तेरा आना मेरी जिंदगी में एक ख्वाब सा लगता है

तेरा आना मेरी जिंदगी में एक ख्वाब सा लगता है

तेरा आना मेरी जिंदगी में एक ख्वाब सा लगता है
ऐतबार नहीं है मुझे अपनी किस्मत पे एक धोखा सा लगता है

जब भी तुझे करीब पता हूँ एक सकून सा लगता है
फिर न जाने क्यों एक डर सा लगता है

तुझे पाकर जहाँ मुकमल सा लगता है
फिर भी न जाने कहीं एक कोना अधूरा सा लगता है

जमानो चले जिस के साथ हर एक पल का साथ
फिर भी न जाने क्यों यह सफर अधूरा लगता है

रहेंगे तलबगार तेरे सारी उम्र का है
फिर भी न जाने यह वादा अधूरा लगता है

देखे सारे ख्वाब हर ख्वाब को जिया हमने
फिर भी न जाने क्यों एक सपना अधूरा लगता है

कहीं तो कुछ खाली है कहीं तो कुछ अधूरा है
फिर भी न जाने क्यों तेरा साथ मुकमल लगता है

Tera Aana Meri Zindagi Mein Ek Khwab Aa Lagta Hai

Tera aana meri jindagi mein ek khwab sa lagta hai
aitbaar nahi hai mujhe apni kismat pe ek dhokha sa lagta hai

Jab bhi tujhe karib pata hoon ek sakoon sa lagta hai
phir na jane kyon ek dar sa lagta hai

tujhe pake jahan mukamal sa lagta hai
phir bhi na kahin ek kona adhura sa lagta hai

jamano chale jis ke sath har ek pal ka sath
phir bhi na jane kyon yeah safar adhura lagta hai

rahenge talabgar tere sari umar ka bada hai
phir bhi na jane yeah wada adhura lagta hai

dekhe sare khwab har khwab ko jiyaa humne
phir bhi na jane kyon ek sapna adhura lagta hai

kahin to kuch khali hai kahin to kuch adhura hai
Phir bhi na jane kyon tera sath mukamal lagtha hai


यूं हुए मेरे नाम के फतवे जारी

यूं हुए मेरे नाम के फतवे जारी
जैसे मोहबत नहीं कोई गुनाह कर दिया हो मैंने

Yoon Hue Mere Naam Ke Fathve Zari

yoon hue mere naam ke fathve zari
jaise mohabat nahi koi gunaah kar diya ho maine…

पहले पहले का इश्क़ अभी भी याद है – फ़राज़

खुश और उदास – फ़राज़

वो मुझ से बिछड़ कर खुश है तो उसे खुश रहने दो “फ़राज़ “
मुझ से मिल कर उस का उदास होना मुझे अच्छा नहीं लगता ….


पहले पहले का इश्क़ अभी याद है “फ़राज़”

दिल भी बुझा हो शाम की परछाइयाँ भी हों
मर जाए जो ऐसे में तन्हाइयाँ भी हों

हर हुस्न -ऐ -सदा लो न दिल में उतार सका
कुछ तो मिज़ाज -ऐ -यार मैं गहराइयाँ भी हों

दुनिया के तजकरे तो तबियत ही ले बुझे
बात उस की हो तो फिर सुख आराईयां भी हों

पहले पहले का इश्क़ अभी भी याद है फ़राज़
दिल खुद यह चाहता था के रुस्वाइयाँ भी हों

Pehle pehle ka ishq abhi yaad hai “Faraz”

Dil bhi bhuja ho shaam ki parchaiyan bhi hon
Mar jaiyye jo aise main tanhaiyan bhi hon

Har husn-ae-saada loh na dil main utar saka
Kuch to mizaaj-e-yaar mein gehraiyan bhi hon

Duniya ke tazkaray to tabiyat hi le bujhay
Baat us ki ho to phir sukhan aaraiyan bhi hon

Pehle pehle ka ishq abhi yaad hai Faraz
Dil khud yeh chahta tha ke ruswaiyan bhi hon…

