Nazdeek Jo Ahsas K Jazbon Se Howa Hun

Nazdeek Jo Ahsas K Jazbon Se Howa Hun
Warasta Me Alfaz K Rishton Se Howa Hun

Apney Me Magan Hey Sabi Ko Apna Hi Gham He
Bezar Me Apno Sey Parayun Sey Howa Hun

Firoun Ne Bi Orh Liya Jama E Mosa
Mohtat Me Ab Kuch Naey Rishton Se Howa Hun

Taqat K Tawasut Se Jo Manwaey Khudai
Baghi Me Aesey Jhotey Khudaon Se Huwa Hun

Noman Jo Is Mulk Ne Phelati hey Nafrat
Ab Robaro Kuch Aesey Hawaon Se Howa Hun

نزدیک جو احساس کے جذبوں سے ہوا ہوں
وارستہ میں الفاظ کے رشتوں سے ہوا ہوں

اپنے میں مگن ہیں، سبھی کو اپنا ہی غم ہے
بے زار میں اپنوں سے، پرایوں سے ہوا ہوں

فرعون نے بھی اوڑھ لیا جامہ موسى
محتاط میں کچھ اب نئے رشتوں سے ہوا ہوں

طاقت کے توسط سے جو منوائیں خدائی
باغی میں ایسے جھوٹے خداوں سے ہوا ہوں

نعمان جو اس ملک میں پھیلاتی ہے نفرت
اب روبرو کچھ ایسے ہواؤں سے ہوا ہوں…

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Hindi Gazal

अगर आप शायरी और ग़ज़ल प्रेमी हैं तो आपके इस लेख में एक से बढ़कर एक अच्छी अच्छी ग़ज़ल या लम्बी शायरिया पढ़ने को मिलेगी| सभी गज़ले बहुत ही प्रसिद्ध कवियों द्वारा लिखी गयी हैं जो की दिल की गहराईयो को छूती हैं

Hindi Gazal By Famous Poet

Hindi Gazal

1) मुक्कमल किताब हूँ Gazal on Mohabbat

मुक्कमल किताब हूँ
तेरी ही अल्फ़ाज़ हूँ
अधूरा सा खुआब हूँ
पर लाजवाब हूँ
सपनो में जो आई थी
बस जरा सा मुस्कुराई थी
ये देख दिल खुशगवार हुआ
फिर मिलने का जिंदगी भर इंतज़ार हुआ
बे इख़्तेयार प्यार हुआ
न मेरा इज़हार हुआ
न उसका इंकार हुआ
फिर महबूब मेराज हुआ
सारी मोहब्बत एक राज़ हुआ
फिर ये मुकम्मल किताब हुआ||
~Meraj Ibn Sami

2) Kabhi Shabnam Jagjit Singh Gazal

कभी गुंचा कभी शोला कभी शबनम की तरह,
लोग मिलते हैं बदलते हुए मौसम की तरह,

मेरे महबूब मेरे प्यार को इलज़ाम न दे,
हिज्र में ईद मनाई है मुहर्रम की तरह,

मैंने खुशबू की तरह तुझको किया है महसूस,
दिल ने छेड़ा है तेरी याद को शबनम की तरह,

कैसे हमदर्द हो तुम कैसी मसीहाई है,
दिल पे नश्तर भी लगाते हो तो मरहम की तरह
~Jagjit Singh

3) Intaha aaj Ishque Ki Kar Di Gazal in Hindi Lyrics

इंतहा आज इश्क़ की कर दी
आपके नाम ज़िन्दगी कर दी

था अँधेरा ग़रीब ख़ाने में
आपने आ के रौशनी कर दी

देने वाले ने उनको हुस्न दिया
और अता मुझको आशिक़ी कर दी

तुमने ज़ुल्फ़ों को रुख़ पे बिखरा कर
शाम रंगीन और भी कर दी!!
~Jagjit Singh

4) आपके दिल ने हमें आवाज दी Best Hindi Gazal

आपके दिल ने हमें आवाज दी हम आ गए
हमको ले आई मोहब्बत आपकी हम आ गए

अपने आने का सबब हम क्या बताएँ आपको
बैठे बैठे याद आई आपकी हम आ गए

हम है दिलवाले भला हम पर किसी का ज़ोर क्या
जायेंगे अपनी ख़ुशी अपनी ख़ुशी हम आ गए

कहिये अब क्या है चराग़ों की ज़रुरत आपको
लेके आँखों में वफ़ा की रौशनी हम आ गए
~Jagjit Singh

