भारत की आजादी का सफ़र | Indian Independence Movement

Indian Independence Movement

भारत में अंग्रेज आने से पहले यहाँ के हालात बेहतर थे। सभी लोग ख़ुशी से रहते थे। सभी धर्म और जाती के लोग साथ मिलकर रहते थे और आपस में भाईचारा बनाये रखते थे। लेकिन बाद में इस देश में अंग्रेज आये और पुरे देश पर धीरे धीरे कब्ज़ा कर लिया। उनके आने के बाद देश की हालत काफी ख़राब हो गयी उन्होंने देश के लोगो के गुलाम बना डाला, उनपर जुल्म करना शुरू किया।

भारत की आजादी का सफ़र – Indian Independence Movement

लेकिन हमारे देश के लोग भी बहादुर थे उन्होंने अंग्रेजो के इस जुल्म के खिलाफ आवाज उठाना शुरू किया और तभीसे देश को आजाद करने की लड़ाई शुरू हुई। देश की आजादी का सफर काफी लम्बे समय तक चला।

इस सफ़र में देश में क्रांतिकारियों को अंग्रेजो का डटकर सामना करना पड़ा। उसके लिए उन्हें कड़ा संघर्ष करना पड़ा। इस संघर्ष में कितने क्रांतिकारियों को अपने देश के आजादी के लिए जान देनी पड़ी। लाखों की संख्या में लोग शहीद हो गये।

इस स्वतंत्रता आन्दोलन की शुरुवात असल में सन 1857 से हुई। लेकिन यह आजादी का पहला आन्दोलन क्यों हुआ, कैसे हुआ, और किसने किया इन सारे सवालों के जवाब हम आपको देने वाले है। ऐसी क्या बात थी जिसमे सैनिको को ही इसमें सबसे पहले आगे कदम रखना पड़ा और इस लड़ाई के बाद अंग्रेज क्यों डर गए, इसकी सारी जानकारी हम आप तक पहुचाने वाले है।

इस युद्ध के बाद कौन कौन से संगठन बने जिनके चलते हमें सन 1947 में आजादी मिल सकी और किन किन क्रांतिकारियों ने देश की आजादी में क्या क्या योगदान दिया इसकी सारी जानकारी आपको मिलेगी। तो ज्यादा समय बर्बाद ना करते हुए हम आपको देश की आजादी का चुनौतीभरा सफ़र कैसा था इसकी जानकारी देने जा रहे।

इतिहास में कई बार लोगो ने भारत पर आक्रमण किये। भारत पर आक्रमण करने वाले अधिकतर लोगो के इरादे पहले से साफ़ थे, अंग्रेजो ने भी शुरुवात में व्यापार करने के माध्यम से भारत में पाव रखा और धीरे धीरे हमारे देश पर कब्ज़ा किया।

अंग्रेजो ने व्यापार करने के लिए शुरुवात में यहापर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना की लेकिन धीरे धीरे उन्होंने अपनी इस कंपनी का विस्तार पुरे देश में किया ताकी उनकी ताकत और बढ़ सके और आखिर में वही हुआ जो अंग्रेज चाहते थे उन्होंने पुरे देश पर कब्ज़ा कर लिया।

17 वी सदी की शुरुवात में ही अंग्रेजो ने व्यापार …

30 Quotes From Famous Historical Leaders To Inspire You To Make Your Mark On The World

Here’s a boost from other the movers and shakers of the world.

Who else remembers doing assignments in school on specific leaders throughout history? Kings and queens born into their stations, elected officials, activists — they all found their way into our textbooks.

Some leaders are more memorable than others due to what they accomplished in their position of political power. Take William Henry Harrison, for example. What did he do as the ninth president of the United States? Not much, since he died of pneumonia a month after his inauguration. To be fair, he was an accomplished military officer. But not the smartest move to forgo wearing a coat on a cold and wet day in early March while giving a two-hour long inaugural speech. Unfortunately, that’s William Henry Harrison’s legacy.

