अपने एक्सपीरियंस से जाना प्यार और हवस में अंतर – Love Vs Lust in Hindi

Love Vs Lust in Hindi

Submitted by an Unknown Female Author

मैं एक बोल्ड लड़की हू और मेरे कई लव अफेयर रह चुके है. प्यार और हवस दोनों अलग-अलग चीज़े है और अगर कोई रिलेशनशिप में है तो ये जानना बहुत ज़रूरी है कि वाकई में इस रिलेशन में प्यार है या सिर्फ हवस है.

Love Vs Lust in Hindi

वैसे तो मैं इंग्लिश में लिखना चाहती थी लेकिन मुझे ये वेबसाइट किसी ने बताई और मुझे इस साइट की स्टोरीज काफी अच्छी लगी. बस इसीलिए मैंने सोचा क्यों ना इस ब्लॉग को मैं हिंदी में ही लिख दू. वैसे भी मैं भारत में रहती हु और यहाँ ज़्यादातर लोगों को हिंदी समझ आती है लेकिन इंग्लिश सभी को समझ नहीं आती.

खैर, अब बात करते है Love Vs Lust in Hindi

पहले बात करते है रिलेशन में हवस की !

जब रिलेशनशिप में हवस हो?

जैसा कि मैंने बताया की मेरे कई बॉयफ्रेंड रह चुके है और मैं ज़्यादातर लड़को के साथ सीरियस नहीं थी. मैं सच बताऊ तो मुझे इंटिमेट होना बहुत पसंद है. जब भी किसी रिलेशनशिप में हवस ज़्यादा हो जाती है तो वो एक दूसरे के शरीर और खासकर एक दूसरे के इंटिमेट पार्ट्स पर ज़्यादा ध्यान देते है. ऐसे में प्यार पर कपल्स ज़्यादा चर्चा नहीं करते, उनके दिमाग में सिर्फ एक ही चीज़ चल रही होती है जैसे कि ” ये मुझे टच क्यों नहीं करता / करती ” या फिर ” ये मुझे अकेले में क्यों नहीं बुलाता / बुलाती ” . ऐसे रिलेशन में इमोशंस नहीं होते। ऐसे रिलेशनशिप में बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड एक दूसरे से सिर्फ वही बात करते है जो वो सुनना चाहत है. हवस भरे रिलेशन में लड़का और लड़की एक दूसरी की आँखों में बहुत कम देखते है और वो एक दूसरे को अपने दोस्त या रिस्तेदारो से भी नहीं मिलवाते.

Love Vs Lust in Hindi – जब रिलेशनशिप में प्यार हो

जब रिलेशनशिप में प्यार हो तो आप कही भी हो आपको अपने पार्टनर का एहसास हमेशा साथ रहता है. एक दूसरे के साथ वक़्त बिताना अच्छा लगता है चाहे आप कितना भी बिजी क्यों ना हो. आप जिससे प्यार करते हो वो आपको हमेशा ज़िन्दगी में सफल होने की प्रेरणा देता है और आप उसके साथ जितना भी वक़्त बिताये, कम ही लगता है. आप अपने पार्टनर की पसंद और ना पसंद के बारे में ज़्यादा सोचते हो. प्यार एक अलग ही एहसास है.

Love Vs Lust in Hindi

जब …

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स्कूल सैड लव स्टोरी इन हिंदी | पहला प्यार

स्कूल सैड लव स्टोरी इन हिंदी | पहला प्यार

यूं तो दीवानगी की कोई हद कोई उम्र नहीं होती। पर जब ये अधूरी हो पूर्ण ही कहलाती तब वो इतिहास में एक अनोखी कहानी लिखी जाती। ऐसी ही एक कहानी है “स्कूल सैड लव स्टोरी इन हिंदी | पहला प्यार”। यह पूर्णतया काल्पनिक है इसमें इस्तमाल किए गए चरित्र काल्पनिक है धन्यवाद।

स्कूल सैड लव स्टोरी इन हिंदी | पहला प्यार

पहली किरण के साथ निकला टहलने मैं अद्वितीय स्फूर्ति जगा,  हवाओं की हस्ती में उड़ता चला जा रहा था,
यूं तो मन में नहीं उबाला था कि नैनों से घायल मैं हो पाऊंगा कभी पर क़िस्मत को तो मंजूर कुछ और ही था||

