Wo Sath Hi Kya Jisme Tera Hath Nahi, Couple Love Shayari, Sms

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥

Aasmaan Se Uncha Koi Nahi,
Saagar Se Gahra Koi Nahi,
Yoon To Mujhko Sabhi Pyaare Hai,
Par Aapse Pyaara Koi Nahi..!!

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥

आसमान से ऊँचा कोई नहीं,
सागर से गहरा कोई नहीं,
यूँ तो मुझको सभी प्यारे है,
पर आपसे प्यारा कोई नहीं..!!

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥

Ek Pal Ki Ye Baat Nahi,
Do Pal Ka Ye Saath Nahi,
Khne Ko To Zindgi, 
Jannat Se Pyari Hai,
Par Vo Saath Hi Kya,
Jisme Tera Haath Nahi..!

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥

एक पल की ये बात नहीं,
दो पल का ये साथ नहीं,
कहने को तो जिंदगी,
जन्नत से प्यारी है,
पर वो साथ ही क्या,
जिसमे तेरा हाथ नहीं..!!

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥

Tere Seene Se Lagakar Teri Aaraju Ban Jaun,
Teri Saanso Se Milkar Teri Khusbu Ban Jaun,
Phaasle Na Rahe Hum Dono Ke Darmiyaan Koi,
Mai, Mai Na Rahoon Bas “Tum” Ban Jaun..!!

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥

तेरे सीने से लगकर तेरी आरजू बन जाऊं,
तेरी सांसो से मिलकर तेरी खुशबू बन जाऊं,
फासले ना रहे हम दोनों के दरमियाँ कोई,
मै, मै ना रहूं बस “तुम” बन जाऊं..!!

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥…

Read More

वो मोहब्बत ही क्या जिसके काबिल ना बन सके

वो ख़्वाब ही क्या जिसे पूरा ना कर सके….
वो मंजिल ही क्या जिसे हासिल ना करे सके
वो बेगुनाही ही क्या जिसे साबित ना करे सके
और वो मोहब्बत ही क्या जिसके काबिल ना बन सके

~ Sweety Phogat…

Read More

कैसे जीऊ मैं खुशहाल ज़िन्दगी | एक और अधूरी मोहब्बत

कैसे जीऊ मैं खुशहाल ज़िन्दगी
उसकी मोहब्बत ने हमको मारा हैं

रखा था जो दिल संभाल कर
उस दिल को हमने हारा हैं

बनता हैं महफ़िलो की शान वो
पर बनता ना मेरा सहारा हैं

दूर भी हम कैसे रह सकते हैं
इंसां वो सबसे लगता प्यारा हैं

जाए कहा अब उसे छोड़ कर
बिन उसके ना अब गुजारा हैं

इंतजार में कटते हैं दिन और रात
दूजा ना अब कोई और चारा हैं

~ पूनम…

Read More

उर्दू ग़ज़लें

मैंने तेरे इंतज़ार से मोहब्बत की है

तेरे इख्लास से मोहब्बत की है तेरे एहसास से मोहब्बत की है तू मेरे पास नहीं है फिर भी तेरी याद से मोहब्बत की है कभी तो तूने भी मुझे याद किया होगा मैंने उन्ही लम्हात से मोहब्बत की है जिन में हों तेरी मेरी बातें , मैंने उस इंसान से मोहब्बत की है और मेह्की हों सिर्फ तेरी मोहब्बत से मैंने उन जज़्बात से मोहब्बत की है तुझसे मिलना तो अब ख्वाब सा लगता है मैंने तेरे इंतज़ार से मोहब्बत की है

Tere Ikhlas Se Mohabbat Ki Hai Tere Ehsas Se Mohabbat Ki Hai Tu Mere Paas Nahi Hai Phir Bhi Teri Yaad Se Mohabbat Ki Hai Kabhi To Tune Bhi Mujhe Yad Kiya Hoga Meine Un Lamhaat Se Mohabbat Ki Hai Jin Mein Ho Teri Meri Batain Maine Us Insaan Se Mohabbat Ki Hai Aur Mehkey Ho Sirf Teri Mohabbat Se Maine Un Jazbaat Se Mohabbat Ki Hai Tujhse Milna To Ab Khawab Sa Lagta Hai Maine Tere Intezaar Se Mohabbat Ki Hai


