दिल तो जले मगर ‘राख ‘ न हो – महफ़िल शायरी

दिल मौजूद न था

उन को देखा तो कुछ खोने का एहसास हमे हुआ
हाथ सीने पे जो गया तो दिल मौजूद न था

Dil Maujood Na Tha

Un Ko Dekha To kush khone ka Ehsaas hume Hua
Hath Seene Pe jo gaya to Dil Maujood Na Tha


बस दुआ है

और कुछ नहीं चाहती मैं इस ज़िन्दगी में ‘मेरे रब ’
बस दुआ है के किसी के दुःख की वजह मेरी ज़ात न बने

Bas Dua Hai

Aur Kuch Nahi Chahti Main is Zindagi Mein ‘Mere Rab’
bas Dua Hai Ke Kisi Ke Dukh Ki wajha Meri Zaat Na Ho..


मुस्कराहट बनाए रखो

हर एक ख्याल को ज़ुबान नहीं मिलती
हर एक आरज़ू को दुआ नहीं मिलती
मुस्कराहट बनाए रखो तो दुनिया है साथ
आँसुओ को तो आँखों में भी पनाह नहीं मिलती

Muskurahat Banaye Rakho

Har Ek khyal Ko Zuban Nahi Milti
Har Ek Aarzu Ko Dua Nahi …

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SAAKI AUR JAAM SHAYARI – साक़ी ओर पिला की पीने पिलाने की रात है

वो पिला कर जाम

वो पिला कर जाम “लबों ” से अपनी मोहब्बत का “मोहसिन”
और , अब कहते हैं के नशे की आदत अच्छी नहीं होती ।

Wo Pila Kar “Jaam” Labon Se Apni Muhabbat Ka “Mohsin”
Aur , Ab Kehte Hain Ke Nashay Ki Aadat Acchi Nahi Hoti.


जाम पे जाम

जाम पे जाम पीने से क्या फ़ायदा
रात गुज़री तो फिर उतर जाएगी
पीना है तो किसी की आँखों से पियो
उम्र सारी नशे में गुज़र जाएगी ।

Jaam Pe Jaam Pene Se Kya Faida
Raat Guzri To Phir Utar Jayegi
Peena Hai To Kisi Ki Ankhon Se Piyo
Umar Sari Nashay Mein Guzar Jayegi.


जाम आँखों से पिलाया किसी ने

कल जो जाम आँखों से पिलाया किसी ने
मदहोश पड़ा रहा , न उठाया किसी ने

 

मुझे भी कुछ ज़्यादा शौक़ था पीने का
पीने के बाद जो हुआ , न बताया किसी ने

कभी

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उर्दू ग़ज़लें

मैंने तेरे इंतज़ार से मोहब्बत की है

तेरे इख्लास से मोहब्बत की है तेरे एहसास से मोहब्बत की है तू मेरे पास नहीं है फिर भी तेरी याद से मोहब्बत की है कभी तो तूने भी मुझे याद किया होगा मैंने उन्ही लम्हात से मोहब्बत की है जिन में हों तेरी मेरी बातें , मैंने उस इंसान से मोहब्बत की है और मेह्की हों सिर्फ तेरी मोहब्बत से मैंने उन जज़्बात से मोहब्बत की है तुझसे मिलना तो अब ख्वाब सा लगता है मैंने तेरे इंतज़ार से मोहब्बत की है

Tere Ikhlas Se Mohabbat Ki Hai Tere Ehsas Se Mohabbat Ki Hai Tu Mere Paas Nahi Hai Phir Bhi Teri Yaad Se Mohabbat Ki Hai Kabhi To Tune Bhi Mujhe Yad Kiya Hoga Meine Un Lamhaat Se Mohabbat Ki Hai Jin Mein Ho Teri Meri Batain Maine Us Insaan Se Mohabbat Ki Hai Aur Mehkey Ho Sirf Teri Mohabbat Se

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शायरी – एक मुसाफिर अजनबी

मुसाफिर के रास्ते बदलते रहे

मुसाफिर के रास्ते बदलते रहे , मुक़द्दर में चलना था चलते रहे
मेरे रास्तों में उजाला रहा , दीये उसकी आँखों में जलते रहे

कोई फूल सा हाथ कंधे पे था , मेरे पाओं शोलों पे चलते रहे
सुना है उन्हें भी हवा लग गयी , हवाओं के जो रुख बदलते रहे

वो क्या था जिसे हमने ठुकरा दिया , मगर उम्र भर हाथ मलते रहे
मोहब्बत , अदावत , वफ़ा , बेरुखी , किराये के घर थे बदलते रहे
लिपट कर चिराग़ों से वो सो गए , जो फूलों पे करवट बदलते रहे..


