Hindi kahani with moral values prernadayak

Hello readers , welcome to onlinehindistory.com once again. Today we are here with fresh 3 new hindi kahani with morals for you people. So read and them and don’t forget to tell us your views in comment section.

1. एक शहीद का परिवार Emotional Hindi kahani

जीवन और मरण यही तो सच्चाई है दुनिया का. कुछ नहीं कर पाते इस जीवन का. हलचल भरा यह जीवन एकदम शांत हो जाता है. यह ना तो किसी को आने की खबर देती है न समझने का मौका. न आगे का भविष्य देखता है और ना पीछे छूटे परिवार. रोते-बिलखते बूढ़े माँ-बाप, चूड़ियाँ तोड़ती जवान बीवी और वह बच्चा जिसको अपने पापा का नाम भी नहीं पता.

जो बड़ा होकर केवल दिवाल पर लगी तस्वीर देख पायेगा.

एक चहकती हुई जिन्दगी 2 पल में एक सुनसान रेगिस्तान बन गया. जिसपर कितना ही बरसात हो जाये सुखा ही रहेगा. ना तो सावन उस पर मरहम लगा पायेगा और ना ही दो पल के लिए आने वाले मुसाफिर.

True story – शहीद के माता-पिता का हाल

बूढी हो चुकी माँ, दरवाजे पर निगाहे गड़ाये बैठी है, आखें देख नहीं पा रही है, दिल मान नहीं रहा है, इसी रास्ते तो आता है वह. जरुर आएगा. ऐसे कैसे चला जाएगा अपनी माँ को छोड़ कर. यही तो आता था. माँ-माँ कह कर गले से चिपक जाता था. तो अब क्यों नहीं आ रहा. कहाँ है मेरा बच्चा. माँ हूँ न मैं पहले मेरे पास ही आएगा. आँखों से टपकती धारा कलेजे को पिस रहा है. कौन समझता उस बूढी मा को अब कभी नहीं आएगा वो.

आंसू को अंदर ही पिने वाला बाप का सीना फटा जा रहा है.

हिलते डंडे का सहारे चलते बाप. अपने बुढ़ापे की लाठी खो दी. जिसके कंधे पर जाने की आस थी उसे कन्धा देना पड़ा. कहाँ है वो जो बोलता था मैं हूँ पापा आपके का सहारा. जो मेरा सीना था, जो मेरा हिम्मत था, ताकत था सब ले गया. क्या करू इस शारीर का. ना घर में रो सकता और ना बाहर रह सकता. कभी घर में आते है कभी बाहर जाते है. क्या ढूंड रहे वह पता नहीं. लडखडाती लाठी और लडखडाते पैर शरीर जर्जर.

चलने की हिम्मत नहीं रह गई.

पागल हुई पत्नी

तस्वीर को निहारती पत्नी. एक जिन्दा लाश है. सारे सपने, सपने हो गये. ना वर्तमान का पता, ना भविष्य का. अँधेरा ही अँधेरा हो गया. कितने सपने देखे थे साथ में. अपने साथ …

