Sad Hindi Love Story – बेवकूफियाँ

साथियों नमस्कार, कई बार हम किसी इंसान के साथ इस कदर एक तरफ़ा प्यार में पड़ जाते हैं की फिर हमें उस इंसान के अलावा कुछ नहीं दीखता। आज की हमारी खास कहानी “Sad Hindi Love Story – बेवकूफियाँ”  ऐसे ही एक प्रेम प्रसंग पर आधारित है। आपको हमारी यह कहानी कैसी लगती है हमें Comment Section में ज़रूर बताएं।

Sad Hindi Love Story – बेवकूफियाँ

सुबह सुबह ही दरवाज़े की घंटी ने मेरी नींद खराब कर दी था। आँखे मलते हुए दरवाज़ा खोला तो सामने वही जाना पहचाना चेहरा था,  “तू यहाँ इतनी सुबह” गुड मॉर्निंग हाय हेलो की जगह यही बात एकदम से मुँह से निकल गई।

वह भी कहाँ कम  थी। झट से बोली –  मतलब क्या है तेरा ?  मैं यहाँ  कोई घूमने फिरने नहीं आई हूँ। कल रात तू तेरी किताबें  मेरे ही घर छोड़ आया था। वही देने आई हूँ कॉलेज जाना है ना तुझे, भूल जाता तो तुझे ही प्रॉब्लम आती। किताबें किसी और की बोझ कोई और उठाता फिरे। वह इतना सब एक ही सांस में  बोल गई ।

अब मेरे पास कहने को सिर्फ सॉरी बचा था, पर वह भी उसे कहाँ हजम होने वाला था। बोली सॉरी-वोरी  से काम नहीं चलेगा बच्चू। मुझे चाय पीनी हैँ  चाय। तब ही माफ़ी मिलेगी। चाय बनाकर लाया तो उसमें  भी दस नखरे। सच में  बड़ी ही अजीब  लड़की थी वो। दिनभर बोलती ही रहती लगता  फुल्ली नहीं बल्कि ओवरचार्ज है।

चुप रहती तो अपने फ़ोन में लग जाती ना जाने किस घोचूँ को अपना सच्चा प्यार मान बैठी थी उसी से चेटिंग में लगी रहती मैं जब भी उसके बारे में  कुछ पूछता चिढ जाती थी-  तुझे क्या मतलब हैँ ? कहकर मुझे एक साइड में  रख देती थी।

पिछले कई सालों से साथ थे हम। उसकी एक-एक बात से मैं अच्छी तरह वाकिफ था। फिर भी लगता उसे अब तक जान नहीं पाया था। शॉपिंग का भूत  सवार था उस पर । हर दो-पाँच दिन में  कोई ना कोई जरूरत निकल ही आती थी उसकी। जरूरतें भी ऐसी जिन्हे जानकर  हँसी  छूटे  बिना ना रह पाए।

एक बार तो मुझे लेकर लिपस्टिक से मैचिंग जूते  के फ़ीते लेने निकल पड़ी बंदी । एक दो नहीं बल्कि पूरी आठ दुकानें  छान मारी थी उसने मेरे साथ। लेकिन मैचिंग फीते ढूंढ़ कर ही दम लिया। उसे खुद के बारे में  चाहे कुछ अता-पता  ना हो, फिर भी मेरा बड़ा ख्याल रखती थी …

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