Punjabi Shayari – पंजाबी शायरी

रब दी सो में तेनु प्यार नी कीता

आधी रात नु दिल दी देहलीज उते
इक सूपना आन खलो जाँदा
आ बेहन्दे हो सिरहाने तुसी
सोना मुस्किल हो जाँदा है
प्यार तेरे दा दर्द वे सजना
मेरी नाड़ी नाड़ी टओ जाँदा
रब दी सो में तेनु प्यार नी कीता
ऐ ता अपने आप ही हो जाँदा…


मौत ता बुरी चीज़ है यारो

मौत ता बुरी चीज़ है यारो
पर मौत तो बुरी जुदाई
सब तो बुरी उडीक साजन दी
जो रख दी खून सुखाई……

Read More

किस ने की थी वफ़ा जो हम करते – Faraz Ahmed Shayari

नाकामी

अपनी नाकामी का एक यह भी सबब है ” फ़राज़ ”
चीज़ जो भी मांगते हैं सब से जुदा मांगते हैं

Naakami

Apni Naakami Ka Ek Yeh Bhi Sabab Hai “Faraz”
Cheez Jo Maangte Hain Sub Se Juda Maangte Hain


बरसो के प्यासे

बस इतना ही कहा था हम बरसो के प्यासे हैं ” फ़राज़ “
होंटो को उस ने चूम कर खामोश कर दिया .

Barso ke pyase

bus itna hi kaha tha hum barso ke pyase hain “Faraz”
honto ko us ne choom kar khamosh kar diya.


बिछडने का सलीका

उस को तो बिछडने का सलीका भी नहीं आया ” फ़राज़ “
जाते हुए वो खुद को यहीं छोड़ गया

Bicharne ka Saleeka

Us ko to Bicharne ka Saleeka bhi nahi ayaa “Faraz”
Jate hue Khud ko yahin Chor gaya.


तेरे जाने के बाद

अकेले तो हम पहले भी जी रहे थे ” फ़राज़ “
क्यों तन्हा से हो गए है तेरे जाने के बाद

Tere Jane Ke Baad

Akele To Hum Pehle Bhi Ji Rahe The “Faraz”
Kyon Tanha Se Ho Gaye Hai Tere Jane Ke Baad


दो गज़ कफ़न

ऐ इंसान इब्न-ऐ -आदम से नंगा आया है तू ” फ़राज़ ”
कितना सफर किया है तूने दो गज़ कफ़न के लिये

Do Ghaz Kafan

Ae Insaan Ibn-E-Aadam Se Nanga Aya Hai To “Faraz”
Kitna Safar Kiya Hai tune do Ghaz Kafan Ke Liye.


वफ़ा

मेरे शिकवों पर उस ने हँस के कहा ” फ़राज़ “
किस ने की थी वफ़ा जो हम करते

Wafa

Mere Shikwon Par Us Ne Hans Ke Kaha
Kis Ne Ki thi Wafa Jo Hum Karte


बेवफाई का क़िस्सा

हम सुना रहे थे अपनी बेवफाई का क़िस्सा ” फ़राज़ “
अफ़सोस इस बात का है लोगो ने तो वाह वाह कहा , उन्होंने भी वाह वाह कहा

Bewafai Ka Qissa

Hum Suna Rahe The Apni Bewafai Ka Qissa “Faraz”
Afsos is Baat Ka hai logo Ne To Wah Wah kaha,Unhone Bhi Wah Wah Kaha…

Read More

गम-ऐ-मुहब्बत शायरी

दिल का आलम

सिर्फ चेहरे की उदासी से भर आए आँसू
दिल का आलम तो अभी आप ने देखा ही नहीं …

Dil ka Alam

Sirf chehray ki Udasi say bhar aye Ansoo
Dil ka alam tu Abhi ap nay Dekha hi nahi…


गम-ऐ-मुहब्बत

वो जो बिछड़ा तो मैंने जाना
लोग मर मर कर भी जिया करते हैं ..!!

Gam-AE-mohabbat

Who Jo Bichra Tu Main Ne Jana
Log Mar Kar Bi Jiya Kartey Hai’n..!!


