खिलेगा
एक दिन तुम अपनी वीरान ज़िन्दगी के लिए बहार माँगोगे

Dil Ka Dhadknaa Mangoge

Meri Dhadkano Se Dil Ka Dhadknaa Mangoge
Ek Din Tum Mujhse Mera Pyaar Udhar Mangoge
Main Wo Phool Hoon Jo Tere Chaman Se Na khilega
Ek din tum Apni Viran Zindagi Ke Liye Bhaar Mangoge


मेरी साँसे उसकी धड़कन में बस्ती है

आज भी मेरे दिल में वो रहती है
आज भी मेरे सपनो में वो दिखती  है
क्या हुआ अब हम दूर है एक दुसरे से पर
आज भी मेरी साँसे उसकी धड़कन में बस्ती है

Meri Saanse Uski Dhadkan Mein Basti Hai

Aaj Bhi Mere Dil Mein Wo rehti Hai
Aaj Bhi Mere Sapno Me Wo Dikhti Hai
Kya Hua Ab Hum Door Hai Ek Dosre Se Par
Aaj Bhi Meri Saanse Uski Dhadkan mein basti Hai


धड़कन है मेरे दिल की

धड़कन है मेरे दिल की तू आँखों का …

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दिल तो जले मगर ‘राख ‘ न हो – महफ़िल शायरी

दिल मौजूद न था

उन को देखा तो कुछ खोने का एहसास हमे हुआ
हाथ सीने पे जो गया तो दिल मौजूद न था

Dil Maujood Na Tha

Un Ko Dekha To kush khone ka Ehsaas hume Hua
Hath Seene Pe jo gaya to Dil Maujood Na Tha


बस दुआ है

और कुछ नहीं चाहती मैं इस ज़िन्दगी में ‘मेरे रब ’
बस दुआ है के किसी के दुःख की वजह मेरी ज़ात न बने

Bas Dua Hai

Aur Kuch Nahi Chahti Main is Zindagi Mein ‘Mere Rab’
bas Dua Hai Ke Kisi Ke Dukh Ki wajha Meri Zaat Na Ho..


मुस्कराहट बनाए रखो

हर एक ख्याल को ज़ुबान नहीं मिलती
हर एक आरज़ू को दुआ नहीं मिलती
मुस्कराहट बनाए रखो तो दुनिया है साथ
आँसुओ को तो आँखों में भी पनाह नहीं मिलती

Muskurahat Banaye Rakho

Har Ek khyal Ko Zuban Nahi Milti
Har Ek Aarzu Ko Dua Nahi Milti
Muskurahat Banaye Rakho To Duniya Hai Sath
Aansoo Ko To Ankhoo Mein Bhi Panah Nahi Milti…


मोहब्बत की आग

करते है मोहब्बत और जताना भूल जाते है
पहले खफा होते हैं फिर मनना भूल जाते है
भूलना तो फितरत सी है ज़माने की
लगाकर आग मोहब्बत की बुझाना भूल जाते है

Mohabbat ki Aag

Karte hai mohabbat aur jtana bhool jate hai
Pehle khfa hote hain fir manana bhool jate hai
Bhulna to fitrat si hai zamane ki
Lagakar aag mohabbat ki bujhana bhool jate hai…


दिल तो जले

वो शमा की महफ़िल ही क्या
जिसमे परवाना जल कर ‘ख़ाक’ न हो
मज़ा तो तब आता है चाहत का मेरे यार
जब दिल तो जले मगर ‘राख ‘ न हो

Dil To Jale

Wo Shama Ki Mehfil Hi Kya
Jisme parvana Jal Kar ‘Khaak’ Na Ho
Maza To Tab Aata Hai Chahat Ka mere yaar
Jab Dil To Jale Magar ‘Raakh’ Na Ho…

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हम तेरे हिजर में अंदर से बिखर जाते हैं – WASI SHAH SHAYARI