कदमों के उठा पटक के बीच अचानक ठहराव शब्द प्रधान बन गया, जब तक खुद को बता पाता समझ पाता…
मैं घायल हो चुका था, नजरों का बार बार टकराना दिल का सीने को धकेल.. धड़क उठना, चलता रहा-चलता रहा|

सड़क के उस पार एक ग्वाले का घर था जिनकी बेटी का विवाह होगा शायद, उनके घर खूब मस्ती माहौल था… गानों का रंगारंग कार्यक्रम चल रहा था|

उस वक़्त और भी शानदार लगने लगा जब मेरी और उसकी आंखें एक पल के लिए एक दूसरे में खो चली, अब ये करामात उस डीजे वाले की थी या क़िस्मत की, ये बात दोनों जाने|पर यहां हर गाना मेरे दिलों दिमाग़ को पढ़ कर ही बजता रहा|

“नहीं चल सकूँगा तुम्हारे बिना मैं मेरा तुम सहारा बनो इक तुम्हें चाहने के अलावा और कुछ हमसे होगा नहीं बोल दो ना ज़रा दिल में जो है छिपा मैं किसी से कहूँगा नही” शायद हम दोनों का गाने के बोल पे उतना ही ध्यान था जितना एक दूसरे पर और गाने के बोल सुन उनकी निगाहों पे वो तिलिस्मी मुस्कान और लज्जा के साथ हलकी हलकी पलकों को झुकाना|

मेरे दिल को बुरे तरीके से घायल करने के लिए काफी था| मानों वर्षों से थका सुकून की बारिश में भीग रहा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क वहां से कुछ कह रहा, मत कर बेमानी मुझसे वो पास है| मान लो मेरा आज एक अलग जगह है। लंबी लंबी सांसें छोड़ मैं उससे कह रहा- ऐ नादां दिल संभालो खुद को बेकाबू मत हो…तुम्हारी यही जगह है।

“ख़ामोशियाँ रखती हैं अपनी भी एक जुबां, ख़ामोशी को चुपके से सब कह जाने दो…
कुछ तो हुआ है ये क्या हुआ जो ना पता है, ये जो हुआ कुछ तो हुआ है समझो कुछ समझो ना”

और इस गाने ने तो जां …

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JANU KO GALE LAGA KE – Akash

Pahali bar mile apani jan se muskura ke,
Dur hone ka man nhi kr raha tha pass aa ke,
Dil ki sari bechaini dur karani thi,
Bas ek bar apane janu ko gale laga ke…

Vo rat bhar mere pass soi. Rato ko sapano me khoi,
Sari duriya mita gaya vo lamha,
Jb vo soi mere pass aa ke…

Dil kr raha tha gale laga ke sou,
Sari rat usake sath sapano me khou,
Ji bhar ke sukun ki sans lu,
Usako apani banho me sama ke…

Subah jb jgaya mujhe to, sab khali-khali sa tha,
Bas waha vo thi aur mai tha,
Labo par ek jam chaha aur muskurakar diya usane…

Pass aya mai usake apane sare dard bhula ke,
Janu bani vo meri. Meri dilo jan me sama ke,
Bate karata hu ab mai sabase muskura ke,
Bas khvahish hai meri,
Ek aur jam mil jaye,
Gale laga ke… !!!…

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Jaate jaate rok bhi na paya – Prince

PyAr karo to usko hamesha pahchane ki koshish karo balki ye mat socho ki usko ap ache se jante ho ki nhi kyuki kbi kbi anjane me ap kahi na kahi na chahte hue v kisiko hurt to kar rahe hote ho.. kyu ki pyar me jab kbi pass koi hota hai to lagta hai ki sab hai ap ke pass par, jab wo special jata hai to apko moka nhi deta jinda rhne ka.. hiiiiiiiiii………. Is story ke 2 character h 1st is prince(27) nd 2nd is princess(26).. mere pyar ki shuruaat kab hui mujhe pata nhi chala mera pyar mere dosto ki wajah se hua.. jab may pahli bar us college me gaya to mane nhi socha tha ki mujhe bhi kisi se pyar hoga waha mari dosti ak ladki se hui jis ka nam princess tha ham log jada se jada samay sath me bitate the ek sath kafi bate karte the ham logo ki dosti kafi achi ho gai thi.