आज फिर दिल है कुछ उदास उदास – जावेद अख्तर

दर्द अपनाता है पराये कौन
कौन सुनता है और सुनाए कौन

कौन दोहराए वो पुरानी बात
गम अभी सोया है जगाए कौन

वो जो अपने हैं क्या वो अपने हैं
कौन दुःख झेले आज़माए कौन

अब सुकून है तो भूलने में है
लेकिन उस शख्स को भुलाए कौन

आज फिर दिल है कुछ उदास उदास
देखिये आज याद आए कौन

Aaj Phir Dil Hai Kuch Udaas Udaas- Javed Akhtar

dard apanaataa hai paraae kaun
kaun sunataa hai aur sunaae kaun

kaun doharaae vo puraanii baat
Gam abhii soyaa hai jagaae kaun

vo jo apane hain kyaa vo apane hain
kaun dukh jhele aazamaae kaun

ab sukuuN hai to bhuulane mein hai
lekin us shaKhs ko bhulaae kaun

aaj phir dil hai kuchh udaas udaas
dekhiye aaj yaad aae kaun…

Umar bhar teri mohabbat meri khidmat rahi

तेरी खिदमत के क़ाबिल

उम्र भर तेरी मोहब्बत मेरी खिदमत रही
मैं तेरी खिदमत के क़ाबिल जब हुआ तो तू चल बसी

हिंदी और उर्दू शायरी – अल्लम इक़बाल शायरी – तेरी खिदमत के क़ाबिल

Teri Khidmat Ke Qabil

Umer Bhar Teri Mohabbat Meri Khidmat Rahi
Main Teri Khidmat Ke Qabil Jab Huwa Tu Chal Basi

Hindi and urdu shayari – Allama Iqbal ki (dedicated to maa) shayari – Teri Khidmat Ke Qabil

ऐ बेखबर

सौदागरी नहीं , यह इबादत खुदा की है
ऐ बेखबर ! जज़ा की तमन्ना भी छोड़ दे

हिंदी और उर्दू शायरी – अल्लम इक़बाल शायरी – ऐ बे -खबर

Ae Be-Khabar

Sodagari Nahin, Ye Ibadat Khuda Ki Hai
Ae Be-Khabar! Jaza Ki Tamanna Bhi Chor De

Hindi and urdu shayari – Allama Iqbal ki shayari – Ae Be-Khaba

इश्क़ क़ातिल से

इश्क़ क़ातिल से भी मक़तूल से हमदर्दी भी
यह बता किस से मुहब्बत की जज़ा मांगेगा
सजदा ख़ालिक़ को भी इबलीस से याराना भी
हसर में किस से अक़ीदत का सिला मांगेगा

हिंदी और उर्दू शायरी – अल्लम इक़बाल शायरी – इश्क़ क़ातिल से भी मक़तूल से हमदर्दी भी

Ishq Qatil Se

Ishq Qatil Se Bhi Maqtool Se Hamdardi Bhi
Ye Bata Kis Se Muhabbat Ki Jaza Maangay Ga
Sajda Khaliq Ko Bhi Iblees Se Yaarana Bhi
Hashr Mein Kis Se Aqeedat Ka Sila Maangay Ga

Hindi and urdu shayari – Allama Iqbal ki shayari – Ishq Qatil Se Bhi Maqtool Se Hamdardi Bhi

इक़रार -ऐ-मुहब्बत

इक़रार -ऐ-मुहब्बत ऐहदे-ऐ.वफ़ा सब झूठी सच्ची बातें हैं “इक़बाल”
हर शख्स खुदी की मस्ती में बस अपने खातिर जीता है

हिंदी और उर्दू शायरी – अल्लम इक़बाल शायरी – इक़रार -ऐ-मुहब्बत ऐहदे-ऐ.वफ़ा

Iqrar-ae-muhabbat

iqrar-ae-muhabbat Ehd-ae-wafa sub jhuti sachi batain hain “Iqbal”
Har shaks khudi ke masti main bas apne khatir jeta hai

Hindi and urdu shayari – Allama Iqbal ki shayari – iqrar-ae-muhabbat Ehd-ae-wafa

दुःख दे कर सवाल करते हो – उर्दू शायरी

दुःख दे कर सवाल करते हो ,
तुम भी ग़ालिब ! कमाल करते हो ..

Dukh Day Kar Sawaal Kartay ho,
Tum Bhe GHAALiB ! Kamaal Kartay ho..