हिजर

हम तेरे हिजर में अंदर से बिखर जाते हैं
ज़िंदा लगते हैं मगर असल में मर जाते हैं
जब कभी बोलता है हँस के किसी और से तू
कितने खंज़र मेरे सीने में उतर जाते हैं

Hijar

Hum Tere Hijar Mein Andar Se Bikhar Jaate Hain
Zindah Lagte Hain Magar Asal Mein Mar Jaate Hain
Jab Kabhi Bolta Hai Hans Ke Kisi Aur Se TU
Kitne Khanjar Mere Seene Mein Utar Jaate Hain..


वो वादे कसमें तोड़ कर

बहुत दिन हो गए शायद सहारा कर लिया उस ने
हमारे बाद भी आखिर गुज़ारा कर लिया उस ने
हमारा जिकर तो उस के लबों पर आ नहीं सकता
हमें एहसास है हम से किनारा कर लिया उस ने
वो बस्ती ग़ैर की बस्ती वो कूचा ग़ैर का कूचा
सुना है इश्क़ भी अब तो दोबारा कर लिया उस ने
सुना है ग़ैर की बाँहों को वो अपना घर समझता है
लगता है मेरा यह दुःख गवारा कर लिया उस ने
भुला कर प्यार की कसमें वो वादे तोड़ कर “वासी ”
किसी को ज़िन्दगी से भी प्यारा कर लिया उस ने

Wo vade kasmein Todh Kar

Bahut Din Ho Gaye Shayad Sahara Kar Liya Us Ne
Hamare Baad Bhi Akhir Guzara Kar Liya Us Ne
Hamara Zikar To Us Ke Labon Par aa Nahin Sakta
hamein Ehsas Hai Hum Se Kinara Kar Liya Us Ne
Wo Basti Ghair Ki Basti Wo Koocha Ghair Ka Koocha
Suna Hai Ishq Bhi Ab To Dobara Kar Liya Us Ne
Suna Hai Ghair Ki Bahon Ko Wo Apna Ghar Samajhta Hai
Lagta Hai Mera Yeh Dukh Gawara Kar Liya Us Ne
Bhula Kar Pyar Ki kasmein Wo vade Todh Kar “Wasi”
Kisi Ko Zindagi Se bhi Pyara Kar Liya Us Ne..


तलाश

अजीब हिजर परस्ती थी उस की फितरत में
सहजर के टूटे पते तलाश करता था .
तमाम रात वो पर्दै हटा के चाँद के साथ ,
जो खो गए था वो लम्हे तलाश करता था .
दुआएं करता था उजड़े हुए मज़ारों पर
बड़े अजीब सहारे तलाश करता था
मुझे तो आज बताया है बादलों ने “वासी”
वो लौटने के रस्ते तलाश करता था .

Talash

ajeeb hijar parasti thi us ki fitrat mein
shajar ke tootte patty talash karta tha.
tamam raat wo pardy hata k chand k sath,
jo kho gaye thy wo lamhy talash karta tha.
duayein karta tha ujdhe huye mazaron par
badhe ajeb sahare talash karta tha.…

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ऑंखें तो प्यार में दिल की ज़ुबान होती है – इश्क़ बेवफा

बड़े शौक़ से मर जाएँगे

आओ किसी रोज़ मुझे टूट के बिखरता देखो
मेरी रगो में ज़हर जुदाई का उतरता देखो
किस किस तरह से तुझे माँगा है खुद से हमने
आओ कभी मुझे सजदों में सिसकता देखो
तेरी तलाश में हम ने खुद को खो दिया है
मत आओ सामने मगर कहीं छुप के मुझे तड़पता देखो
बड़े शौक़ से मर जाएँगे हम मगर वरना
तुम सामने बैठ कर सांसों का तसलसुल टूटता देखो