Love forever – Ateet ka Parinda – 1

वो शाम फ़िर तन्हा ना होना था…मगर तन्हाई बोलकर थोड़े ही आती है
जब याद आती है तब ही तन्हा होता हूँ और जब भी तन्हा होता हूँ वो ही याद आती है शाम के ५;३० बजे, नवंबर ११,२००८
ऐसा लगता है अब वो समझ चुकी है मेरे मन की बात….ना कुछ बोल रही है ना कुछ सुन रही है
ख़ामोशी अगर सब कुछ ना बयां करे नज़रें सब कुछ बोल देती हैं
चुप रहना काँटों की तरह चुभ रहा था, मगर बोल भी नहीं सका क्योंकि जुबान लड़खड़ा रहे थे
ना उसने कुछ कहा ना मैंने कुछ सुना, मगर दिल की आवाज़ सीधा दिल पे लगती है
आज ऐसा क्यों लग रहा था की सब कुछ झूठा था, प्यार तो झूठे थे ही जस्बात भी झूठे थे, आरजू झूठी थी तमन्ना झूठी थी
ना उसने समझा मेरे जूनून को, ना मैंने जाना उसके शुकुन को
घंटों निकल गए मगर दो बोल ना बोल सके हम, सिसकियाँ निकलती रही और हमें छोड़ गए सनम दोपहर ३ बजे….जुलाई १६,२०१६
कम्बख्त बारिश को भी अभी आना था….ना छाता ना छुपने की जगह….
एक तो पहले ही लेट हूँ ऊपर से बारिश
चलो थोड़ा दौड़कर ही सही, ये बस स्टॉप बचा लेगी मुझे अरे मैडम क्या कर रही हैं….संभल के! वो तो संभाल गयी मगर मैं नहीं संभाल सका खुद को….
सब कुछ निकल गया अतीत के पन्नों को टटोलकर बस एक घटके में
वो सहमी, देखा और फिर से सहम गयी….
मानो उसे करंट छूकर निकल गयी हो और फिर भी झटके हज़ार दे गयी हो नज़रें हैरान थी, निगाहें परेशान थी….दिल कह रहा था पूछ लूँ सब कुछ….
खैरियत से रुख़्साने तक….तन्हाईयों से फ़साने तक…. भरोसा नहीं हो रहा था ये वही है जिसके साथ जिंदगी साथ गुजरने की कसमें खायीं थीं…. ऐसा लग रहा था जैसे कल की ही बात हो…. नहीं राहुल तुम कभी पैसे की अहमियत नहीं समझ पाए….मुझे उधार की जिंदगी नहीं चाहिए
प्यार तो मैं तुम्हे खुद से भी ज्यादा करती हूँ मगर सिर्फ प्यार से जिंदगी नहीं चलती न
मैं तुम्हारे साथ जिंदगी गुजार सकती हूँ मगर तुम ही बताओ बिना पैसे के जिंदगी कैसी? मुझे पता है तुम मुझे खुश रखोगे मगर मुझे जिंदगी में और भी बहुत कुछ चाहिए राहुल….
एक ही जिंदगी है , मैं अभाव में नहीं बिताना चाहती…. दोपहर ३:१५ बजे….जुलाई १६,२०१६ मम्मा मैं आ गई…
अरे बेटा रुको, क्या कर रही हो, भींग जाओगी…..ऐसे नहीं बेटा!
मम्मा पप्पा कहाँ …

Hindi Story | भगवान का सत्कार

Hindi Story | भगवान का सत्कार

एक गाँव में दामोदर नाम के एक गरीब ब्राह्मण रहा करते थे! ब्राह्मण को लोभ और लालच बिलकुल भी न था! वे दिन भर गाँव में भिक्षा व्रती करते और जो भी रुखा सुखा मिल जाता उसे भगवन का प्रशाद समझ कर ग्रहण कर लेते|

तय समय पर भ्रम्हं का विवाह संपन्न हुआ| विवाह के उपरांत ब्राह्मण ने अपनी स्त्री से कहा की देखो अब हम गृहस्थ जीवन में प्रवेश कर रहें हैं, गृहस्थ जीवन का सबसे पहला नियम होता है अतिथि सत्कार करना, गुरु आगया का पालन करना और भजन कीर्तन करना|

में चाहे घर में रहूँ न रहूँ लेकिन घर में अगर कोई अतिथि आए तो उनका बड़े अच्छे से अतिथि सत्कार करना| चाहे हम भूखे रह जाएँ लेकिन हमारे घर से कोई भी भूखा जाने न पाएं!

ब्राह्मण की बात सुनकर ब्राह्मणी ने मुस्कुराकर कहा अच्छी बात है| में इस सब बातों का ध्यान रखूंगी, आप निश्चिन्त रहें और भजन कीर्तन कर प्रभु भक्ति में ध्यान लगाए!

ब्राम्हण और ब्राह्मणी सुखी सुखी अपना जीवन यापन करने लगे! ब्राम्हण रोज सुबह अपने घर से भिक्षा व्रती के लिए आसपास के गाँव में जाते और जो कुछ भी मिलता उसे प्रभु इच्छा मानकर ग्रहण करते!