But the majority of US presidents are memorable in other, more positive, ways. We read books about them, watch movies and musicals about them, even willingly after grade school!

Presidents aren’t the only leaders we look up to, though. They don’t even represent most of us. In fact, all 45 presidents have been men. We have women to admire, too. And people with different ethnic backgrounds. A leader doesn’t have to be someone elected into office.

A leader is someone who influences thinking. They inspire and speak for voices often left unheard. They are people others want to follow.

There are times in our lives when we need to take a stand. History is made every day — every minute and every second all around the world. Why not be a part of it?

You can do so much with so little. With cultivation, a little can become a lot. A mere idea in a moment can become a movement.

First, however, you need to be in the right mindset to think big. Some of the biggest thinkers in history can help with that.

Here are thirty quotes from thirty different historical leaders that have made their mark on history to inspire you to make yours as well.

1. Remember to go forth with love in your heart.

“Darkness cannot drive out darkness. Only light can do that. Hate cannot drive out hate. Only love can do that.” — Martin Luther King, Jr.

2. Rise up.

“Those who stand for nothing fall for anything.” — Alexander Hamilton

3. Self-reliance is key.

“I will have here but one mistress

बाजीराव के शनिवार वाडा किले में आज भी गूंजती है किसी की चीख | Shaniwar Wada Fort History In Hindi

भारत की एतिहासिक धरोहर शनिवार वाडा किला (Shaniwar Wada Fort) पुणे, महाराष्ट्र का एक प्रमुख पर्यटक स्थल है. बाजीराव प्रथम द्वारा निर्मित यह किला बाजीराव द्वारा काशीबाई को दिए धोखे और बाजीराव-मस्तानी की अधूरी प्रेमगाथा के साथ ही पेशवाओं की उन्नति से लेकर पतन की कहानी खुद में संजोये हुए है. यह पुणे के प्रमुख पर्यटक स्थलों में गिना जाता है.

१८ वीं शताब्दी में मराठा पेशवाओं के उदयकाल में शनिवार वाडा किला भारतीय राजनीति का प्रमुख केंद्र हुआ करता था. लेकिन दुर्भाग्यवश यह बड़े ही रहस्यमयी तरीके से आग की चपेट में आकर नष्ट हुआ. आज यह अवशेष के रूप शेष है.

Shaniwar Wada Fort History In Hindi
Shaniwar Wada Fort History In Hindi | Source : wikipedia

शनिवार वाडा किले के साथ एक काला अध्याय भी जुड़ा हुआ है. इस किले में सत्ता में लोभ में मराठाओं के ५वें पेशवा १६ वर्ष के नारायणराव की निर्मम हत्या करवा दी गई थी. कहा जाता है कि उनकी आत्मा इस किले में भटकती है और अंतिम घड़ी में उनके द्वारा ली गई चीखें आज भी इस किले की चारदीवारों में गूंजती है. यह किला भारत के सबसे रहस्यमयी/डरावनी जगहों (Top Most Haunted Places Of India) में शामिल है.

शनिवार वाडा किले का निर्माण (Shaniwar Wada Fort Constrution)

शनिवार वाडा का निर्माण पेशवा बाजीराव प्रथम द्वारा करवाया गया था, जो मराठा शासक छत्रपति साहू के पेशवा/प्रधान थे. इसकी नींव १० जनवरी १७३० को शनिवार के दिन रखी गई थी. शनिवार के दिन नींव रखे जाने के कारण इस किले का नाम ‘शनिवार वाडा’ (Shaniwar Wada) पड़ा.

