तेरा रंग-ऐ-हिना – उर्दू हिना शायरी

हाथों की हिना

चंद मासूम से पतों का लहू है ‘फाखिर’
जिस को महबूब के हाथों की हिना कहते हैं

Haathon Ki Hina

Chand Maasoom Se Patton Ka Lahoo Hai ‘Faakhir’
Jis Ko Mahaboob Ke Haathon Ki Hina Kahte Hain…


मोहताज-ऐ-हिना

खून है दिल ख़ाक में अहवाल-ऐ-बुतान पर यानी
उन के नाखून हुए मोहताज -ऐ -हिना मेरे बाद

Mohtaaj-AE-Hinaa

Khoon Hai Dil Khaak Mein Ahvaal-AE-Butaan Par Yaani
Un Ke Naakhoon Hue Mohtaaj-AE-Hinaa Mere Baad…


पा बस्ता ऐ-ज़ंजीर ऐ-हिना

मैं भी पलकों पे सजा लूँगा लहू की बूँदें
तुम भी पा-बस्ता-ऐ-ज़ंजीर-ऐ-हिना हो जाना

Paa Basta-AE-Zanjeer AE-Hina

Main Bhi Palkon Pe Sajaa Loon Ga Lahoo Ki Boonden
Tum Bhi Paa-Basta-AE-Zanjeer-AE-Hina Ho Jaanaa…


तन्हाई में खुशबू-ऐ-हिना

वो हाथ पराये हो भी गए अब दूर का रिश्ता है “कैसर ”
आती है मेरी तन्हाई में खुशबू-ऐ-हिना धीरे धीरे

Tanhaai Mein Khushboo-AE-Hina

Vo Haath Paraaye Ho Bhi Gaye Ab Door Ka Rishta Hai “Qaisar”
Aati Hai Meri Tanhaai Mein Khushboo-AE-Hina Dheere Dheere…


मेहँदी के वास्ते

मेहँदी के वास्ते वो लहू मांगते हैं रोज़
दिल देना उन को जान का बे-नामा हो गया

Mehndi Ke Vaaste

Mehndi Ke Vaaste Vo Lahoo Maangte Hain Roz
Dil Dena Un Ko Jaan Ka Be-Naamaa Ho Gayaa…


तेरी हिना में

शामिल है मेरा खून-ऐ-जिगर तेरी हिना में
यह काम हो तो अब खून-ऐ-वफ़ा साथ लिए जा

Teri Hena Mein

Shaamil Hai Meraa Khoon-E-Jigar Teri Hena Mein
Ye Kam Ho To Ab Khoon-AE-Vafaa Saath Liye Jaa…


तेरा रंग-ऐ-हिना

न मेरे ज़ख्म खिले हैं न तेरा रंग -ऐ -हिना
मौसम आये ही नहीं अब के गुलाबों वाले

Tera Rang-AE-Hina

Na Mere Zakhm Khile Hain Na Tera Rang-AE-Hina
Mausam Aaye Hi Nahin Ab Ke Gulaabon Vaale…


रंग-ऐ-हिना

रंग-ऐ-हिना के बोझ से उठना मोहाल है …
नाजुक हैं किस क़दर मेरे मेहबूब के पाओं

Rang-E-Hina

Rang-E-Hina Ki Bojh Se Uthna Mohaal Hai
NazukK Hain Kis Qadar Mere Mehboob Ke Paaon…


रंग-ऐ-हिना भी तेरा

हाय अब भूल गया रंग-ऐ-हिना भी तेरा
खत भी कभी खून से तहरीर हुआ करते थे . .