ब्राम्हण के घर की स्थिथि बहुत ही सामान्य थी| कभी-कभी तो दोनों पति पत्नी को भूखा ही सोना पड़ता! लेकिन फिर भी दोनों पति पत्नी सुखी सुखी अपना जीवन यापन कर रहे थे| मन में कोई भी द्वेष और लालच न था|

भगवान् बड़े लीलाधर हैं! वे देवलोक में बेठे-बेठे सब कुछ देखते हैं| उनकी लीला बड़ी विचित्र है| वे समय-समय पर अपने भक्तों के दुःख हरने किसी न किसी भेष में आते रहते हैं| वे हमेशा अपने भक्तों की परीक्षा लेते हैं|

एक दिन ब्राम्हण की भक्ति और त्याग से प्रसन्न होकर भगवान् ब्राम्हण के घर साधू का वेश धारण कर ब्राम्हण की परीक्षा लेने पहुंचे| भगवान ब्राम्हण के घर के बाहर बने चबूतरे पर बैठे और भिक्षा के लिए आवाज लगाईं|

ब्राम्हण ने जब साधू महात्मा की आवाज सुनी तो वह बाहर आया| ब्राम्हण को देख साधू महात्मा मुस्कुराए और बोले, “पुत्र आज इस रास्ते पर जाते-जाते मन किया की आज तुम्हारे घर भोजन करूँ”

ब्राम्हण ने प्रसन्नता पूर्वक साधू महात्मा को नमन किया और बोला, “महाराज ! बड़ी अच्छी और प्रसन्नता की बात है की आज आप हमारे घर भोजन करने के लिए पधारे हैं| आइये भीतर चलिए…

इतना कहकर ब्राम्हण साधू महात्मा को घर …

Ehsaas.

Excerpt: We got separated from each other because of some “misunderstanding”, I loved you and you loved me but then we parted ways. Destiny was very nice to me it gave me back you and I was happy.

कहीं ट्रेन ना छूट जाए मेरी, मैं यहीं बड़बड़ाता हुआ प्लेटफार्म पर भाग रहा था, अगर बॉस ने आज ऑफिस से जल्दी जाने दिया होता तो शायद यह नहीं होता। ऑफिस में भी जरूरी काम आपके पास तभी आते हैं जब आपको ऑफिस से जल्दी जाना हो। मैं यही सोचता हुआ प्लेटफार्म पर दौड़ रहा था कि कहीं ट्रेन छूट ना जाए वैसे भी बहुत समय बाद मैं घर जा रहा था, वैसे मेरा घर जाने का मन हमेशा ही करता है पर कभी ऑफिस से छुट्टी नहीं मिलती या कभी कुछ और काम निकल आते है और शायद सच तो यह है, कि अब वहां वो पहले वाली बात नहीं क्योंकि अब वहाँ वो नहीं है!आखिरकार में प्लेटफार्म नंबर 7 पर पहुंचा देखा कि ट्रेन लेट थी शायद ट्रेन को भी यह अंदाजा हो गया था कि मेरा घर जाना कितना जरूरी है।
मैं फिर अपने ख्यालों में खो गया क्या करूंगा मैं वहां ? क्या वो भी इस होली पर घर आयेगी कितने महीने बीत गए है उसे देखें हुए, उससे बात किए हुए, आखिरी बार हमने तब बात की थी जब मैं नोएडा शिफ्ट हो रहा था मेरी जॉब लगी थी यहाँ, वो मेरे कॉलोनी में रहती थी मेरे घर से कुछ कदमों की दूरी पर ही उसका घर था।

यह बात कॉलेज के दिनों की है। जब हमारी कॉलोनी में नए पड़ोसी आए थे उनका परिवार शिमला से शिफ्ट हुआ था, उसके पिताजी एक सरकारी बैंक में मैनेजर थे। ’महक’ नाम था उसका, नाम की तरह वो भी हमेशा महकती रहती थी मेरी और उसकी पहली मुलाकात या ये कहना ज्यादा सही होगा कि मैंने उसे पहली बार अपनी छत से देखा था। मेरे और उसके घर के बीच फासला जरूर था पर हम दोनों एक दूसरे को आसानी से पहचान लेते थे। वैसे हमारी अभी तक एक दूसरे से कोई बात नहीं हुई थी पर लगता था आंखें हमारी बहुत कुछ कहना चाहाती हों। मैंने अपना ऐडमिशन यूनिवर्सिटी में करा लिया था जो मेरे घर से 10 किलोमीटर की दूरी पर था और इत्तेफाक से उसने भी अपना ऐडमिशन उसी यूनिवर्सिटी में करा लिया था।
अक्सर हम दोनों का सामना कई बार हो जाया करता था, फिर …

Digital India hindi story

This is a story written in hindi based on digital india program. This is educational and motivational both  hand in hand. So read this Digital India hindi story till end and share with everyone.