इस ७ मंजिला किले के निर्माण की जिम्मेदारी राजस्थान के ठेकेदारों को सौंपी गई, जो ‘कुमावत क्षत्रिय’ (Kumawat Kshatriya) कहलाते थे. इसे पूर्णतः पत्थरों से निर्मित किये जाने की योजना थी. किंतु सतारा की प्रजा द्वारा वहाँ के राजा साहू से शिकायत की गई कि पत्थरों से ईमारत के निर्माण का अधिकार केवल राजाओं का है. जिसके बाद राजा साहू द्वारा पेशवाओं को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति जताई गई और शनिवार वाडे का निर्माण पत्थरों के बजाय ईंट से करने को कहा. उस समय तक किले का आधार तैयार हो चुका था. राजा साहू की बात मानकर पेशवाओं ने किले की शेष मंजिलों का निर्माण ईंटों से करवाया.

किले के निर्माण हेतु प्रयुक्त टीक की लकड़ी जुन्नार के जंगलों (Junnar Forest) से, पत्थर चिचवाड़ की खदानों (Chinchwad Mines) से और चूना जेजुरी खदानों (Jejuri Mines) …

शेर शाह सूरी का मकबरे का इतिहास – Sher Shah Suri Tomb

Sher Shah Suri Tomb

इतिहास में भी ऐसे ही अच्छे लोग थे जिन्होंने समाज की उन्नति के लिए बहुमूल्य योगदान दिए। ऐसे लोगो में शेर शाह सूरी जैसे सम्राट भी है। बिहार में रोहतास जिले के सासाराम में इनकी याद में एक बहुत बड़ा मकबरा बनाया गया है। यह मकबरा इसीलिए भी खास है क्यों की यह ताजमहल से भी बड़ा है और ऊँचा भी है। पुरे भारत में इस तरह का मकबरा कही भी दिखाई नहीं देता। शेर शाह सूरी की इसी मकबरा – Sher Shah Suri Tomb के बारे में पूरी जानकारी निचे दी गयी है।

शेर शाह सूरी का मकबरे का इतिहास – Sher Shah Suri Tomb

जैसे हमनें आपको बताया की शेर शाह सूरी का मकबरा – Sher Shah Suri Tomb बिहार में रोहतास जिले के सासाराम में मौजूद है। खुद शेर शाह सूरी ने अपना खुद की मकबरा बनाने की शुरुवात की थी और इस मकबरा को पूरी तरह बनाने के काम उसके लड़के इस्लाम शाह ने शेर शाह की मृत्यु होने के तीन महीने बाद पूरा किया था।

सन 1545 में शेर शाह सूरी की मौत हो गयी थी। शेर शाह सूरी के मकबरे को बनाने का काम अलावल खान को सौपा गया था।

शेर शाह सूरी का मकबरे की वास्तुकला – Sher Shah Suri Tomb Architecture

सूरी की मकबरे को बहुत ही सुन्दर रेतीले पत्थरो से बनाया गया था। यह मकबरा बिलकुल झील के बिचोचिच स्थित है। यह तीन मंजिलो वाली कब्र 46 मीटर उची है और यह आगरा के ताजमहल से भी 13 फीट ऊँची है। इस कब्र के चारो और पत्थरो की बनी हुई सीढिया है जो झील के अन्दर तक ले जाने का काम करती है।

इस मकबरे के उपरी हिस्से में जो बरामदा है उसके चारो तरफ़ उची दीवार बनाई गयी है। इस मकबरे के चारो कोनो में आठ भुजाओ वाले चार गुबंद है साथ ही इस मकबरे की पूर्व दिशा में एक बडासा दरवाजा है जहासे इस मकबरे में पंहुचा जा सकता है।

इस मकबरे तक पहुचने के लिए सन 1881 में एक पक्की सड़क भी बनायीं गयी थी। इस मकबरे के चारो और आठ भुजाओ के गुबंद बनाये गए है और इसके चारो और खुली जगह दिखाई देती है। यहापर जो खुली जगह है उसके चारो तरफ़ 24 छोटे छोटे गुबंद बनाये गए है।

भारत में सबसे बड़ी मकबरों में इस शेर शाह सूरी की मकबरे का नाम भी लिया जाता है। मकबरे के अन्दर के हिस्से …