मुसाफिर के साथ तू ने क्या किया

इस राह -ऐ -उल्फत के मुसाफिर के साथ तू ने क्या किया
कभी अपना लिया कभी ठुकरा दिया

मेरी मोहब्बत तेरे नाम का मुहाल तो नहीं
कभी बना लिया कभी गिरा दिया

मैं तेरी किताब -ऐ -ज़िंदगी का वो हर्फ तो नहीं हूँ जिसे…

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जब उठा मेरा जनाज़ा – मेरा जनाज़ा उर्दू शायरी

मेरा जनाज़ा ज़माने में निकला

जब मेरा जनाज़ा इस ज़माने से निकला
मेरे जनाज़े को देखने सारा ज़माना निकला
मगर मेरे जनाज़े में वो न निकला
जिसके लिए मेरा जनाज़ा ज़माने में निकला

Mere Janaze Mein Wo Na Nikla

Jab Mera Janaza is Zamane Se Nikla
Mere Janaze Ko Dekhne Sara Zamana Nikla
Magar Mere Janaze Mein Wo Na Nikla
Jiske Liye Mera Janaza Zamane Se Nikla


मेरे जनाज़े के पीछे

एक वादा था तेरा हर वादे के पीछे
तू मिलेगा मुझे हर गली ,हर दरवाज़े के पीछे
पर तू तो बड़ा ही बेवफा निकला मेरी जान
एक तू ही नहीं था मेरे जनाज़े के पीछे

Mere Janaze ke Peeche

Ek wada tha tera har wade ke peeche
Tu milega muje har gali,har darwaze ke peeche
Par tu bada bewafa nikla meri jaan
Ek tu hi nahi tha mere janaze ke peeche

तेरे जनाज़े के पीछे

एक वादा था मेरा …

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फेसबुक चुनिंदा शायरी – अरज़ किया है

   मुझे ज़रा खुदा से हमकलाम होने दो …
   तुम्हारा ज़िकर भी इसी गुफ्तगू में है

मेरी शामें

खुद को खुद से हमकलाम कर के देखना
कितना मुश्किल है यह सफर तय कर के देखना
किस क़दर उदास गुज़रती हैं मेरी शामें
याद किसी को किसी शाम कर के देखना


कफ़न अगर तुम्हारा होगा

आँखें अगर तुम्हारी होगी तो आंसू हमारे होंगे
दिल अगर तुम्हारा होगा तो धड़कन हमारी होगी
ख्वाहिश है ..कफ़न अगर तुम्हारा होगा तो मयत हमारी होगी


कफ़न न डालो मेरी मयत पर

कफ़न न डालो मेरे चेहरे पे
मुझे आदत है मुस्कुराने की
कफ़न न डालो मेरी मयत पर
मुझे इंतज़ार है उसके आने का


उनके सदके जान है मेरी

शिकायत ये नहीं के वो नाराज़ है हमसे
शिकायत इस बात की है वो आज भी अनजान है हमसे
दिल तोडा , जज़्बात बिखेरे , फिर भी वो दिलजान है मेरे
मांग ले वो कभी …

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यादों का आईना – Unique Collection of Pakistani Urdu Shayari and Poetry

तेरे शोख तासुबर में

ख़ामोश थे लव और मैं गुफ़्तार में गुम थी
पलके न झमकती थी के मैं दीदार में गुम थी
तन मन ने सजाये है तेरे शोख तासुबर में
यादों का आईना था मैं सिंगार में गुम थी

 

Tere Shokh Tasubur Mein

khamosh the luv aur main guftar mein gum thi
palke na Jhamkti thi ke main didar mein ghum thi
tan man ne sajaye hai tere shokh tasubur mein
yadon ka aiina tha main shingar mein gum thi

 


जुदाई के मौसम

जुदाई के मौसम सताने लगे है
वो फिर टूट कर याद आने लगे है
तख़्युल के परवाज़ को कैसे रोकू
वो गोया मेरे घर फिर आने लगे है
निशो रोक लो वो जाने लगे है
मनाने में जिन को ज़माने लगे है

 

Judai ke Mausam

judai ke mausam satane lage hai
wo phir toot kar yaad ane lage hai
takhayul ke parwaz …

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