Tera saath hai

Tera saath hai

Tera saath hai

तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है
अंधेरो से भी मिल रही रोशनी है
कुछ भी नहीं है तो कोई गम नहीं है
हर एक बेबसी बन गयी चांदनी है

टूटी है कश्ती, तेज है धारा
कभी ना कभी तो मिलेगा किनारा
बही जा रही ये समय की नदी है
इसे पार करने की आशा जगी है

हर इक मुश्किल सरल लग रही है
मुझे झोपडी भी महल लग रही है
इन आँखों में माना नमी ही नमी है
मगर इस नमी पर ही दुनिया थमी है

मेरे साथ तुम मुस्कुरा के तो देखो
उदासी का बादल हटा के तो देखो
कभी हैं ये आँसू, कभी ये हँसी हैं
मेरे हमसफ़र बस यही जिन्दगी है…

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मैं सबसे छोटी होऊं – Sumitranandan Pant (सुमित्रानंदन पंत)

मैं सबसे छोटी होऊँMain Sabse Choti Hou, Sumitranandan Pant, Hindi Poem तेरी गोदी में सोऊँ
तेरा आँचल पकड़-पकड़कर

फिरू सदा माँ तेरे साथ
कभी न छोड़ूँ तेरा हाथ

बड़ा बनाकर पहले हमको
तू पीछे छलती है माँ
हाथ पकड़ फिर सदा हमारे
साथ नहीं फिरती दिन-रात

अपने कर से खिला, धुला मुख
धूल पोंछ, सज्जित कर गात
थमा खिलौने, नहीं सुनाती
हमें सुखद परियों की बात

ऐसी बड़ी न होऊँ मैं
तेरा स्‍नेह न खोऊँ मैं
तेरे अंचल की छाया में
छिपी रहूँ निस्‍पृह, निर्भय
कहूँ दिखा दे चंद्रोदय

∼ सुमित्रानंदन पंत

सुमित्रानंदन पंत (मई 20, 1900 – दिसंबर 28, 1977) का जन्म सुरम्य वातावरण में रविवार 20 मई 1900 को उत्तराखंड के कुमायूं की पहाड़ियों में स्थित बागेश्वर के एक गांव कौसानी में हुआ था | पंत जी हिंदी में छायावाद युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। जन्म के छह घंटे बाद ही माँ को क्रूर मृत्यु ने छीन लिया। शिशु को उसकी दादी ने पाला पोसा। शिशु का नाम रखा गया गुसाई दत्त। वे सात भाई बहनों में सबसे छोटे थे। सन 1942 के भारत छोडो आन्दोलन, 1947 के भारत विभाजन, 1962 के चीन का आक्रमण तथा 1965 के पाकिस्तान के युद्ध की विभीषिका ने उनकी सोच को अत्यधिक प्रभावित किया, जिसके दिग्दर्शन उनकी कविताओ में होते है…

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ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा

ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा
क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा

अपने साए से चौंक जाते हैं
उम्र गुज़री है इस क़दर तन्हा

रात भर बोलते हैं सन्नाटे
रात काटे कोई किधर तन्हा

दिन गुज़रता नहीं है लोगों में
रात होती नहीं बसर तन्हा

हमने दरवाज़े तक तो देखा था
फिर ना जाने गये किधर तन्हा

-गुलज़ार…

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College Ka Canteen

कॉलेज का कैंटीन

बड़ा रंगीला है जी कॉलेज का कैंटीन,
चाय, समोसे, दही बड़े और मिलते है नमकीन।
विद्यार्थियों का जमघट कॉलेज का कैंटीन,
जहाँ नहीं चलता कोई कॉलेज का रूटीन। गप शपों की झड़ियाँ लगती,
हा हा ही ही की बौछारें फूटतीं।
चारों तरफ माहौल हो जाता रंगीन,
बड़ा रंगीला है जी कॉलेज का कैंटीन। मीठी मीठी बातें वो पहली मुलाकातें,
दोस्ती के वादे या प्यार की शुरुआतें।
मिलना न हुआ तो मन हो जाता गमगीन,
बड़ा रंगीला है जी कॉलेज का कैंटीन।…