Rang-AE-Hina Bhi Tera

Haaye ab bhool gaya rang-AE-hina bhi tera
Khat bhi kabhi khoon se tehreer hua karte the…


मेहँदी लगा के बैठे हैं

वो जो सर झुका के बैठे हैं
हमारा दिल चुरा के बैठे हैं
हमने उनसे कहा हमारा दिल हमे लौटा दो
तो बोले , हम तो हाथों में , मेहँदी लगा के बैठे हैं

Mehndi Laga ke Baithe Hain

Woh jo sar jhuka ke baithe hain
Hamara dil chura …

पंजाबी और उर्दू शायरी – हीर राँझा शायरी

जेल बिच बंद ग़ुलाम रह जाँदै न
किताबां बिच लिखे पैग़ाम रह जाँदै न
पहली मुलाकात किसी नु याद रवे न रवे
याद सब नू आखरी सलाम रह जाँदै न ​

jailaan ch band ghulaam reh janday ne
kitaabaan ch likhay paighaam reh janday ne
pehli mulakaat kissi nu yaad raway na raway
yaad sab nu akhari SALAAM reh janday ne​


वेख के उदास चेहरा यार दा , जिदी आँख भर आवे .
रब्ब ऐसे सजना नु कदे भी न तड़फावे ….
अस्सी रब्ब तक पहुँच बनायीं होई है …
मेरे हुंदियां न डरीं मौत कोलों …
तेरी मौत अस्सी अपनी लक़ीरां च लिखाई होई है …

vekh k udass chehra yaar da, jeedi akhh par aave.
Rabb aise sajna nu kade vi na tarpave….
Assi rabb tak pohach banayi hoyi hai…
Mere hundiyaa na darrin maut kolon…
Teri maut assi apni lakeran ch likhayi hoyi hai…


तू मेरी जिंद ते जान वरगा
मेरे पिंड नूं जांदी राह वरगा
तैनू भुला वे किंज यारा
तू आंदी जांदी साह वरगा

To meri Jind Tay jaan Wergaa
Mery Pind Nou Jaandi Raah Wergaa
tainoo Pullaan V Kainj yaraaaaaaaa
Tou Aandi jaandi Saah Wergaaaaa


हाजी लोक मक्का  ” नू जांदे ” मेरा रांझा माहि मक्का नी मैं कमली हाँ
मैं तां मांग रांझे  “दी होई ” आन मेरा बाबल करदा धक्का नी मैं कमली हाँ

हाजी लोक मक्के  “नू जांदे “, असां जाना तख़्त हज़ारे ‘ नी मैं कमली हाँ
जिथ वल यार ओथे  “वल क़ाबा ” भावें फूल किताबां चारे ‘ नी मैं कमली हाँ

हाजी लोक मक्के  “नू जांदे ”  मेरे घर विच नोशाह मक्का नी में कमली हाँ
विच्चे ‘ हाजी , विच्चे ग़ाज़ी , विच्चे चोर उचक्का नी मैं कमली हाँ ​

Haaji lok makke nuu jaaNde mera raanjha maahi maakka Ni main kamli haan
Main taaN mang raanjhe’ di hoe’aaN mera baabal karda dhakka Ni main kamli haan

Haaji lok makke’ nu jaaNde, asaaN jaana takht hazare’ Ni main kamli haan
Jhith bal yaar othe’ bal kaaba, bhaavein phool kitaabaaN chaare’ Ni main kamli haan

Haaji lok makke’ nu jaaNde’ mere ghar vich naoshah makka Ni mein kamli haan
Wicche’ haaji, wiche ghaazi, wicche chor uchakka Ni main kamli haan​…

हीर शायरी – वारिस शाह

लिखी रांझे नाम ये हीर हुंदी

की मुक जाना सी वारिस शाह दा,
लिखी रांझे नाम ये हीर हुंदी .

वख रूह नालो रूह न हो सकदी ,
न दिल चो वख तस्वीर हुंदी .
नशा अख दा इक वारी चढ़ जावे ,
पूरी इश्क़ दी फिर तासीर हुंदी .

झूठा रब्ब नू तुस्सी केहन वालयो ,
निगाह मेरी नाल ये देख लावो ,

झूठ अख कदे नी कह सकदी ,
निगाह यार दी निगाहे -ऐ -पीर हुंदी .

तेरी अख तो ओहले मैं हुँदा न ,
मंदी ऐनी ये न तक़दीर हुंदी .

Likhi Ranjhe Naam Je Heer Hundi

Ki Mukk Jana Si Waris Shah Da,
Likhi Ranjhe Naam Je Heer Hundi.