शाहजहाँ की बड़ी और सबसे लाडली बेटी राजकुमारी “जहाँआरा बेगम”

Jahanara Begum

Jahanara – जहाँआरा बेगम शाहजहाँ की बड़ी बेटी और औरंगज़ेब की बहन है। शाहजहाँ अपनी बेटी से अन्य बच्चों की अपेक्षा ज़्यादा प्यार करते थे। जहाँआरा – Jahanara जब पैदा हुई तब आगरा के लालकिले को बहुत ही सुंदर फूलों से सजाया गया था। आज हम जहाँआरा के जीवन के बारेमें जानेंगे कुछ बातें।

शाहजहाँ की बड़ी और सबसे लाडली बेटी राजकुमारी “जहाँआरा बेगम” – Jahanara Begum

Jahanara  – जहाँआरा बेगम का जन्म 23 मार्च 1614 में भारत के अजमेर, राजस्थान में मुग़ल वंश में हुआ था। बेगम के पिता का नाम शाहजहाँ था और माता का नाम अर्जुमन्द बानो था। जहाँआरा बेगम को पादशाह बेगम और बेगम साहब के नाम से भी जाना जाता है। जहाँआरा अपने माता पिता की चौदहवीं संतान थी और औरंगज़ेब की बड़ी बहन थी।

शाहजहाँ और जहाँआरा का अनूठा रिश्ता –

जहाँआरा ने अपने जीवन काल के दौरान वह जब चौदह वर्ष की हुई तभी से अपने पिता शाहजहाँ के राजकार्यों में उनका हाथ बटाने लगी थी।

जहाँआरा – Jahanara मुग़ल सल्तनत की एक अकेली ऐसी राजकुमारी थी, जिसे आगरा फोर्ट के बाहर अपने खुद के महल में रहने की इजाजत थी। अपनी माँ अर्जुमन्द के देहांत के बाद जहाँआरा अपने पिता की सबसे विश्वासपात्र साथी रही थी।

औरंगज़ेब ने अपने पिता शाहजहाँ को अंतिम समय में जब आगरा के किले में कैद कर लिया था। तब भी गुणों से भरपूर जहाँआरा – Jahanara ने अपने पिता की उनकी मृत्यु होने तक धन और मन से सेवा की। शाहजहाँ की मृत्यु जनवरी वर्ष 1666 में हो गयी थी।

जहाँआरा, आग की लपटों में जली थी।

जहाँआरा – Jahanara के जीवन में एक ऐसी घटना घटी थी की जिस ने महल में रह रहे हर शख़्स को चिंतित कर दिया था। वर्ष 1644 में जहाँआरा – Jahanara किसी कारण से आग की लपटों में आ गयी थी और बहुत ही बुरी तरह से जख़्मी हुई थी।

इस हादसे से बेगम का आधे से ज्यादा शरीर का हिस्सा जल गया था। शाहजहाँ को जब इस खबर का पता लगा तो उसने उस समय के बेहतरीन वैधों को जहाँआरा के इलाज के लिए महल में बुलवाया था।

इस घटना के बाद जहाँआरा – Jahanara को करीब चार महीनों तक जिन्दगी और मौत के बीच संघर्ष करना पड़ा था। आखिर में उनकी जान खतरे से बाहर हुई और ग्यारह महीनों के लम्बे आराम के बाद वह महल में फिर से उसी विश्वास के साथ लौटी तब …

जानिए क्या है हाड़ी रानी की वीरगाथा…

Hadi Rani History

एक सच्ची देशभक्ति और राष्ट्रप्रेम के लिए बलिदान की ढेरों कहानियां का उल्लेख इतिहास में देखने को मिलता है लेकिन राजस्थान की वीरांगना की अद्भुत कहानी है। हम बात कर रहे हैं मेवाड़ की हाड़ी रानी – Hadi Rani की जिन्होनें मातृभूमि के लिए और अपने राजा की जीत के लिए इतना बड़ा त्याग किया है कि शायद ही किसी ने किया हो।