मुहब्बतों के पयाम लिखना ​

कभी किताबों में फूल रखना , कभी दरख्तों पे नाम लिखना हमें भी याद है आज तक वो , नज़र से हर्फ़-ऐ-सलाम लिखना ​ वो चाँद चेहरा , वो बहकी बातें , सुलगते दिन थे , सुलगती रातें वो छोटे छोटे से काग़ज़ों पर , मुहब्बतों के पयाम लिखना ​ गुलाब चेहरों से दिल लगाना , वो चुपके चुपके नज़र मिलाना वो आरज़ूओं के ख्वाब बुनना, वो क़िस्सा -ऐ -नाम तमाम लिखना मेरे शहर की हसीं फिज़ाओ , कहीं जो उन का निशान पाओ तो पूछना के कहाँ बसे वो , कहाँ है उन का क़याम लिखना ​ गयी रुतों में रुबाब अपना , बस एक यह ही तो मश्ग़ला था किसी के चेहरे को सुबह लिखना , किसी के चेहरे को शाम लिखना

Kabhi Kitabon Mein Phool Rakhna, Kabhi Darakhton Pe Naam Likhna Hamein Bhi Yaad Hai Aaj Tak Wo , Nazar Say Harf-Ae-Salam Likhna Wo Chand Chehray, Wo Behki Batein, Sulagtay Din The, Sulagti Ratein Wo Chote Chote Se Kaghazon Par, Muhabbaton Key Payaam Likhna Gulab Chehron Say Dil Lagana, Wo Chupkey Chupkey Nazar Milana Wo Arzuon Key Khwaab Bunna , Wo Qissa-Ae-Naam Tamaam Likhna Mere Shahar Ki Haseen Fizaoon, Kaheen Jo Un Ka Nishan Pao To Poochna Ke Kahan Basay Wo ,Kahan Hai Un Ka Qayam Likhna Gayee Ruton Mein Rubab Apna , Bas Ek Yeh Hi To Mashghala Tha …

Read More

जब उठा मेरा जनाज़ा – मेरा जनाज़ा उर्दू शायरी

मेरा जनाज़ा ज़माने में निकला

जब मेरा जनाज़ा इस ज़माने से निकला
मेरे जनाज़े को देखने सारा ज़माना निकला
मगर मेरे जनाज़े में वो न निकला
जिसके लिए मेरा जनाज़ा ज़माने में निकला

Mere Janaze Mein Wo Na Nikla

Jab Mera Janaza is Zamane Se Nikla
Mere Janaze Ko Dekhne Sara Zamana Nikla
Magar Mere Janaze Mein Wo Na Nikla
Jiske Liye Mera Janaza Zamane Se Nikla


मेरे जनाज़े के पीछे

एक वादा था तेरा हर वादे के पीछे
तू मिलेगा मुझे हर गली ,हर दरवाज़े के पीछे
पर तू तो बड़ा ही बेवफा निकला मेरी जान
एक तू ही नहीं था मेरे जनाज़े के पीछे

Mere Janaze ke Peeche

Ek wada tha tera har wade ke peeche
Tu milega muje har gali,har darwaze ke peeche
Par tu bada bewafa nikla meri jaan
Ek tu hi nahi tha mere janaze ke peeche

तेरे जनाज़े के पीछे

एक वादा था मेरा हर वादे के पीछे
मैं मिलूंगा तुझसे हर गली , हर दरवाज़े के पीछे
पर तुमने ही मुद के नहीं देखा मेरी जान
मेरा भी जनाज़ा था तेरे जनाज़े के पीछे

Tere Janaze ke Peeche

Ek wada tha mera har wade ke peeche
Main milunga tujse har gali, har darwaze ke peeche
Par tumne hi mud ke nahi dekha
Mera Bhi janaza tha tere janaze ke peeche..


मेरी अर्थी

जिस दिन मेरी अर्थी इस दुनिया से विदा होगी
एक अलग समां होगा एक अलग बात होगी
कहना उस बेवफा से मर गया तुम्हारा आशिक़
अब न हम है और न हमारी बातें होंगी

Meri Arthi

Jis Din Meri Arthi is Duniya se Vida Hogi
Ek Alag Sama Hoga Ek Alag Baat Hogi
Kehna Us Bewafa Se Mar gaya Tumhara ashiq
Ab Na Hum Hai Aur Na Hamari batain Hongi..


जब लाश होगी कफ़न में

मिलना है तो मिल इसी दुनिया के चमन में
फिर क्या मिलना होगा जब लाश होगी कफ़न में

Jab Laash Hogi Kafan Mein

Milna Hai to Mil isi Duniya Ke Chaman Mein
Phir Kya Milna Hoga Jab Laash Hogi Kafan Mein..