Vakh Rooh Naalo Rooh na Ho Sakdi,
Nai Dil Cho Vakh Tasveer Hundi.

Nasha Akh Da Ik Vaari Chadh Jave,
Poori Ishq Di Fer Taseer Hundi.

Jhootha Rabb Nu Tussi Kehen Waleyo,
Nigah Meri Naal Je Dekh Lavo,

Jhooth Akh Kade Ni Keh Sakdi,
Nigah Yaar Di Nigahe-E-Peer Hundi.

Teri Akh To Ohle Manu Hunda Na,
Maadi Enni Je Na Taqdeer Hundi.…

शायरी – एक मुसाफिर अजनबी

मुसाफिर के रास्ते बदलते रहे

मुसाफिर के रास्ते बदलते रहे , मुक़द्दर में चलना था चलते रहे
मेरे रास्तों में उजाला रहा , दीये उसकी आँखों में जलते रहे

कोई फूल सा हाथ कंधे पे था , मेरे पाओं शोलों पे चलते रहे
सुना है उन्हें भी हवा लग गयी , हवाओं के जो रुख बदलते रहे

वो क्या था जिसे हमने ठुकरा दिया , मगर उम्र भर हाथ मलते रहे
मोहब्बत , अदावत , वफ़ा , बेरुखी , किराये के घर थे बदलते रहे
लिपट कर चिराग़ों से वो सो गए , जो फूलों पे करवट बदलते रहे..


मुसाफिर के साथ तू ने क्या किया

इस राह -ऐ -उल्फत के मुसाफिर के साथ तू ने क्या किया
कभी अपना लिया कभी ठुकरा दिया

मेरी मोहब्बत तेरे नाम का मुहाल तो नहीं
कभी बना लिया कभी गिरा दिया

मैं तेरी किताब -ऐ -ज़िंदगी का वो हर्फ तो नहीं हूँ जिसे
कभी लिख लिया कभी मिटा दिया

मेरा साथ तेरे लिए बाईस-इ-रुस्वाई तू नहीं जिसे
कभी दुनिया को बतला दिया कभी छुपा लिया

आज कल लोगों का यही मशग़ला है “मुसाफिर”
कभी हमें सोच लिया तो कभी भुला दिया..


ऐ मुसाफिर

दुनिया के ऐ मुसाफिर मंज़िल तेरी कब्र है
और जिस सफर पर तू चला है , दो दिन का वो सफर है..


अजनबी मुसाफिर

अजनबी राहों के अजनबी मुसाफिर
आ कर मुझसे पूछ बैठा है रास्ता बता दो गे

अजनबी राहों के , अजनबी मुसाफिर सुन
रास्ता कोई भी हो , मंज़िले नहीं मिलती

मंज़िलें तो धोखा हैं , मंज़िलें जो मिल जायें
जुस्तुजू नहीं रहती , ज़िन्दगी को जीने की आरज़ू नहीं रहती ..


एक गुमनाम मुसाफिर

एक गुमनाम मुसाफिर की तरह चुपके से
खुद को इस भीड़ में खो देने को जी चाहता है

इक इरादा ख़ाक की हर दुःख से दिला देगी निजात
खुद को मट्टी में समा देने को जी चाहता है

दर्द ऐसा है के मरहम की बजाए ‘मुसाफिर’
दिल में निश्तर सा चुभो देने को जी चाहता है..


मुसाफिर घर का रास्ता भूल गया

दर बेदर फिरा मुसाफिर घर का रास्ता भूल गया
क्या है तेरा क्या है मेरा अपना पराया भूल गया

कैसे दिन थे कैसी रातें कैसी बातें बीत गयी
मन बालक है पहले पियार का सुन्दर सपना भूल गया

याद के फेर में आकर दिल पर ऐसी फिर एक चोट लगी
दुःख में सुख है सुख में दुःख है भेद यह करना भूल गया