5) Tera Chahera Jagjit Sing Hindi Gazal

तेरा चेहरा है आईने जैसा
क्यों न देखूँ है देखने जैसा

तुम कहो तो मैं पूछ लूँ तुमसे
है सवाल एक पूछने जैसा

दोस्त मिल जाएँगे कई लेकिन
न मिलेगा कोई मेरे जैसा

तुम अचानक मिले थे जब पहले
पल नही है वो भूलने जैसा
~Jagjit Singh

6) Meri Aadat Jagjit Gazal

काँटों से दामन उलझाना …

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सुना है लोग उसे आँख भर के देखते है – फ़राज़ की शायरी

सुना है लोग उसे – फ़राज़ अहमद

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते है
तो उसके शहर में कुछ दिन ठहर के देखते है

सुना है राफत है उसे खराब हालो से
तो अपने आप को बर्बाद कर के देखते है

सुना है दर्द की गाहक है चस्मे नाज़ उसकी
तो हम भी उसकी गली से गुजर के देखते है

सुना है उसको भी है शेयर -ओ -शायरी से सराफ
तो हम भी मोईझे अपने हुनर के देखते है

सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते है
यह बात है तो चलो बात कर के देखते है

सुना है रात उसे चाँद तकता रहता है
सितारे बामे-ऐ-फलक से उतर के देखते है

सुना है दिन को उसे तितलियाँ सताती है
सुना है रात को जुगनू ठहर के देखते है

सुना है उसके बदन की तराश ऐसी है
फूल अपनी कवाएं क़तर के देखते है

रुके तो गर्दिशयें उसका तवाफ़ करते है
चले तो उसे ज़माने ठहर के देखते है

Hindi and Urdu Shayari – हुस्न की तारीफ  (Faraz Ahmed) – सुना है लोग उसे आँख भर के देखते है

Suna hai Log use – Faraz Ahmed

suna hai log use ankh bhar ke dekhte hai
to uske shehar mein kuch din tehar ke dekhte hai

suna hai raft hai use khrab haalo se
to apne app ko barbaad kar ke dekhte hai

suna hai dard ki gaahak hai chaasme naaz uski
to hum bhi uski gali se gujar ke dekhte hai

suna hai usko bhi hai sher-o-shayari se saraaf
to hum bhi moejhe apne hunar ke dekhte hai

suna hai bole to baaton se phool jharthe hai
yeah baat hai to chaalo baat kar ke dekhte hai

suna hai raat use chand takta rehta hai
sitare bame falak se utaar ke dekhte hai

suna hai din ko use titliya satati hai
suna hai raat ko jungu ther ke dekhte hai

suna hai uske badan ki tarash aisi hai
phhol apni kawayen katar ke dekhte hai

ruke to gardishyein uska tawaf karte hai
chale to use jamane ther ke dekhte hai

Urdu and hindi shayari – Husn – Faraz ki shayari – suna hai log use ankh bhar ke dekhte hai
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Hindi Urdu Poetry | Charagh Le Ke Tere Shehar Se Guzarna Hai

Hindi Urdu Poetry | Urdu Shayari Ghazal

Charagh le ke tere shehar se guzarna hai
Ye tajurba bhi hame ek baar karna hai

Main woh pahar hu jo cut raha ho pani se
Ye dil nahi hai mere aansuo ka jharna hai

Bohat jadeed hun lekin ye mera wirsa hai
Usi qadeem gali se mujhe guzarna hai

Tumhe khabar nahi suraj bhi aks hai mera
Tamam din ka mujhe intazam karna hai

Wo ek shakhs ke jis ko gazal bhi kehte hain
Usi ke naam se jeena, usi se marna hai