Ek din usne mujh se pucha tuhmari koi girl fnd hai kya mane jawab diya nhi fir hamare 12th ke paper hue roj ham ak dusre se puch te ki paper kisa hua last day jab hmare paper katam hue to us ka phone mere ghar ke namber par aya meri class ki 3 or frnd ne bhi mujh se bat ki uske sth usne bhi ki mujhe laga ki wo mujh se pyar karti hai mae uski frnd se pucha ki wo mujhe like karti hai to usne kaha nhi yar princess ne kaha hai ki wo prince ko ek sacha dost manti hai or kuch nhi or fir mai apne gaav chala gaya chuttiyo me waha papa gar ban wa rahe the meri chuttiya khatam hogai thi par fir bhi mera wahan ka kam khatam nhi hua tha is liye wahi tha kam katam hone par mai delhi aya mene b.com me jab maine class join kiya to wo bhi wahi thi usne bhi b.com li thi mai jakar chair par beth gaya or sir pada rahe the tabhi mari najar us par padi to dikha wo mujhe hi dek rahi thi mene bar bar bar dekha wo sirf mujhe hi dek rahi thi maine use bat nhi ki par mujhe kya pata ki wo mujhe like karne lagi hai.

Ek din sir ne axtra class rakhi sir ne padaya or fir bola todi …

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Aaj fir holi aayi hai – Amit

Aaj fir holi aayi hai,

dher saare rang laayi hai,

in rango ke beech,

humne apni khushiya sajayi hai,

Aaj fir holi aayi hai.

Dosto ne rango ki barsaat karayi hai,

Rango me rang ke hamne reet nibhayi hai,

Aaj fir holi aayi hai.

Wo rango se khelna, wo pichkari se ladna,

Wahi khoobsurat ladayi fir saath laayi hai,

Aaj fir holi aayi hai.

Gehre rango me uska chehra dhondna,

sabse bachke use rangna,

Uske sunhere chehre ko apne rang me ragne aayi hai

Aaj fir holi aayi hai.

Wo uska mere liye gujiya lana,

Chupke chupke mujhe khilana,

Wo meri berang zindagi me fir rang bharne aayi hai,

Aaj fir holi aayi hai.…

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मैं भी इसी कोशिश में हूं – Ajay

कभी कभी ऐसे पल भी हमारे जीवन में आते हैं जब किसी के हां या ना भर कह देने से सब कुछ बदल जाता है। कुछ ऐसा ही हमारे साथ भी हुआ जब बार-बार मैं उससे पुछता..क्या तुम रूक सकती हो? और उसे हर बार मुझे एक ही जवाब देना पड़ता..”नहीं, तुम जिस तरह से मुझे रोकना चाहते हो मैं नहीं रुक सकती”।ये सुन कर मैं हर बार आहत होता रूआंसा सा हो जाता।फिर भी बार-बार उससे पुछता क्या हमारे बीच कोई रिश्ता नहीं है?पता नहीं क्यूं नहीं सुन कर भी मुझे क्यूं विश्वास था कि वो एक दिन हां कह देगी। पता नहीं उसके हां और ना से ही फैसला क्यूं होना था, दुनिया में मान लेने से भी तो चीजें होती हैं ना?मान लेने से मैथ्स साल्व हो जाता है,मान लेने से ही तो काशी में महादेव हैं।

पर मैं जानता हूं कि उसके “नहीं”कहने में भी ईमानदारी ही थी अन्यथा उसने हां का वचन जिसे दिया है उसके प्रति अन्याय होता। एक इंसान भावनात्मक रूप से दो लोगों का बराबर कभी नहीं हो सकता। उसके लिए उसे किसी एक के साथ थोड़ा बेईमान होना पड़ता है।….. कहीं पहुंचने के लिए कहीं से निकलना बहुत जरूरी है।
बस मैं भी इसी कोशिश में हूं…!!…

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Pyar ki khusi Part I – Dev Aggarwal

Mai Dev Agrawal. Age 21year my story u must read

MAi alwar ka rahne wala hu meri love story 23-8-2018 ko start hui or 20-9-2018 ko the end
Hua kuch aisa tha