एक नज़र की एक ही पल की …

किसी के हिजर में नींदें गवां कर कुछ नहीं मिलता – Wasi Shah

हाल-ऐ-दिल

न कर बयाँ उन से हाल-ऐ-दिल “वासी”
मगरूर सा शख्स है कहीं साथ न छोड़ दे

Haal-ae-Dil

Na Kar Byaan Un Se Haal-ae-Dil “WASI”
Magror Sa Shakhs Hai Kahin Sath Na Chor De


जान -ऐ-मन

कौन कहता है शरारत से तुम्हें देखते हैं
जान -ऐ-मन हम तो मोहब्बत से तुम्हें देखते है

Jaan-ae-maan

kon kehta hai shararat se tumein dekhtey hain
jaan e man ham to mohabbat se tumhein dekhtey hain


किसी के हिजर में

किसी की आँख से सपने चुरा कर कुछ नहीं मिलता
मंदिरों से चिराग़ों को बुझा कर कुछ नहीं मिलता
मुझे अक्सर सितारों से यही आवाज़ आती है
किसी के हिजर में नींदें गवां कर कुछ नहीं मिलता

Kissi Ke Hijr Mein

Kissi Ki Ankh Se Sapney Chura Kar Kuch Nahi Milta
Mandeiron Se Chiraaghon Ko Bhuja Kar Kuch Nahi Milta
Mujhe Aksar Sitaron Se Yehi Awaaz Aati Hai
Kissi Ke Hijr Mein Neendein gawan Kar Kuch Nahi Milta


उन के मिल जाने का नशा

हिजर की प्यास में क़तरा भी बुहत होता है
दीद के वास्ते एक लम्हा भी बुहत होता है

जिन के मिलने की नहीं दूर तक कोई उम्मीद
उन के खो जाने का हादसा भी बुहत होता है

जिन के खो जाने पे खो जाती हैं सब होश -ओ -हवास
उन के मिल जाने का नशा भी बुहत होता है

अब कोई और तलब दिल में नहीं है  “वासी”
अब तेरी याद का साया भी बुहत होता है

Un ke mil jane ka nasha

Hijr ki piyas may qatra bhi buht hota hai
deed ke wastay lamha bhi buht hota hai

Jin ke milny ki nahi dour tak koi ummeed,
un ke kho jany ka khadsha bhi buht hota hai

Jin ke kho jane pe kho jaty hain sab hosh-o-hawas
un ke mil jane ka nasha bhi buht hota hai

Ab koi aur talab dil mein nahi hai  “WASI”
ab teri yaad ka saya bhi buht hota hai…

Best Collection of Pakistani Two Lines urdu Shayari

कोई ऐसा शख्स

जो पुकारता था हर घड़ी , जो जुड़ा था मुझसे लड़ी लड़ी
कोई ऐसा शख्स अगर कभी , मुझे भूल जाये तो क्या करूं

Koi Aisa Shakhs

Jo Pukarta Tha Har Ghadi, Jo Juda Tha Mujhse Ladi Ladi
Koi Aisa Shakhs Agar Kabhi, Mujhe Bhool Jaye To Kya Krun


जान देने की इजाज़त

जान देने की इजाज़त भी नहीं देते हो
वरना मर जाएँ और मर के मना लें तुम को

Jaan Dene Ki Ejazaat

Jaan Dene Ki Ejazaat Bhi Nahi Dete Ho
Warna Mar Jayein Aur Mar Ke Manaa Le Tum Ko


उम्र भर के साथ

उस मरहले को मौत भी कहते हैं दोस्तों
एक पल में टूट जाएँ जहाँ उम्र भर के साथ

Umar Bhar Ke Sath

Us Marhaly Ko Mout Bhi Kehte Hain Dosto
Ek Pal Mein Toot Jayen Jahan Umar Bhar Ke Sath


मिसल-ऐ-खुशबु

सुना है जिन की बातें मिसल-ऐ-खुशबु फैला जाती हैं
बहुत बिखरे हुए होते हैं ऐसे लोग अंदर से

Misl-ae-Khushbu

Suna Hai Jin Ki Baaten Misl-ae-Khushbu fila Jati Hain
Bahut Bikhre Hue Hote Hain Aise Log Andar Se…