आईना

जो दिल के आईने में हो ,
वही है प्यार के क़ाबिल
वरना दीवार के क़ाबिल तो हर तस्वीर होती है

Aaiena

Jo Dil Ke Aainey Mein Ho,
Wohi Hai Pyaar Ke Qaabil
Warna Dewaar Ke Qabil To Har Tasveer Hoti Hai


वो तो खुश्बू है हवाओं में बिखर जाएगा

वो तो खुश्बू है हवाओं में बिखर जाएगा
मसला फूल का है फूल किधर जाएगा

हम तो समझे थे के एक ज़ख्म है , भर जाएगा
क्या खबर थी के रग -ऐ -जान में उतर जाएगा

वो हवाओं की तरह खाना -बेजान फिरता है
एक झौंका है जो आएगा गुज़र जाएगा

वो जब आएगा तो फिर उस की रफ़ाक़त के लिए
मौसम -ऐ -गुल मेरे आँगन में ठहर जाएगा

आख़िर वो भी कहीं रेत पे बैठी होगी
तेरा यह प्यार भी दरिया है उतर जाएगा

Wo to Khushbu hai hawaaon mein bikhar jaayegaa

Wo to Khushbu hai hawaaon mein bikhar jaayegaa
mslaa phuul ka hai phuul kidhar jaayegaa

hum to samjhe the ke ek zaKhm hai, bhar jaayegaa
kyaa Khabar thi ke rag-ae-jaaN mein utaar jaayegaa

wo hawaaoN ki tarah Khaanaa-bajaaN phirtaa hai
ek jhonkaa hai jo aayegaa guzar jaayegaa

wo jab aayegaa to phir us kii rafaaqat ke liye
mausam-e-gul mere aangan mein Thaher jaayegaa

aaKhir wo bhi kahin ret pe baithi hogi
teraa ye pyaar bhi dariyaa hai utar jaayegaa…

Read More

फ़राज़ और मोहसिन नक़वी की खूबसूरत उर्दू शायरी

तन्हाई और महफ़िल – फ़राज़

तन्हाई में जो चूमता है मेरे नाम के हरूफ फ़राज़
महफ़िल में  वो शख्स मेरी तरफ देखता भी नहीं ​

Tanhai Aur Mehfil – Faraz

Tanhai main jo chomta hai mere naam ke haroof  “Faraz”
Mehfil mein wo shakhas meri taraf dekhta bhi nahi​


जिंदगी और मौत – फ़राज़

कोई न आएगा तेरे सिवा मेरी जिंदगी में  “फ़राज़”
एक मौत ही है जिस का हम वादा नही करती ​

Zindgi Aur Maut – Faraz

Koi na ayega tere siwa meri zindgi main “Faraz”
Ek maut hi hai jiss ka hum wada nahi karte


मिज़ाज़ और धड़कन – फ़राज़

कितना नाज़ुक मिज़ाज़ है  उसका  कुछ न पूछिये  “फ़राज़”
नींद नही आती उन्हें धड़कन के शोर से ​

Mizaz Aur Dhadkan – Faraz

Kitna nazuk mizaz hai uska kuch na puchiay “Faraz”
Neend nhi ati unhe Dhadkan ke shor se​


खुश और उदास – फ़राज़

वो मुझ से बिछड़ कर खुश है तो उसे खुश रहने दो “फ़राज़ “
मुझ से मिल कर उस का उदास होना मुझे अच्छा नहीं लगता

Khush Aur Udaas – Faraz

Wo mujh se bichad kar khush hai to usse khush rehne do “Faraz”
Mujh se mil kar us ka udass hona muje acha nai lagta


बेवफा और ज़िंदगी – फ़राज़

वो बेवफा ही सही, आओ उसे  याद कर लें  “फ़राज़”
अभी ज़िंदगी बहुत पड़ी है, उसे भुलाने के लिए ​

Bewafa Aur Zindgi – Faraz

Wo bewafa hi sahi aao usse yaad kar lein “Faraz”
Abhi zindgi bahut padi hai usse bhulane ke liye​


आँखें – मोहसिन  नक़वी 

तेरी कम गोइ के चर्चे हैं ज़माने भर में  “मोहसिन”
किस से सीखा है यूँ आँखों से बातों की वज़ाहत करना ​

Anken – Mohsin Naqvi

Teri kam goi ke charche hain zamane bhar main “Mohsin”
Kis se seekha hai yun ankhon se baton ki wazahat karna​


हाथों की लकीरें – मोहसिन  नक़वी 

अपने हाथों की लकीरें न बदल पाया  “मोहसिन”
खुशनसीबो से बहुत हाथ मिलाये हम ने ​

Hathon ki Lakeerain – Mohsin Naqvi

Apne hathon ki lakeerain na badal paya “Mohsin”
khush naseebo se bahut hath milay hum ne​…

Read More

ख्वाब टूटें या बिक जाएँ – ग़मगीन शायरी

मेरे दिल में

घर बना कर वो मेरे दिल में छोड़ गया है
न खुद रहता है न किसी और को बसने देता है

Mere Dil Mein

Ghar bana kar wo mere dil mein chod gaya hai
Na khud rehta hai na kisi aur ko basne deta hai


