दिल तो जले मगर ‘राख ‘ न हो – महफ़िल शायरी

दिल मौजूद न था

उन को देखा तो कुछ खोने का एहसास हमे हुआ
हाथ सीने पे जो गया तो दिल मौजूद न था

Dil Maujood Na Tha

Un Ko Dekha To kush khone ka Ehsaas hume Hua
Hath Seene Pe jo gaya to Dil Maujood Na Tha


बस दुआ है

और कुछ नहीं चाहती मैं इस ज़िन्दगी में ‘मेरे रब ’
बस दुआ है के किसी के दुःख की वजह मेरी ज़ात न बने

Bas Dua Hai

Aur Kuch Nahi Chahti Main is Zindagi Mein ‘Mere Rab’
bas Dua Hai Ke Kisi Ke Dukh Ki wajha Meri Zaat Na Ho..


मुस्कराहट बनाए रखो

हर एक ख्याल को ज़ुबान नहीं मिलती
हर एक आरज़ू को दुआ नहीं मिलती
मुस्कराहट बनाए रखो तो दुनिया है साथ
आँसुओ को तो आँखों में भी पनाह नहीं मिलती

Muskurahat Banaye Rakho

Har Ek khyal Ko Zuban Nahi Milti
Har Ek Aarzu Ko Dua Nahi Milti
Muskurahat Banaye Rakho To Duniya Hai Sath
Aansoo Ko To Ankhoo Mein Bhi Panah Nahi Milti…


मोहब्बत की आग

करते है मोहब्बत और जताना भूल जाते है
पहले खफा होते हैं फिर मनना भूल जाते है
भूलना तो फितरत सी है ज़माने की
लगाकर आग मोहब्बत की बुझाना भूल जाते है

Mohabbat ki Aag

Karte hai mohabbat aur jtana bhool jate hai
Pehle khfa hote hain fir manana bhool jate hai
Bhulna to fitrat si hai zamane ki
Lagakar aag mohabbat ki bujhana bhool jate hai…


दिल तो जले

वो शमा की महफ़िल ही क्या
जिसमे परवाना जल कर ‘ख़ाक’ न हो
मज़ा तो तब आता है चाहत का मेरे यार
जब दिल तो जले मगर ‘राख ‘ न हो

Dil To Jale

Wo Shama Ki Mehfil Hi Kya
Jisme parvana Jal Kar ‘Khaak’ Na Ho
Maza To Tab Aata Hai Chahat Ka mere yaar
Jab Dil To Jale Magar ‘Raakh’ Na Ho…

SAAKI AUR JAAM SHAYARI – साक़ी ओर पिला की पीने पिलाने की रात है

वो पिला कर जाम

वो पिला कर जाम “लबों ” से अपनी मोहब्बत का “मोहसिन”
और , अब कहते हैं के नशे की आदत अच्छी नहीं होती ।

Wo Pila Kar “Jaam” Labon Se Apni Muhabbat Ka “Mohsin”
Aur , Ab Kehte Hain Ke Nashay Ki Aadat Acchi Nahi Hoti.


जाम पे जाम

जाम पे जाम पीने से क्या फ़ायदा
रात गुज़री तो फिर उतर जाएगी
पीना है तो किसी की आँखों से पियो
उम्र सारी नशे में गुज़र जाएगी ।

Jaam Pe Jaam Pene Se Kya Faida
Raat Guzri To Phir Utar Jayegi
Peena Hai To Kisi Ki Ankhon Se Piyo
Umar Sari Nashay Mein Guzar Jayegi.


जाम आँखों से पिलाया किसी ने

कल जो जाम आँखों से पिलाया किसी ने
मदहोश पड़ा रहा , न उठाया किसी ने

 

मुझे भी कुछ ज़्यादा शौक़ था पीने का
पीने के बाद जो हुआ , न बताया किसी ने

कभी मस्जिद , कभी मंदिर मैं घूमता रहा रात भर
कभी मुस्लमान , कभी हिन्दू बनाया किसी ने

आदि बना के महखाना छीन लिया गया मुझसे
कुछ इस तरह मुझे सताया किसी ने

Kal Jo Jaam Aankhon Se Pilaya Kisi Ne
MadHosh Pada Raha, Na Uthaya Kisi Ne

Mujhe Bhi Kuch Ziada Shoq Tha Pene Ka
Pene Ke Bad Jo Hua, Na Bataya Kisi Ne

Kabhi Masjid, Kabhi Mandir Main Ghoomta Raha Rat Bhar
Kabhi Musalman, Kabhi Hindu Banaya Kisi Ne

Aadi Bana Ke MayKahaana Cheen Liya Gaya Mujhse
Kuch Is Tarha Mujhe Staya Kisi Ne.