यह हम ही जानते हैं जुदाई के मोड़ पर ,
इस दिल का जो भी हाल तुझे देख कर हुआ ..

Yeah hum hi jantey hain judaai ke mod par,
Is dil ka jo bhi haal tujhe dekh kar hua..

क्या ज़रूरी है के हम हार के जीतें, ताबिश
इश्क़ का खेल बराबर भी तो हो सकता है…

Kia Zaroori Hai Ke Hum Haar Ke Jeetien Tabish
Ishq Ka Khel Baraber Bhi To Ho Sakta Hai…

तुम आज हँसते हो हँस लो मुझ पर ये आजमाइश न बार बार होगी
मैं जनता हूँ मुझे खबर है के कल फ़िज़ा खुशगवार होगी .

Tum Aj Hanste Ho Hans Lo Mujh Par Ye Ajamaish Naa Bar Bar Hogi
Main Janta Hun Mujhe Khabar Hai Ki Kal Faza Khushgawar Hogi.

लगा न दिल को क्या सूना नहीं तूने ,
जो कुछ के मीर का इस आशिक़ी ने हाल किया ..

Laga na dil ko kya sunaa nahin tu ne,
Jo kuch ke Meer ka is aashqi ne haal kiya..

इश्क़ माशूक़ इश्क़ आशिक़ है ,
यानी अपना ही मुबतला है इश्क़ .
इश्क़ है तर्ज़ -ओ -तौर इश्क़ के ताईं ,
कहीं बंदा कहीं खुदा है इश्क़ .

Ishq maashuq ishq aashiq hai,
Yaani apna hi mubtala hai ishq.
Ishq hai tarz-o-taur ishq ke taeen,
Kahin banda kahin Khuda hai ishq.

बस के दुस्बार है हर काम का आसान होना ,
आदमी को भी मुयस्सर नहीं इंसान होना ,

मेरे कत्ल के बाद उसने की जफ़ा से तौबा ,
हाय उस जोर पशेमान का पशेमान होना ,

है उस चारगिरह कपड़े की क़िस्मत ‘ग़ालिब ,
जिस की क़िस्मत में हो आशिक़ का गिरेवान होना ..!!

Bus ke Dushwaar hai har kaam ka Asaan hona,
Admi ko bhi muyassar nahin insaaN hona,

ki Mere Qatal ke baad Usne jafa se Tauba,
Haye Us zoad pasheman ka pasheman hona,

Haif us chaar girah kaprhe ki Qismat ‘GHalib,
Jis ki Qismat main ho Ashiq ka GarebaN hona..!!

जो काम आसान समझ रहे हो वो काम मुमकिन नहीं रहेगा
वफ़ा का काग़ज़ तो भीग जाएगा बदगुमानी की बारिशों में
खतों की बातें तो ख्वाब होंगी पयाम मुमकिन नहीं रहेगा
में जानती हूँ मुझे यक़ीन है अगर कभी तू मुझे भुला दे
तो तेरी आँखो में रौशनी का क़याम मुमकिन …

चंद नग्मे हुस्न वालो की नज़र

जख्म है गहरे और न आये मुझे उन्हें सीना
उसके जख्मो के बिन जिंदगी क्या जीना
अगर लफ्ज़ो में तेरी तारीफ करू तो
तेरे हुस्न की बेअदबी होगी
बस तू यह जान ले
चाँद भी अधूरा है तेरे बिना


हुस्न वालों के पीछे दीवाने चले आते है
शमा के पीछे परवाने चले आते है
तुम भी चली आना मेरे जनाजे के पीछे
उसमे अपने तो क्या बेगाने भी चले आते है…

जाते जाते वो मुझे अच्छी निशानी दे गया – Javed Akhtar Shayari

जाते जाते वो मुझे अच्छी निशानी दे गया

जाते जाते वो मुझे अच्छी निशानी दे गया
उम्र भर दोहराएंगे ऐसी कहानी दे गया

उस से मैं कुछ पा सकू ऐसी कहाँ उम्मीद थी
ग़म भी शायद बराए मेहरबानी दे गया

खैर मैं प्यासा रहा पर उसने इतना तो किया
मेरी पलकों की कितरों को वो पानी दे गया

Jatay jatay wo mujhe acchi nishani de gaya

jatay jatay wo mujhe acchi nishani de gaya
umar bhar dohraoonge, aisi kahani dae gaya

us say main kuch pa sakoon aisi kahaN umeed thi
gham bhi wo shayad baaraye meharbani de gaya

khair maiN pyasa raha par usne itna to kia
meri palkon ki qitaroN ko wo pani de gaya…


