लफ़्ज़ों की शरारत – शरारत उर्दू शायरी

वो शरारत भी तेरी थी

वो मोहब्बत भी तेरी थी , वो शरारत भी तेरी थी
अगर कुछ बेवफाई थी , तो वो बेवफाई भी तेरी थी
हम छोड़ गए तेरा शहर , तो वो हिदायत भी तेरी थी
आखिर करते तो किस से करते तुम्हारी शिकायत
वो शहर भी तेरा था और वो अदालत भी तेरी थी


शरारत न होती

शरारत न होती , शिकायत न होती
नैनों में किसी के , नज़ाकत न होती
न होती बेकरारी , न होते हम तन्हा
अगर जहाँ में कम्बख्त ये मोहब्बत न होती


कोई शरारत करते

तुम पास होते तो कोई शरारत करते
तुझे बाँहों में भर मुहब्बत करते
देखते तेरी आंखों में नींद का खुमार
अपनी खोई हुई नींदो की शिकायत करते


आओ एक शरारत करते हैं

एक शरारत करते हैं आओ मोहब्बत करते हैं
हँसती आँखों से कह दो , दरिया हिजरत करते हैं ,
कुछ दिल ऐसे हैं जिन पर हम भी हुकूमत करते हैं


कौन कहता है शरारत से तुम्हें देखते हैं

कौन कहता है शरारत से तुम्हें देखते हैं
जान -ऐ -मन हम तो मोहब्बत से तुम्हें देखते हैं
तुम को मालूम नहीं तुम हो मुकद्दस कितने
देखने वाले भी तुम्हे अकीदत से तुम्हें देखते हैं


मोहब्बत में शरारत का मज़ा

मोहब्बत में शरारत का मज़ा कुछ और होता है
कहा क्या किसी ने और सुना दूजे ने कुछ और होता है
यही तो है अलग अंदाज़ जीने और मरने का
के दुनिया और कुछ समझे, हुआ कुछ और होता है


वो आँखों से शरारत करते है

वो आँखों से शरारत करते है
अदाओ से क़यामत करते है
निगाहे उनके चेहरे से हटती नहीं
और वो हमारी नज़रो से शिकायत करते है


लफ़्ज़ों की शरारत

यह लफ़्ज़ों की शरारत है , संभल कर कुछ भी लिखना तुम
मोहब्बत लफ्ज़ है लकिन यह अक्सर हो भी जाती है


शरारत यूँ नहीं करते

माना के प्यार करते है तुम्हे , हक़ है शरारत का
किसी की जान पर बन जाये , शरारत यूँ नहीं करते…

Read More

हिंदी और उर्दू शायरी – दो लाइन शायरी – Daag , Perveen , Naqvi Shayari

न जाने कौन

न जाने कौन सा आसब दिल में बसता है
के जो भी ठहरा वो आखिर मकान छोड़ गया …

Na jane kaun

Na jane kaun sa aasaab dil mein basta hai
Ke jo bhi thehra wo aakhir makaan chod gaya


तुझी को पूछता रहा

बिछड़ के मुझ से , हलक़ को अज़ीज़ हो गया है तू ,
मुझे तो जो कोई भी मिला , तुझी को पूछता रहा

Tujhi ko puchta raha

Bichar ke mujh se, halaq ko aziz ho geya hai tu
Mujhe to jo koi mila, tujhi ko puchta raha


मेरे हम-सकूँ 

मेरे हम-सकूँ  का यह हुक्म था के कलाम उससे मैं कम करूँ ..
मेरे होंठ ऐसे सिले के फिर उसे मेरी चुप ने रुला दिया …

Mere hum-sukhan

Mere hum-sukhan ka yeh hukm tha ke kalaam us se main kam karoon..
mere hont aise sile ke phir usey meri chup ne rula diya ….


यह शब-ऐ-हिजर

यह शब-ऐ-हिजर तो साथी है मेरी बरसों से
जाओ सो जाओ सितारों के मैं ज़िंदा हूँ अभी

Shab-ae-hizar

Yeh Shab-ae-hizar To Sathi Hai Meri Barsoon Se
Jao So Jao Sitaro Ke Main Zinda Hoon Abhi


न आना तेरा

ले चला जान मेरी रूठ के जाना तेरा
ऐसे आने से तो बेहतर था न आना तेरा

Na aanaa Tera

Le chalaa jaan meri ruth ke jaana tera
aise aane se to behtar tha na aanaa tera…

Read More

कोई तो जलवा खुदा के बास्ते

दीदार के काबिल

कोई तो जलवा खुदा के बास्ते दीदार के काबिल दिखाई तो दे
संगदिल तो मिल चुके है हजारो कोई एहले दिल तो दिखाई दे

Didar Ke Kabil

Koi to jalwaa khudaa ke bastee didar ke kabil dikhaee to de
Sangdil to mil chuke hai hajaro koi ehle dil to dikhai de…


इश्क़

आसमानो से कहो अगर हमारी उड़ान देखनी हो
तो अपना कद और ऊँचा कर ले
हुसन वालो से कहो अगर इश्क़ देखना हो तो हम से आके मिलें

Ishq

Asmanoo se kahoo agar hamari udan dekhni ho
To apna kad aur unchaa kar le
Husaan walo se kaho agar ishq dekhana ho to hum se ake mile…


दिललगी

हमने बहुत देखे हैं इश्क़ में जान देने वाले
पर क्या करे हजूर आशक़ी दिललगी नहीं होती

Dillagi

Humne bahut dekhe hain ishq mein jaan dene wale
Par kya kare hajoor ashqi dillagi nahi hoti…