Hindi Urdu Poetry

چراغ لے کے تیرے شہر سے گزرنا ہے
یہ تجربہ بھی ہمیں ایک بار کرنا ہے

میں وہ پھر ہوں جو کٹ رہا ہو پانی سے
یہ دل نہیں ہے میرے آنسوؤں کا جھرنا ہے

بہت جدید ہوں لیکن یہ میرا ورثہ ہے
اسی قدیم گلی سے مجھے گزرنا ہے

تمہیں خبر نہیں سورج بھی عکس ہے میرا
تمام دن کا مجھے انتظام کرنا ہے

وہ ایک شخص کے جس کو غزل بھی کہتے ہیں
اسی کے نام سے جینا اسی سے مرنا ہے

#Hindi #Urdu #Poetry

चराग़ लेके तेरे शहर से गुज़ारना है
ये तजरुबा भी हमें एक बार करना है

मैं वह पहर हु जो कट रहा हो पानी से
ये दिल नहीं है मेरे आंसुओ का झरना है

बहुत जदीद हूँ लेकिन ये मेरा विरसा है
उसी क़दीम गली से मुझे गुज़रना है

तुम्हे खबर नहीं सूरज भी अक्स है मेरा
तमाम दिन का मुझे इंतज़ाम करना है

वो एक शख्स के जिस को ग़ज़ल भी कहते हैं
उसी के नाम से जीना, उसी से मरना है

♥…

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Aasan Urdu Shayari in Urdu Hindi : Aa Gai Yaad

Aasan Urdu Shayari in Urdu Hindi

 

Aagai yaad sham dhalte hi
Bujh gaya dil charagh jalte hi

Khul gaye shehr e gham ke darwaze
Ek zara si hawa ke chalte hi

Kon tha tu ke phir n dekha tujhe
Mit gaya khwab aankh malte hi

Khaof aata hai apne hi ghar se
Mah e shab e tab ke nikalte hi

Tu bhi jaise badal sa jaata hai
Aks e divar ke badalte hi

Khoon sa lag gaya hai hathon mein
Chadh gaya zehr gul masalte hi

 

Aasan Urdu Shayari in Urdu

آ گئی یاد شام ڈھلتے ہی
بجھ گیا دل چراغ جلتے ہی

کھل گئے شہر غم کے دروازے
اک ذرا سی ہوا کے چلتے ہی

کون تھا تو کہ پھر نہ دیکھا تجھے
مٹ گیا خواب آنکھ ملتے ہی

خوف آتا ہے اپنے ہی گھر سے
ماہ شب تاب کے نکلتے ہی

تو بھی جیسے بدل سا جاتا ہے
عکس دیوار کے بدلتے ہی

خون سا لگ گیا ہے ہاتھوں میں
چڑھ گیا زہر گل مسلتے ہی

 

Aasan Urdu Shayari in Hindi

आ गई याद शाम ढलते ही
बुझ गया दिल चराग़ जलते ही

खुल गए शहर-ए-ग़म के दरवाज़े
इक ज़रा सी हवा के चलते ही

कौन था तू कि फिर न देखा तुझे
मिट गया ख़्वाब आँख मलते ही

ख़ौफ़ आता है अपने ही घर से
माह-ए-शब-ताब के निकलते ही

तू भी जैसे बदल सा जाता है
अक्स-ए-दीवार के बदलते ही

ख़ून सा लग गया है हाथों में
चढ़ गया ज़हर गुल मसलते ही

 

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Shiv Kumar Batalvi – नग्मे और शायरी

प्यार तेरे शहर दा
 

रोग बन के रह गया है प्यार तेरे शहर दा
मैं मसीहा वेख्या बीमार तेरे शहर दा

इसकी गलियां मेरी चढ़दी जवानी खा लायी
क्यों ना करूँ दोस्ता सत्कार तेरे शहर दा

शहर तेरे क़दर नहीं लोकां नू सच्चे प्यार दी
रात नूं खुल्दा है हर बाजार तेरे शहर दा

जिथे मोयां बाद भी कफ़न नहीं होया नसीब
कौन पागल अब करे एतबार तेरे शहर दा

इथे मेरी लाश तक नीलाम कर दीती गयी
लथ्या कर्ज़ा ना फिर भी यार तेरे शहर दा

Pyaar Tere Shahar Da
 

Rog ban ke reh gayaa hai pyaar tere shahar daa
Main Masiihaa vekhyaa biimaar tere shahar daa

Ehdiyaan galiyan merii charhdi jawaani khaa layii
Kyon karaan naa dostaa satkaar tere shahar daa

Shahar tere qadar nahin lokaan noon suche pyaar dii
Raat noon khuldaa hai har bazaar tere shahar daa

