भोली – Story in Hindi

साथियों नमस्कार, आज हम आपके लिए एक खास कहानी “भोली – Story in Hindi” लेकर आएं हैं। यह कहानी आधारित है भारतीय समाज में फैली कुरूतियों में से एक दहेज़ प्रथा पर। आशा है आपको हमारा यह संकलन ज़रूर पसंद आएगा।


भोली – Story in Hindi

“बधाई हो बाबूजी भोली बिटिया का ब्याह तय हो गया”, नौकर रमेश ने ये कहते हुए आदर्श बाबू को उनकी बिटिया का रिश्ता पक्का होने की बधाई दी। आदर्श बाबू सुबह समाचार पत्र पढ़ते हुए हल्की नींद की झपकी ले रहे थे कि अचानक उस बधाई से आदर्श बाबू अचानक से तन्द्रा से बाहर आए और समाचार पत्र को नीचे करके बोले, “अरे रमेश, तुम! गाँव से कब लौटे। गाँव में सब कुशल मंगल तो है?”

“बस बाबूजी आपकी और मालकिन की कृपा से सब कुशल मंगल है। आपने तो बताया नहीं, लेकिन मुझे पता चला अभी दो दिन पहले ही आपने भोली बिटिया का ब्याह तय कर दिया। कैसा परिवार है? लड़का कैसा है? लड़का करता क्या है…”

“अरे बस-बस तुमने तो आते ही एक के बाद एक प्रश्न लगा दिए, साँस तो ले लो” कहते हुए आदर्श बाबू ने नौकर रमेश को रोक दिया।

आदर्श: “भोली बिटिया के प्यारे काकाजी, परिवार बहुत ही अच्छा है। आप परिवार से भी भलीभाँति परिचित हो और लड़के से भी।”

रमेश: “कौन हैं वो लोग, बाबूजी?”

आदर्श: “यहाँ से आगे चौराहा है न वो पान वाला, उससे आगे जो चौक के सामने मंत्रीजी रहते हैं वो सुभाष बाबू।”

रमेश: “अरे वो सुभाष बाबू।”

आदर्श: “हाँ जी वही सुभाष बाबू जो क्षेत्र के विधायक भी रह चुके हैं। उन्ही का बेटा ‘काव्य’। अभी विलायत से विज्ञान में परास्नातक करके लौटा है। सुभाष बाबू ने अपनी बेटी भोली को देखा होगा कभी चौराहे से गुज़रते हुए तो उन्होंने हमारे पास प्रस्ताव भेजा। लड़का देखा तो हम ना नहीं कर पाए। बहुत ही अच्छा लड़का है। अपनी भोली के लिए सही रहेगा।”

रमेश: “बाबूजी अगर आप बुरा न मानें तो हम कुछ कहें।”

आदर्श: “हाँ बोलो। तुम भी हमारे घर के सदस्य हो। तुम्हारा निर्णय भी हमारे लिए अहम है।”

आप पढ़ रहें हैं मयंक सक्सैना ‘हनी’ द्वारा लिखी कहानी “भोली – Story in Hindi”

रमेश: “बाबूजी, इस बात में दो राह हरगिज़ नहीं है कि काव्य बहुत ही अच्छे लड़के हैं। हमने छोटेपन में उन्हें देखा था, जब हम सुभाष बाबू के घर नौकरी करते थे और इसी वजह से हम उनके पूरे परिवार को भी …

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