ज़रा ठहर जाओ

थकी थकी सी फ़िज़ाएं , बुझे बुझे से तारे
बड़ी उदास गहरी रातें है , ज़रा ठहर जाओ

Zara Tehar Jao

Thaki thaki si fizaayen, bujhey bujhey se taare
Badi udaas gehri ratein hai, zara tehar jao


दस्तक की तमन्ना

उजड़े हुए घर का मैं वो दरवाज़ा हूँ “मोहसिन”
दीमक की तरह खा गयी जिसे तेरी दस्तक की तमन्ना

Dastak ki Tamanna

Ujde hue ghar ka main wo darwaaza hoon “Mohsin”
Deemak ki tarah kha gayi jise teri dastak ki tamanna


वो कितना मेहरबान था

वो कितना मेहरबान था के हज़ारों ग़म दे गया “मोहसिन”
हम कितने खुदगर्ज निकले कुछ न दे सके “मुहब्बत ” के सिवा

Wo Kitna Mehrban Tha

Wo Kitna Mehrban Tha Ke Hazaron Ghum De Gaya “Mohsin”
Hum Kitne Khudgaraz Nikle Kuch Na De Sake “MUHABBAT” Ke siva


बहलाया था दिल

मौजूद थी उदासी अभी पिछली रात की
बहलाया था दिल ज़रा सा के फिर रात हो गयी

Behlaya Tha Dil

Mojood thi udaasi abhi pichli raat ki
behlaya tha dil zara sa ke phir raat ho gayi


यकीन दिल दो

तुम मेरे हो इस बात में कोई शक नहीं
तुम किसी और के नहीं होंगे इस बात का यकीन दिल दो

Yakeen Dila Do

Tum Mere Ho Is Baat Me Koi Shak Nahi
Tum kisi Aur Ke Nahi Hoge is Baat Ka Yakeen Dila Do


पैग़ाम -ऐ -शौक

पैग़ाम -ऐ -शौक को इतना तवील मत करना ऐ “क़ासिद”
बस मुकतसर उन से कहना के आँखें तरस गयी हैं

Paigham-ae-Sauk

Paigham-ae-Sauk Ko Itna Taveel Mat Karna Ae “Qasid”
Bas Muqtasar Un Se Kehna Ke Aankhein Taras Gayi Hain


फितरत -ऐ -इंसान

गुफ़्तुगू कीजिये के यह फितरत -ऐ -इंसान है “शाकेब”
जाले लग जाते हैं जब बंद मकान होता है

Fitrat-ae-Insan

Guftugu kijiye ke yeh fitrat-ae-insan hai “Shakeb”
Jaalay lag jatay hain jab band makaan hota hai

Read More

वक़्त के साथ गर हम भी बदल जाते तो अच्छा था

वक़्त के साथ गर हम भी बदल जाते तो अच्छा था …
बहुत अरमान थे दिल में निकल जाते तो अच्छा था …

न शीशे के रह पाये न पत्थर के हो पाये …
किसी अच्छे से साँचे में जो ढल जाते तो अच्छा था …

गिरे तो यूँ गिरे के गिराया सब ने नज़रों से …
ज़रा सा लड़खड़ा कर संभल जाते तो अच्छा था …

वो हम से ऐसे रूठे हैं जैसे हम अंदर से टूटे हैं …
किसी बच्चे की मानिंद ही मचल जाते तो अच्छा था …

सफर में हो कोई साथी तो आसानी सी रहती है …
अकेलेपन के ज़ालिम पल जो टल जाते तो अच्छा था


waqt key sath gar hum bhi badal jatay to accha tha…
Bahat arman they dil mein nikal jatey to accha tha…

Na sheeshey ke rah paye na pathar key ho paye…
Kisi acchey se sanchay mein jo dhal jatey to achcha tha…

Girey to yun girey key Giraya sab ne nazaron se…
zara sa ladkhada kar sambhal jatay to accha tha…

Woh hum se aise roothey hain jaise hum ander se tootey hain…
Kisi bachey ki manind hi machal jatey to accha tha…

Safar mein ho koi sathi tuo asani si rehti hai…
Akelaypan key Zalim pal jo tal jate to accha tha…

Read More

छोड़कर तेरी चाहत पराई लगे दुनिया सारी – तेरे इश्क़ में

बला है इश्क़

कहर है , मौत है , सजा है इश्क़
सच तो यह है बुरी बला है इश्क़
करते सब है पर सब से हारा है इश्क़