कसूर शराब का नहीं

मदहोश हम हरदम रहा करते हैं,
और इल्ज़ाम शराब को दिया करते हैं ,
कसूर शराब का नहीं , उनका है यारों ,
जिनका चेहरा हम हर जाम में तलाश किया करते हैं ।

Madhhosh Hum Hardam Raha Karte Hain,
Aur Ilzaam Sharaab Ko Diya Karte Hain,
Kasoor Sharaab Ka Nahi, Unka Hai Yaron,
Jinka Chehra Hum Har Jaam Mein Talaash Kiya Karte Hain.


मोहब्बत और जाम

आशिकों को मोहब्बत के आलावा अगर कुछ काम होता ,
तो मयख़ाने जा के हर रोज़ यूँ बदनाम न होता ,
मिल जाती चाहने वाली उसे भी कहीं राह में कोई ,
अगर क़दमों में उसके नशा और हाथ में जाम न होता ।

Aashikon Ko Mohabbat Ke Alava Agar Kuchh Kaam Hota,
To Maikhane Ja ke Har Roz Yun Badnam Na Hota,
Mil Jaati Chahne Wali Usse Bhi Kahin Raah Mein Koi,
Agar Kadmon Mein Nasha Aur Hath Mein Jaam Na Hota.


हाथ में

उर्दू ग़ज़लें

मैंने तेरे इंतज़ार से मोहब्बत की है

तेरे इख्लास से मोहब्बत की है तेरे एहसास से मोहब्बत की है तू मेरे पास नहीं है फिर भी तेरी याद से मोहब्बत की है कभी तो तूने भी मुझे याद किया होगा मैंने उन्ही लम्हात से मोहब्बत की है जिन में हों तेरी मेरी बातें , मैंने उस इंसान से मोहब्बत की है और मेह्की हों सिर्फ तेरी मोहब्बत से मैंने उन जज़्बात से मोहब्बत की है तुझसे मिलना तो अब ख्वाब सा लगता है मैंने तेरे इंतज़ार से मोहब्बत की है

Tere Ikhlas Se Mohabbat Ki Hai Tere Ehsas Se Mohabbat Ki Hai Tu Mere Paas Nahi Hai Phir Bhi Teri Yaad Se Mohabbat Ki Hai Kabhi To Tune Bhi Mujhe Yad Kiya Hoga Meine Un Lamhaat Se Mohabbat Ki Hai Jin Mein Ho Teri Meri Batain Maine Us Insaan Se Mohabbat Ki Hai Aur Mehkey Ho Sirf Teri Mohabbat Se Maine Un Jazbaat Se Mohabbat Ki Hai Tujhse Milna To Ab Khawab Sa Lagta Hai Maine Tere Intezaar Se Mohabbat Ki Hai


मुहब्बतों के पयाम लिखना ​

कभी किताबों में फूल रखना , कभी दरख्तों पे नाम लिखना हमें भी याद है आज तक वो , नज़र से हर्फ़-ऐ-सलाम लिखना ​ वो चाँद चेहरा , वो बहकी बातें , सुलगते दिन थे , सुलगती रातें वो छोटे छोटे से काग़ज़ों पर , मुहब्बतों के पयाम लिखना ​ गुलाब चेहरों से दिल लगाना , वो चुपके चुपके नज़र मिलाना वो आरज़ूओं के ख्वाब बुनना, वो क़िस्सा -ऐ -नाम तमाम लिखना मेरे शहर की हसीं फिज़ाओ , कहीं जो उन का निशान पाओ तो पूछना के कहाँ बसे वो , कहाँ है उन का क़याम लिखना ​ गयी रुतों में रुबाब अपना , बस एक यह ही तो मश्ग़ला था किसी के चेहरे को सुबह लिखना , किसी के चेहरे को शाम लिखना