मेरा जनाज़ा पढ़ा गया

फ़र्क़ सिर्फ इतना सा है
तेरी डोली उठी मेरी मयत उठी
फूल तुझ पर भी पड़े फूल मुझ पर भी पड़े
तू सज के गई मुझे सजाया गया
तू उठ के गई मुझे उठाया गया
सहेलियां तेरी भी थी दोस्त मेरे भी थे
महफ़िल वहां भी थी लाग् यहाँ भी थी
उन का हँसना वहां इन का रोना यहाँ
दो बोल …

Read More

शायरी जो दिल में उतर जाये – लफ़्ज़ों की दास्ताँ

न किया कर अपने दर्द-ऐ-दिल को शायरी में बयान “मोहसिन”
लोग और टूट जाते हैं हर लफ़ज़ को अपनी दास्ताँ समझ कर

तुम नहीं , गम नहीं , शराब नहीं

तुम नहीं , गम नहीं , शराब नहीं
ऐसी तन्हाई का जवाब नहीं

कभी कभी इसे पढ़ा कीजिये
दिल से बेहतर कोई किताब नहीं

जाने किस किस की मौत आई है
आज रुख पे उनके कोई नक़ाब नहीं

वो कर्म उँगलियों पे गिनते हैं
ज़ुल्म का जिनके कुछ हिसाब नहीं

शायर – सईद राही


खत लिख रहा हूँ

खत लिख रहा हूँ अहदमोहब्बत को तोड़ के
काग़ज़ पे आंसुओं के थपेड़े छोड़ छोड़ के

तू फ़िक्र मंद क्यों है मेरा दिल तोड़ के
मैं खुद ही जा रहा हूँ तेरा शहर छोड़ के ..

कल रात लिखने बैठा ग़ज़ल तेरे नाम की
अल्फाज़ सामने थे खड़े यूँ हाथ जोड़ जोड़ के

जिसमें तुम्हारा अक्स _ऐ _हसीं देखता था मैं
तुमने तो रख दिया वही आइना तोड़ के

ये दास्ताँ _ऐ _ज़ीस्त भी कितनी तवील है
रखने पड़े हैं मुझ को कुछ वरक मोड मोड के .


जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा

मेरे जैसे बन जाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा
दीवारों से सर टकराओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा

हर बात गवारा कर लोगे मन्नत भी उतारा कर लोगे
ताबीजें भी बँधवाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा

तन्हाई के झूले खुलेंगे हर बात पुरानी भूलेंगे
आईने से तुम घबराओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा

जब सूरज भी खो जाएगा और चाँद कहीं सो जाएगा
तुम भी घर देर से आओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा

बेचैनी बढ़ जायेगी और याद किसी की आएगी
तुम मेरा नाम गुनगुनाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा

शायर – सईद राही


दोस्त बन बन के मिले मुझको मिटाने वाले

दोस्त बन बन के मिले मुझको मिटाने वाले
मैंने देखे हैं कई रंग बदलने वाले

तुमने चुप रहकर सितम और भी ढाया मुझ पर
तुमसे अच्छे हैं मेरे हाल पे हंसाने वाले

मैं तो इख़लाक़ के हाथों ही बिका करता हूँ
वो और होंगे तेरे बाजार में बिकने वाले

आखरी दौर पे सलाम-ऐ-दिल-ऐ-मुज़्तर ले लो
फिर ना लौटेंगे शब्-ऐ -हिजर पे रोने वाले

शायर – सईद राही


जहाँ क़तरे को तरसाया गया हूँ

जहाँ क़तरे को तरसाया गया हूँ
वहीँ डूबा हुआ पाया गया हूँ

बला काफी न थी एक ज़िन्दगी की
दोबारा याद फ़रमाया गया हूँ

सुपुर्दे ख़ाक ही करना है मुझको
तो फिर काहे को नहलाया गया हूँ

अगरचे अब्र -ऐ -गौहरबार …

Read More

फेसबुक चुनिंदा शायरी – अरज़ किया है

   मुझे ज़रा खुदा से हमकलाम होने दो …
   तुम्हारा ज़िकर भी इसी गुफ्तगू में है

मेरी शामें

खुद को खुद से हमकलाम कर के देखना
कितना मुश्किल है यह सफर तय कर के देखना
किस क़दर उदास गुज़रती हैं मेरी शामें
याद किसी को किसी शाम कर के देखना


कफ़न अगर तुम्हारा होगा

आँखें अगर तुम्हारी होगी तो आंसू हमारे होंगे
दिल अगर तुम्हारा होगा तो धड़कन हमारी होगी
ख्वाहिश है ..कफ़न अगर तुम्हारा होगा तो मयत हमारी होगी