Jithe moyaan baad vii kafan nahin hoyaa nasiib
Kaun paagal hun kare etbaar tere shahar daa

Eithe merii laash tak niilaam kar ditii gayii
Lathyaa karzaa naa fer vii yaar tere shahar daa…


दर्द दा कोई जाम पीतियाँ
 

आज फिर दिल गरीब इक पाउँदा है वास्ता,
दे जा मेरी अज  कलम नू  इक होर हादसा

मुददत होइ है दर्द दा कोई जाम पीतियाँ ,
पीडां च हन्जू घोल के , दे जा दो आताशा

कागज़ दी कोरी रीझ है चुप चाप वेखदी ,
शब्दां दे थल च भटकदा गीतां दा काफिला

तुरना मैं चौन्दां पैर विच कंडे दी ले के पीड ,
दुःख तो खबर तक दोस्ता जिना भी फासला ,

आ बौड़ शिव नु पीड भी है कंडे दी चली ,
रखी सी जेह्ड़ी उस ने मुददत तो दास्ताँ

Dard Da Koi Jaam Peeteyaan
 

Aaj Fer Dil Gareeb Ik Paaunda Hai Vaasta,
De Ja Meri Aaj Kalam Nu Ik Hor Haadsa,

Muddat Hoi Hai Dard Da Koi Jaam Peeteyaan,
Peedaan Ch Hanju Ghol Ke, De Ja Do Aatasha,

Kaagaz Di Kori Reejh Hai Chup Chaap Vekhdi,
Shabdaan De Thal Ch Bhatakda Geetaan Da Kaafila,

Turnaa Main chaundaan Pair Vich Kande Di Le Ke Peed,
Dukh To Kabar Tak Dosta Jihna Vi Faasala,

Aa Bahur Shiv Nu Peed Vi Hai Kand De Chali,
Rakhi Si Jihdi Oas Ne Muddat To Daastaan.…

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आँखें मिलाओ ग़ैर से – मिर्ज़ा ग़ालिब

आँखें  मिलाओ ग़ैर से – मिर्ज़ा ग़ालिब
 

कहना ग़लत ग़लत तो छुपाना सही , सही
क़ासिद कहा जो उस ने बताना सही सही

यह सुबह सुबह चेहरे की रंगत उतरी हुई
कल रात तुम कहाँ थे बताना सही ,सही

दिल ले के मेरा हाथ में कहती हैं मुझ से वो
क्या लोगे इसका दाम बताना सही , सही

आँखें  मिलाओ ग़ैर से दो हम को जाम _ऐ _महफ़िल
साक़ी तुम्हें क़सम है पिलाना सही , सही

आइमा फरोश भीड़ है तेरी दुकान पर
ग्राहक हैं हम भी माल दिखाना सही , सही

ग़ालिब तो जान _ओ _ दिल से फ़क़त आपका है बस
क्या आप भी हैं उसके बताना सही ,सही..

Ankhen Milao Gair Se – Mirza Galib
 

Kehna Ghalt Ghalt To Chupana Sahi, Sahi
Qasid Kaha Jo Us Ne Btana Sahi Sahi

Yeh Subah Subah chehre Ki Rangat utri Hui
Kal Raat Tum Kahan The Batana Sahi,Sahi

Dil Le Ke Mera Hath mei Kehte Hain Mujh Se Wo
Kya Loge Iska Daam Batana Sahi, Sahi

Ankhen Milao Gair Se Do Hum Ko Jaam_AE_mehfil
Saqi Tumhen Qasm Hai Pilana Sahi, Sahi

Aiema Farosh Bheer Hai Teri Dukan Par
Gahak Hain Hum Bhi Maal Dikhana Sahi, Sahi

Ghalib To Jaan_O_Dil Se Faqt Apka Hai Bas
Kya Ap Bhi Hain Uske Btana Sahi,Sahi..…

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ग़ज़ल – वो मेरा हमसफ़र हुआ भी तो लम्हा भर