Kabhi Kitabon Mein Phool Rakhna, Kabhi Darakhton Pe Naam Likhna Hamein Bhi Yaad Hai Aaj Tak Wo , Nazar Say Harf-Ae-Salam Likhna Wo Chand Chehray, Wo Behki Batein, Sulagtay Din The, Sulagti Ratein Wo Chote Chote Se Kaghazon Par, Muhabbaton Key Payaam Likhna Gulab Chehron Say Dil Lagana, Wo Chupkey Chupkey Nazar Milana Wo Arzuon Key Khwaab Bunna , Wo Qissa-Ae-Naam Tamaam Likhna Mere Shahar Ki Haseen Fizaoon, Kaheen Jo Un Ka Nishan Pao To Poochna Ke Kahan Basay Wo ,Kahan Hai Un Ka Qayam Likhna Gayee Ruton Mein Rubab Apna , Bas Ek Yeh Hi To Mashghala Tha

शायरी – एक मुसाफिर अजनबी

मुसाफिर के रास्ते बदलते रहे

मुसाफिर के रास्ते बदलते रहे , मुक़द्दर में चलना था चलते रहे
मेरे रास्तों में उजाला रहा , दीये उसकी आँखों में जलते रहे

कोई फूल सा हाथ कंधे पे था , मेरे पाओं शोलों पे चलते रहे
सुना है उन्हें भी हवा लग गयी , हवाओं के जो रुख बदलते रहे

वो क्या था जिसे हमने ठुकरा दिया , मगर उम्र भर हाथ मलते रहे
मोहब्बत , अदावत , वफ़ा , बेरुखी , किराये के घर थे बदलते रहे
लिपट कर चिराग़ों से वो सो गए , जो फूलों पे करवट बदलते रहे..


मुसाफिर के साथ तू ने क्या किया

इस राह -ऐ -उल्फत के मुसाफिर के साथ तू ने क्या किया
कभी अपना लिया कभी ठुकरा दिया

मेरी मोहब्बत तेरे नाम का मुहाल तो नहीं
कभी बना लिया कभी गिरा दिया

मैं तेरी किताब -ऐ -ज़िंदगी का वो हर्फ तो नहीं हूँ जिसे
कभी लिख लिया कभी मिटा दिया

मेरा साथ तेरे लिए बाईस-इ-रुस्वाई तू नहीं जिसे
कभी दुनिया को बतला दिया कभी छुपा लिया

आज कल लोगों का यही मशग़ला है “मुसाफिर”
कभी हमें सोच लिया तो कभी भुला दिया..


ऐ मुसाफिर

दुनिया के ऐ मुसाफिर मंज़िल तेरी कब्र है
और जिस सफर पर तू चला है , दो दिन का वो सफर है..


अजनबी मुसाफिर

अजनबी राहों के अजनबी मुसाफिर
आ कर मुझसे पूछ बैठा है रास्ता बता दो गे

अजनबी राहों के , अजनबी मुसाफिर सुन
रास्ता कोई भी हो , मंज़िले नहीं मिलती

मंज़िलें तो धोखा हैं , मंज़िलें जो मिल जायें
जुस्तुजू नहीं रहती , ज़िन्दगी को जीने की आरज़ू नहीं रहती ..


एक गुमनाम मुसाफिर

एक गुमनाम मुसाफिर की तरह चुपके से
खुद को इस भीड़ में खो देने को जी चाहता है

इक इरादा ख़ाक की हर दुःख से दिला देगी निजात
खुद को मट्टी में समा देने को जी चाहता है

दर्द ऐसा है के मरहम की बजाए ‘मुसाफिर’
दिल में निश्तर सा चुभो देने को जी चाहता है..


मुसाफिर घर का रास्ता भूल गया

दर बेदर फिरा मुसाफिर घर का रास्ता भूल गया
क्या है तेरा क्या है मेरा अपना पराया भूल गया

कैसे दिन थे कैसी रातें कैसी बातें बीत गयी
मन बालक है पहले पियार का सुन्दर सपना भूल गया

याद के फेर में आकर दिल पर ऐसी फिर एक चोट लगी
दुःख में सुख है सुख में दुःख है भेद यह करना भूल गया

एक नज़र की एक ही पल की …

जब उठा मेरा जनाज़ा – मेरा जनाज़ा उर्दू शायरी

मेरा जनाज़ा ज़माने में निकला

जब मेरा जनाज़ा इस ज़माने से निकला
मेरे जनाज़े को देखने सारा ज़माना निकला
मगर मेरे जनाज़े में वो न निकला
जिसके लिए मेरा जनाज़ा ज़माने में निकला

Mere Janaze Mein Wo Na Nikla

Jab Mera Janaza is Zamane Se Nikla
Mere Janaze Ko Dekhne Sara Zamana Nikla
Magar Mere Janaze Mein Wo Na Nikla
Jiske Liye Mera Janaza Zamane Se Nikla