Digital India hindi story motivational

Digital india aapko sochne par majbur kar dega

Motivational stories -डिजिटल इंडिया

“बापू ये डिजिटल इंडिया क्या होता है?” नन्ही सी मुन्नी ने अपने बापू से पूछी, जो की उसके पास ही बैठ कर रेडियो सुन रहे थे. और अमाचार में कोई बार-बार ‘डिजिटल इंडिया’ के बारे में बोल रहा था. मुन्नी लालटेन की टिमटिमाती लौ में पढ़ रही थी और बाल-मन ये शब्द सुन कर रोक न पाई और radio सुनते हुए बापू से पूछी.

“ये तो मुझे भी नहीं पता बिटिया, मगर सब लोग कह रहे है की अब mobile से ही सब कुछ होगा.” उसको समझाते हुए उसके बापू ने बोला- “और तुमको तो पता होगा तू तो स्कूल भी जा रही है. मास्टर जी से पूछ लेना.”

“ना बापू, स्कूल में तो अंग्रेजी पढ़ाते ही नहीं है और मास्टर जी तो कुछ बताते भी नहीं है. दिन भर ऑफिस में बैठे रहते है. उनको भी कुछ नहीं आता है.” बड़े ही मासूमियत से मुन्नी ने जवाब दिया.

“अच्छा बापू, हमारे यहाँ बिजली तो आती ही नहीं, तो mobile कैसे चलेगा.” मुन्नी ने फिर एक सवाल दागा.

“बेटी ये हमारे लिए नहीं है, जो बड़े-बड़े लोग होते है न, जो कारों से चलते है उनके लिए होता है.” उसके बापू ने फिर उसे समझाते हुए कहा.

“मैं भी बड़ा आदमी बनूँगी.” मुन्नी ने चहकते हुए कहा – “बापू मेरा भी नाम शहर में जो बड़े स्कुल होते है न उसमे लिखा दो, जिसमे जूते पहन कर जाते है और वो गर्दन में लगाते है, वो भी खरीद देना.”

उनसके बापू ने प्यार से उसके सर पर हाथ फिर और अपने मज़बूरी पर हँसते हुए कहा _”बेटा उसमे भी बड़े-बड़े आदमी के बच्चे पढ़ते है. हमलोग तो किसान है, तो हमलोग के लिए सरकार ने सरकारी स्कुल खोल रखा है.”

मुन्नी के सवाल

उस बाल-मन के मन से अभी सवाल ख़त्म नहीं हुई “हमलोग भी तो “इंडिया के ही है तो हमलोग के डिजिटल बने बिना इंडिया कैसे डिजिटल बन जाएगा?. हमलोग क्यों नहीं बड़े है ? हम क्यों नहीं बड़े स्कुल में जा सकते? हमारे यहाँ बिजली क्यों नहीं है? बापू ने ऐसा क्यों कहा ‘हम किसान है हमारे लिए सरकारी स्कुल ही है? और सरकारी स्कुल के …

God stories in hindi to restore faith भगवान की कहानी

Today we are presenting in front of you god stories in hindi to restore faith. We are on a track of posting inspirational and life changing hindi stories and quotes. So remain stick to us for wonderful stories and quotes in future.

God stories in hindi – Bhagwan ki kahani

एक गांव में एक ब्राहम्ण परिवार रहता था. उस ब्राहम्ण परिवार में तिन भाई थे और खेती-बाड़ी का काम करते थे. तीनो भाइयो में नित्यानंद जी सबसे बड़े भाई थे. वह सुबह-सुबह उठते और गंगा स्नान करने जाते फिर आकर भगवान का भजन और पूजन में लग जाते. उनका ये दिनचर्या हर मौसम में चलता रहता.

न बरसात उनका रास्ता रोक पाई, न ही कड़ाके की ठण्ड और न भीषण गर्मी. हर मौसम में सुबह 4 बजे उठते और अपना कमंडल लेकर निकल पड़ते नंगे पैर. न ही पत्थर चुभने का गम, न ही विषैले जीवो का डर. उनको न तो बिजली की कड़कहट डरा पाई और न अंधरी रात की आंधी-पानी.

उनके इस आदत से उनके घर वाले परेशान रहते थे. भाईओं के कहने पर भी न तो खेत में जाते और न ही घर का कोई काम करते जबकि दोनों भाई मेहनत से काम करते. उनके इस आदत से उनकी धर्मपत्नी भी उनके ऊपर गुस्सा करती रहती. “दुनिया कमा कर क्या से क्या कर रही है मगर इनको अपने पूजा-पाठ से समय नही मिलता है.