कफ़न न डालो मेरी मयत पर

कफ़न न डालो मेरे चेहरे पे
मुझे आदत है मुस्कुराने की
कफ़न न डालो मेरी मयत पर
मुझे इंतज़ार है उसके आने का


उनके सदके जान है मेरी

शिकायत ये नहीं के वो नाराज़ है हमसे
शिकायत इस बात की है वो आज भी अनजान है हमसे
दिल तोडा , जज़्बात बिखेरे , फिर भी वो दिलजान है मेरे
मांग ले वो कभी जान भी मेरी , उनके सदके जान है मेरी


अश्क आँख से ढल गए

कभी आह लब पे मचल गई कभी अश्क आँख से ढल गए
वो तुम्हारे ग़म के चिराग़ हैं कभी बुझ गए कभी जल गए
जो फना हुए ग़म-ऐ -इश्क़ में , उन्हें ज़िंदगी का न ग़म हुआ
जो अपनी आग में जल न सके, वो पराई आग में जल गए


देख लो खवाब मगर

देख लो खवाब मगर , ख्वाब का चर्चा न करो
लोग जल जाएंगे सूरज की तमन्ना न करो
बे-ख्याली में कभी उंगलियां जल जाएंगी
राख गुज़रे हुए लम्हों की कुरेदा न करो


मोहब्बत उसे भी थी

देखा पलट के उसने के हसरत उसे भी थी
हम जिस पे मिट गए थे मोहब्बत उसे भी थी
ये सोच कर अँधेरे गले से लगा लिए
रातों को जागने की आदत उसे भी थी
वो रो दिया था मुझ को परेशान देख कर
उस दिन राज़ खुला के मेरी ज़रुरत उसे भी थी


मोहब्बत की नई बुनियाद

चलो मोहसिन मोहब्बत की नई बुनियाद रखते हैं
खुद पाबंद रहते हैं , उसे आज़ाद रखते हैं
हमारे खून में खुदा ने यही तासीर रखी है
बुराई भूल जाते हैं अच्छाई याद रखते हैं
मोहब्बत में कहीं हम से गुस्ताखी न हो जाए
हम अपना हर क़दम उसके क़दम के बाद रखते हैं


दिल से दिल

दिल से दिल बड़ी मुश्किल से मिलते है
तूफान में साहिल बड़ी मुश्किल से मिलते है
यूँ तो मिल जाते है कई लोग राहो में मगर
आप जैसे दोस्त बड़ी मुश्किल से मिलते है…

Read More

इश्क़ की कीमत पूछ लो मुझ से – Passionate Shayari

तुम्हारा साथ

जी चाहता है तुम से प्यारी सी बात हो
हसीं चाँद तारे हो , लम्बी सी रात हो
एहसास हो , बात हो और तुम्हारा साथ हो
यही सिलसिला तमाम रात हो , तुम्हारा साथ हो
तुम मेरी ज़िन्दगी हो , तुम मेरी कायनात हो .

Tumhara Sath

Jee Chahta Hai Tum Se Pyari Si Baat Ho
Haseen Chand Tare Ho, Lambi Si Raat Ho
Ehsaas ho, baat ho aur tumhara sath ho
Yahi silsila tamam raat ho, tumhare sath ho
Tum Meri Zindagi Ho, Tum Meri Kayinat Ho.


तेरे क़दमों में

तुम न जाओ कहीं
बस एक नज़र देख लेने की इजाज़त दे दो
कुछ वक़्त गुज़ार लू तेरे क़दमों में
इक ज़िन्दगी जीने की इजाज़त दे दो

Tere Kadmo Mein

Tum na jao kahin..
Bas ek nazar dekh lene ki ijazat de do
Kuchh waqt guzar lo tere Kadmo mein
Ik zindagi jeene ki ijaazat de do


ऐतबार

किसी को प्यार इतना देना की हद न रहे
पर ऐतबार भी इतना रखना की शक न रहे
वफ़ा इतनी करना की बेवफाई न हो
और दुआ बस इतनी करना की जुदाई न हो

Aitbaar

Kisi ko pyar itna dena ki had na rahe
par aitbaar bhi itna rakhna ki shak na rahe
wafa itni karna ki bewafai na ho
aur dua bus itni karna ki judai na ho