मेरे जनाज़े के पीछे

एक वादा था तेरा हर वादे के पीछे
तू मिलेगा मुझे हर गली ,हर दरवाज़े के पीछे
पर तू तो बड़ा ही बेवफा निकला मेरी जान
एक तू ही नहीं था मेरे जनाज़े के पीछे

Mere Janaze ke Peeche

Ek wada tha tera har wade ke peeche
Tu milega muje har gali,har darwaze ke peeche
Par tu bada bewafa nikla meri jaan
Ek tu hi nahi tha mere janaze ke peeche

तेरे जनाज़े के पीछे

एक वादा था मेरा हर वादे के पीछे
मैं मिलूंगा तुझसे हर गली , हर दरवाज़े के पीछे
पर तुमने ही मुद के नहीं देखा मेरी जान
मेरा भी जनाज़ा था तेरे जनाज़े के पीछे

Tere Janaze ke Peeche

Ek wada tha mera har wade ke peeche
Main milunga tujse har gali, har darwaze ke peeche
Par tumne hi mud ke nahi dekha
Mera Bhi janaza tha tere janaze ke peeche..


मेरी अर्थी

जिस दिन मेरी अर्थी इस दुनिया से विदा होगी
एक अलग समां होगा एक अलग बात होगी
कहना उस बेवफा से मर गया तुम्हारा आशिक़
अब न हम है और न हमारी बातें होंगी

Meri Arthi

Jis Din Meri Arthi is Duniya se Vida Hogi
Ek Alag Sama Hoga Ek Alag Baat Hogi
Kehna Us Bewafa Se Mar gaya Tumhara ashiq
Ab Na Hum Hai Aur Na Hamari batain Hongi..


जब लाश होगी कफ़न में

मिलना है तो मिल इसी दुनिया के चमन में
फिर क्या मिलना होगा जब लाश होगी कफ़न में

Jab Laash Hogi Kafan Mein

Milna Hai to Mil isi Duniya Ke Chaman Mein
Phir Kya Milna Hoga Jab Laash Hogi Kafan Mein..


मेरा जनाज़ा पढ़ा गया

फ़र्क़ सिर्फ इतना सा है
तेरी डोली उठी मेरी मयत उठी
फूल तुझ पर भी पड़े फूल मुझ पर भी पड़े
तू सज के गई मुझे सजाया गया
तू उठ के गई मुझे उठाया गया
सहेलियां तेरी भी थी दोस्त मेरे भी थे
महफ़िल वहां भी थी लाग् यहाँ भी थी
उन का हँसना वहां इन का रोना यहाँ
दो बोल …

फेसबुक चुनिंदा शायरी – अरज़ किया है

   मुझे ज़रा खुदा से हमकलाम होने दो …
   तुम्हारा ज़िकर भी इसी गुफ्तगू में है

मेरी शामें

खुद को खुद से हमकलाम कर के देखना
कितना मुश्किल है यह सफर तय कर के देखना
किस क़दर उदास गुज़रती हैं मेरी शामें
याद किसी को किसी शाम कर के देखना


कफ़न अगर तुम्हारा होगा

आँखें अगर तुम्हारी होगी तो आंसू हमारे होंगे
दिल अगर तुम्हारा होगा तो धड़कन हमारी होगी
ख्वाहिश है ..कफ़न अगर तुम्हारा होगा तो मयत हमारी होगी


कफ़न न डालो मेरी मयत पर

कफ़न न डालो मेरे चेहरे पे
मुझे आदत है मुस्कुराने की
कफ़न न डालो मेरी मयत पर
मुझे इंतज़ार है उसके आने का


उनके सदके जान है मेरी

शिकायत ये नहीं के वो नाराज़ है हमसे
शिकायत इस बात की है वो आज भी अनजान है हमसे
दिल तोडा , जज़्बात बिखेरे , फिर भी वो दिलजान है मेरे
मांग ले वो कभी जान भी मेरी , उनके सदके जान है मेरी


अश्क आँख से ढल गए

कभी आह लब पे मचल गई कभी अश्क आँख से ढल गए
वो तुम्हारे ग़म के चिराग़ हैं कभी बुझ गए कभी जल गए
जो फना हुए ग़म-ऐ -इश्क़ में , उन्हें ज़िंदगी का न ग़म हुआ
जो अपनी आग में जल न सके, वो पराई आग में जल गए