Bade Shoq Se Mar Jayeinge

Aao Kisi roz Mujhe Toot Ke Bikhrta Dekho
Meri Ragon Mein Zehar Judai Ka Uterta Dekho
Kis Kis Ada Se Tujhe Maanga Hai khuda Se
Aao Kabhi Mujhe Sajdon Mein Sisakta DekHo
Teri Talaash Mein Hum Ne Khud Ko Kho Diya Hai
Mat Aao Saamne Mgar Kahin Chup Ke Mujhe Tarapta Dekho
Bade Shoq Se Mar Jaein gay Hum magar warna
Tum Saamne Baith Kar sansoon Ka Tasalsul Tootta Dekho


वफ़ा की तलाश

जो भी मिला वो हम से खफा मिला
देखो हमे मोहब्बत का क्या सिला मिला
उम्र भर रही फ़क़त वफ़ा की तलाश हमे
पर हर शख्स मुझ को ही क्यों बेवफा मिला

Wafa Ki Talash

jo bhi mila woh ham se khafa mila
dekho dosti ka kya sila mila
umar bhar rahi faqat wafa ki talash
par har shaks mujh ko hi kyon bewafa mila


प्यार में दर्द

ऑंखें तो प्यार में दिल की ज़ुबान होती है
सच्ची चाहत तो सदा बेज़ुबान होती है
प्यार में दर्द भी मिले तो क्या घबराना
सुना है दर्द से ही चाहत जवाँ होती है

Pyar Mein Dard

Ankhen to pyar me dilki zuban hoti hai
Sachi chahat to sada bezuban hoti hai
Pyar mein dard bhi mile to kya ghabrana
Suna hai dard se hi chahat jawan hoti hai…

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दर्द की स्याही से लिखा है यह पैगाम – उर्दू शायरी

मुझे होश नहीं

कितनी पी कैसे कटी रात मुझे होश नहीं
रात के साथ गयी बात मुझे होश नहीं

मुझ को यह भी नहीं मालुम की जाना है कहाँ
थाम ले कोई मेरा हाथ मुझे होश नहीं

आंसुओं और शराबों में गुज़र है अब तो
मैंने कब देखी थी बरसात मुझे होश नहीं

जाने क्या टूटा है पैमाना की दिल है मेरा
बिखरे बिखरे हैं ख्यालात मुझे होश नहीं

Mujhe Hosh Nahin

kitni pee kaise kati raat mujhe hosh nahin
raat ke saath gayi baat mujhe hosh nahin

mujh ko yeh bhi nahin maalum ki janaa hai kahaan
tham le koi mera hath mujhe hosh nahin

aansuoon aur sharaabon mein guzar hai ab to
mainne kab dekhi thi barasaat mujhe hosh nahin

jaane kyaa Tuutaa hai paimaanaa ki dil hai mera
bikhare bikhare hain Khayaalaat mujhe hosh nahin


बारिश के बाद

हो गयी रूखसत घटा बारिश के बाद
एक दिया जलता रहा बारिश के बाद

मेरे बहते हुए आंसुओ को देख कर
रो पड़ी ठंडी हवा बारिश के बाद

मेरी तन्हाई का दामन थाम कर
कुछ उदासी ने कहा बारिश के बाद

याद तेरी ओढ़ कर में सो गयी
ख्वाबों का दर खुल गया बारिश के बाद

चाँद देख कर बादलों की क़ैद में
एक सितारा रो दिया बारिश के बाद

अपने घर की हर कच्ची दीवार पर
नाम तेरा लिख दिया हमने बारिश के बाद

Baarish ke Baad

Ho gayi rukhsat ghata baarish ke baad
Ek diya jalta raha baarish ke baad

Mere behte hue Aansuo ko dekh kar
Ro parri thandi hawa baarish ke baad

Meri tanhaayi ka daaman thaam kar
Kuch udaasi ne kaha baarish ke baad

Yaad teri odh kar mein so gayi
Khawaab ka daar khul gaya baarish ke baad

Chand dekh kar baadlo ki qaid mein
Ek sitaara ro diya baarish ke baad

Apne ghar ki har kachi deewaar par
Naam tera likh diya humne baarish ke baad


करते हैं वादा

चाह के भी कभी न तुमको भुला पाएंगे हम
करते हैं वादा यह निभा पाएंगे हम
खुद को फना कर देंगे इस जहाँ से हम
पर नाम तेरा न दिल से मिटा पाएंगे हम