हाड़ी रानी एक ऐसी वीरागंना थी जिन्होनें अपने अपने सतीत्व की रक्षा के लिए अपना मेवाड़ की रानी ने अपने पति को उसका फर्ज याद दिलाने के लिए अपने सिर ही काटकर पेश कर दिया। रानी ने खुद की कुर्बानी देकर बलिदान की मिसाल पेश की और इतिहास के पन्नो पर ऐसा करने वाली सर्वश्रेष्ठ वीरांगना कहलाईं। इसके पीछे एक अमर प्रेम कथा छिपी हुई है आइए जानते हैं – हाड़ी रानी की वीरगाथा।

जानिए क्या है हाड़ी रानी की वीरगाथा – Hadi Rani History

हाड़ी रानी का संक्षिप्त परिचय- Hadi Rani Information

Hadi Rani – हाड़ी रानी बूंदी के हाड़ा शासक की बेटी थी। जिनकी शादी उदयपुर ( मेवाड़ ) के सलुंबर ठिकाने के सरदार रावत रतन सिंह चूड़ावत से हुई और फिर बाद में उन्हें हाड़ी रानी के नाम से जाना गया।

हाड़ी रानी की सरदार चूड़ावत से शादी – Hadi Rani Story

राजस्थान की वीरांगना हाड़ी रानी – Hadi Rani का विवाह को महज एक हफ्ता ही बीता था। यहां तक कि रानी के हाथों की मेंहदी तक नहीं छूटी थी कि उनके पति को युद्ध जाने का फरमान आ गया।

फरमान में औरंगजेब की सेना को रोकने का आदेश था। जिसके बाद सरदार चूड़ावत ने अपने सैनिकों को यूद्ध की तैयारी और कूच करने का आदेश दे दिया था। लेकिन सरदार हाड़ी रानी से दूर नहीं जाना चाहता था।

एक राजपूत युद्धभूमि में अपने शीश का मोह त्यागकर उतरता है और जरूरत पड़ने पर सिर काटने से भी पीछे नहीं हटता। यही वजह थी कि हाड़ी सरदार को उनका पत्नी प्रेम यूद्ध भूमि में जाने से मन ही मन रोक रहा था।

लेकिन दूसरी तरफ औरंगजेब की सेना आगे बढ़ रही थी। जिसके बाद हाड़ी सरदार अपना भारी मन लेकर हाड़ी रानी – Hadi Rani से विदा लेने पहुंचे। यह संदेश सुनकर हाड़ी रानी को भी सदमा लगा लेकिन हिम्मती हाड़ी रानी ने अपने पति रतन सिंह को युद्ध पर जाने  के लिए प्रेरित किया।

लेकीन हाड़ी सरदार को अपनी रानी की चिंता मन ही मन खाय जा रही थी। …

यूक्रेन देश के बारे में कुछ रोचक तथ्य और इतिहास

यूक्रेन देश के बारे में कुछ रोचक तथ्य और इतिहास – History And Interesting Facts about Ukraine

1991 में जब सोवियत रूस के टूटने से 15 देश बने थे उनमे से एक देश यूक्रेन – Ukraine था जोकि यूरोप महाद्वीप में स्थित है इस देश का दुनिया के भूगोल में अलग ही स्थान है जो उसे कई देशो से अलग बनाता है जैसे वेश-भूषा, संस्कृति, रहन-सहन, भाषा, व्यवसाय।

