Umar bhar teri mohabbat meri khidmat rahi

तेरी खिदमत के क़ाबिल

उम्र भर तेरी मोहब्बत मेरी खिदमत रही
मैं तेरी खिदमत के क़ाबिल जब हुआ तो तू चल बसी

हिंदी और उर्दू शायरी – अल्लम इक़बाल शायरी – तेरी खिदमत के क़ाबिल

Teri Khidmat Ke Qabil

Umer Bhar Teri Mohabbat Meri Khidmat Rahi
Main Teri Khidmat Ke Qabil Jab Huwa Tu Chal Basi

Hindi and urdu shayari – Allama Iqbal ki (dedicated to maa) shayari – Teri Khidmat Ke Qabil

ऐ बेखबर

सौदागरी नहीं , यह इबादत खुदा की है
ऐ बेखबर ! जज़ा की तमन्ना भी छोड़ दे

हिंदी और उर्दू शायरी – अल्लम इक़बाल शायरी – ऐ बे -खबर

Ae Be-Khabar

Sodagari Nahin, Ye Ibadat Khuda Ki Hai
Ae Be-Khabar! Jaza Ki Tamanna Bhi Chor De

Hindi and urdu shayari – Allama Iqbal ki shayari – Ae Be-Khaba

इश्क़ क़ातिल से

इश्क़ क़ातिल से भी मक़तूल से हमदर्दी भी
यह बता किस से मुहब्बत की …

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हर एक सांस पर शक है के आखरी होगी – अल्लम इक़बाल शायरी

बड़ा बे-अदब हूँ

तेरे इश्क़ की इन्तहा चाहता हूँ
मेरी सादगी देख क्या चाहता हूँ
भरी बज़्म में राज़ की बात कह दी
बड़ा बे-अदब हूँ , सज़ा चाहता हूँ

Bada be-Adab Hoon

Tairay ishq kii intehaa chahataa hoon
mairi saadagii daikh kyaa chahataa hoon
bharii bazm mein raaz ki baat kah di
bada bai-adab hoon, sazaa chahataa hoon….


इक़बाल दुनिया तुझ से नाखुश है

बड़े इसरार पोशीदा हैं इस तनहा पसंदी में .
यह मत समझो के दीवाने जहनदीदा नहीं होते .
ताजुब क्या अगर इक़बाल दुनिया तुझ से नाखुश है
बहुत से लोग दुनिया में पसंददीदा नहीं होते .

IQBAL dunia tujh se nakhush hai

Barray israr poshida hain is tanha pasnadi mein.
Ye mat samjho k dewanay jahan’deeda nahi hotay.
Tajub kya agar IQBAL duniya tujh se nakhush hai
Bohat se log duniya mein pasanddeeda nahi hotay….


दर्द में इज़ाफ़ा

और भी कर देता है दर्द में …

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शब-ऐ-इंतज़ार – Mirza Galib,Ahmed Faraz,Mohsin Naqvi,Raaz Sarwer Shayari

मेरी वेहशत

इश्क़ मुझको नहीं वेहशत ही सही
मेरी वेहशत तेरी शोहरत ही सही
कटा कीजिए न तालुक हम से
कुछ नहीं है तो अदावत ही सही

Meri Wehshat

Ishq mujhko nahin wehshat hi sahi
Meri wehshat teri shohrat hi sahi
kta kijiay na taaluq hum se
kuch nahin hai to adaawat he sahi…


शब-ऐ-इंतज़ार

वो गया तो साथ ही ले गया सभी रंग उतार के शहर के
कोई शख्स था मेरे शहर में किसी दूर पार के शहर का
चलो कोई दिल तो उदास था , चलो कोई आँख तो नम थी
चलो कोई दर तो खुला रहा शब-ऐ-इंतज़ार के शहर का

Shab-ae-Intezaar

Wo Gaya To Saath Hi Le Gaya Sabhi Rang Utaar Ke Shehar Ke
Koi Shakhs Tha Mere Shehar Mein Kisi Door Paar Ke Shehar Ka
Chalo Koi Dil to Udaas Tha, Chalo Koi Aankh To Num thi
Chalo Koi Dar To Khula Raha Shab-ae-Intezaar Ke Shehar …

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अगर न बदलू तेरी खातिर हर एक चीज़ तो कहना – आलम इक़बाल की शायरी

अगर न बदलू तेरी खातिर हर एक चीज़ तो कहना

मुहब्बत की तमना है तो फिर वो वस्फ पैदा कर
जहां से इश्क़ चलता है वहां तक नाम पैदा कर

अगर सचा है इश्क़ में तू ऐ बानी आदम
निग़ाह -ऐ -इश्क़ पैदा कर

मैं तुझ को तुझसे ज़्यादा चाहूँगा
मगर शर्त ये है के अपने अंदर जुस्तजू तो पैदा कर

अगर न बदलू तेरी खातिर हर एक चीज़ तो कहना
तू अपने आप में पहले अंदाज़ -ऐ -वफ़ा तो पैदा कर

Agar Na Badlu Teri Khatir Har Ek Cheez To Kehna

Muhabbt Ki Tamna Hai To Phir Wo Vasf Peda Kar
Jahan Se Ishq Chalta Hai Wahan Tak Naaam Peda Kar