Blaa Hai IshQ

Kehar Hai, Mout Hai, Saja Hai IshQ
Sach To Yeh Hai Buri Blaa Hai IshQ
karte sab hai par sab se hara hai ishq


आप की मुस्कुराहट

मेरी किसी खता पर नाराज़ मत होना
अपनी प्यारी सी मुस्कान कभी न खोना
सकून मिलता है देख कर आप की मुस्कुराहट को
मुझे मौत भी आये तो भी तुम मत रोना

Aap ki Muskurahat

Meri kisi khata par naraz mat hona
Apni pyari si muskan kabhi kabhi na khona
Sakoon milta hai dekh kar aap ki muskurahat ko
Mujhe mout bhi aaye to bhi tum mat rona


मेरा इंतज़ार

मुझे भी कोई याद कर रही होगी
अपने सपनो मैं वो मुझे सजा रही होगी
कोई कहे या न कहे मगर
वो मेरा इंतज़ार ज़रूर कर रही होगी

Mera Intezar

Mujhe bhi koi yaad kar rahi hogi
Apne sapno main wo mujhe saja rahi hogi
Koi kahe ya na kahe magar
Wo mera intezar zaroor ka rahi hogi


ज़िन्दगी तेरे नाम

हर बला से खूबसूरत तेरी शाम कर दूँ
प्यार अपना मैं तेरे नाम कर दूँ
मिल जाये अगर दोबारा यह ज़िन्दगी
तो हर बार यह ज़िन्दगी तेरे नाम कर दूँ

Zindagi Tere Naam

Har bla se khubsurat teri sham kar du
pyaar apna main tere naam kar du
Mil jaye agar dobara yeh zindagi
To har bar yeh zindagi tere naam kar du


छोड़कर तेरी चाहत

ज़िन्दगी कुछ अधूरी सी लगे तेरे प्यार के बिना
मुनासीब नहीं है जीना मेरे लिए तेरे साथ के बिना
छोड़कर तेरी चाहत पराई लगे दुनिया सारी
इस दिल ने सीखा नहीं धड़कना तेरी याद के बिना

Chodkar Teri Chahat

Zindagi kuch adhuri si lage tere pyaar ke bina
Munasib nahi hai jeena mere liye tere saath ke bina
Chodkar teri chahat parai lage duniya saari
Is dil ne seekha nahi dhadkna teri yaad ke bina…

Read More

कभी कभी मेरे दिल मैं ख्याल आता हैं – Bollywood Shayari

कभी कभी मेरे दिल मैं ख्याल आता हैं

कभी कभी मेरे दिल मैं ख्याल आता हैं
कि ज़िंदगी तेरी जुल्फों कि नर्म छांव मैं गुजरने पाती
तो शादाब हो भी सकती थी।

यह रंज-ओ-ग़म कि सियाही जो दिल पे छाई हैं
तेरी नज़र कि शुआओं मैं खो भी सकती थी।

मगर यह हो न सका और अब ये आलम हैं
कि तू नहीं, तेरा ग़म तेरी जुस्तजू भी नहीं।

गुज़र रही हैं कुछ इस तरह ज़िंदगी जैसे,
इससे किसी के सहारे कि आरझु भी नहीं.

न कोई राह, न मंजिल, न रौशनी का सुराग
भटक रहीं है अंधेरों मैं ज़िंदगी मेरी.

इन्ही अंधेरों मैं रह जाऊँगा कभी खो कर
मैं जानता हूँ मेरी हम-नफस, मगर यूंही

कभी कभी मेरे दिल मैं ख्याल आता है…


जब लोग वाह वाह करते है
 

दिल के छालों को कोई शायरी कहे
तो दर्द नहीं होता
दर्द तो तब होता है
जब लोग वाह वाह करते है…


तेरा मुजरिम हूँ
 

अपनी आँखों के समंदर में उतर जाने दे
तेरा मुजरिम हूँ , मुझे ड़ूब के मर जाने दे
ज़ख्म कितने तेरी चाहत से मिले है मुझको
सोचता हूँ कहूँ तुझे , मगर जाने दे…


ऐसे मौसम में ही तो प्यार जवां होता है
 

फूल खिलते है बहारों का समां होता है
ऐसे मौसम में ही तो प्यार जवां होता है
दिल की बातों को होंठों से नहीं कहतें
यह फ़साना तो निगाहों से बयां होता है…


तेरा नाम मेरे नाम के साथ
 

गर्मिये हसरत के नाकामी से जलते है
हम चिरागों की तरह शाम को जलते है
जब आता है तेरा नाम मेरे नाम के साथ
न जाने क्यों लोग हमारे नाम से जलते है…