दिनभर राम-राम जपने से खाना नहीं मिल जाता. उसके लिए काम करना पड़ता है. ऐसे कब तक चलेगा कब तक भाइयों के किये काम पर बैठ कर खाओगे. कम-से-कम दिन भर में एक बार खेतो से घूम ही आओ. दिन भर भगवान कहने से कुछ नहीं होगा.”

Godly stories -पंडितजी को अलग कर देना

इन सब बातो पर नित्यानंद जो मुस्करा देते और बोलते-“तुमको लग रहा है की मेरे भाई मुझे खिला रहे है. नहीं! ये तो परमेश्वर ही है जो मुझे लाकर देता है. सब उनकी मर्जी से होता है. सभी को खाना भी वही देते है. भाई तो माध्यम मात्र है.”

उनकी ये बात न तो उनकी पत्नी को समझ में आती और न ही उनके भाईओं को. हालत दिन-पर-दिन बिगड़ते गए. न ही पंडित जी ने अपना नित्यकर्म छोड़ा और न ही भगवान का कीर्तन भजन. उनके इस व्यवहार से उनके भाईओं ने और उनकी पत्नी ने उनको सबक सिखने को सोच.

अगले दिन

अहिसे ही गंगा से स्नान करके लौटे भाईओं ने बोला-‘ भैया आप कुछ करते नहीं है. …

Business story in hindi for getting success

We will read today business story in hindi. And will also tell you that how you can get successful in your particular business.कहते है की हर प्रॉब्लम का solve हमारे आस-पास ही रहता है. बस हमे उसे पहचने की देर होती है.

उसी कुछ लोग उसे पहचान लेते है और success होते है मगर कुछ रोने में समय निकल देते है की अब क्या कर. अब कुछ नहीं हो सकता. आपके प्रॉब्लम का solve आपके पास ही है बस आप उसे देखिये उसे इस्तेमाल कीजिए.

मैं आपलोग को एक कहानी बताता हूँ कैसे एक आदमी अपने डूबती company को बचाता है. और उसे आगे तक ले कर जाता है. Moral story in hindi -एक कहानी जो आपकी जीवन बदल देगी.

Awesome business story in hindi

जतिन जब ऑफिस घर पंहुचा तो अभी शाम हुआ था. घरवाले बैठ कर उसका कब से wait कर रहे थे. जैसे ही जतिन घर के दरवाजे पर पंहुचा सभी खड़े हो गये. सभी का ध्यान जतिन के तरफ लग गया. ‘क्या हुआ आज ऑफिस में’ रही बात सभी के मन में चल रहा था. उसपर जतिन का गंभीर चेहरा बता रहा था की कुछ अच्छा नहीं हुआ है.

Story for successful business

जैसे ही वह घर के अंदर गया उसने सभी को एक बार देखा. सभी नजरे उसे घुर रही थी. सभी की नजरे बस जतिन पर टिक गयी. उसकी मा ने कुछ पूछना चाहा. तब तक जतिन उनलोगों से आगे निकल गया और सीधे अपने room में चला गया. उसकी वाइफ, उसकी माँ, डैड सब उसे बस जाते देखे.

जतिन अपनी एक company चलाता है. अपनी पापा की विरासत नहीं अपने मेहनत से बनाया हुआ. एक-एक सफलता पार करके. अपनी मेहनत के दम पर. अपने टैलेंट के बल पर. उसकी company भी अच्छी चल निकली. अच्छे दिन आने के बाद ख़राब दिन भी आते है. यही जतिन के साथ भी हुआ.

उसने company को बड़ा करने के लिए बैंक से भारी-भरकम लोन ले लिया. धीरे धीरे लोन का दबाव बढ़ने लगा. company का उत्पादकता तो बढ़ गया मगर selling कम हो गया. मार्किट में company बढ़ने से selling गिर गया. जितना मॉल company से निकलता वह बिक नहीं पाता. heart touching stories -बारिश की वो काली रात

Motivational story for employees

जब लगा सब कुछ खत्म हो गया

बैंक वाले अपना installment के लिए रोज-रोज आने लगे. धीरे-धीरे company का हालत बहुत बिगड़ गया. जो भी installment बैंक में जा रहा था वह …

Relationship stories in hindi with moral value

Today we come here with a true story. This is based on relationship stories in hindi. In this story we will talk about how a relationship becomes a torture for someone.