Agar Sacha Hai Ishq Mein Tu Ae Bani ADAM
Nighah-E-Ishq Peda Kar

Main Tujh Ko Tujh Se Ziada Chahunga
Magar Shart Yeh Hai Ki Apne Andar Justju To Pedaa Kar

Agar Na Badlu Teri Khatir Har Ek Cheez …

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Best Ever Shayari Colletion of Munir Niazi – मुनीर नियाज़ी शायरी मजमूआ

उसके जाने का रंज

मेरी सदा हवा में बहुत दूर तक गयी
पर मैं बुला रहा था जिसे , वो बेखबर रहा
उसकी आखिरी नज़र में अजब दर्द था “मुनीर”
उसके जाने का रंज मुझे उम्र भर रहा

Uske Jaane Ka Ranj

Meri Sada Hawa Mein Bohat Door Tak Gayi
Par Main Bula Raha Tha Jise, wo Bekhabar Raha
Uski Aakhiri Nazar Mein Ajab Dard Tha “Munir”
Uske Jaane Ka Ranj Mujhe Umar Bhar Raha


हम जवाब क्या देते

किसी को अपने अमल का हिसाब क्या देते
सवाल सारे ग़लत थे, हम जवाब क्या देते
हवा की तरह मुसाफिर थे, दिलबरों के दिल
उन्हें बस एक ही घर का अजाब क्या देते

Hum Jawab Kya Dete

Kisi Ko Apnay Amal Ka Hisaab Kya Dete
Sawaal Saare Ghalat The, Hum Jawab Kya Dete
Hawa Ki Tarha Musafir The, Dilbaron Ke Dil
Unhain Bus Ak Hi Ghar Ka Azaab Kya Dete


ज़ुल्म

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यारों की इनायत – ख्वाजा मीर दर्द की शायरी

यारों की इनायत

न कोई इलज़ाम , न कोई तंज़ , न कोई रुस्वाई मीर ,
दिन बहुत हो गए यारों ने कोई इनायत नहीं की

Yaron ki Inayat

Na koi ilzaam, Na koi tanz, Na koi ruswai Mir,
din bohat hogaye yaron ne koi inayat nahi ki..


ज़ोर आशिक़ मिज़ाज है कोई

जब मैंने आकर इधर उधर देखा
तू ही आया नज़र जिधर देखा

जान से हो गया बदन खाली
जिस तरफ तूने आँख भर के देखा

उन लबों ने की न मसीहाई
हम ने सौ -सौ तरह से मर देखा

ज़ोर आशिक़ मिज़ाज है कोई
“दर्द ” को किसे -ऐ -मुख़्तसर देखा

ख्वाजा मीर दर्द

Zor Ashiq Mizaj Hai koi

Jag main aakar idhar udhar dekha
tu hi aya nazar jidhar dekha

Jaan se ho gaye badan khali
jis taraf tune ankh bhar ke dekha

Un labon ne ki na masihai
ham ne sau -sau tarah se mar …

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यह इश्क़ नहीं आसां – Jigar Moradabadi – Urdu Shayar

यूं ही दिल के तड़पने का कुछ तो है सबब आखिर
या दर्द ने करवट ली है या तुमने इधर देखा
माथे पे पसीना क्यों आँखों में नमी सी क्यों
कुछ खैर तो है , तुमने जो हाल -ऐ -जिगर देखा

                                                           Jigar Moradabadi – Urdu Shayar

यह इश्क़ नहीं आसां

क्या हुस्न ने समझा है क्या इश्क़ ने जाना है
हम ख़ाक-नाशिनो की ठोकर में ज़माना है

वो हुस्न -ओ -जमाल उनका यह इश्क़ -ओ -शबाब अपना
जीने की तम्मना है मरने का ज़माना है

या वो थे खफा हम से या हम थे खफा उनसे
कल उनका ज़माना था आज अपना ज़माना है

यह इश्क़ नहीं आसां इतना तो समझ लीजिये
एक आग का दरिया है और डूब के जाना …

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ज़िन्दगी की किताब उर्दू शायरी – मुनीर नियाज़ी

ज़िन्दगी की किताब

यह जो ज़िन्दगी की किताब है
यह किताब भी क्या किताब है
कहीं एक हसीं सा ख्वाब है
कहीं जान लेवा अज़ाब है

मुनीर नियाज़ी – ज़िन्दगी की किताब उर्दू शायरी – यह जो ज़िन्दगी की किताब है


Zindgi ki Kitab

Yeh jo Zindgi ki kitab hai
Yeh kitab bhi kya kitab hai
Kahin ek haseen sa khwab hai
Kahin jaan levaa azaab hai

Munir Niazi – Zindgi ki kitab Urdu Shayari – Yeh jo Zindgi ki kitab hai

रहमतों की हैं बारिशें

कभी खो दिया कभी पा लिया
कभी रो लिया कभी गा लिया
कहीं रहमतों की हैं बारिशें
कहीं तिशनगी बेहिसाब है

मुनीर नियाज़ी – ज़िन्दगी की किताब उर्दू शायरी – कभी खो दिया कभी पा लिया


Rehmaton ki Hain Barishain

Kbhi kho diya kbhi pa liya
Kabhi ro liya kbhi gaa liya
Kahin rehmaton ki hain barishain
Kahin tishnagi behisab hai

Munir Niazi –
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