शमा और परवाना

हूँ मैं परवाना मगर कोई शमा तो हो रात तो हो
जान देने को हूँ हाजिर मगर कोई बात तो हो

Shama Aur Parwana

Hoon main parwana magar koi shama to ho raat to ho
Jaan dene ko hoon hajir magar koi baat to ho…

Read More

हमे तो प्यार की गहराइयाँ मालूम करनी थी “फ़राज़”

प्यार की गहराइयाँ

हमे तो प्यार की गहराइयाँ मालूम करनी थी “फ़राज़”
यहाँ नहीं डूबता तो कहीं और डूबे होते

Pyar ki Gehraiya

hume to pyar ki gehraiya maaloom karni thi “FARAZ”
yahan nhi dubte to kahin aur dube hote


मेरी ख़ामोशी

वो अब हर एक बात का मतलब पूछता है मुझसे “फ़राज़”
कभी जो मेरी ख़ामोशी की तफ्सील लिखा करता था

Meri Khamoshi

woh ab har ek baat ka matlab poochta hai mujhse “FARAZ”
kbhi jo meri khamoshi ki tafseel likha karta tha…


लफ़्ज़ों की तरतीब

लफ़्ज़ों की तरतीब मुझे बांधनी नहीं आती “ग़ालिब”
हम तुम को याद करते हैं सीधी सी बात है

Lafzon ki Tarteeb

Lafzon ki tarteeb mujhe bandhni nahi aati “GHALIB”
Hum tum ko yaad karte hain sidhi si baat hai…


इंतज़ार

तेरे जाने के बाद बस इतना सा गिला रहा हमको “मोहसिन “
तू पलट कर देख जाता तो सारी ज़िन्दगी इंतज़ार में गुज़ार देते .

Intezar

Tere jane ke bad bus itna sa gila raha humko “mohsin”
tu palat kar dekh jata to sari zindagi intezar mein guzar dete…


ज़ख़्म खिल उठे

लाज़िम था गुज़ारना ज़िन्दगी से
बिन ज़हर पिये गुज़ारा कब था

कुछ पल उसे देख सकते
अश्कों को मगर गवारा कब था

हम खुद भी जुदाई का सबब थे
उस का ही क़सूर सारा कब था

अब औरों के साथ है तो क्या दुःख
पहले भी कोई हमारा कब था

एक नाम पे ज़ख़्म खिल उठे
क़ातिल की तरफ इशारा कब था

आए हो तो रौशनी हुई है
इस बाम में कोई सितारा कब था

देखा हुआ घर था हर किसी ने
दुल्हन की तरह संवारा कब था

Zakham Khil Uthe

Lazim Tha Guzarna Zindagi Se
Bin Zehar Piye Guzara Kab Tha

Kuch Pal Use Dekh Sakte
Ashkoon Ko Mager Gawara Kab Tha

Ham Khud Bhi Judai Ka Sabab The
Us Ka Hi Qasoor Sara Kab Tha

Ab Auron Ke Sath Hai To Kya Dukh
Phele Bhi Koi Hamara Kab Tha

Ek Naam Pe Zakham Khil Uthe
Qatil Ki Taraf Eshara Kab Tha

Ayee Ho To Roshni Hui Hai
Is Baam Main Koi Setara Kab Tha

Dekha Hua Ghar Tha Har Kisi Ne
Dulhan Ki Tarah Sanwara Kab Tha…

Read More

कभी याद आओ तो इस तरहं – Shayari

एक ग़ैर के पहलु में हमारा प्यार होगा

दिल डूबता है यह सोच कर की फिर न उनका दीदार होगा
जिस दिन वो रुखसत किसी और के साथ होगा
नींद टूट जाती है अक्सर यह सोचकर .
एक ग़ैर के पहलु में हमारा प्यार होगा .

Ek Ghair Ki pehlu mein hamara yaar hoga

dil doobta hai yeah soach kar ki phir na unka didar hoga
jis din wo Rukhsat kisi aur ke sath hoga
neend toot jati aksar yeah Sochkar.
Ek Ghair Ki pehlu mein hamara pyar hoga.


कभी याद आओ तो इस तरहं

कभी याद आओ तो इस तरहं ,
कभी गुनगुनाओ तो इस तरहं ,
मेरा दर्द फिर से ग़ज़ल बने ,
कभी दिल दुखाओ तो इस तरहं ,
मेरी धड़कने भी लरज़ उठें ,
कभी भूल जाओ तो इस तरहं ,
न सिसक सकें न बिलख सकें ,
कभी छोड़ जाओ तो इस तरहं ,
न उजड़ सकें न सँवर सकें ,
कभी याद आओ तो इस तरहं ……..

Kabhi yaad aao to is Tarhan

Kabhi yaad aao to is tarhan,
Kabhi gungunao to is tarhan,
Mera dard phir se ghazal bane,
Kabhi dil Dukhao to is tarhan,
Meri Dharkanen bhi laraz uthen,
Kabhi bhool jao to is tarhan,
Na sisak saken na balak saken,
Kabhi choor jao to is tarhan,
Na ujar saken na sanwar saken,
Kabhi yaad aao to is tarhan


सबब तो बता जुदाई का

कोई सवाल जो पूछे तो क्या कहूँ उस से
बिछड़ने वाले ! सबब तो बता जुदाई का . .

Sabab to bata judai ka

Koi sawaal jo poochay to kia kahoon us se
Bicherney walay! Sabab to bata judai ka. .

For Daily Updates Follow Us On Facebook…

Read More