अपने होने पर मुझको यकीन आ गया

पिघले नीलम सा बहता ये समां
नीली नीली सी खामोशियां

न कहीं है ज़मीन न कहीं आसमान
सरसराती हुई टहनियाँ -पत्तियां

कह रही हैं बस एक तुम हो यहाँ
बस मैं हूँ , मेरी साँसे हैं और मेरी धड़कने

ऐसी गहराइयाँ , ऐसी तन्हाइयाँ , और मैं … सिर्फ मैं
अपने होने पर मुझको यकीन आ गया

Apne Hone Par Mujhko Yakeen Aa Gaya

Pighle Neelam Sa Behta Yeh Sama
Neeli Neeli Si Khamoshiyan

Na Kahin Hai Zameen Na Kahin Aasmaan
Sarsaraati Hui Tehniyaan-Pattiyaan

Keh Rahi Hain Bas Ek Tum Ho Yahan
Bas Main Hoon, Meri Saanse Hain Aur Meri Dhadkane

Aisi Gehraiyaan, Aisi Tanhaiyaan, Aur Main… Sirf Main
Apne Hone Par Mujhko Yakeen Aa Gaya…

नए कवियों की शायरी पढ़िए

Poet – Kautilya Gaurav

कहती सुनती बातों सी…
जैसे गहरी मेरी रातों सी…
ख़ामोशी से भरी भरी…
ख़ाली मेरे हाथों सी…
कभी कभी कहीं जो मिलती थी…
ख़ामोशी सी रातों में…
जाने कहाँ मुझसे गुम हुई…
कुछ बातें तेरी बातों सी…


Poet – Kautilya Gaurav

दरिया सा एक सब्र का…
बहता रहा मुझमें कहीं…
बहोत दिन हुये…
अब न जाने कितने…

 

ख़्वाब कितने थे अब…
जाने क्या कहिये…
कुछ एक बातें कभी कभी…
जैसे लगता है कि…
दोहराती हैं खुद को…

बहोत दिन हुये…
मेरी बातों को…
मुझमें कहीं रूबरू हुये…
बातें मेरी अब…
बड़ी बेनूर सी हैं…

बहोत दिन हुये…
अब न जाने कितने…


Poet – Kautilya Gaurav

लकीरों से भरता रहा हथेलियों को…
जाने कौन सी कहीं किसी मंज़िल तक हो जाती…
मंज़िलों से कहीं आगे तक है जाता…
फिर क्युं ये मेरा रास्ता…

कभी कुछ ज़हन में जो था मैंने सोचा…
एक रास्ता वहाँ से जैसे चल पड़ा…
मंज़िलों के रास्ते बनाता चला…
हथेलीयों पे लकीरें को मिलाता चला…

कभी शायद कहीं किसी मंज़िल के रास्ते पे…
मैं कभी कहीं खुद से मिलूँगा…

लकीरों की हद से कही बहोत आगे…
मंज़िलों से कहीं बहोत आगे तक है जाता…
मेरे ज़हन में ये मेरा रास्त..…

आज की रात

आज की रात

वो कह के चले इतनी मुलाक़ात बहुत है
मैंने कहा रुक जाओ अभी रात बहुत है

आँसू मेरे थम जाएं तो फिर शौक से जाना
ऐसे मैं कहाँ जाओगे बरसात बहुत है

वो कहने लगे जाना मेरा बहुत ज़रूरी है
नहीं चाहता दिल तोडू तेरा पर मजबूरी है

गर हुई हो कोई खता तो माफ़ कर देना
मैंने कहा हो जाओ चुप इतनी कही बात बहुत है

समझ गए हों सब और कुछ कहो ज़रूरी नहीं
बस आज की रात रुक जाओ , जाना इतना भी ज़रूरी नहीं है

फिर कभी न आऊँगी तुम्हारी ज़िन्दगी में लौट के
सारी ज़िन्दगी तन्हाई के लिए , आज की रात बहुत है