Real life relationship stories in hindi

किसी-न-किसी दिन तो यह होना ही था. ऐसा बहुत दिन तक नहीं चलने वाला था. सहन भी कितना करू. एक हद होती है, एक सीमा होती है सहन करने की. और वह सीमा पार हो चूका था. अच्छा किया, बहुत अच्छा किया. ऐसे रिश्ते से बहार आकर बहुत ही अच्छा किया. और अब नहीं निभा सकता था ये रिश्ता.

शाम का समय था. मैं अभी भी पार्क में बैठ था. पार्क के एक कोने में थोड़ी सी जगह पड़ी थी. जहाँ कोई आता-जाता नहीं था. मैं वही बैठा सोच रहा था आखो से आसू निकलते और फिर खुद ही सुख जाते. मैंने अपने मन को काबू करने की कोशिश कर रहा था. मगर मन बार-बार अपने बिताये पल और उन पलो में जा रहा था जो हमने साथ बिताये थे. आखो में एक तस्वीर उभर कर आ जाती और उतनी ही तेजी से आखो से आसू भी निकल पड़ते.

Real life love story – तुमको किसी के प्यार का जरूरत क्यों है?

आज मैं खुद उस से रिश्ता तोड़ के आया, खुद ही. एक ऐसा रिश्ता, जो रिश्ता नही बोझ हो गया था. एक ऐसा रिश्ता जिसमे फिल्लिंग्स नहीं थी. मुझे इतने आसू रोज मिलते थे. और इस आसू का कोई एहसास नहीं था उनके पास. इतने सालो के हमारे रिश्ते में मुझे आज भी अपनापन का एहसास नहीं था.

उसका बार-बार गलती करना और मेरा बार-बार माफ़ कर देना. यही चलता रहा. कितने बार ही उसे समझाया होगा की ‘क्या चाहिए तुझे किसी और से? ‘प्यार’. मैं हूँ न प्यार करने के लिए. क्यों तुमको किसी और का जरूरत पड़ रहा है. एक लड़का तुम्हारे लिए आसू बहा सकता है यानि उसको दुनिया में सबसे जयादा तुमको प्यार करता है. मगर उनके पास इन सब का कोई असर नहीं था.

Real life relationship story – हमेशा के लिए छोड़ दिया उसे

मगर आज मैं इस सब बातो को झूठा साबित रहा हूँ. मैंने अपना आसू पोछ लिया अब नहीं बहाने है ये आसू. वह इस आसू के काबिल नहीं है. और न ही इस प्यार के. आज मैं कोई कसम नहीं खाऊंगा call नहीं करने के लिए. आज कोई वादा नहीं, उसको message नहीं करने का. फिर भी वादा है कभी न …

Real life hindi love story in hindi हिंदी लव स्टोरी

Today we are writing Real life hindi love story which is happy and sad both. दिल की बात दिल में ही रह जाती है. बस एक डर की वजह से ‘अगर वो गलत समझ ली तो क्या होगा?’ हमारी दोस्ती भी खत्म हो जाएगी. इस एक डर की वजह से हमारे जैसे कितनो ने अपना love खो दिया. और उस बात का अफ़सोस आज भी होता है.

काश उसे बता दिया होता. – “मैं तुमसे प्यार करता हूँ. मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता हूँ. तुम जो करो तुम्हारे ऊपर है मगर मैं तुमसे love करता हूँ.”

Real life hindi love story

आज इतने साल बित जाने के बाद भी यह बात धड़कन तेज कर देती है. मन बेचैन होता है और आँखे देखने के लिए उसे ढूढने लगती है. यह जानते हुए भी की वो है ही नहीं. जो मिलेगा ही नहीं. उस समय की सारी तस्वीर आँखों के सामने घुमने लगता है. आज वह बेचैनी फिर से बढ़ गई है. उसके यादें दिल को तड़पा रही है. अपनी कहानी आपलोग के साथ शेयर कर रहा हूँ शायद दिल का बोझ हल्का हो जाये.

हमारी love story शुरू हुई थी 11th class से. मैं अपने class में सबसे कम बोलने वाला लड़का था. बहुत ही शर्मिला. फिर हमारे ही class में एंट्री ली एक बहुत ही खुबशुरत लड़की ‘स्नेहा’. वह सबसे अलग थी. उसमे कुछ अलग बात थी. सुन्दरता तो जैसे स्वर्ग के परियो से मांग कर लाई हो. बड़ी-बड़ी आँखे, नुकीले नाक, गुलाबी गाल और काले-काले लम्बे बाल. जिस दिन वह उजली शूट पहन कर आती बिलकुल ही पारी के समान लगती थी.