Ek ladki thi haryana ke bilaspur ki uska name Renuka Sharma bhut pyari ladki thi jise mai bhut pyar karta tha  ya uh. Khu wo meri zindgi ban gyi thi
Renuka mujhe Facebook pr mili dono me bat cheet hui dost bane or no. Exchange ho gye hum call pr ghanto bat krte the bat karte karte pta hi nahi chlta tha kb time nikal gya
23-8-2018 ko maine use prapose kiya usne acpt kr liya love story kafi acchi chal rhi thi wo apni saari bate share karti thi or mai bhi mai any time uski khusi chahta tha uski khusi ke liye mai apni khusi tk bhul gya mai sapne sajane lga ki wo mere sath or mai uske sath khus hai
Ek din usne mujhe apne past ke bare me btaya wo jb bta rhi thi to bhut ro rhi thi mujhe usko rota hua dekh kr accha nahi lg rha tha use rota dekh m khud bhi rone lga pr use bya nhi hone diya ki mai bhi ro rha hu agr use pta chlta to sayd wo apno bate share nhi kr pati or apna dard nahi nikal pati maine uski puri khani suni or usse kha bbu jo hua use bhul jao mai tumhare sath hu tumhe kabhi koi taqleef nhi aane dunga
Ladki ne meri bat smjhi or usne rona band kr diya
Mai mn hi mn sochta tha ki chahe me dukhi rh lunga pr kbhi uski aankho me aasu nhi aane dunga

To be continue…….…

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Love story in metro part I – Amit

Hey friends I am Amit and I want to share my story here. I live in Delhi I have completed my graduation from Delhi University. I am working in a company. I go to my office by metro daily.

One day I was returning to home from my office. I saw a beautiful face in metro. She was so beautiful and I was just ‘Ah what a pretty girl.’I was looking at here and thinking that this girl is amazing yr. In the journey of 1 hour, I was stared at her many times. My heartbeat was getting faster and my heart was beating loudly. But she did not notice me as she was busy with her friend. Then-after her station arrived and she went away. I was feeling sad as I thought that I may not see her again.

Next day I went to office as usual and I was thinking about my return to home after office. Because I was thinking about her and I was hoping to meet her again. So i finished my work and ran toward the metro station. It was the same time as last day when I saw her. It was 5.52 P.M., metro came to station and I went in the same coach as I did last day. I searched her in the coach and I was searching her everywhere. But i did not find her. I was sad and was not in the mood to go home. But the situation was not in my hand so I went to my home and thought she might come next day. But the days passed and I was not able to see her again. Then I realized that I was right, I may not see her again.

But after 21 days suddenly I saw her again in the metro.

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जीरो से हीरो की कहानी – Zero to Hero Success Story in Hindi

Zero to Hero Success Story in Hindi

Zero to Hero Success Story in Hindi

Hi Friends, ye hai meri Zero to Hero Story in Hindi. I hope that you will like it. Main apni ye जीरो से हीरो की कहानी sirf isliye sabke saamne rakhna chahta hu taki dusre log bhi meri is story se inspiration le sake.

1995 से 2013 तक

मेरा नाम अमित सिंह है और मैं दिल्ली में रहता हूँ. जब मैं 3 साल का था तो मेरे पिता जी का देहांत हो गया था और उसके बाद हमारे घर की आर्थिक हालत बहुत खराब हो गयी थी. मेरी माँ सिर्फ छठी तक पढ़ी थी इसलिए उन्हें कोई अच्छा काम नहीं मिला. मजबूरन माँ ने कपडे सिलाई का काम शुरू कर दिया. 2009 तक मैं, मेरी माँ और मेरी छोटी बहिन महज़ 5000 रुपये में अपने घर का गुज़ारा चलाते थे. बहुत मुश्किल से घर गुज़ारा चलता था, किसी दिन तो घर में खाने को कुछ भी नहीं होता था.

Zero to Hero Success Story in Hindi

माँ ने मेरे लिए बहुत कुर्बानिया दी है. बचपन में मैंने कभी दूरदर्शन के इलावा कोई और चैनल नहीं देखा क्यूंकि केबल के लिए हमारे पास पैसे ही नहीं थे. मेरी माँ के पास एक बहुत पुराना नोकिआ का फ़ोन था, मैंने 2012 तक कभी स्मार्टफोन चला कर नहीं देखा था.

