बरसों के इंतज़ार का अंजाम लिख दिया

बरसों के इंतज़ार का अंजाम लिख दिया

बरसों के इंतज़ार का अंजाम लिख दिया
काग़ज़ पे शाम काट के फिर शाम लिख दिया

बिखरी पड़ी थी टूट के कलियाँ ज़मीन पर
तरतीब दे के मैंने तेरा नाम लिख दिया

आसान नहीं थी तर्क -ऐ -मुहब्बत की दास्ताँ
दो आंसूओं ने आखरी पैग़ाम लिख दिया

अल्लाह ज़िन्दगी से कब तक निभाऊं मैं
किस बेवफा के साथ मेरा नाम लिख दिया

तक़सीम हो रही थीं खुदाई की नेमतें
इक इश्क़ बच गया सो मेरे नाम लिख दिया

किसी की देंन हैं यह शायरी मेरी
किसकी ग़ज़ल पे किसने मेरा नाम लिख दिया

Barson ke intezar ka anjaam likh diya

Barson ke intezar ka anjaam likh diya
kaghaz pe shaam kaat ke phir shaam likh diya

bikhri paree thi toot ke kaliyan zameen par
tarteeb de ke maine tera naam likh diya

aasan nahin thi tark-e-muhabbat ki daastan
do aansoon ne aakhri paigham likh diya

allah zindagi se kab tak nibhaon main
kis bewafa ke saath mera naam likh diya

taqseem ho rahi thi khudai ki naimatain
ik ishq bach gaya so mere naam likh diya

kissi ki dein hain yeh shairee meri
kiski ghazal pe kisne mera naam likh diya…

शायरी – अदब-ऐ-वफ़ा

रूह

हम अपनी रूह तेरे जिस्म में छोड़ आये है
तुझे गले से लगाना तो एक बहाना था

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वो नज़र तो आया है

यही बहुत है की दिल उसे ढूंढ लाया है
किसी के साथ ही सही वो नज़र तो आया है

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मेरा शहर छोड़ दो

वो बात बात पर देते है परिंदों की मिसाल
साफ़ साफ़ नहीं कहते मेरा शहर छोड़ दो

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इश्क़ में ज़िद है

अंजाम की परवाह है तो इश्क़ करना छोड़ दो
इश्क़ में ज़िद है और ज़िद में जान भी चली जाती है

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अदब-ऐ-वफ़ा

अदब-ऐ-वफ़ा भी सीखो मोहबत की दरगाह में
फकत यूं ही दिल लगाने से , दिलो में घर नहीं बनते

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इतिफाक

अगर होता है इतिफाक तो यूँ नहीं होता
वो चले उस राह पर जो मुझपे आकर खत्म हुई

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दिल का सौदा

न कर सके हम उनसे दिल का सौदा
लूट के ले गए लोग हमे मोहबत का दिलासा दे कर

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सब को दुआओं में याद रखना आदत है मेरी

रिवायत

माना के मरने वालों को भुला देती है यह दुनिया
मुझे जीते जी को भुला कर तुम ने रिवायत ही बदल डाली

Riwayat

Maana ke Marnay Walon Ko Bhula Daiti hai yeah Dunya
Mujhe Jite ji Ko Bhula Kar Tum Ne Riwayat Hi Badal Dali..


मोहब्बत

भूल जाना भुला देना फ़क़त एक वेहम् ही तो है
दिलों से कब निकलते हैं , मोहब्बत जिन से हो जाये

Mohabbat

Bhool Jana Bhula Dena Faqat Ek Weham hi to Hai,
Dilon Se Kab Nikalte Hain, Mohabbat Jin Se ho jaye..


आदत है मेरी

हर सुबह दुआ देना फितरत है मेरी
हर एक को खुश देखना हसरत है मेरी
मैं किसी को याद आऊं या न आऊं
सब को दुआओं में याद रखना आदत है मेरी

Adat hai meri

Har Subah dua dena Fitrat hai meri
har ek ko khush dekhna Hasrat hai meri
mein kisi ko yaad aon ya na aon
sab ko duao mein yaad rakhna Adat hai meri..


वफ़ा

सारी रात तकलीफ देता रहा यही एक सवाल हमें
वफ़ा करने वाले हमेशा अकेले क्यों रह जातें हैं

Wafa

Sari raat Takleef Deta Raha Yahi ek Sawal Humein
Wafa Karnay Walay Humesha Akele Kyun Reh Jatein Hain.