Karte Hain Wada

Chah Ke Bhi Kabhi Na Tumko Bhula Payenge Hum
Karte Hain Wada Yeh Nibha Payenge Hum
Khud Ko Fanna Kar Denge Is Jahaan Se Hum
Par Naam Tera Na Dil Se Mita Paayenge Hum…


वो बेवफा था

मुझे मिटटी के घर बनाने का शौक़ था
उसे …

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तक़दीर का अफसाना – किस्मत से अपनी सबको शिकायत क्यों है

किस्मत मैं लिखदे मेरी

किस्मत मैं मेरी चैन से जीना लिखदे
मिटा न सके कोई वो अफसाना लिखदे
जन्नत भी न-गवार है मुझे तेरे बिन
ऐ कातिब-ऐ-तक़दीर ख़ाक-ऐ-मदीना लिखदे

Kismat mein Likhde Meri

kismat main meri chain se jeena likhde
mita na sake koi wo afsana likhde
jannat bhi na-gawar hai mujhe tere bin
Ae kaatib-ae-taqdeer KHaak-e-madiina likhde..


किस्मत पर ऐतबार

किस्मत पर ऐतबार किस को है
मिल जाये ‘ख़ुशी’ इनकार किस को है
कुछ मजबूरियां हैं मेरे दोस्तों
वरना ‘जुदाई ’ से प्यार किस को है

Kismat Par Aitbaar

kismat par aitbaar kis ko ha
Mil jaye ‘KHUSHI’ inkaar kis ko hai
kuch ‘MAJBURIYAN’ hain mere dosto
warna! ‘JUDAI’ se pyar kis ko hai..


किस्मत से शिकायत

किस्मत से अपनी सबको शिकायत क्यों है
जो नहीं मिल सकता उसी से मोहब्बत क्यों है
कितने खड़े है राहो पे
फिर भी दिल को उसी की चाहत क्यों

Kismat se Shikayat

Kismat se apni sabko shikayat kyon hai
Jo nahi mil sakta usi se mohabbat kyon hai
Kitne khade hai raho pe
Phir bhi dil ko usi ki chahat kyon..


किस्मत में मोहब्बत

कुछ किस्मत ही ऐसी रही दोस्तों
की अब ज़िन्दगी से कोई तम्मना ही नहीं
जिसको चाहा हमने उसे पा न सका
जो किस्मत में थी उसे मोहब्बत न कर सके

Kismat Mein Mohabbat

Kuch Kismat Hi Aisi rahi Doston
Ki Ab Zindagi Se Koi Tammana hi Nahi
Jisko Chahaa humne use paa Na Saka
Jo kismat mein thi usse Mohabbat Na kar sake..


मेरे नसीब की लकड़ी

मेरी किस्मत ही बेईमानी निकली
कबर भी खोदी तो ज़मीन पत्थर की निकली
लेकर मेरा जनाजा वो जलाने गए तो
कम्बख़त मेरे नसीब की लकड़ी भी गीली निकली

Mere Naseeb Ki Lakdi

Meri kismat bhi beimani nikli
Kabar Bhi Khodi To Zamin Pathar Ki Nikli
Lekar Mera Janaja Wo Jalane Gaye To
Kambakat Mere Naseeb Ki Lakdi Bhi Gili Nikli..