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Ye Mera Deewanapan Hai

ये मेरा दीवानापन है
– शैलेन्द्र

Dil Se Tujhko Be-dili Hai, Mujhko Hai Dil Ka Garoor
Tu Yeh Maane Ke Na Maane, Log Maanenge Zaroor

Yeh Mera Deewanapan Hai, Ya Mohabbat Ka Suroor
Tu Na Pehchaane To Hai Yeh, Teri Nazron Ka Kusoor

Yeh Mera Deewanapan …Dil Ko Teri Hi Tamanna,
Dil Ko Hai Tujhse Hi Pyar

Chaahe Tu Aaye Na Aaye, Hum Karenge Intezaar
Yeh Mera Deewanapan…Aise

Veerane Mein Ek Din, Ghut Ke Mar Jayenge Hum
Jitna Ji Chaahe Pukaro, Phir Nahin Aayenge Hum
Yeh Mera Deewanapan…

दिल से तुझको बेदिली है, मुझको है दिल का गुरुर
तू ये माने के न माने, लोग मानेंगे ज़रुर

ये मेरा दीवानापन है, या मोहब्बत का सुरूर
तू ना पहचाने तो है ये तेरी नज़रों का कुसूर

ये मेरा दीवानापन है …दिल को तेरी ही तमना, दिल हो है तुझसे ही प्यार
चाहे तू आए ना आए, हम करेंगे इंतज़ार
ये मेरा दीवानापन है ….

ऐसे वीराने में एक दिन, घुट के मर जायेंगे हम
जितना जी चाहे पुकारो, फिर नहीं आयेंगे हम
ये मेरा दीवानापन है ……

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Pasand Aaye To Daad Dena

कुछ पसंदीदा शेर

Mat Doondh E Dost,
Kamzoriya mujh mein.
Tu bhi To Shamil hai,
Meri Kamzoriyon mein.

Hum bewafa na the youn hi badnam ho gaye
Hazaroon chahne wale the kis kis se wafa katre

May be this line suits all of us:
Zindagi ki pareshaniya, shararaton ko kum kar deti hain.
Aur
Log samajhte hain ki hum samajhdar ho gaye hai..

Ye Zalimo Ki Duniya Hai,
Zara Sambhal Ke Chalna Dost,
Yahan Palkon Pe Bithaya Jata Hai,
Nazron Se Girane Ke Liye.

Thokar Na Lagaa Mujhe Patthar Nahi Hu Main,
Hairat Se Na Dekh Manzar Nahi Hu Main,
Teri Nazar Mein To Humari Qadar Kuch Nahi,
Magar Unse Pooch Jinhe Hasil Nahi Hu Main…!!!

Ikhtiar e Neend To Kab Ki Hum Se Chhoot Gai..
Ab To Sirf Bistar Pr Rasm e KaRwat Nibha Rahay Hain..!

Kuch Sahi toh kuch kharab kehte hai…
Log hame bigda hua Nawab kehte hai…
Kuch es tarah se badnaam huye hai hum…
Ke paani bhi piye toh log Sharaab kehte hai….

Aankhon me ashq aur naam hai uska jabaan per..
Baarish bhi hui toh mere kachche makaan per…

Is Zamaane Me Wafa Ki Talash Naa Kar Galib,
Wo Waqt Aur Tha Jab Makaan KACHHE Aur Log SACHHE Hua Karte The..

Sach Hi Kahte Hai Ki:
Kharid Sakte Unhe To Apni Zindgi Bech Kar Bhi Kharid Lete..
Par Kuch Log ‘ KEEMAT ‘ Se Nahi ‘KISMAT ‘ Se Mila Karte Hai..