  • यूक्रेन 1922 में सोवियत संघ का सदस्य बन गया था व उसने 1991 में सोवियत संघ से स्वतंत्रता हासिल की थी।
  • यूक्रेन यूरोप महादीप का क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे बड़ा देश है, इसका क्षेत्रफल 17818 वर्ग किमी है। यह पूर्वी महादीप में स्थित है।
  • कीव शहर यूक्रेन देश का सबसे अधिक जनसँख्या वाला शहर है व इसके साथ ही वह देश की आर्थिकता, राजनीतिकता और संस्कृति का प्रमुख केंद्र है। कीव शहर की स्थापना 1600 साल पहले की गयी थी।
  • यूक्रेन देश की सीमाएं स्लोवाकिया, दक्षिण पश्चिम में रोमानिया, पूर्व में रूस, उत्तर में बेलारूस, माल्दोवा, दक्षिण में काला सागर और अजोव सागर से मिलती है।
  • जब द्वितीय विश्वयुद्ध हुआ था तो हिटलर की नाजी सेनाओ से बचने के लिए लाखो यहूदियों ने यूक्रेन में शरण ली थी, परन्तु नाजी सेना ने यूक्रेन पर हमलाकर बहुत सारे यहूदियों का नरसंहार किया।
  • 1986 में यूक्रेन में सबसे भयंकर परमाणु संयत्र दुर्घटना चेर्नोबिल परमाणु दुर्घटना हुई थी।
  • यूक्रेन की मुद्रा यूक्रेनी रीवनिया है व आधिकारिक भाषा यूक्रेनियाई है।
  • यूक्रेन दुनिया में सबसे ज्यादा इंटरनेट इस्तेमाल करने के मामले में ८वे स्थान पर है।
  • यूक्रेन की जनसँख्या 1990 में 5 करोड़ 14 लाख थी जोकि अब घटकर सिर्फ 4 करोड़ ही रह गयी है जिसकी वजह है जन्मदर में कमी व लोगो का दूसरे देशो में पलायन करना।
  • दुनिया का सबसे गहराई में स्थित मेट्रो स्टेशन यूक्रेन का अर्सेनलना मेट्रो स्टेशन है।
  • यूक्रेन के शहर कीव में दुनिया का सबसे बड़ा व सबसे भरी विमान बनाया गया है जिसका नाम ए एन-225 मरिया रखा गया था जिसे एंटोनेव डिज़ाइन ब्यूरो ने बनाया था ।
  • 2007 में यूक्रेन के शेयर बाजार में 130% वृद्धि हुई थी जोकि दुनिया की दूसरी बड़ी वृद्धि थी।
  • यहाँ दुनिया की सबसे अनोखी रस्म ये है की दुनिया में ज्यादातर लोग शादी की अंगूठी बांये हाथ में पहनी जाती है परन्तु यूक्रेन में शादी की अंगूठी को दांये हाथ में पहना जाता है।
  • यूक्रेन में मेडिकल की पढाई अन्य देशो जैसे अमेरिका व भारत से सस्ती है। अमेरिका में मेडिकल

My Struggle

They lock us in these cages
And throw away the key
Say it ain’t no hope for me
I was only sixteen
When they gave me eighteen
Man if they really really knew
All of the s*** we go through
Maybe they’ll provide a better way
And lil bruh still be here today
These streets is unsafe
Or do they really even care
That this s*** is unfair,
We living in the slums, so you better not run
Cause they’ll shoot you in your back
And justify your death
Say I took away his breath
‘Cause I thought he had a gun
And wasn’t nothing in your hand
Now do you see what I’m saying?
History keep on showing us
That America don’t accept us
But don’t listen to lil ole me
Just watch and see
Trump about to show you
That this ain’t that land of the free
Nor the home of the brave
Money, lies and graves is what this country really about
And how it was made……

भगवान श्री कृष्ण का अनोखा मंदिर श्रीनाथजी मंदिर | Shrinathji Temple

Shrinathji Temple

महाभारत के नायक भगवान श्री कृष्ण के आज हर जगह पर मंदिर देखने को मिलते है। लेकिन एक ऐसी भी जगह जहापर भगवान श्री कृष्णा एक अलग रूप में दिखाई देते है। उस मंदिर के भगवान का जो रूप है, भगवान की जो मूर्ति है वह पूरी तरह से अलग है। इस मंदिर को श्रीनाथजी का मन्दिर – Shrinathji Temple कहते है।