हम तो अकेले रहे
 

हमेशा रहेगा यह आलम कहाँ
यह महफ़िल कहाँ और यह हमदम कहाँ

सदा चोट पर चोट खाता रहा
मुक़द्दर में इस दिल के मरहम कहाँ

कहाँ अब्र कोई कड़ी धुप में
झुलसते बयाबां में शबनम कहाँ

ना मस्त आँखें होंगी ना ज़ुल्फे रसा
हमेशा रहेगा यह मौसम कहाँ

अकेले थे हम तो अकेले रहे
कोई अपना गमख्वार हो , हमदम कहाँ

जहांगीर-ओ-नौशेरवां चल बसे
रहा डर में अद्ल पैहम कहाँ

ना अय्यूबी कोई ना खालिद कोई
गया रखता अपना परचम कहाँ

Hum To Akele Rahe
 

Hamesha Rahega Yeh Aalam Kahan
Yeh Mahfil Kahan aur Yeh Humdam Kahan

Sada Chot Par Chot Khata Raha
Muqaddar Mein Is Dil Ke Marham Kahan

Kahan Abr Koi Kadi Dhoop Mein
Jhulaste Bayabaan Mein Shabnam Kahan

Naa Mast Aankhein Hongi Naa Zulfe Rasaa
Hamesha Rahega Yeh Mausam Kahan

Akele The Hum To Akele Rahe
Koi Apna Ghamkhwaar , Humdam Kahan

Jahangeer-O-Nausherwaan Chal Base
Rahaa Daar Mein Adl Paiham Kahan

Naa Ayyubi Koi Naa Khalid Koi
Gaya Rekhta Apna Parcham Kahan..


दिखाई दिए यूँ
 

दिखाई दिए यूँ की बेखुद किया
हमें आप से भी जुदा कर चले

जबीं सजदा करते ही करते गए
हक़-ऐ-बंदगी हम अदा कर चले

गई उम्र दर बंद-ऐ-फ़िक्र-ऐ-ग़ज़ल
वो इस फन को ऐसा बढ़ा कर चले

कहें क्या जो पूछे कोई हम से “मीर”
जहाँ में तुम आए थे , क्या कर चले

Dikhai Diye Yun
 

Dikhai diye yun ki bekhud kiya
Hamain ap se bhi juda kar chale

Jabin sajda karte hi karte gai
Haq-ae-bandagi ham ada kar chale

Gai umar dar band-ae-fikar-ae-gazal
So is faan ko aisas bada kar chale

Kahen kya jo puche koi ham se “Meer”
Jahan main tum aaye the, kya kar chale..


वफाओं की मोहरें
 

न सोचा न समझा न सीखा न जाना
मुझे आ गया खुद ब खुद दिल लगाना
ज़रा देख कर अपना जलवा दिखाना
सिमट कर यहीं आ न जाए ज़माना
ज़ुबान पर लगी हैं वफाओं की मोहरें
ख़ामोशी मेरी कह रही है फ़साना
गुलों तक बात आई तो आसान है लेकिन
है दुष्वार काँटों से दामन बचाना
करो लाख तुम मातम -ऐ -नौजवानी
पर ‘मीर’ अब नहीं आएगा वो ज़माना

Wafaon ki Mohrain
 

Na socha na samajha na sikha na jana
mujhe aa gaya khudbakhud dil lagana
zara dekh kar apna jalwa dikhana
simat kar yahin aa na jaye zamana
zuban par lagi hain wafaon ki mohrain
khamoshi meri keh rahi hai fasana
gulon tak lagayi to aasan …

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हर एक से कहते हैं क्या “दाग़ ” बेवफा निकला – “दाग़” उर्दू शायरी

हर एक से कहते हैं क्या “दाग़ ” बेवफा निकला 
 

तुम्हारे खत मैं नया एक सलाम किस का था
न था रक़ीब तो आखिर वो नाम किस का था

वो क़त्ल कर के हर किसी से पूछते हैं
यह काम किस ने किया है ये काम किस का था

वफ़ा करेंगे निभाएंगे बात मानेंगे
तुम्हें भी याद है कुछ यह कमाल किस का था

रहा न दिल मैं वो बे-दर्द और दर्द रहा
मुक़ीम कौन हुआ है मक़ाम किस का था

न पूछ -पाछ थी किसी की न आओ-भगत
तुम्हारी बज़्म में कल एहतमाम किस का था

गुज़र गया वो ज़माना कहें तो किस से कहें
ख्याल मेरे दिल को सुबह -ओ -शाम किस का था

हर एक से कहते हैं क्या “दाग़ ” बेवफा निकला
यह पूछे इनसे कोई वो ग़ुलाम किस का था

Har ek se kahte hain kya “Daagh” bewafa nikla
 

Tumhare khath main naya ek salam kis ka tha
na tha raqeeb to akhir wo nam kis ka tha