दिल से हमे भुलाओगे कैसे
 

हमसे दूर जाओगे कैसे
दिल से हमे भुलाओगे कैसे
हम वो खुश्बू हैं जो
साँसों में बस्ते है
खुद की साँसों को रोक पाओगे कैसे…


बेख़ुदी की ज़िन्दगी
 

बेख़ुदी की ज़िन्दगी हम जिया नहीं करते
जाम दूसरो से छीनकर हम पिया नहीं करते
उनको मोहबत है तो आकर इज़्हार कर
पीछे हम भी किसी के जाया नहीं करते…


इतनी शिद्दत से
 

इतनी शिद्दत से मैंने तुम्हे पाने की कोशिश की है
की हर एक जर्रे ने मुझे तुमसे मिलाने की साज़िश की है…

Read More

Yaadein Shayari in Hindi on Unko Hamara Intezar

कब उनकी आँखो से इज़हार होगा,
दिल के किसी कोने में हमारे लिए प्यार होगा,
गुज़र रही हे रात उनकी याद मे,
कभी तो उनको भी हमारा इंतज़ार होगा..…

Read More

तेरी खुशबू का एहसास – अक्स-ऐ-खुशबू हूँ उर्दू शायरी

अक्स -ऐ -खुशबू हूँ

अक्स -ऐ -खुशबू हूँ बिखरने से न रोके कोई
और बिखर जाऊं तो मुझे न समेटे कोई

काँप उठती हूँ मैं इस तन्हाई में
मेरे चेहरे पे तेरा नाम न पढ़ ले कोई

जिस तरह ख्वाब मेरे हो गए रेज़ा-रेज़ा
इस तरह से न कभी टूट के बिखरे कोई

मैं तो उस दिन से हरासां हूँ के जब हुक्म मिले
खुश्क फूलों को किताबों में न रखे कोई

अब तो इस राह से वो शख्स गुज़रता भी नहीं
अब किस उम्मीद से दरवाज़े से झांके कोई

कोई आवाज़ ,कोई आहात ,कोई चाप नहीं
दिल की गलिया बड़ी सुनसान हैं आये कोई

Aks-AE-Khushboo

Aks-AE-Khushboo Hoon Bikharne Se Na Roke Koi
Aur Bikhar Jaaun To Mujhe Na Samete Koi

Kaanp Uthti Hoon Main Iss Tanhaai Mein
Mere Chehre Pe Tera Naam Na Padh Le Koi

Jis Tarah Khwaab Mere Ho Gaye Reza-Reza
Is Tarah Se Na Kabhi Toot Ke Bikhre Koi

Main To Us Din Se Harasaan Hoon Ke Jab Hukm Mile
Khushk Phoolon Ko Kitabon Mein Na Rakhe Koi

Ab To Is Raah Se Wo Shakhs Guzarta Bhi Nahin
Ab Kis Ummeed Se Darwaaze Se Jaahnke Koi

Koi Aawaaz,Koi Aahaat,Koi Chaap Nahin
Dil Ki Galyaan Badi Sunsaan Hain Aaye Koi..


खुशबू की तरह आया वो

खुशबू की तरह आया वो तेज़ हवाओं में
माँगा था जिसे हम ने दिन रात दुआओं में
तुम चाट पे नहीं आये मैं घर से नहीं निकल
यह चाँद बहुत भटकता है सावन की घटाओं में

Khushboo ki Tarah Aaya wo

Khushboo ki Tarah Aaya wo tez Hawaaon mein
Manga tha jise hum ne Din Raat Duaaon mein
Tum Chat pe nahi aaye Main Ghar se nahi Nikla
Yeh Chaand bahut bhatka hai Saawan ki Ghataon mein..


खिलावत -ऐ -खुशबू

तेरे हुनर में खिलावत -ऐ -खुशबू सही मगर
काँटों को उम्र भर की चुभन कौन दे गया
“मोहसिन” वो कायनात -ऐ -ग़ज़ल है उससे भी देख
मुझ से न पूछ मुझ को यह फन कौन दे गया

Khilwat-AE-khushboo
 

Tere hunar mein khilwat-AE-khushboo sahi magar
Kaanton ko umar bhar ki chubhan kaun day gaya
“Mohsin” wo kaayinaat-ae-ghazal hai ussay bhi deikh
Mujh say na pooch mujh ko yeh fun kaun day gaya..


तेरी बात से खुशबु आये
 

तेरी हस्ती से तेरी ज़ात से खुशबु आये
तू जो बोले तो तेरी बात से खुशबु आये

तुझको देखों तो मेरी आँख महक सी जाये
तुझको सोचूं तो ख्यालात से खुशबु आये

तू चमेली है , …

Read More