Dil me Chahat ka hona bhi zaruri hai..
Warna….YAAD….To dushman bhi roz kiya karte hai.

Apni Taqdeer Main to kuchh aise hi silsile likkhen hai ……
kisi ne Waqt Guzaarne ke liye apna bna liya to kisi ne apna bna kar Waqt Guzaar liya..

Kal raat apne saare dukh deewaron se keh dalle,
ab hum sote rehte hai aur deewaren roti rehti hain.

Impressive lines:
Manzil to mil hi jayegi….
Bhatak kar hi sahi..Gumrah to wo hain….
Jo ghar se nikle hi nahi…

Dushmano Se bhi Pyaar Hota Jaayega…
Bas…
Apno Ko Aazmate Jaayiye…

Ajeeb Kashmkash thi k JaaN Kisko dein..?
.
Wo bhi Aa Baithe the
Aur MaUT bhi….

NigaahoN se qatl kar de jalimna ho takleef dono ko
tujhe khanjar uthaane ki,Aur
mujhe gardan jhukaane ki !!!…

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safaigiri

सफाई गिरी 

सफाई अभियान का नारा, क्या देश को भी है इतना प्यारा।
अगर देश से है वाक़ई में प्यार, फिर सफाई से क्यों है इंकार।
देश का हो दुनिया में नाम,
जनता का क्या इससे काम।
यही सोच तो पीछे करती,
जनता ही फिर इसमें मरती।
चारो तरफ गंद की मार,
क्या करे देश की सरकार।
देश के तंत्र को कहे लाचार,
क्या जनता खुद नहीं ज़िमेदार।
स्वच्छ भारत का सुनहरा सपना,
हर भारतीय का हो ये अपना।
तंत्र को कोसना है बेकार,
जनता करे अपने में सुधार।।
हर नागरिक का एक पहल,
भारत को बनाये दुनिया का महल।
अब तो जागो हे जनता जनार्दन,
करो गंद के साम्राज्य का मर्दन।।…

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Muk Vyatha

मूक व्यथा

पुरषों को कहते हैं शासक,
हम कहते है उन्हें प्रताणक|
वास्तविक सत्य उलट है इसके,
जो कहा न जाये किसी से| नारी ही प्रताड़ित होती,
समाज ये कहे सभी से| पुरषों की मूक लाचारी का,
चहु ओर बने तमाशा|
पुरुष गर आवाज़ उठाए,
तो हाथ लगे उसके निराशा| नारी ही प्रताड़ित होती
समाज ये कहे सभी से पुरुष करे गर अत्याचार,
तो नारी मचाये हाहाकर|
नारी करे गर व्यभिचार,
तो वह है उसका सामाजिक अधिकार| नारी ही प्रताड़ित होती,
समाज ये कहे सभी से| नारी पुरुष समाज के हिस्से,
एक दूजे के बिना अधूरे किस्से|
न्यायिक व्यवस्था का सशख्त हाथ,
इनका बनाये समर्पित साथ| नारी ही प्रताड़ित होती,
फिर समाज कहे ना किसी से|…

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Bihar Ka Swaroop

बिहार का स्वरूप

बिहार की जनता करे पूकार,
बिहार का हो पुनरोद्धार।
जो था कभी शिक्षा संस्कृति का गढ़,
आज वहीं जनता अनपढ़। चहु ओर था ज्ञान ही ज्ञान,
आज केवल पसरा अज्ञान।
जहाँ जन्में चाणक्य और बुद्ध,
वातावरण भी था स्वच्छ और शुद्ध। आज बिहार का खस्ता हाल,
जनता भी बिल्कुल बेहाल।
नेता उल्लू सीधा करते,
गरीब जनता भूखे मरते। नेताओं की गंदी चाल,
कर दिया बिहार को कंगाल।
जो कभी था सबसे आगे,
जनता आज वहीं से भागे।…

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