अगर मुझे सफर करना हो तो मैं DTC बस में ही सफर करता था. कभी कभी तो बस के किराये के पैसे भी नहीं होते थे मेरे पास, उस वक़्त मुझे चल कर जाना पड़ता था.

Zero to Hero Success Story in Hindi

किसी तरह मैंने अपनी ग्रेजुएशन पूरी की, मुझे उम्मीद थी कि शायद मैं अपने परिवार की आर्थिक हालत ठीक कर सकू. जब मैं कॉलेज में था तो एक बहुत ही अमीर बाप की बेटी ने मुझे प्रोपोज़ किया था लेकिन मैंने मना कर दिया क्यूंकि मेरा लक्ष्य था पैसा कमाना और वो भी बिना अपना आत्म सम्मान खोये. उस वक़्त मैं सिर्फ अपनी पढाई और करियर पर ध्यान देना चाहता था. वो मेरी ज़िन्दगी का सबसे मुश्किल फैसला था.

Zero to Hero Success Story in Hindi

2013 to Present

कॉलेज से पढाई ख़त्म करते ही मैंने एक छोटी सी कंपनी में नौकरी कर ली. 1 साल वह नौकरी करने के बाद जब मैं दूसरी कंपनी में गया तो मुझे दोगुनी तनख्वाह मिल गयी. उस वक़्त मुझे एहसास हो गया था कि मैं धीरे धीरे अपने लक्ष्य के करीब आ रहा हु.

अब मैं …

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Only friends??? – Ishika

Hii.myself ishika aur aaj Mai apne lyf ke baare Mai batana chahti hun..when I was in 7th mera ak new frnd bna yash and he was very nyc.aur meri ak friend bhi thi siya Yash hum dono ka hi bht accha. Frind tha but uss tym Vo mujhse zyda close siya ke tha Vo dono bhtt acche frnds the.but fir hamare class ke bacche un dono ko ak dusre ke naam se chidhane lge.but mujhe us samay kch fark nhi pda coz Vo mera ak accha friend tha bus.fir siya ka baaki dosto ne use bola Ki Vo Yash ko propose kar de coz Vo bhtt smart tha or siya Yash ke sath acchi lage gi.siya ne vhi kiya..yash na bhi yes bol Diya.nd fir vi relation ship Mai the but unke bich kbhi kbhi fights hoti thi but fir solve bhi ho jaati thi.

Aise hi chlte chlte nxt year siya ke papa ka transfer ho gya Amritsar..yash bhtt sad tha..nd fir Mai or Yash bhtt acche frinds bhi the.Yash siya se baat krne ke liye use Roz msz krta but siya ka jb Mann hota Vo tbhi Yash se baat krti thi.mai or Yash bhtt close frnds the.hum dono ak dusre se sab share krte the.Kai baar Mai use gussa ho jaati thi to vo mujhe manna bhi liya krta tha..or ab baat aayi siya Ki to siya ne mujhe btaya Ki vhan par use ak dusre larka se pyaar ho gya hai.par Mai yeh baat Kisi KO bhi naa bataun.yash ko bhi nhi par mujhe yash ke liye bura lg rha tha iss liye Maine ysh ko bta Diya par use mujhpar vishwas nhi ho rha tha usnr kha Ki siya aisa nhi kar skti.jb usne siya se pucha to usne mna kar Diya Ki aisa kch nhi hai..mai Tb smj gyi Ki siya ysh ko dhokha de rhi hai.kyunki Vo hamesha usse se larai kar leti thi use baat bhi bhtt hi km krti thi.mainee socha Ki choro agr ysh ko nhi maanana to naa maane.mai or Yash fir se ak dusre ke acche frnds bann gye jis din vo nhi aata mera Mann nhi lgta tha.Mai hamesha uske sath hi rhti thi.mere saare friends kehte the that I love him.but mujhe lga yeh bus ak attraction hai.lakin nhi jb bhi mera koi dost mujhse gussa hota to mujhe fark nhi pdta tha lkin agr Yash …

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