Wo qatl kar ke har kisi se puchte hain
ye kaam kis ne kiya hai ye kaam kis ka tha

Wafa karenge nibhayenge baat manenge
tumhen bhi yaad hai kuch ye kalam kis ka tha

Raha na dil main wo be-dard aur dard raha
muqeem kaun hua hai maqam kis ka tha

Na pooch-paach thi kisi ki na aao-bhagat
tumhari bazm main kal ehtamam kis ka tha

Guzar gaya wo zamana kahen to kis se kahen
khayal mere dil ko subah-o-sham kis ka tha

Har ek se kahte hain kya “Daagh” bewafa nikla
ye puche in se koi wo ghulam kis ka tha…

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उर्दू ग़ज़लें

मैंने तेरे इंतज़ार से मोहब्बत की है

तेरे इख्लास से मोहब्बत की है तेरे एहसास से मोहब्बत की है तू मेरे पास नहीं है फिर भी तेरी याद से मोहब्बत की है कभी तो तूने भी मुझे याद किया होगा मैंने उन्ही लम्हात से मोहब्बत की है जिन में हों तेरी मेरी बातें , मैंने उस इंसान से मोहब्बत की है और मेह्की हों सिर्फ तेरी मोहब्बत से मैंने उन जज़्बात से मोहब्बत की है तुझसे मिलना तो अब ख्वाब सा लगता है मैंने तेरे इंतज़ार से मोहब्बत की है

Tere Ikhlas Se Mohabbat Ki Hai Tere Ehsas Se Mohabbat Ki Hai Tu Mere Paas Nahi Hai Phir Bhi Teri Yaad Se Mohabbat Ki Hai Kabhi To Tune Bhi Mujhe Yad Kiya Hoga Meine Un Lamhaat Se Mohabbat Ki Hai Jin Mein Ho Teri Meri Batain Maine Us Insaan Se Mohabbat Ki Hai Aur Mehkey Ho Sirf Teri Mohabbat Se Maine Un Jazbaat Se Mohabbat Ki Hai Tujhse Milna To Ab Khawab Sa Lagta Hai Maine Tere Intezaar Se Mohabbat Ki Hai


मुहब्बतों के पयाम लिखना ​

कभी किताबों में फूल रखना , कभी दरख्तों पे नाम लिखना हमें भी याद है आज तक वो , नज़र से हर्फ़-ऐ-सलाम लिखना ​ वो चाँद चेहरा , वो बहकी बातें , सुलगते दिन थे , सुलगती रातें वो छोटे छोटे से काग़ज़ों पर , मुहब्बतों के पयाम लिखना ​ गुलाब चेहरों से दिल लगाना , वो चुपके चुपके नज़र मिलाना वो आरज़ूओं के ख्वाब बुनना, वो क़िस्सा -ऐ -नाम तमाम लिखना मेरे शहर की हसीं फिज़ाओ , कहीं जो उन का निशान पाओ तो पूछना के कहाँ बसे वो , कहाँ है उन का क़याम लिखना ​ गयी रुतों में रुबाब अपना , बस एक यह ही तो मश्ग़ला था किसी के चेहरे को सुबह लिखना , किसी के चेहरे को शाम लिखना

Kabhi Kitabon Mein Phool Rakhna, Kabhi Darakhton Pe Naam Likhna Hamein Bhi Yaad Hai Aaj Tak Wo , Nazar Say Harf-Ae-Salam Likhna Wo Chand Chehray, Wo Behki Batein, Sulagtay Din The, Sulagti Ratein Wo Chote Chote Se Kaghazon Par, Muhabbaton Key Payaam Likhna Gulab Chehron Say Dil Lagana, Wo Chupkey Chupkey Nazar Milana Wo Arzuon Key Khwaab Bunna , Wo Qissa-Ae-Naam Tamaam Likhna Mere Shahar Ki Haseen Fizaoon, Kaheen Jo Un Ka Nishan Pao To Poochna Ke Kahan Basay Wo ,Kahan Hai Un Ka Qayam Likhna Gayee Ruton Mein Rubab Apna , Bas Ek Yeh Hi To Mashghala Tha …

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