वह भी मेरे तरह कम बोलने वाली थी. वह मुझे मेरे जैसी लगी. मैं उसे चाहने लगा. हमेशा वह मेरे ख्यालो में ही रहती. मैं उस से बात करने के बहाने ढूढने लगा. तब तक उसने हमारा ग्रुप भी ज्वाइन कर लिया था. हमारी हल्की-फुलकी बात होने लगी थी. मगर उसे ये एहसास नहीं था की मैं उस से कितना प्यार करता हूँ. कितनी ही बार सोचा की आज उसे बता दू. मगर जैसे ही वो सामने से आती हुई दिखाई देती मेरा धडकन बढ़ जाता और दिमाग blank हो जाता. सारी बाते भूल जाता.

Real life love story  – हमने बहुत समय साथ में बिताया

अब हमलोग 12th में आ गये थे. तभी कॉलेज के तरफ से दुसरे जगह जाने का टूर प्रोग्राम आया. मैं सोच कर बहुत ही खुश था की कुछ दिन …

Short hindi stories with moral values शार्ट हिंदी कहानिया मोरल

Today we bring to you short hindi stories with moral values. Which will surely help in you life. इस पोस्ट में आपको बहुत सारी छोटी छोटी कहानिया मिलेंगी | जो मानवीय मूल्यों से भरी हैं और मजेदार भी हैं | आशा है आप लोगों को पसंद आएगी |

These are some short stories written below which inspirational , motivational , emotional with moral values. Read them and give feedback in comment box.

Short hindi stories for family

सोहन 10 साल का था जब उसके माँ-बाप गुजर गये. तब वह 6th class में पढता था. माँ-बाप के मरने के बाद सारी जिम्मदारी उसके बड़े भाई दिवाकर पर आ गई.

जब दिवाकर के माता-पिता का देहांत हुआ. दिवाकर का शादी हो चूका था. दिवाकर और उसकी पत्नी ने बहुत ही सेवा किया ‘माता-पिता’ का. उनके इलाज में सारा कुछ बेच डाला. मगर नियति को कुछ और मंजूर था. माता-पिता के मरने के बाद सोहन की सारी जिम्मदारी दिवाकर पर आ गई. दिवाकर ने भी अपना जिमादारी बखूबी निभाया. किसी चीज की कमी नहीं होने दिया सोहन को.

This is Short family story in hindi.

उसे सब कुछ बेच कर पढाया

सोहन को पढने के लिए शहर भेज दिया. खर्चे के लिए बची हुई खेत गिरवी रख दिया. घर के हालत भी बिगड़ने लगे. कभी-कभी चूल्हे में आग भी नहीं जलने की नौबत आ गई. फिर भी सोहन के लिए पढाई का खर्च देना जारी रखा.

सोहन ने भी बढ़िया से पढाई जारी रखा. उसे एक बढ़िया गवर्नमेंट job भी मिल गई. दिवाकर बहुत खुश हुआ. उसे अब लगा रहा था की पिता की दी हुई जिम्मेदारी अच्छे ढंग से निभा पाया. उसे खेत बिक जाने का डर नहीं था. न ही कभी अपने आपको उदास पाया.सोहन की job मिलने की ख़ुशी सबको थी.

सब कुछ ठिक चलने लगा. उसी बिच दिवाकर ने सोहन की शादी भी करा दी. बहुत ही धूम-धाम से शादी हुआ. दिवाकर ने बड़े भाई का फर्ज बहुत ही बढ़िया तरीके से निभाया.

वह ही आँख दिखाने लगा

दिन बीतने लगे. सोहन की पत्नी बड़े भाई के लडको से दूर ही रहती. हमेश उलाहना करती. ये सारी बातें दिवाकर सुना और चुप हो जाता. यही सोचता की औरते कर रही है करती रहे. हम भाई तो अच्छे है. उधर सोहन की पत्नी, सोहन के भी कान भरने लगे. सोहन शुरू-शुरू में इन बातो को नहीं सुना मगर रोज-रोज रही सुन कर वह अपनी पत्नी के बातो पर विश्वास करने …