 

ज़ख़्म-ऐ -जिगर तुमको दिखाएगें किसी रोज़ – परवीन शाकिर उर्दू शायरी

इश्क़ में सच्चा चाँद

पूरा दुःख और आधा चाँद हिजर की शब और ऐसा चाँद
इतने घने बादल के पीछे कितना तनहा होगा चाँद
मेरी करवट पर जाग उठे नींद का कितना कच्चा चाँद
सेहरा सेहरा भटक रहा है अपने इश्क़ में सच्चा चाँद

Ishq mein Sachcha chaand

Pura dukh aur Aadha Chaand Hijr ki shab aur Aisa Chaand
Itne ghane Badal ke piche Kitna tanha Hoga chaand
Meri karavat par Jag uthe Neend ka kitna Kachcha chaand
Sehra sehra Bhatak raha hai Apne ishq mein Sachcha chaand


मिन्नत -ऐ -सैयाद

बहुत रोया वो हम को याद कर के
हमारी ज़िन्दगी बर्बाद कर के

पलट कर फिर यहीं आ जायेंगे हम
वो देखे तो हमें आज़ाद करके

रिहाई की कोई सूरत नहीं है
मगर हाँ मिन्नत -ऐ -सैयाद कर के

बदन मेरा छुआ था उसने लेकिन
गया है रूह को आबाद कर के

हर आमिर तोल देना चाहता है
मुकर्रर-ऐ-ज़ुल्म की मीआद कर के

Minnat-ae-Saiyaad

Bahut roya wo hum ko yaad kar ke
Hamaari zindagi barbaad kar ke

Palat kar phir yahiN aajayenge hum
Wo dekhe to hamain aazaad karke

Rihaayi ki koi soorat nahi hai
Magar haaN minnat-ae-saiyaad kar ke

Badan mera chhuaa tha usne lekin
Gaya hai rooh ko aabaad kar ke

Har amir tool dena chaahta hai
Muqarrar-ae-zulm ki meeaad kar ke..


ज़ख़्म-ऐ -जिगर

उड़ने दो इन परिंदों को आज़ाद फ़िज़ाओं में
तुम्हारे होंगे अगर तो लौट आएंगे किसी रोज़
अपने सितम को देख लेना खुद ही साक़ी तुम
ज़ख़्म-ऐ -जिगर तुमको दिखाएगें किसी रोज़

Zakham-AE-Jigar

Udne do In Parindon Ko Azaad Fizaon Mein
Tumhare Honge Agar To Lout Aayein Gay Kisi Roz
Apne Sitam Ko Dekh Lena Khud Hi Saqi Tum
Zakham-AE-Jigar Tumko Dekhein Gaye Kisi Roz……

शायरी जो दिल में उतर जाये – लफ़्ज़ों की दास्ताँ

न किया कर अपने दर्द-ऐ-दिल को शायरी में बयान “मोहसिन”
लोग और टूट जाते हैं हर लफ़ज़ को अपनी दास्ताँ समझ कर

तुम नहीं , गम नहीं , शराब नहीं

तुम नहीं , गम नहीं , शराब नहीं
ऐसी तन्हाई का जवाब नहीं

कभी कभी इसे पढ़ा कीजिये
दिल से बेहतर कोई किताब नहीं

जाने किस किस की मौत आई है
आज रुख पे उनके कोई नक़ाब नहीं

वो कर्म उँगलियों पे गिनते हैं
ज़ुल्म का जिनके कुछ हिसाब नहीं

 

शायर – सईद राही


खत लिख रहा हूँ

खत लिख रहा हूँ अहदमोहब्बत को तोड़ के
काग़ज़ पे आंसुओं के थपेड़े छोड़ छोड़ के

तू फ़िक्र मंद क्यों है मेरा दिल तोड़ के
मैं खुद ही जा रहा हूँ तेरा शहर छोड़ के ..

कल रात लिखने बैठा ग़ज़ल तेरे नाम की
अल्फाज़ सामने थे खड़े यूँ हाथ जोड़ जोड़ के

जिसमें तुम्हारा अक्स _ऐ _हसीं देखता था मैं
तुमने तो रख दिया वही आइना तोड़ के

ये दास्ताँ _ऐ _ज़ीस्त भी कितनी तवील है
रखने पड़े हैं मुझ को कुछ वरक मोड मोड के .


जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा

मेरे जैसे बन जाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा
दीवारों से सर टकराओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा

हर बात गवारा कर लोगे मन्नत भी उतारा कर लोगे
ताबीजें भी बँधवाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा

तन्हाई के झूले खुलेंगे हर बात पुरानी भूलेंगे
आईने से तुम घबराओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा

जब सूरज भी खो जाएगा और चाँद कहीं सो जाएगा
तुम भी घर देर से आओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा

बेचैनी बढ़ जायेगी और याद किसी की आएगी
तुम मेरा नाम गुनगुनाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा

शायर – सईद राही


दोस्त बन बन के मिले मुझको मिटाने वाले

दोस्त बन बन के मिले मुझको मिटाने वाले
मैंने देखे हैं कई रंग बदलने वाले

तुमने चुप रहकर सितम और भी ढाया मुझ पर
तुमसे अच्छे हैं मेरे हाल पे हंसाने वाले

मैं तो इख़लाक़ के हाथों ही बिका करता हूँ
वो और होंगे तेरे बाजार में बिकने वाले

आखरी दौर पे सलाम-ऐ-दिल-ऐ-मुज़्तर ले लो
फिर ना लौटेंगे शब्-ऐ -हिजर पे रोने वाले

शायर – सईद राही


जहाँ क़तरे को तरसाया गया हूँ

जहाँ क़तरे को तरसाया गया हूँ
वहीँ डूबा हुआ पाया गया हूँ

बला काफी न थी एक ज़िन्दगी की
दोबारा याद फ़रमाया गया हूँ

सुपुर्दे ख़ाक ही करना है मुझको
तो फिर काहे को नहलाया गया हूँ

अगरचे अब्र -ऐ -गौहरबार …

इश्क़ की कीमत पूछ लो मुझ से – Passionate Shayari

तुम्हारा साथ

जी चाहता है तुम से प्यारी सी बात हो
हसीं चाँद तारे हो , लम्बी सी रात हो
एहसास हो , बात हो और तुम्हारा साथ हो
यही सिलसिला तमाम रात हो , तुम्हारा साथ हो
तुम मेरी ज़िन्दगी हो , तुम मेरी कायनात हो .

Tumhara Sath

Jee Chahta Hai Tum Se Pyari Si Baat Ho
Haseen Chand Tare Ho, Lambi Si Raat Ho
Ehsaas ho, baat ho aur tumhara sath ho
Yahi silsila tamam raat ho, tumhare sath ho
Tum Meri Zindagi Ho, Tum Meri Kayinat Ho.


तेरे क़दमों में

तुम न जाओ कहीं
बस एक नज़र देख लेने की इजाज़त दे दो
कुछ वक़्त गुज़ार लू तेरे क़दमों में
इक ज़िन्दगी जीने की इजाज़त दे दो

Tere Kadmo Mein

Tum na jao kahin..
Bas ek nazar dekh lene ki ijazat de do
Kuchh waqt guzar lo tere Kadmo mein
Ik zindagi jeene ki ijaazat de do


ऐतबार

किसी को प्यार इतना देना की हद न रहे
पर ऐतबार भी इतना रखना की शक न रहे
वफ़ा इतनी करना की बेवफाई न हो
और दुआ बस इतनी करना की जुदाई न हो

Aitbaar

Kisi ko pyar itna dena ki had na rahe
par aitbaar bhi itna rakhna ki shak na rahe
wafa itni karna ki bewafai na ho
aur dua bus itni karna ki judai na ho


इश्क़ की कीमत

मौत के पास जा कर भी देखा है
मैंने दिल लगा कर भी देखा है

चाँद को लोग दूर से देखते है
मैंने चाँद को पास बुला कर भी देखा है

इश्क़ की कीमत पूछ लो मुझ से
मैंने घर तक लुटा कर भी देखा है

प्यार तो भीख में भी मिल जाता है
मैंने तो दामन को भी फैला कर देखा है

एक शख्स है जो भूलता नहीं मुझसे
मैंने तो सारी दुनिया को भुला कर भी देखा है

Ishq Ki Kimat

Mout ke paas ja kar bhi Dekha hai
Meine Dil Laga kar bhi dekha hai

Chaand ko log Door se Dekhte hai
Meine chaand ko Pass Bula kar bhi Dekha hai

Ishq Ki Kimat Puch loo mujh say
Meine Ghar Tak Luta kar bhi Dekha hai

pyar to bhekh mein bhi mil jata hai
Meine to daaman ko bhi Pehla kar dekha hai

Ek shaks hai jo bhulta nhi mujh say
Meine to Sari dunya ko bhula kar bhi dekha hai…