यह मंदिर इसीलिए सबसे खास और विशेष है क्यों की इस मंदिर में भगवान श्री कृष्ण बाल अवतार में दिखाई देते है। भगवान बालक के रूप में इसीलिए है क्यों की उन्होंने बचपन में एक बार गोवर्धन पर्वत को अपने एक हाथ से उठाया था। तो उसी मुद्रा वाली मूर्ति इस श्रीनाथजी मंदिर में है। आज हम आपको राजस्थान के इसी श्रीनाथजी मंदिर की जानकारी देने जा रहे है।

भगवान श्री कृष्ण का अनोखा मंदिर श्रीनाथजी मंदिर – Shrinathji Temple

श्रीनाथजी भगवान श्री कृष्ण के अवतार है और यह भगवान श्रीनाथजी एक छोटेसे सात साल के बालक के अवतार में विराजमान है। भगवान श्रीनाथजी का मंदिर राजस्थान के नाथद्वारा शहर में स्थित है। यह मंदिर उदयपुर से उत्तर पूर्वी दिशा में 48 किमी की दुरी पर स्थित है।

भगवान श्रीनाथजी वैष्णव संप्रदाय के प्रमुख देवता है और इस संप्रदाय को कुछ लोग पुष्टि मार्ग, वल्लभ संप्रदाय और शुद्धद्वैत नाम से भी जानते है और इस संप्रदाय की स्थापना वल्लभाचार्य ने की थी। भक्ति योग के अनुयायी और गुजरात और राजस्थान के वैष्णव प्रमुखता से श्रीनाथजी को मानते है और उनकी पूजा करते है। भाटिया लोग भी श्रीनाथजी के बड़े भक्त है।

वल्लभाचार्य के बेटे विट्ठल नाथजी भगवान श्रीनाथजी के बड़े भक्त थे और भगवान की निस्वार्थ रूप से सेवा और भक्ति करते थे। नाथद्वारा शहर में उन्होंने ही श्रीनाथजी की भक्ति को चरम सीमा पर पहुचाया था। इसकी वजह से नाथद्वारा के सभी लोग श्रीनाथजी की इतनी भक्ति करने लगे की कुछ समय बाद इस शहर को लोग श्रीनाथजी नाम से ही जानने लगे थे। इस शहर को कुछ लोग बावा की नगरी और श्रीनाथजी बावा की नगरी कहते है।

बचपन में भगवान श्री कृष्ण को देवदमन भी कहते थे क्यों की उन्होंने बचपन में ही गोवर्धन पर्वता को उठाया था जिसे इन्द्रदेव भी नहीं उठा सके थे। वल्लभाचार्य ने ही भगवान को गोपाल नाम दिया था और जिस जगह पर भगवान की पूजा की जाती है आज उस जगह को सभी गोपालपुर कहते। उसके बाद में विट्ठल नाथजी ने भगवान को श्रीनाथजी नाम दिया। यहापर …

Speak Child Speak

By MS

For my daughter

Speak, child, speak,
hold not your tongue because the question that you ask,
the answer that it brings may be the solution that saves us all

Speak, child, speak
Because ignorance is not bliss,
it is apathy to the mind.
It is the residue of stagnant thoughts that destroys itself fully
with the passions of time
& stagnation is death to young & old minds.

Speak, child, speak,
your voice may be the one that touches the world & shapes reality
into a paradise that women, men, & children may grow & peacefully live in.

Speak, child, speak,
Because my voice is old & un-remembered.
It is the weeping in the bowels of coffin ships & it is the creak of rope & wind
& silent kingdoms swaying in a sultry southern breeze,
it is the shackles of falsehoods binding me to inferior thoughts of mental slavery,
It is the sound of a fast life lived & lost in court rooms
silently weeping in cells trying to escape my self-created hell.

Speak, child, speak,
Because you are the Grace of God & the Dreams of a Nation.

SPEAK, CHILD, SPEAK…