देख लो खवाब मगर

देख लो खवाब मगर , ख्वाब का चर्चा न करो
लोग जल जाएंगे सूरज की तमन्ना न करो
बे-ख्याली में कभी उंगलियां जल जाएंगी
राख गुज़रे हुए लम्हों की कुरेदा न करो


मोहब्बत उसे भी थी

देखा पलट के उसने के हसरत उसे भी थी
हम जिस पे मिट गए थे मोहब्बत उसे भी थी
ये सोच कर अँधेरे गले से लगा लिए
रातों को जागने की आदत उसे भी थी
वो रो दिया था मुझ को परेशान देख कर
उस दिन राज़ खुला के मेरी ज़रुरत उसे भी थी


मोहब्बत की नई बुनियाद

चलो मोहसिन मोहब्बत की नई बुनियाद रखते हैं
खुद पाबंद रहते हैं , उसे आज़ाद रखते हैं
हमारे खून में खुदा ने यही तासीर रखी है
बुराई भूल जाते हैं अच्छाई याद रखते हैं
मोहब्बत में कहीं हम से गुस्ताखी न हो जाए
हम अपना हर क़दम उसके क़दम के बाद रखते हैं


दिल से दिल

दिल से दिल बड़ी मुश्किल से मिलते है
तूफान में साहिल बड़ी मुश्किल से मिलते है
यूँ तो मिल जाते है कई लोग राहो में मगर
आप जैसे दोस्त बड़ी मुश्किल से मिलते है…

यादों का आईना – Unique Collection of Pakistani Urdu Shayari and Poetry

तेरे शोख तासुबर में

ख़ामोश थे लव और मैं गुफ़्तार में गुम थी
पलके न झमकती थी के मैं दीदार में गुम थी
तन मन ने सजाये है तेरे शोख तासुबर में
यादों का आईना था मैं सिंगार में गुम थी

 

Tere Shokh Tasubur Mein

khamosh the luv aur main guftar mein gum thi
palke na Jhamkti thi ke main didar mein ghum thi
tan man ne sajaye hai tere shokh tasubur mein
yadon ka aiina tha main shingar mein gum thi

 


जुदाई के मौसम

जुदाई के मौसम सताने लगे है
वो फिर टूट कर याद आने लगे है
तख़्युल के परवाज़ को कैसे रोकू
वो गोया मेरे घर फिर आने लगे है
निशो रोक लो वो जाने लगे है
मनाने में जिन को ज़माने लगे है

 

Judai ke Mausam

judai ke mausam satane lage hai
wo phir toot kar yaad ane lage hai
takhayul ke parwaz ko kaise roku
wo goya mere ghar phir ane lage hai
nisho rok lo wo jane lage hai
manane main jin ko jamane lage hai

 


ज़िन्दगी-ऐ-ज़िन्दगी

हम तेरी धुन मैं परेशान ज़िन्दगी-ऐ-ज़िन्दगी
और तू हम से गुरेजा ज़िन्दगी-ऐ-ज़िन्दगी
तू कहीं साकी गली में खो गयी है और यहाँ
डंस गया इंसान को इंसान ज़िन्दगी-ऐ-ज़िन्दगी

 

Zindagi-ae-zindagi

hum teri dhun main preshan zindagi-ae-zindagi
Aur tu hum se gujejan zindagi-ae-zindagi
tu kahin saki gali mein khow gayi hai aur yahan
das gaya insaan ko insaan zindagi-ae-zindagi

 


दीवानगी

होश मंदी का सीला है शायद
यह जो दीवानगी अब तारी है
मेह्बे नज़ारा है वो आँख अभी
सो तमाशा भी अभी जारी है

 

Diwangi

hosh mandi ka sila hai shayad
yeah jo diwangi ab tari hai
mehbe nazara hai wo ankh abhi
so tamasha bhi abhi zaari hai

 


ख्याल और किसी का

ऐसा नहीं देखा कहीं हाल किसी और का
पहलू में कोई और ख्याल और किसी का

 

Khyal Aur Kisi Ka

aisa nahi dekha kahin haal kisi aur ka
pehlu mein koi aur khyal aur kisi ka

 


फैसला दिल का

फकत निगाह से होता है फैसला दिल का
न हो निगाह में शोखी तो दिलबरी क्या है

 

Faisla Dil Ka

fakat nigah se hota hai faisla dil ka
na ho nigah main shokhi to dilbari kya hai…