Aaj Ki Raat

Wo Keh Ke Chalay Itni Mulaqat bahut hai
Maine Kaha Ruk Jao Abhi Raat bahut hai

Aansoo Mere Thum Jayein To Phir Shoq Say Jana
Aisay Main Kahan JaoGey Barsaat bahut hai

Wo Kehne Lagey Jana Mera Bohot Zaroori Hai
Nahi Chahta Dil Todun Tera Par Majboori Hai

Gar Hui Ho Koi Khata To Maaf Ker Dena
Maine Kaha Ho jao Chup Itni Kahi Baat bahut hai

Samajh Gayi Hon Sab Aur Kuch Kaho Zaroori Nahi
Bas Aaj Ki Raat Ruk Jao, Jana Itna Bhi Zaroori Nahi Hai

Phir Kabhi Na Aaongi Tumhari Zindagi Mein Lot Ke
Saari Zindagi Tanhayee Ke Liye, Aaj Ki Raat bahut hai…

यह इश्क़ नहीं आसां – Jigar Moradabadi – Urdu Shayar

यूं ही दिल के तड़पने का कुछ तो है सबब आखिर
या दर्द ने करवट ली है या तुमने इधर देखा
माथे पे पसीना क्यों आँखों में नमी सी क्यों
कुछ खैर तो है , तुमने जो हाल -ऐ -जिगर देखा

                                                           Jigar Moradabadi – Urdu Shayar

यह इश्क़ नहीं आसां

क्या हुस्न ने समझा है क्या इश्क़ ने जाना है
हम ख़ाक-नाशिनो की ठोकर में ज़माना है

वो हुस्न -ओ -जमाल उनका यह इश्क़ -ओ -शबाब अपना
जीने की तम्मना है मरने का ज़माना है

या वो थे खफा हम से या हम थे खफा उनसे
कल उनका ज़माना था आज अपना ज़माना है

यह इश्क़ नहीं आसां इतना तो समझ लीजिये
एक आग का दरिया है और डूब के जाना है

आँसू तो बहुत से हैं आँखों में “जिगर” लेकिन
बन जाए सो मोती है बह जाए सो पानी है

Yeh Ishq Nahin Aasaan

kya husn ne samjha hai kya ishq ne jaana hai
ham Khaak-nashinoo ki Thokar mein zamana hai

wo husn-o-jamaal unkaa yeh ishq-o-shabaab apana
jeene ki tamanaa hai marne ka zamana hai

yaa wo the Khafaa hum se yaa hum the Khafaa unse
kal unkaa zamana tha aaj apana zamana hai

yeh ishq nahin aasaan itanaa to samajh lijiye
Ek aag kaa dariyaa hai aur Doob ke jaanaa hai

aansuu to bahut se hain aankhon mein “Jigar” lekin
ban jaaye so moti hai beh jaaye so pani hai..


तुझ को खुदा का वास्ता

इश्क़ फना का नाम है इश्क़ में ज़िन्दगी न देख
जलवा-ऐ-आफताब बंजारे में रोशनी न देख

शौक़ को राहनुमा बना , जो हो चुका कभी न देख
आग दबी हुई निकाल , आग बुझी हुई न देख

तुझ को खुदा का वास्ता तू मेरी ज़िन्दगी न देख
जिस की सहर भी शाम हो उस की सियाह की छबि न देख

Tujh ko Khudaa kaa Baastaa

ishq fanaa kaa naam hai ishq mein zindagi na dekh
jalwa-ae-aaftaab banzarre mein roshani na dekh

shauq ko rahnumaa banaa jo ho chukaa kabhi na dekh
aag dabi huii nikaal aag bujhi hui na dekh

tujh ko Khudaa kaa Baastaa tu meri zindagi na dekh
jis ki sahar bhi shaam ho us ki siyaah shavvi na dekh..


इश्क़ में लाजवाब

इश्क़ में लाजवाब हैं हम लोग
माहताब आफताब हैं हम लोग

गरचे अहल -ऐ -शराब हैं हम लोग
यह न समझो खराब हैं हम लोग

शाम से आ गए जो पीनी पर
सुबह तक आफताब हैं हम लोग…