किस्मत का फैसला

मेरी तक़दीर से पूछ मेरी किस्मत का फैसला
मेरी मुस्कराहट पे न जा मेरा दर्द तलाश कर
आँखों से पूछ मेरे इंतज़ार की हद
इम्तिनान पे न जा मेरे सबर को तलाश कर
मेरे दोस्तों से पूछ मेरी दोस्ती का आलम
सूरत पे न जा मेरी सिरत तलाश कर
जो मिल जाये तुम को मेरी बातों के जवाब
तो फिर तू ज़रा सा काम कर
मुझे आस पास न देख मुझे खुद मैं तलाश कर

Kismat Ka Faisla

Meri Taqdeer Se Pooch Meri Kismat Ka Faisla
Meri Muskrahat …

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फ़राज़ की दिल फरेब उर्दू शायरी – Erratic collection of Fazar Shayari

किसी से जुदा होना

किसी से जुदा होना अगर इतना आसान होता “फ़राज़”
जिस्म से रूह को लेने कभी फरिश्ते न आते

Kissi Se Juda Hona

Kissi Se Juda Hona Agar Itna Asan Hota “FARAZ”
Jism Se Rooh Ko Leney Kabhi Farishtay Na Aate


प्यासे गुज़र जाते हैं

तू किसी और के लिए होगा समंदर-ऐ -इश्क़ “फ़राज़”
हम तो रोज़ तेरे साहिल से प्यासे गुज़र जाते हैं

Piyase Guzaar Jate Hain

Tu kisi aur ke liye hoga samander-ae-ishq “Faraz”
hum to rooz tere sahil se piyase guzaar jate hain


मिले तो कुछ कह न सके

हम उन से मिले तो कुछ कह न सके “फ़राज़”
ख़ुशी इतनी थी के मुलाक़ात आँसू पोंछते ही गुज़र गई

Milay To Khuch Keh na Sakay

hum un se milay to khuch keh na sakay “Faraz”
khushi itni the ke mulaqaat ansoo ponchtay hi guzaar gai


इश्क़ का नशा

कुछ इश्क़ का नशा था पहले हम को “फ़राज़”.
दिल जो टूटा तो नशे से मोहब्बत हो गई .

Ishq Ka Nasha

Kuch ishq ka nasha tha pehle hum ko “Faraz”
Dil jo tuta to nashe se mohabbat ho gai


यह वफ़ा तो

यह वफ़ा तो उन दिनों की बात है “फ़राज़”
जब मकान कच्चे और लोग सच्चे हुआ करते थे

Yeh Wafa to

Yeh wafa to un dinoo ki baat hai “Fraaz”
Jab makaan kache or log sache hua kartey the


उम्र भर का सहारा

कौन देता है उम्र भर का सहारा ऐ “फ़राज़’
लोग तो जनाज़े में भी कंधे बदलते रहते हैं

Umar Bhar ka Sahara

Kaun deta hai umar bhar ka sahara ae “Faraz”
Log to janaje mein bhi kandhe badalte rehtein hein


खुद ही बिक गए

किस की क्या मजाल थी जो कोई हम को खरीद सकता “फ़राज़”
हम तो खुद ही बिक गए खरीदार देख कर

Khud Hi Bik Gaye

Kis ki Kya majal thi jo koi Hum ko kharid sakta “Faraz”
Hum to khud hi Bik gaye kharidar dekh kar


हम न बदलेंगे

हम न बदलेंगे वक़्त की रफ़्तार के साथ ‘”फ़राज़”‘
हम जब भी मिलेंगे अंदाज़ पुराना होगा …

Hum Na Badleinge

Hum na badleinge waqt ki raftaar ke sath “Faraz”‘
Ham jab bhi milengay andaaz purana hoga


तेरा न हो सका

तेरा न हो सका तो मर जाऊंगा “फ़राज़ “
कितना खूबसूरत वो झूट बोलता था

Tera Na Ho Saka

Tera Na Ho Saka To Mar Jaonga “Faraz”
Kitna Khobsurat Wo Jhoot Bolta Tha


वो बेवफा न था

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