इश्क़ की कीमत

मौत के पास जा कर भी देखा है
मैंने दिल लगा कर भी देखा है

चाँद को लोग दूर से देखते है
मैंने चाँद को पास बुला कर भी देखा है

इश्क़ की कीमत पूछ लो मुझ से
मैंने घर तक लुटा कर भी देखा है

प्यार तो भीख में भी मिल जाता है
मैंने तो दामन को भी फैला कर देखा है

एक शख्स है जो भूलता नहीं मुझसे
मैंने तो सारी दुनिया को भुला कर भी देखा है

Ishq Ki Kimat

Mout ke paas ja kar bhi Dekha hai
Meine Dil Laga kar bhi dekha hai

Chaand ko log Door se Dekhte hai
Meine chaand ko Pass Bula kar bhi Dekha hai

Ishq Ki Kimat Puch loo mujh say
Meine Ghar Tak Luta kar bhi Dekha hai

pyar to bhekh mein bhi mil jata hai
Meine to daaman ko bhi Pehla kar dekha hai

Ek shaks hai jo bhulta nhi mujh say
Meine to Sari dunya ko bhula kar bhi dekha hai…

Read More

जिंदगी की रंग-ओ-बू – Shayari of Life

मंजूर कब थी हमको वतन से दूरियां

आईना-ऐ-ख़ुलूस-ऐ-वफ़ा चूर हो गए
जितने चिराग-ऐ-नूर थे बे नूर हो गए
मालूम यह हुआ की वो रास्ते का साथ था
मंज़िल करीब आई और हम दूर हो गए
मंजूर कब थी हमको वतन से यह दूरियां
हालात की जफ़ाओं से मजबूर हो गए
कुछ आ गयी हमे एहले-ऐ-वफ़ा ऐ दोस्तों
कुछ वो भी अपने हुस्न पे मगरूर हो गए
चरागों की ऐसी इनायत हुई हफ़ीज़
के जो ज़ख़्म भर चले थे वो नासूर हो गए

Manzoor Kab Thi Humko Watan Se Dooriyan

Aaina-AE-Khuloos-E-Wafa Churr Ho Gaye
Jitne Chirag-AE-Noor The Benoor Ho Gaye
Malum Yeh Hua Ki Wo Raaste Ka Sath Tha
Manzil Kareeb Aayi aur Hum Door Ho Gaye,
Manzoor Kab Thi Humko Watan Se Yeh Dooriyan
Haalaat Ki Jafaoon Se Majboor Ho Gaye
Kuch Aa Gayi Hume Ahl-AE-Wafa Mein Ae dosto
Kuch Wo Bhi Apne Husn Pe Magroor Ho Gaye
Charagon Ki Aisi Inayaat Hui Hafeez
Ke Jo Zakham Bhar Chale the Wo Nasoor Ho Gaye


ऐ इंसान जरा संभल के चल

कल रात हम गुनगुनाते निकले दिल में कुछ अरमान थे
एक तरफ थे जंगल , एक तरफ श्मशान थे
रस्ते में एक हड्डी पैरो से टकराई , उस के यह बयान थे
ऐ इंसान जरा संभल के चल , वरना कभी हम भी इंसान थे

Ae insaan jara sambhal ke chal

Kal raat hum gungunate nikle dil mein kuch armaan the
Ek taraf thi jangal the, ek taraf shmshan the
Raste mein ek haddi paon se takrai, us ke ye bian the
Ae insaan jara sambhal ke chal, warna kabhi hum bhi insaan the


मुहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं

ज़िन्दगी क़ैद-ऐ-मुसलसल के सिवा कुछ भी नहीं
किया था जुर्म-ऐ-वफ़ा इस के सिवा कुछ भी नहीं
जीने की आरज़ू में रोज़ मर रहे हैं
दवा तेरी मोहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं
खींचती है अपनी तरफ गुलशन की रंग-ओ-बू
ख्वाइश फूलों मैं खुशबू के सिवा कुछ भी नहीं
भूल जाना एक नय्मत है खुदा की इसलिए
भूलना तेरा हकीकत के सिवा कुछ भी नहीं
थोड़ा है फ़र्क़ बस इंसान और हैवान में
बाकि इस दुनिया में मुहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं

Mohabbat ke siwa kuch bhi nahi

Zindagi qaid-ae-musalsal ke siwa kuch bhi nahi
Kiya tha jurm-ae-wafa iss ke siwa kuch bhi nahi
Jeenay ki arzo main roz mar rahey hain
Dawa teri mohabbat ke siwa kuch bhi nahi
Khinchti hai apni taraf gulshan ki rang-o-bu
Khwaish phoolon main …

Read More